पूर्व राष्ट्रपति डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम के 92वें जन्मदिन समारोह के अवसर पर 15 अक्टूबर को ज्ञानचंद कोठारी को इंटरनेशनल यूनाइटेड कलाम बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स द्वारा सर्वश्रेष्ठ सामाजिक सेवा अवार्ड से नवाजा गया। इंटरनेशनल यूके बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के अध्यक्ष डॉ.एम.सेंथुर पांडी तथा सीईओ डॉ.साई बालाजी व मुख्य अतिथि आईडीएम नेशंस कैंपस के समाज कल्याण विभाग के प्रमुख श्रीलंका से पधारें चंद्रु फर्नेन्डो ने समाज सेवी ज्ञानचंद कोठारी को सम्मान पत्र व स्मृति चिन्ह प्रदान किया। अध्यक्ष डॉ.सेंथुर पांडी ने बताया कि ज्ञानचंद कोठारी महावीर इंटरनेशनल चेन्नई मेट्रो के चेयरमैन, जी के जैन हायर सेकंडरी स्कूल के सेक्रेटरी, कटारिया डायलिसिस सेन्टर के सचिव तथा राजस्थानी अशोसिएशन के संयुक्त सचिव एवं अनेक संस्थाओं के माध्यम से समाज सेवा व मानव सेवा में उल्लेखनीय कार्य के लिए सम्मान करते हुए अत्यंत हर्ष हो रहा है।
नार्थ टाउन में ए यम के यम स्थानक में चातुर्मासार्थ विराजित गुरुदेव जयतिलक मुनिजी ने प्रवचन में फरमाया कि आत्मबन्धुओं धर्म जीवन में नैतिकता से जीने की कला सीखाता है सुखी बनने का निर्देश देता है नैतिकता धर्म से ही समझ आती है धर्म ही ऐसा साधन जो नैतिकता ईमानदारी, सत्य सीखता है धर्म ही एक ऐसा प्रशस्त मार्ग है धर्म नीति से जीवन जीने के लिए नीरुपण किया। अहिंसा व्रतों का निरुपण करने के लिए पांच महाव्रत, तीन गुणव्रत और चार शिक्षा व्रतों का निरुपण किया। भगवान ने अनुकम्पा की दृष्टि से धर्म के मार्ग पर आगे बढ़ने के लिए शिक्षा व्रतों का विधान किया। श्रावक व्रतों को धारण करो या महाव्रतों को धारण करो जिससे संसार के परिभ्रण को सीमित कर सकते है अधर्मी जीवों को धर्म से जुडना है । एक बार धर्म को धारण करके कभी न कभी चरित्र में जरुर आयेंगे । जिस प्रकार पाल बांधने से मर्यादा आ जाती है । राम को इसलिए पुरु...
जैन साध्वी ने बताया नवरात्रि में हर दिन का विशेष महत्व, साधना कर पाई जा सकती है सिद्धि Sagevaani.com @शिवपुरी ब्यूरो। नवरात्रि के 9 दिन विशेष महत्व के होते है और हर दिन का अपना महत्व है। इस बार रविवार से नवरात्रि प्रारंभ हुई है। रविवार को सूर्य की आराधना कर अपने जीवन में ज्ञान रूपी प्रकाश को प्राप्त करें तथा सोमवार को चन्द्रदेवता की आराधना कर मन को शीतल बनाऐं। जिसका मन शीतल हो जाता है उसका घर स्वर्ग बन जाता है। उक्त उदगार प्रसिद्ध जैन साध्वी नूतन प्रभाश्री जी ने स्थानीय कमलाभवन में आयोजित विशाल धर्मसभा में व्यक्त किए। धर्मसभा में साध्वी वंदनाश्री जी ने ओम जय जिनवर चंदा, सुख संपत्ति के दाता भजन का गायन कर नवरात्रि के दूसरे दिन चंद्र देवता की आराधना को शुभ बताया। साध्वी नूतन प्रभाश्री जी ने बताया कि नवरात्रि का पर्व श्रेष्ठ शक्तिदायक और ऊर्जा प्रदान करने वाला है। इन नौ दिनों में हिन्दू धर्म ...
Sagevaani.com @चैन्नई। बड़ों की सेवा और सानिध्य प्राप्त करने वाला व्यक्ति जीवन में कभी भी भटक नहीं सकता है। सोमवार साहुकारपेट जैन भवन महासती धर्मप्रभा ने श्रध्दांलूओ को सम्बोधित करते हुए कहा कि मनुष्य जीवन मे छोटीसी उपल्ब्धि मिल जाने पर अपने आप को भगवान समझने लग जाता है और अपनें मां बाप और गुरु के उपकारो को भूलकर उनका तिरस्कार और अपमान करने वाला व्यक्ति जीवन मे कितनी भी सफलता प्राप्त कर लेवें। उस इंसान को परमात्मा भी माफ करने वालें नहीं है। जिस मनुष्य ने अपने मां बाप और गुरू की सेवा की उसके जीवन में कितनी भी आपत्ति और विपत्ति एवं संकट आ जाए वह जीवन मे कभी असफल नहीं हो सकता है क्योंकि बुजुर्गों से प्राप्त कि गई शिक्षा और अनुभव से वह संकट मे भी सही मार्ग खोज लेगl जो व्यक्ति अपने बड़ो और परिवार अपमान करता और उन्हें दुखः देता है ऐसा व्यक्ति कभी भी किसी का भला नहीं कर सकता है। सेवा करने वाला इंसा...
Sagevaani.com @चैन्नई। जब तक मनुष्य अपनी बुराइयों का विसर्जन नहीं कर देता है तब तक उसके जीवन में सुख और शांति नहीं आने वाली है। रविवार को साहुकारपेट जैन भवन में महासती धर्मप्रभा ने नवरात्रा पर सभी श्रध्दालुओं को आर्शीवाद एवं शुभकामनाएं देतें हुए कहा कि अपने स्वार्थ को छोड़कर जो मनुष्य साधना करता है वह अपने जीवन को पवित्र बनाकर अपनी आत्मा को मोक्ष दिलवा सकता है। बिना त्याग किए जीवन का निर्माण और आत्मा का उध्दार नहीं हो सकता है। साधना ही वह मार्ग है जिससे मनुष्य अपने आप को पहचान और जानकर भीतर मे छिपी गंधगी और बुराईयों और कसायो को वह छोड़ देता है तो अपने जीवन को सुखमय बना सकता है जब तक वो छल-कपट,राग-देवेष,मोह -माया और कयायो का वह परित्याग और विसर्जन नहीं कर देता है तब तक वह कितनी भी साधना और आराधना कर लेवें, उसे साधना का फल प्राप्त नहीं हो सकता है, और नाहि वह अपने जीवन में सुख भोग सकता है।साध्व...
श्रीपाल मैनासुन्दरी की कथा सुनाते हुए उपाध्याय प्रवर प्रवीण ऋषि ने कह कि जो हमारे भाग्य में नहीं रहता है, वह आशीर्वाद से मिलता है। जैसे श्रीपाल को मिला। और अपनी खुद की पहचान बनने के लिए वह अपनी माता का आशीर्वाद लेकर अनजानी राहों पर निकल पड़ा। वह सुख सुविधाओं का त्याग कर 12 साल बाद वापस आने का वादा कर राज्य से बाहर चल पड़ता है। वह यह तय करता है कि मुझे क्या करना है और क्या नहीं करना। वह प्रत्याख्यान के साथ प्रतिज्ञा लेता है। उपाध्याय प्रवर ने कहा कि अपने जीवन में हम क्या करना है यह तो तय कर लेते हैं, लेकिन क्या नहीं करना है, ये तय नहीं करते है और फेल हो जाते हैं। अगर हम क्या करना है और क्या नहीं करना है तय कर लें तो जीवन में कोई कठनाई नहीं आएगी। उक्ताशय की जानकारी रायपुर श्रमण संघ के अध्यक्ष ललित पटवा ने दी। रविवार को धर्मसभा को संबोधित करते हुए उपाध्याय प्रवर ने कहा कि श्रीपाल इसी प्रतिज्ञा...
◆ ट्रस्ट बोर्ड की नवगठित टीम का हुआ शपथग्रहण ◆ जैन संस्कार विधि से हुई शपथ विधि Sagevaani.com @साहुकारपेट, चेन्नई: साध्वी लावण्यश्री के सान्निध्य में श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथी सभा ट्रस्ट बोर्ड, साहुकारपेट चेन्नई के सत्र 2023-2025 की नवगठित टीम का शपथग्रहण समारोह समायोजित हुआ। साध्वीश्रीजी के नवरात्रि अनुष्ठान के साथ कार्यक्रम शुभारम्भ हुआ। तेरापंथ सभा मंत्री अशोक खतंग ने नव मनोनीत टीम का अनुठे अन्दाज में परिचय प्रस्तुत किया। पुर्व प्रबंधन्यासी सुरेश नाहर ने नवमनोनीत प्रबंधन्यासी विमल चिप्पड़ को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। श्री विमल चिप्पड़ ने पदाधिकारियों एवं सम्पूर्ण टीम को शपथ दिलाई। जैन संस्कारक स्वरूप चन्द दाँती ने मंगल मंत्रोच्चार के साथ शपथ विधि परिसम्पन्न करवाई। सहयोगी संस्कारक हनुमान सुखलेचा, तेयुप उपाध्यक्ष सन्दीप मुथा, मंत्री कोमल डागा ने सम्पूर्ण टीम को तिलक लगाकर मौली बांधी। न...
हमारे भाईन्दर में विराजीत उपप्रवृत्तिनि संथारा प्रेरिका सत्य साधना ज गुरुणी मैया आदि ठाणा 7 साता पूर्वक विराजमान हैl वह रोज हमें प्रवचन के माध्यम से नित नयी वाणी सुनाते हैं, वह इस प्रकार हैंl बंधुओं जैसे कि उत्साह से किया कार्य स्वर्ग का द्वारा होता हैl हम उत्साह से यह काम कर जाए किसी से रिश्ता रखें या चाहे साधना में बैठे यदि हम उत्साह और उमंग के साथ काम करेंगे तो उसके परिणाम भी उत्साह और उमंग के ही होंगेl अगर भोजन मरे हुए मन से कुत्सित मन से यदि भोजन भी करेंगे तो भोजन भी बेशवादी लगेगा और रसगुल्ला भी नहीं रस्सी लगेगा फूल को सुघना भी हमें पत्थर सुनने की तरह लगेगाl उत्साह भाव के साथ ही जीवन को दिया जाए और उत्साह भाव के साथ ही अपने कर्म योग को संपादित किया जाl व्यक्ति जब सांस को घर लौटता है तो थक्का हर आता है और पत्नी से कहता है बहुत थक चुका हूं तब यह समझ लीजिए यह बात वह व्यक्ति रहेगा जो अपने...
गौतमकिरण परिसर में पारणोत्सव हुआ सानंद संपन्न महानगर के छह विभिन्न जैन संघों के तत्वावधान और गच्छाधिपति आचार्यश्री उदयप्रभ सूरीश्वरजी की पावन निश्रा में भद्रतप की पूर्णाहुति के उपलक्ष्य में आयोजित महोत्सव के तीसरे दिन रविवार प्रातः तपस्वियों के सम्मान में भव्य वरघोड़ा निकाला गया। यह वरघोड़ा केएलपी अभिनंदन अपार्टमेंट से प्रारंभ होकर एटकिंसन रोड़ स्थित गौतमकिरण परिसर में पहुंचा, जहां तपस्वियों का राजशाही पारणोत्सव आयोजित किया गया। भद्रतप की सौ दिवसीय आराधना, जिसमें 75 उपवास और 25 बियासना शामिल है, को देखकर प्रतीत होता है कि यह एक पहाड़ के जैसी साधना है लेकिन इस पहाड़ के शिखर पर सफलतापूर्वक पहुंचने का कार्य जो करते हैं, वे कर्मवीर कहलाते हैं। उन कर्मवीरों की अनुमोदनार्थ वरघोड़े में शामिल हुए हजारों की संख्या में श्रद्धालु उनके सामने नतमस्तक थे और उन कर्मवीरों के चेहरों की चमक यह बताने में समर...
नार्थ टाउन में चातुर्मासार्थ विराजित गुरुदेव जयतिलक मुनिजी ने फरमाया कि आत्म बन्धुओ तीर्थंकंरो ने धर्म का प्रवर्तन किया। 2 प्रकार का धर्म श्रुत धर्म, चारित्र धर्म । श्रुत धर्म दो प्रकार अणगार धर्म आगार धर्म । आगार धर्म धारण करने वाला भी 14 गुणस्थान को पार करके देव गति को प्राप्त कर सकता हैl भगवान ने ऐसा उपदेश नहीं दिया कि पूरा धन का त्याग करो। परिग्रह में कुछ मर्यादा करो। संसारी का मान धन में है। धन है तो सम्मान है जब तक श्वास है तब तक धन की आवश्यकता है धन अपने पास रखो। अपना परिग्रह अपने पास रखो। अपने जीवन निर्वाह के लिए किसी के आगे हाथ फैलाना ना पडे, दूसरों के सामने हाथ फैलाना भी भारी लगता है वृद्ध अवस्था में थोड़ा परिग्रह अपने पास रखो । जवानी में गरज नहीं होती है बुढ़ापा गरज वाला है। बुढ़ापे में हर चीज की गरज होती हैं वृद्धावस्था साधु का कुछ नहीं बिगाडता है। गृहस्थ का बिगड़ता है जीवन...
हर धर्म अलग-अलग रूपों में एक ही शिक्षा देता है कि प्रभु पर भरोसा रखने से जीवन यात्रा सहज रहती है। लेकिन सिर्फ़ विश्वास के सहारे जीना संभव नहीं है । उपरोक्त बातें आचार्य श्री देवेंद्रसागरसूरिजी ने सुमतिवल्लभ नोर्थटाउन जैन संघ में प्रवचन देते हुए कही, वे आगे बोले कि मां की गोद में बैठा छोटा-सा बच्चा भी जरा सा झटका लगने पर अपने हाथ में जो कुछ आए उसे पकड़ लेता है, जैसे उसके सहारे नीचे गिरने से बच जाएगा। हम अपनी बुद्धि के कारण सोचते हैं कि परमात्मा उसी की मदद करते हैं जो अपनी मदद की खुद चेष्टा करता है। यह एक सीमा तक सच है। पर यही वजह है कि खुद को धार्मिक मानने वाले और हमेशा परमात्मा का नाम भजने वाले भी दैनिक जीवन की चिंताओं मुक्त नहीं हो पाते। किसी तरह जोड़तोड़ कर खुद ही अपने बिगड़े काम बनाने की कोशिश करते हैं। लेकिन जब कोई कठिन स्थिति आती है और लगता है कि अब चीजें हमारे काबू में नहीं हैं, तब ह...
धर्म सभा में जैन साध्वियों ने बताया- पाप के फल से कोई नहीं बच सकता Sagevaani.com @शिवपुरी। हमारी आत्मा हमें बुरे कामों और पाप करने से रोकती है जबकि मन का झुकाव पाप के कामों की ओर होता है। इंसान के भीतर मन और आत्मा में अंतर्द्वंद चलता रहता है। जो अपनी आत्मा की आवाज सुनता है वह पाप नहीं कर सकता और हमेशा वह बुराइयों से दूर रहता है। उक्त बात शनिवार को कमला भवन में आयोजित धर्म सभा में साध्वी नूतन प्रभाश्री जी ने कही। उन्होंने समझाइश दी कि हमें जीवन का हर पल सावधानी से बिताना चाहिए। क्या पता जिंदगी का दीप कब बुझ जाए? उन्होंने कहा कि अंतिम समय में व्यक्ति की जैसी मनोवृत्ति और भावना रहती है उसे अगले जन्म में उसी प्रकार की गति प्राप्त होती है। धर्मसभा में साध्वी वंदना श्री जी ने श्रावक के गुणों का वर्णन करते हुए कहा कि श्रावक क्षमाशील होना चाहिए और क्रोध आदि कषायों से उसकी अंतरात्मा मुक्त होनी चाहि...