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साध्वी रमणीक कुंवर जी की बड़ी मांगलिक में उमड़ा जनसैलाब, देशभर से श्रद्धालु आए

14 वर्ष बाद शिवपुरी में हुई बड़ी मांगलिक, साध्वी रमणीक कुंवर जी ने कहा- बड़ी मांगलिक से आपकी श्रद्धा के कारण चमत्कार Sagevaani.com @शिवपुरी। शिवपुरी को प्रसिद्ध जैन साध्वी रमणीक कुंवर जी की बड़ी मांगलिक का लाभ 14 वर्ष पश्चात मिला। गुरुणी मैया की बड़ी मांगलिक हेतु देशभर से उनके अनुयायी भक्तगण और श्रद्धालु शिवपुरी पधारे। बड़ी मांगलिक में अभूतपूर्व जनसैलाब उमड़ा जिसमें जैन और अजैन दोनों ने बड़ी संख्या में भाग लेकर जैन साध्वी रमणीक कुंवर जी से आशीर्वाद लिया। इस अवसर पर साध्वी नूतन प्रभाश्री जी ने अपने उदगार व्यक्त करते हुए कहा कि बड़ी मांगलिक से चमत्कार आपकी श्रद्धा करती है। ठीक मुहूर्त पर गुरुणी मैया साध्वी रमणीक कुंवर जी ने भक्तगणों के बीच बड़ी मांगलिक का पाठ किया और इसके पश्चात उन्होंने जाप मंत्र और माला का पुरुष वर्ग को वितरण किया। आयोजन में बड़ी मांगलिक में नवकारसी का लाभ उठाने वाले नन्नू...

ब्यावर एसोसिएशन ट्रस्ट मद्रास द्वारा अनुराधा पौडवाल शो का आयोजन 28 अक्टूबर को

Sagevaani.com @चेन्नई: स्थानीय ब्यावर एसोसिएशन ट्रस्ट मद्रास के तत्वावधान में 28 अक्टूबर को एसएस खेतपालिया फाउंडेशन अनुराधा पौडवाल लाइव शो का आयोजन श्री मुथा वेंकट सुब्बाराव कंसर्ट हॉल लेडी अंडल कैंपस चेतपेट में किया जा रहा है। ट्रस्ट के सचिव अजय नाहर ने बताया कि इस कार्यक्रम का आयोजन ट्रस्ट के दान दाताओं सदस्यों तथा उनके परिवारों के लिए किया जा रहा है और आयोजन से प्राप्त संपूर्ण आय को चैरिटी कार्यों में दान दे दिया जाएगा। ज्ञात रहे संस्था छात्रवृति का कार्य एवं जीवन ज्योति मासिक पेंशन आर्थिक रूप से सधर्मी भाइयों के लिए कार्यरत है! अध्यक्ष श्री राज कुमार कोठारी ने बताया कि इस कार्यक्रम के आयोजन में ट्रस्ट के अलावा कई बड़ी कंपनियां, सामाजिक संस्थाएं एवं समितियो ने कार्यक्रम का प्रायोजक बन प्रोत्साहन किया है जिनमें से प्रमुख कंपनियों में से एएमएस बुलियन, सुस्वानी ज्वेलर्स प्राइवेट लिमिटेड, ए...

अभ्यास ही आत्म-विकास का सर्वोत्तम साधन है : देवेंद्रसागरसूरि

Sagevaani.com @चेन्नई. बिन्नी के नोर्थटाउन मूर्तिपूजक जैन संघ में बिराजमान आचार्य श्री देवेंद्रसागरसूरिजी ने प्रवचन के माध्यम से श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि अपने-अपने क्षेत्रों में जो भी व्यक्ति सफल हुए हैं उनकी सफलता में अभ्यास की महती भूमिका रही है। अभ्यास के द्वारा मूढ़ से मूढ़ व्यक्ति भी विद्वान बन सकता है। नि:संदेह किसी भी लक्ष्य को प्राप्त करने में अभ्यास का महत्वपूर्ण योगदान होता है। द्रोण ने एकलव्य को धनुर्विद्या देने से इन्कार कर दिया था। उसके उपरांत एकलव्य ने उन्हें चोरी-छिपे देखकर स्वयं धनुष-बाण चलाने का अभ्यास किया और वह धीरे-धीरे धनुर्विद्या में निपुण होता गया। हॉकी खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद एक मैच में गोल नहीं दाग पा रहे थे तो उन्हें गोलपोस्ट की माप पर कुछ संदेह हुआ। जब उस गोलपोस्ट की माप ली गई तो वह अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुरूप नहीं थी। यह ध्यानचंद का स्वयं पर विश्व...

साध्वी रमणीक कुंवर जी की बड़ी मांगलिक का लाभ लेनेे हेतु देशभर से श्रद्धालु शिवपुुरी पहुंचे, तैयारियाँ अंतिम चरण में

सुुबह 9 बजे सदर बाजार से निकलेगा जुलूस और परिणय बाटिका में सुनाई जाएगी बड़ी मांंगलिक Sagevaani.com @शिवपुरी। प्रसिद्ध जैन साध्वी रमणीक कुुंवर जी द्वारा प्रतिवर्ष दी जाने वाली बड़़ी मांगलिक का लाभ इस बार शिवपुरी नगर को मिलने जा रहा है। उनकी बड़ी मांगलिक का लाभ लेने हेेतु देशभर से श्रद्धालु शिवपुरी पहुंच चुके हैैंं। इंदौर, उज्जैन, धार,पुणे, हैदराबाद,नई दिल्ली, सवाई माधौपुर,ग्वालियर, गुना सहित देश के अनेक शहरों के धर्मावलंबियों नेे आज धर्म सभा मेें पहुंच कर गुरुणी मैया सेे आशीर्वाद लिया। इस अवसर पर साध्वी रमणीक कुंवर जी ने भक्तगणों को मंत्र दीक्षा दी और उन्हें बताया कि कल वह बड़ी मांगलिक के दौरान पुरुष भक्तों को जाप का वितरण करेंगी। साध्वी नूतन प्रभा श्रीजी ने बताया कि मंत्र और जाप अकेले चमत्कार नहीं करते बल्कि चमत्कार गुरु के प्रति आपकी श्रद्धा से होता है। बड़ी मांगलिक भक्तोंं को हर प्रकार क...

शुभ भाव लाना आसान है परंतु अशुभ भाव छोड़ना मुश्किल है – आचार्यश्री उदयप्रभ सूरीजी

किलपाॅक जैन संघ में विराजित योगनिष्ठ आचार्य केशरसूरीजी के समुदाय के वर्तमान गच्छाधिपति आचार्यश्री उदयप्रभ सूरीश्वरजी म.सा. ने प्रवचन में कहा कि क्षमा गुण में सबसे महान् तीर्थंकर है। शील में नारद, युद्ध के बल में वासुदेव, सौंदर्य में चक्रवर्ती रत्न, दान में शालीभद्र और विश्रमण देव और वैभव में चक्रवर्ती को महान् बताया गया है। इस तरह अलग-अलग परिचय दिए हैं। इसी तरह अलग-अलग पदार्थों के अलग-अलग स्वभाव है। सिद्ध भगवंत अपना स्वभाव कभी नहीं बदलते। उनके लिए दृश्य बदलता है, दृष्टा नहीं, इसका नाम सिद्धावस्था है। जैसे कांच अपना स्वभाव नहीं बदलता, चाहे उसके सामने पत्थर हो या सोना, वह स्थिर रहता है। गुरुदेव ने बताया कि पूजा दो प्रकार की होती है द्रव्य और भाव पूजा। द्रव्यपूजा के अंदर भावों को पिरोना जरूरी है। भाव के बिना दीक्षा अनंत बार लेने पर भी फलित नहीं होती। अशुभ भाव को बाहर निकालना सबसे बड़ा धर्म है...

रजत द्वारा राजस्थानी बाजार 28 व 29 अक्टूबर 2023 को सेंट जॉर्ज स्कूल, किलपाक में 

राजस्थानी एसोसिएशन तमिलनाडु द्वारा राजस्थानी बाजार दिनांक 28 व 29 अक्टूबर 2023 शनिवार और रविवार को सेंट जॉर्ज स्कूल, चेन्नई में आयोजित किया जाएगा। जिसके रीफेक्ष मुख्य सहयोगी है। इसके तैयारियां के लिए दिनांक 16 अक्टूबर को बाम्बे हलवा हाउस में मिटींग रखी गई। अध्यक्ष मोहनलाल बजाज ने सभी का स्वागत किया। चेयरमैन नरेंद्र श्रीश्रीमाल ने राजस्थानी बजार के बारे में बताया कि तमिलनाडु में सबसे बड़ी राजस्थानी प्रदर्शनी पहला दिन सुबह 11 बजे से रात 11 बजे तक और दूसरा दिन सुबह 10.30 बजे से रात 9 बजे तक रहेगी।‌ राजस्थानी सांस्कृतिक शो, विशेष आभूषण मंडप, स्वादिष्ट खान पान के स्टाल,अखिल भारतीय प्रदर्शकों के 150 से ज्यादा स्टॉल एवं अनेक आकर्षण होंगे। जो 32000 वर्ग फुट‌ में एयर कंडिशन्ड हॉल में होंगे। 20,000 आगंतुकों की उम्मीद है। सह चेयरमैन हेमंत दुगड ने बताया कि खरीदारी में ज्वेलरी पैवेलियन, फैशन, डेकॉर, एक...

जिनवानी भवी जीवों को तार के मोक्ष तक ले जाने वाली है: जयतिलक मुनिजी

नार्थ टाउन की पावन धरा पर गुरुदेव जयतिलक मुनिजी ने प्रवचन में फरमाया कि आत्म बधुओं, जिनवानी भवी जीवों को तार के मोक्ष तक ले जाने वाली है। देशविरति ममत्व से युक्त संसार में रहने वालों का चारित्र धर्म है सर्वविरति अनासक्त भाव में रहने साधु-साध्वी का चारित्र धर्म है। जिनेश्वर ने इस सुन्दर मार्ग का निरुपण किया गृहस्थ में रहते हुए भी यदि श्रावक-श्राविका देशविरति चारित्र धर्म का पालन जागृत अवस्था में करे तो उनका मोक्ष उनके हाथ में है।   इस प्रकार दोनों चारित्र धर्म कल्याणकारी और मंगलकारी है। मोक्ष तो दुःख पूर्वक भी प्राप्त किया जा सकता है परन्तु यदि जिनेश्वर भगवान द्वारा प्ररुपित मार्ग का पालन किया जाये तो सुखपूर्वक मोक्ष को प्राप्त किया जा सकता है। सांतवे व्रत में सागर जैसे पाप को कुण्ड जितना मर्यादित कर सकते हैं। ज्ञानचंद कोठारी ने संचालन करते हुए बताया कि गुरुदेव के द्वारा श्रावक के बारह...

जिनकी मंजिल तय रहती है, वे कभी रुकते नहीं हैं : प्रवीण ऋषि

20 अक्टूबर से शुरू होगी आयंबिल की ओली Sagevaani.com @रायपुर। उपाध्याय प्रवर प्रवीण ऋषि ने कहा कि जिनकी मंजिल और रास्ते तय रहते हैं, वे कभी रुकते नहीं हैं। प्रमाद वही करते हैं जिन्हे समय का बोध नहीं होता है और रास्ता पता नहीं होता है। श्रीपाल को मैनासुन्दरी की याद आई और वह अपनी रानियों संग चल पड़ा उज्जैन की ओर। और श्रीपाल चुपचाप नहीं चलता है, रास्ते में जितने भी राज्य आते हैं उनके राजा को संदेश देता है कि मैं आ रहा हूं। जो राजा स्वागत के लिए आते हैं, उन्हें पुरस्कार मिलता है। और जो नहीं आते हैं, श्रीपाल उन्हें पराजित करता हुआ आगे बढ़ता है। जिन्होंने सम्मान किया उन्हें सम्मान मिला, जिसने सम्मान नहीं किया उनका अपमान हुआ। एक नगरी के द्वार पहुंचे, वहां का राजा स्वागत के लिए नहीं आया तो श्रीपाल ने कारण जानना चाहा। उपाध्याय प्रवर ने कहा कि कोई भी काम नहीं हुआ है तो सबसे पहले उसका कारण जानें। उक्ताश...

प्रतिकूल परिस्तिथियो में सकारात्मक सोच रखने वाला व्यक्ति ही जीवन में सफलता प्राप्त करता है: महासती धर्मप्रभा

Sagevaani.com @चैन्नई। प्रतिकूल और अनूकूल परिस्तिथियो में तटस्थ रहने वाला व्यक्ति ही सफलता को प्राप्त करता है। गुरूवार साहुकारपेट जैन भवन में महासती धर्मप्रभा ने श्रोताओं को धर्म उपदेश प्रदान करतें हुए कहा कि हर व्यक्ति के जीवन में निराशा एवं प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करना ही पड़ता है, लेकिन सफल और सार्थक जीवन वही है,जो सफलता और असफलता अनुकूलता और प्रतिकूलता,दुख और सुख,हर्ष और विषाद के बीच संतुलन स्थापित करते हुए अपने चिंतन की धारा को सकारात्मक बनाए रखता है तो वह जीवन की समग्र समस्याओं का व्यक्ति चिंतन और मनन के द्वारा समाधान खोज सकता है। विषम परिस्थितियों मे जीवन मे कृष्ट आ जाने के बावजूद ऐसा व्यक्ति हिम्मत नहीं हार है और वह सफलता प्राप्त करता है। मनुष्य की आत्म शक्ति कमजोर नही है और इच्छा शक्ति संकल्प और दृष्टिकोण सही है तो मनुष्य जीवन मे विपरीत और कठिन समय को भी वह सही समय मे बदल सक...

गुरू पदम जन्म जयंति पर सुल्लूरपेठ में होगा त्रि दिवसीय कार्यक्रम

राष्ट्र संत उत्तर भारतीय प्रवर्तक अनंत उपकारी दादा गुरुदेव भण्डारी श्री पदम चन्द्र जी म. सा. की पावन जन्म जयंती 22 – 23 एवं 24 अक्टूबर को त्रिदिवसीय धार्मिक एवं जन कल्याणकारी कार्यक्रमों के द्वारा गुरु गणेश मिश्री पावन स्मृति धाम के प्रांगण में सुल्लूरपेठ में मनाई जा रही है । इस कार्यक्रम को स्पष्टवक्ता पू. श्री कांति मुनि जी म. एवं श्रमण संघीय उप प्रवर्तक पू. श्री पंकज मुनि जी म. सा. आदि ठाणा 5 का पावन सान्निध्य प्राप्त होगा। दक्षिण सूर्य ओजस्वी वक्ता डॉ. श्री वरुण मुनि जी म. सा. पूज्य दादा गुरुदेव के महिमा एवं गरिमा मंडित जीवन पर अपने प्रवचन के माध्यम से प्रकाश डालेंगे। उपरोक्त जानकारी देते हुए मुनि रत्न श्री रूपेश मुनि जी म. ने बताया कि 22 अक्टूबर को प्रात: 9 से 10 बजे तक गुणगान सभा एवं सामायिक दिवस का भव्य आयोजन किया जायेगा। जिसमें अधिक से अधिक संख्या में भाई- बहनें सामायिक की आर...

प्रसिद्ध जैन साध्वी रमणीक कुंवर जी 20 को देंगी भक्त गणों को वर्षिक बड़ी मांगलिक का लाभ

मांगलिक पाठ श्रवण हेतु देश भर से आयेंगे उनके अनुयायी, सुबह 9 बजेे कोर्ट रोड से निकलेगा जुलूस और परिणय वाटिका में होगा आयोजन Sagevaani.com @शिवपुरी। शिवपुरी में चातुर्मास कर रहीं प्रसिद्ध जैन साध्वी रमणीक कुुंवर जी 20 अक्टूबर को अपने भक्तगणों के कल्याण हेतु बड़ी मांगलिक का पाठ पढ़ेगीं। इस हेेतु देशभर से उनके भक्तगण औेर अनुयायी शिवपुरी पधार रहें हैं। वर्ष भर मेंं एक बार होने वालेे इस बड़ी मांगलिक के पाठ का आध्यात्मिक रूप से विशेष महत्व है और यह भक्तों को हर प्रकार केे विघ्नोंं से मुक्त कराता है। बड़ी मांगलिक का पाठ सुनाने के पहले गुरु णी मैया साध्वी रमणीक कुंवर जी 10 दिन तक साधना में रहती हैं और बड़ी मांगलिक के बाद वह पुरुष भक्तों को यंत्र का वितरण करती हैं। बड़ी मांगलिक के भव्य कार्यक्र्रम का संचालन ओजस्वी प्रवचन प्रभाविका साध्वी नूतन प्रभा श्रीजी करेंगी। इस अवसर पर तपस्वी रत्ना साध्वी पूनम...

एक हाथ से दिया दान हजारों हाथों से लौटकर आता है : देवेंद्रसागरसूरि

सुमतिवल्लभ नोर्थटाउन श्वेतांबर मूर्तिपूजक जैन संघ में आचार्य श्री देवेंद्रसागरसूरिजी ने धर्म प्रवचन देते हुए कहा कि एक हाथ से दिया गया दान हजारों हाथों से लौटकर आता है। जो हम देते हैं वो ही हम पाते हैं। दान के विषय में हम सभी जानते हैं। दान अर्थात् देने का भाव, अर्पण करने की निष्काम भावना। किंतु दान की महिमा तभी होती है, जब वह नि:स्वार्थ भाव से किया जाता है अगर कुछ पाने की लालसा में दान किया जाए तो वह व्यापार बन जाता है। यहां समझने वाली बात यह है कि देना उतना जरूरी नहीं होता जितना कि देने का भाव। अगर हम किसी को कोई वस्तु दे रहे हैं लेकिन देने का भाव अर्थात् इच्छा नहीं है तो वह दान झूठा हुआ, उसका कोई अर्थ नहीं। इसी प्रकार जब हम देते हैं और उसके पीछे यह भावना होती है, जैसे पुण्य मिलेगा या फिर परमात्मा इसके प्रत्युत्तर में कुछ देगा तो हमारी नजर लेने पर है, देने पर नहीं। दान का अर्थ होता है दे...

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