श्री सुमतिवल्लभ नोर्थटाउन श्वेतांबर मूर्तिपूजक जैन संघ में आचार्य श्री देवेंद्रसागरसूरिजी ने धर्म वाणी के माध्यम से प्रवचन देते हुए कहा कि शांति इंसान के लिए सबसे जरूरी और महत्वपूर्ण है। आज लोगों के पास भौतिक सुविधाएं बहुत हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें मन की शांति नहीं है। धन-दौलत से संसाधन खरीदे जा सकते हैं, लेकिन शांति नहीं खरीदी जा सकती है। शांति बाजार में बिकने वाली वस्तु नहीं है। केवल मुख से चुप रहने से शांति नहीं मिलती, बल्कि सच्ची सुख-शांति तो तभी है जब व्यक्ति का मन चुप रहे। अशांति का कारण ही व्यक्ति का मन है। वे मन से अशांत हैं और जब तक उनका मन शांत नहीं होगा तब तक उनका जीवन सुखी नहीं हो सकता है। मन को नियंत्रित करने पर ही उन्हें शांति मिलेगी।
हाथ में माला फेरने और जीभ से भजन करने से ईश्वर का सच्चा सुमिरन नहीं होता है, यदि मनुष्य का मन ही एकाग्र न हो। मनुष्य का मन एकाग्र करने के लिए आचार्य श्री ने आगे कहा कि जो व्यक्ति नियम और अनुशासन से चलता है उसका मन कभी अशांत नहीं होगा, बल्कि वह स्वयं प्रफुल्लित रहेगा और अपने आसपास के लोगों को भी सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करेगा।मन की शांति किसी भी मनुष्य के लिए एक अनमोल धन है. इसके बिना जीवन में सब कुछ बेकार है. अगर आपके मन में शांति नहीं होगी तो आप इस दुनिया की किसी भी चीज से प्रसन्न और आनंदित नहीं हो सकते भले ही आपके पास कितना भी धन क्यों ना हो. वहीँ अगर आपके पास मन की शांति है तो आप झोंपड़ी में भी प्रसन्नता के साथ रह सकते हैं.
मन की शांति एक ऐसा अनमोल धन है जिसकी प्राप्ति के लिए मनुष्य को सदैव प्रयत्नशील रहना चाहिए और हमेशा इस मूल्यवान धन की रक्षा करना चाहिए. क्योंकि एक बार आपका रुपया-पैसा चला गया तो उतना नुक्सान नहीं होगा जितना की मन की शांति के चले जाने से होगा. यह एक ऐसा खजाना है जो आपको बड़ा भाग्यवान और ताकतवर बना देता है. सफलता प्राप्त करने के लिए मन की शांति होना बहुत जरूरी है. एक अशांत और चिंतित मन से आप किसी बढ़िया परिणाम की उम्मीद नहीं कर सकते. अशांत मन किसी भी काम पर पूरा फोकस ठीक से नहीं कर पाता जिससे कोई भी कार्य अपने सर्वश्रेष्ठ लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर पाता.