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अणुव्रतों को धारण करने वाला श्रावक कहलाता है: जयतिलक मुनिजी

नार्थ टाउन के ए यम के यम स्थानक में गुरुदेव जयतिलक मुनिजी ने प्रवचन में फरमाया श्रावक का मतलब, श्रा = यानि श्रवण करने वाला, व – विनयपूर्वक, क- यानि प्रवृत्ति करना। जो श्रावक अणुव्रतों को धारण करने वाला श्रावक कहलाता है उसका जीवन नैतिकता से पूर्ण होता है उसकी हर प्रवृत्ति में धर्म झलकता है कर्म के भार से आत्मा जैसे जैसे हल्की होगी तो ऊपर उठती है कर्म से रहित हो जायेगी तो अग्र भाग पर स्थित हो जायेगी जब अच्छी भावना आयेगी तो व्रतों को धारण करने की इच्छा जागेगी। व्रत प्रत्यखान बन्धन नहीं है मुक्त होने का मार्ग है जीवन सुगमता से जीने का मार्ग प्रशस्त करती है आत्मा नन्दन की तरह सुखों से परिपूर्ण हो जायेगी। दूसरे व्रत के पांच अतिचार है तीसरा अतिचार यानि किसी को जान बूझकर झुठा कलंक नहीं लगाना। जैसे अंजना सती। बिना सच जाने किसी पर झुठा आरोप लगा देते हे तो कर्मों का बन्ध होता है जैसे बीज बोते ह...

निंदा करो लेकिन अपने दुर्गुणों की, प्रशंसा करो दूसरों के सदगुणों की : साध्वी नूतन प्रभाश्री जी

जैन साध्वी ने बताया- धर्म में अरुचि और पाप कर्म में रुचि पाप है Sagevaani.com @शिवपुरी। भगवान महावीर ने निंदा करने को भी एक पाप बताया है। उनका उपदेश है कि निंदा करना है तो अपने दुर्गुणों की करो और प्रशंसा दूसरों के सदगुणों की करो। उक्त उदगार व्यक्त करते हुए प्रसिद्ध जैन साध्वी नूतन प्रभाश्री जी ने कमला भवन में सोमवार को आयोजित धर्मसभा में कहा कि पर परिवाद पाप (दूसरों की निंदा करना) को हम आनंद के साथ करते हैं। उन्होंने बताया कि निंदा करना और निंदा श्रवण करना दोनों पाप हैं और इन पापों को करने का फल हमें भोगना पड़ता है। साध्वी वंदनाश्री जी ने श्रावक के 21 गुणों की चर्चा करते हुए आज बताया कि श्रावक को दयावान होना चाहिए। उसके हृदय में स्नेह, प्रेम, वात्सल्य और करुणा का झरना बहना चाहिए। दूसरों के दुख से जो द्रवित होता है वहीं सच्चा श्रावक है। धर्मसभा में आज पुणे महाराष्ट्र से श्रावक और श्राविका ...

नाखुशी का नाम हटाओ: उपप्रवृत्तिनि संथारा प्रेरिका सत्य साधना ज गुरुणी मैया

हमारे भाईन्दर में विराजीत उपप्रवृत्तिनि संथारा प्रेरिका सत्य साधना ज गुरुणी मैया आदि ठाणा 7 साता पूर्वक विराजमान हैl वह रोज हमें प्रवचन के माध्यम से नित नयी वाणी सुनाते हैं, वह इस प्रकार हैंl बंधुओं जैसे कि अगर आप खुश रहना चाहते हैं तो जीवन में दो बातें नाखुशी का नाम हटाओ हर हाल में खुशी लेकर आओ अगर आप खुश रहना चाहते हैं तो अपने जीवन से दो दुश्मन चिंता और गुस्से को हटा दोl अपने माचिस की तिल्ली अच्छी है अपने नीचे डंडी होती है अब और अपने भार का माता होता है हमारा शरीर डडी है और ऊपर माता है शेर हैl लेकिन माचिस की दिल में गड़बड़ी है जैसे ही हमें गुस्सा आग सुलग जाती है स्वयं को भी देखें जरा से बात के हिसाब लगी कि गुस्से की आज सूरत जाएगीl मेरी बहनों मेरे भाइयों यह तो माचिस की दिल्ली है इसमें थोड़ा कल नहीं है इसलिए थोड़ा सा घर्षण का लगती है आज से लिखा उड़ती है लेकिन हमारे पास तस्वीर भी है और अक्ल...

अशांत मन से आप किसी बढ़िया परिणाम की उम्मीद नहीं कर सकते: देवेंद्रसागरसूरि

श्री सुमतिवल्लभ नोर्थटाउन श्वेतांबर मूर्तिपूजक जैन संघ में आचार्य श्री देवेंद्रसागरसूरिजी ने धर्म वाणी के माध्यम से प्रवचन देते हुए कहा कि शांति इंसान के लिए सबसे जरूरी और महत्वपूर्ण है। आज लोगों के पास भौतिक सुविधाएं बहुत हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें मन की शांति नहीं है। धन-दौलत से संसाधन खरीदे जा सकते हैं, लेकिन शांति नहीं खरीदी जा सकती है। शांति बाजार में बिकने वाली वस्तु नहीं है। केवल मुख से चुप रहने से शांति नहीं मिलती, बल्कि सच्ची सुख-शांति तो तभी है जब व्यक्ति का मन चुप रहे। अशांति का कारण ही व्यक्ति का मन है। वे मन से अशांत हैं और जब तक उनका मन शांत नहीं होगा तब तक उनका जीवन सुखी नहीं हो सकता है। मन को नियंत्रित करने पर ही उन्हें शांति मिलेगी। हाथ में माला फेरने और जीभ से भजन करने से ईश्वर का सच्चा सुमिरन नहीं होता है, यदि मनुष्य का मन ही एकाग्र न हो। मनुष्य का मन एकाग्र करने के ल...

यदि श्रद्धा को कम कर दिया तो आराधना करना व्यर्थ है- गच्छाधिपति उदयप्रभ सूरीश्वरजी महाराज

किलपाॅक जैन संघ में विराजित योगनिष्ठ आचार्य केशरसूरीजी के समुदाय के वर्तमान गच्छाधिपति आचार्यश्री उदयप्रभ सूरीश्वरजी म.सा. ने ज्ञाता धर्मकथा की विवेचना करते हुए कहा कि छोटा सा पाप किया और सरलता का गुण नहीं अपनाया तो वह दोष हमारे लिए भारी होता है। सरलता नाम का गुण मेरुपर्वत जितने बड़े पापों को भी हल्का कर देता है। धर्मकथा दो प्रकार की होती हैं कल्पित दृष्टांत और चरित्र दृष्टांत। उन्होंने कहा श्रद्धा प्राण है, इसे कभी कम मत करो। यदि श्रद्धा को कम कर दिया तो आराधना करना व्यर्थ है। आराधना निष्फल होने के पांच कारण है अश्रद्धा, अनुताप यानी पश्चाताप, अविधि, अधैर्य और अज्ञान यानी कदाग्रह। इन पांचो दोषों से मुक्त रहने पर ही व्यक्ति धर्म का पूर्ण फल पा सकता है। प्रभु के प्रति अहोभाव उत्तरोत्तर बढ़ना चाहिए। हरेक के गुणों के प्रति अनुराग के भाव होने चाहिए। गुरु महाराज की बात को नहीं मानना अज्ञानता है।...

दुनिया में कोई भी ऐसा नहीं है जिसे लाभ ही लाभ मिलता हो: उपप्रवृत्तिनि संथारा प्रेरिका सत्य साधना ज

हमारे भाईन्दर में विराजीत उपप्रवृत्तिनि संथारा प्रेरिका सत्य साधना ज गुरुणी मैया आदि ठाणा 7 साता पूर्वक विराजमान हैl वह रोज हमें प्रवचन के माध्यम से नित नयी वाणी सुनाते हैं, वह इस प्रकार हैंl बंधुओं जैसे कि जीवन के अनोखे दाव कभी धुप कभी छांव दुनिया में ऐसा कौन है जिसे जीवन में दुख और सुख का सामना न करना पड़ता हूंl दुनिया में कोई भी ऐसा नहीं है जिसे लाभ ही लाभ मिलता हो और कभी नानी का सामना न करना बड़ा होl हर व्यक्ति को अपने जीवन में हानि लाभ सुख दुख यश अभ्यास जन्म मरण सभी प्रकार की परिस्थितियों का सामना करना पड़ता हैl जो सूर्य उगता है अस्त भी होता है जो फूल खिलता है वह मुरझा जाता भी हैl जहां-जहां सही होंगे वहां वहां भी योग है जहां-जहां जन्म है वहां वहां मरण हैl जहां लाभ है वहां हानी भी हैl जहां सम्मान है अपमान की भी संभावना हैl अगर इस पृकतिके मर्म को समझ ले या सब कुछ परिवर्तनशील है तो व्यक्...

– आचार्यश्री की निश्रा में ‘शासन शौर्य’ उपधान तप की हुई घोषणा

भद्रतप के 222 तपस्वियों का पचक्खाण उत्सव हुआ आयोजित चंद्रप्रभु जैन नया मंदिर ट्रस्ट एवं किलपाॅक श्वेताम्बर मूर्तिपूजक जैन संघ के तत्वावधान और गच्छाधिपति आचार्यश्री उदयप्रभ सूरीश्वरजी एवं आचार्यश्री युगोदयप्रभ सूरीश्वरजी म.सा. की निश्रा में भद्रतप के 222 तपस्वियों का पचक्खाण उत्सव रविवार को एससी शाह भवन में आयोजित किया गया। इस मौके पर तपस्वियों ने पचक्खाण ग्रहण करने की विधि के अंतर्गत परमात्मा की प्रदक्षिणा दी एवं आचार्यश्री और उपस्थित सकल संघ ने उनका अक्षत से बधामणा किया। इससे पूर्व आचार्यश्री का पदार्पण पचक्खाण उत्सव के लाभार्थी संघवी गंगादेवी रतनचंद बालगोता परिवार के गृहांगन में हुआ, जहां भद्रतप के तपस्वियों का बहुमान किया गया। आचार्यश्री उदयप्रभ सूरीश्वरजी ने तपस्वियों की अनुमोदना करते हुए कहा कि देहबल, मनोबल और अनुग्रहबल के साथ आपका भद्रतप पूर्ण होने जा रहा है। उन्होंने कहा जहां पर अंद...

जीवन को कैसे सुन्दर जिया जाए यह हमारे अधिकार में है: साध्वी वंदना श्री जी

जैन साध्वियों ने बताए जीवन में अच्छाई लाने और बुराई से दूर रहने के सूत्र Sagevaani.com @शिवपुरी ब्यूरो। शिवपुरी में चार्तुमास कर रही जैन साध्वियों ने आज कमला भवन में आयोजित धर्मसभा में जीवन को सुन्दर बनाने के उपाय बताए। एक ओर साध्वी वंदना श्रीजी श्रावक के 21 गुणों का बखान कर जीवन को सकारात्मक रूप देने वहीं साध्वी नूतन प्रभाश्रीजी 18 पापों से कैसे दूर रहकर जीवन की नकारात्मकता से मुक्ति पाने के तरीके बताए। साध्वी रमणीक कुंवर जी ने कहा कि जिन वाणी श्रवण से आपके जीवन में यदि किचिंत भी बदलाव आया तो हमारा शिवपुरी चार्तुमास करना सार्थक हो जाएगा। धर्मसभा में धर्म निष्ठ श्रावक जगदीश निगोती ने अपने उदगार व्यक्त करते हुए कहा कि साध्वी रमणीक कुंवर जी ठांणा पांच का चार्तुमास शिवपुरी में हुआ है यह हमारे लिए सौभाग्य की बात है। उन्होंने काव्यात्मक अंदाज में कहा कि हम उनका स्वागत करते हैं, वंदन और अभिनंदन ...

बिगड़ने के बाद सुधारने से अच्छा है कि बिगड़ने से बचा लो : प्रवीण ऋषि

Sagevaani.com @रायपुर। उपाध्याय प्रवर ने कहा कि दान देने के लिए दाता चाहिए और ज्ञान देने के लिए गुरु। अगर दाता नहीं है तो दान नहीं हो सकता, लेकिन बिना गुरु के भी ज्ञान लिया जा सकता है। आशीर्वाद कोई दे या न दे, आप ले सकते हैं। किसी वास्तु का दान आप तभी ले सकते हैं जब कोई देने वाला हो। लेकिन ज्ञान और कृपा सामने वाला दे या न दे, आप ले सकते हैं। इसी प्रकार बद्दुआ भी बिन दिए ले सकते हैं। ठीक इसी प्रकार लेश्या सामने वाला देना चाहे या नहीं, आप ले सकते हैं। उक्ताशय की जानकारी रायपुर श्रमण संघ के अध्यक्ष ललित पटवा ने दी। रविवार को लेश्या पर चल रही प्रवचन माला के अंतिम दिवस उपाध्याय प्रवर ने धर्मसभा में कहा कि महाभारत में गुरु द्रोणाचार्य ने दुर्योधन और अर्जुन को शिक्षा दी थी। दुर्योधन ने ज्ञान ग्रहण नहीं किया, अर्जुन ने किया लेकिन एकलव्य ने बिना गुरु द्रोणाचार्य के ज्ञान दिए उनके ज्ञान को ग्रहण किय...

नार्थ टाउन में आचार्य सम्राट् पूज्य श्री जयमलजी म.सा. की 316 वीं जन्म जयंति मनाई गई 

नार्थ टाउन में एक भवावतारी, आचार्य सम्राट् पूज्य श्री जयमलजी म.सा. की 316 वीं जन्म जयंति परम पूज्य गुरुदेव श्री जयतिलकमुनिजी म.सा. ‘लघु’ के शुभ सान्निध्य में श्री एस. एस. जैन संघ, नार्थ टाउन द्वारा रविवार दिनांक 08.10.2023 को मनाई गई ।  दिनांक 07.10.2023 शनिवार से दिनांक 08.10.2023 रविवार तक 24 घंटे का जय जाप -ए यम के यम स्थानक, नार्थ टाउन में रखा गया। जय जाप के लाभार्थी पेरम्बुर निवासी कमला कुमारी पारसमल बोहरा परिवार का सम्मान मंत्री ललीत बेताला, उपाध्यक्ष अनिल मेहता, सहमंत्री प्रमोद ललवाणी ने किया। दिनांक 8 अक्टूबर को जन्म जयंती समारोह का आयोजन किया गया। अध्यक्ष अशोक एम. कोठारी ने पधारें सभी अतिथियों व उपस्थित सभी का स्वागत किया। बहु मण्डल ने स्तवन प्रस्तुत किया। अनेक वक्ताओं ने जयमलजी के बारे में विचार रखें। इस अवसर पर शासन सौभाग्यतिलक आचार्य देवेश श्री देवेन्द्रसागरसूरिश्वर...

ज्ञान को प्राप्त करने वाला धरती पर स्वर्ग के सुख को प्राप्त कर सकता है – महासती धर्मप्रभा

Sagevaani.com @चैन्नई। ज्ञान का एक सूत्र भी मनुष्य अपने जीवन मे उतारलें और उस सूत्र का वह पालन करने लग जाऐ तो इस धरती पर भी वह स्वर्ग का सुख प्राप्त कर सकता है रविवार साहुकारपेट जैन भवन में गुरूवर्या महासती धर्मप्रभा ने आयोजित विषेश धर्मसभा मे श्रध्दांलूओ को सम्बोधित करते हुए कहा कि ज्ञान अनन्त है और सम्पूर्ण ज्ञान प्राप्त कर पाना साधारण मनुष्य के लिए कठिन और असंभव है लेकिन ज्ञान के छोटे से एक सूत्र को भी वह अपने जीवन में समावेश कर लेता है तो वह सभी दुखों से छुटकारा प्राप्त कर सकता है और मनुष्य भव मे भी स्वर्ग के सुख को प्राप्त करके अपनी आत्मा मोक्ष दिला सकता है। परन्तु मनुष्य थोड़े से ज्ञान पर अंहकार और घमंड करता है और समझा है कि इस संसार मेरे बराबर कोई दुसरा विद्वान ज्ञाता पंडित नहीं है जो कुछ भी हू वह मे,जबकि इस धरती न जाने कितने ही अल्पज्ञ अंहकारी घमंडी इस धरती की राख बन चुकें है और उनक...

आध्यात्मिक संस्कारकों से जीवन बनता उच्च : जिनमणिप्रभसुरीश्वर

★ श्री सिवाणची जैन भवन में रहा एक दिवसीय प्रवास ★ रविपुष्य नक्षत्र पर अनेकों संघों ने किये संघबद्ध दर्शन  परम पूज्य खतरगच्छाधिपती आचार्य श्री जिनमणिप्रभसुरीश्वरजी मा सा आदि ठाणा एवम साध्वीवृंद का बाजते गाजते श्री सिवांची जैन भवन, साहुकारपेट में पगलिया एवम प्रवचन सुनने का सुअवसर प्राप्त हुआ। ◆ वर्तों के पालन से व्यक्ति सादगी भरा जीवन जीता  धर्मपरिषद् को सम्बोधित करते हुए सिवाणची गौरव आचार्य प्रवर ने कहा कि जीवन के सम्यक् निर्माण के लिए सम्यक् संस्कारों का होना जरूरी है। जैन धर्म संस्कारवान धर्म है। भगवान महावीर ने साधु साध्वीयों के साथ श्रावक श्राविकाओं को संयमित होने के लिए बारह वर्तों का पालन करने की प्रेरणा दी। वर्तो के पालन से व्यक्ति सादगी भरा जीवन जीता है। गुरु भगवंत आपको समय समय पर प्ररेणा देते है कि आप जैनत्व के संस्कारों से परिपूर्ण बने। ◆ बच्चों को जैनत्व संस्कारों के साथ करवायें ...

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