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रात्रि भोजन त्याग जरूरी: जयतिलक मुनिजी

नार्थ टाउन में गुरुदेव जयतिलक मुनिजी ने प्रवचन में फरमाया कि भगवान कहते है जिस काम का जो काल हो उस समय वह कार्य पूर्ण कर लेना चाहिए। प्रमाद नहीं करना चाहिए। शास्त्रो में कहा गया है कि रात्रि भोजन त्याग जरूरी  है। साधु के लिए रात्रि भोजन तो निषेध है ही पर गृहस्थ के लिए भी यही निर्देश है, पर आज गृहस्थों में शिथिलता आ गई है। परिमित भोजन करने से शरीर स्वस्थ रहता है। धक्का-मुक्की करते हुए किसी भी समारोह में आहार ग्रहण करना सभ्यता नही है। विवेक पूर्वक आचरण करना चाहिए। आहार की प्रशंसा नही करनी चाहिए अन्यथा कर्म बंध की सम्भावना रहती है। इसलिए ज्ञानीजन कहते है। भोजन करते समय मौन रखना चाहिए जिससे राग द्वेष से बचा जा सकता है। विनीत शिष्य को आज्ञा देकर काम करवाना सरल होता है परन्तु अविनीत शिष्य से काम करवाना कठिन होता है शिष्य को चाहिए कि वह न गुरू को कृपित करे और न ही स्वयं कुपित हो । सदैव अपने गुरु ...

कविता अनुराधा पौडवाल एवं जोली मुखर्जी ने दी प्रस्तुति

ब्यावर एसोसिएशन ट्रस्ट मद्रास के कार्यक्रम एस एस खेतपालिया फाउंडेशन कविता अनुराधा पौडवाल एवं जोली मुखर्जी ने दी प्रस्तुति ब्यावर एसोसिएशन ट्रस्ट मद्रास का 28 अक्टूबर को जीवन आनंद योजना फंड संकलन एवं दिवाली मिलन हेतु कार्यक्रम लेडी अंडाल सभा हाल चेतपेट में किया कार्यक्रम में कविता पौडवाल जोली मुखर्जी मदन मोहन शुक्ला मधुरा देशपांडे और अनुराधा पौडवाल टीम के साथ मिलकर नायाब संगीत मय प्रस्तुति दीl इस कार्यक्रम के मुख्य प्रायोजक श्री एस एस खेतपालिया फाउंडेशन के श्री सुनील जी खेतपालिया , एम आइ लाइफ़स्टाइल के श्री प्रवीण जी चंदन, ए एम एस बुलियन के श्री पुखराज जी बडोला दीपचंद जी लूनिया पप्पुसा एवं मार्गदर्शक श्री सुभाष जी रांका अध्यक्ष श्री राजकुमार जी कोठारी चेयरमैन श्री सुरेश जी लुणावत को चेयरमैन श्री अजीत जी गोठी, महासचिव श्री अजय नाहर, कोषाध्यक्ष श्री राजेश बोहरा , बी वाइ ए के अध्यक्ष राकेश नाह...

 आचार्यश्री हमीरमलजी म.सा की पुण्यतिथि सामायिक दिवस के रुप में मनाई गई

Sagevaani.com/चेन्नई: आज रविवार 29 अक्टूबर 2023 को आचार्यश्री हमीरमलजी म.सा की पुण्यतिथि सामायिक दिवस के रुप में स्वाध्याय भवन, साहूकारपेट,चेन्नई में मनाई गई | धर्मसभा में श्री जैन रत्न हितैषी श्रावक संघ तमिलनाडु के कार्याध्यक्ष आर नरेन्द्र कांकरिया ने पूज्य आचार्यश्री हमीरमलजी म.सा के गुण स्मरण करते हुए कहा कि नागौर में श्री नगराजजी -ज्ञानदेवीजी गांधी के यहां जन्में हमीरमल के ऊपर से गयारह वर्ष की वय में ही पिताजी का साया उठ गया | अपनी मातुश्री के संग पीपाड़ शहर में ननिहाल में आपका लालन- पालन हुआ | रत्नवंशीय महासती श्री बरजूजी म.सा का संयोग मिलने पर आपकी मातुश्री को वैराग्य प्राप्त हुआ व आचार्यश्री रतनचंद्रजी म.सा के पास बर के समीप ही बिरांटिया ग्राम में अपने पुत्र हमीरमल को दीक्षित करने के पश्चात आचार्य हस्तीमल की मातुश्री रूपादेवी की तरह आप भी दीक्षित हो गयी | नवदीक्षित हमीरमलजी म.सा के घ...

अध्यात्म जीवन जीने की कला सिखाता है : देवेंद्रसागरसूरि

Sagevaani.com/चेन्नई. बिन्नी के श्री सुमतिवल्लभ नोर्थटाउन जैन संघ में पूज्य आचार्य श्री देवेंद्रसागरसूरिजी ने धर्म प्रवचन देते हुए कहा कि जीवन बड़ा अमूल्य है। इसमें संसार का सौंदर्य भरा हुआ है, पर उसका आनंद तभी मिल सकता है जब जीवन जीने की कला को समझें। अध्यात्म जीवन जीने की कला सिखाता है, यह एक दिव्य विधा है। यह मनुष्य को हर दुख, कष्ट, विपत्ति और चिंता से छुटकारा दिलाकर आनंद से सराबोर करता है। केवल कुछ समय के लिए नहीं, बल्कि काल की सीमाओं से परे जाकर अनंत काल के लिए। अध्यात्म आत्मा का विज्ञान है। इसे कहीं बाहर नहीं खोजना है, बल्कि इसकी कुंजी हमारे अपने ही भीतर है। अध्यात्म का अर्थ है अपने मूल स्वभाव में लौटना जहां शांति, आनंद और स्थायी समाधान है। अध्यात्म तनावग्रस्त मन को शांति प्रदान करता है। अध्यात्म का संपूर्ण जोर इस बात पर है कि व्यक्ति अपनी मूर्छा से जागे और जान ले कि वह शुद्ध और बुद्...

श्रध्दां और निष्ठा से नवपद की आराधना करने वालख मनवांछित फल की प्राप्त करता है: महासती धर्मप्रभा

Sagevaani.com/चैन्नई। नवपद ओलीजी की आराधना और साधना करने वाले साधक मनवांछित फल प्राप्त करता है।रविवार साहुकारपेट जैनभवन मे महासती धर्म प्रभा ने आयंबिल ओली के अंतिम दिवस तप अराधना करने वाले साधको के तप की अनूमोदना करतें हुए कहा कि नवपद की आराधना जन्म-जरा-मृत्यु के महा भयंकर रोग को मिटाकर अक्षय सुख प्रदान करती है तथा आराधना से ही बाह्य-अभ्यंतर सुख की प्राप्ति होती है। अरिहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय, साधु, दर्शन, ज्ञान, चारित्र और तप की साधना ही नवपद ओली आराधना का सार है। यह आराधना आत्मिक एवं शारीरिक आरोग्य बढ़ाती है और कर्माे की निर्जरा तथा शारीरिक व्याधि को तो दूर करती ही है मनवांछित फल भी प्रदान करती है। साध्वी स्नेहप्रभा ने श्री मद उत्ताराध्यय सूत्र विवेचन करतें हुए कहा कि ज्ञान आत्मा के अवगुण को दूर करता है। किसी की भी निंदा वक्ता नहीं करता है। जो व्यक्ति निंदा वक्ता करता है वो ज्ञानवान...

पाठशाला के 45 बच्चों की फ़ार्म हाऊस पर टिफ़िन पार्टी एवं पाठशाला का आयोजन

पिछले सप्ताह *युवा संगठन के सजग पाठशाला सहयोगी श्री प्रवीण जी चौरड़िया, उज्जैन एवं श्री मोहित जी मेहता, मेघनगर* ने खाचरोद पाठशाला के बच्चों से सामायिक, प्रतिक्रमण, 25 बोल, 67 बोल, कल्याण मंदिर, भक्तामर स्तोत्र, गति-आगति आदि ज्ञानार्जन सुना। 👉🏻साथ ही *जनरल प्रश्नोत्तर, भ.महावीर स्वामी एवं पूज्य गुरूदेव* आदि के बारे में भी बच्चों से पूछकर उन्हें ईनाम प्रदान किये गये। 👉🏻 जिन बच्चों ने *अणु संस्कार परीक्षा* में भाग लिया था उन्हें उनकी प्राप्त रैंक के अनुसार *पुरस्कार प्रदान* किये गये। 👉🏻 🧨 बच्चों को पटाखें फोड़ने से 8 कर्मों के बंधन से बचने के लिये समझाया, 35 बच्चों ने समझकर वहीं पर पटाखे नहीं फोड़ने के प्रत्याख्यान लिए। 🙋‍♂️🙋‍♀️🙋‍♂️🙋‍♀️🙋‍♂️🙋‍♀️🙋‍♂️🙋‍♀️🙋‍♂️ 👩‍👩‍👦‍👦 *खाचरोद पाठशाला मे 6 बच्चों ने सामायिक एवं 5 बच्चों ने प्रतिक्रमण पूर्ण किये। अतिशीघ्र सभी बच्चों को युवा संगठन की ओर से पुरस्कार प...

संघर्ष करने वालों के व्यक्तित्व में ही आता है निखार:साध्वी नूतन प्रभाश्री जी

साध्वी जी ने बताया कि धर्म और परोपकार के कार्य दान पुण्य के कार्र्य में कभी बिलम्ब न करें Sagevaani.com/शिवपुरी। ओसवाल गली स्थित कमला भवन में प्रसिद्ध जैन साध्वी नूतन प्रभाश्री जी भगवान महावीर की अंतिम देशना उत्तराध्यन सूत्र का वाचन कर रही है। उन्होंने उत्तराध्यन सूत्र के दूसरे अध्ययन का जिक्र करते हुए बताया कि भगवान महावीर ने हमें संघर्ष करने की प्रेरणा दी। भगवान ने बताया कि जो संघर्ष से मुंह मोडता है उसका जीवन कभी चमकदार नहीं हो सकता। संघर्ष से ही इंसान के व्यक्तित्व में निखार आता है। इसके पूर्व साध्वी वंदनाश्री जी ने भगवान महावीर की स्तुति करते हुए तन मन होवे एक प्राण, महावीर गुण गाने से भजन का सुमधुर स्वर में गायन कर माहौल को भक्तिरस की गंगा से सराबोर कर दिया। धर्मसभा में बाहर से पधारे श्रावकों का जैन श्वेताम्बर श्री संघ ने सम्मान किया। साध्वी नूतन प्रभाश्री जी ने बताया कि भगवान महावीर...

चेन्नई में आध्यात्मिक कार्यक्रम व पाक्षिक पक्खी प्रतिक्रमण संग क्षमायाचना   

शरद पूर्णिमा के अवसर पर स्वाध्याय भवन, साहूकारपेट, चेन्नई में आध्यात्मिक कार्यक्रम व पाक्षिक पक्खी प्रतिक्रमण संग क्षमायाचना      आज शनिवार 28 अक्टूबर 2023 को सामायिक सूत्र पर लिखित परीक्षा की तैयारी हेतु स्वाध्यायी बन्धुवर आर वीरेन्द्रजी कांकरिया ने सामायिक के पाठों के अर्थ, 32 दोष व प्रश्नोत्तरी पर पूर्ण रूप से प्रकाश करते हुए स्वाध्याय भवन, साहूकारपेट,चेन्नई में परीक्षा का पूर्वाभ्यास करवाया | श्री जैन रत्न हितैषी श्रावक तमिलनाडु के कार्याध्यक्ष आर नरेन्द्र कांकरिया ने जानकारी देते हुए कहा कि रविवार 29 अक्टूबर 2023 को रत्न वंश के तृतीय आचार्य भगवन्त पूज्यश्री हमीरमलजी म.सा के पुण्य स्मृति दिवस के अवसर पर सामायिक सूत्र पर लिखित परीक्षा का आयोजन स्वाध्याय भवन, साहूकारपेट, चेन्नई में होगा | श्रीमती पुष्पलताजी गादिया ने नौ दिवसीय नीवी की तपस्या के प्रत्याख्यान किये | योगेश श्रीश्रीमाल ...

तप साधना ही शक्ति और सिद्धि का स्तोत्र है – देवेंद्रसागरसूरि

Sagevaani.Com/चेन्नई. श्री सुमतिवल्लभ नोर्थटाउन श्वेतांबर मूर्तिपूजक जैन संघ में नवपद के अंतिम दिन तप पद के ऊपर विवेचना करते हुए आचार्य श्री देवेंद्रसागरसूरिजी ने कहा कि दबी हुई समर्थता को उभारने के लिए तप एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है। वह कष्ट साध्य तो है पर उसके द्वारा होने वाले लाभों को देखते हुए महत्ता इतनी बड़ी है की उसे घाटे का सौदा नहीं कह सकते। व्यामशाला में किया हुआ तप पहलवान बनाता है। पाठशाला में तप करने वाला विद्वान बनता है। खेत का तपस्वी सुसम्पन्न कृषक बनता है। पत्थर को प्रतिमा, काग़ज़ को चित्र बना देने की क्षमता मूर्तिकार के, चित्रकार के तप में सन्निहित है। वे आगे बोले की जैसे लौकिक जीवन में पग-पग पर कठोर श्रम, पुरुषार्थ, साहस, मनोयोग की महत्ता स्पष्ट है। अध्यात्म क्षेत्र में भी यही तथ्य काम करता है। तपस्वी शक्तिशाली बनते हैं और उस तप साधित शक्ति के आधार पर शाश्वत सुख के भोक्ता बन...

सुखी बनने के सद आचरण को अपनाना चाहिए: जयतिलक मुनिजी

नार्थ टाउन में चातुर्मासार्थ विराजित गुरुदेव जयतिलक मुनिजी ने प्रवचन में फरमाया कि आत्मबधुओ घर के बड़ों की आज्ञा पालन करने से घर में शान्ति रहती हैl उसी प्रकार अपने गुरु की आज्ञा को तहती बोल कर स्वीकार करने से गुरु के हृदय में भी शान्ति समाधि बनी रहती है। समय – 2 पर गुरु को अपने शिष्य को निर्देश देना पड़ता है यदि उन निर्देशों को पालन कर लिया जाये तो सभी प्रकार के क्लेश शान्त हो जाते है। इंगित इशारे को समझने वाला शिष्य विनीत कहलाता है। जो इशारे को न समझे, जिसे बार बार निर्देश देना पड़े वह अविनीत शिष्य कहलाता है। जिस घर में निर्देश और आज्ञा का पालन होता है वहाँ क्लेश की सम्भावना नहीं रहती। सुखी बनने के सद आचरण को अपनाना चाहिए। आवश्यक के अनुसार, आगम सिद्धान्त के अनुसार मर्यादित वचन बोलने से हिसां की सम्भावना नहीं होती। विनीत व्यक्ति सभी का प्रिय होता है उसके अपने निकट रखना चाहते है। गुरु ...

सिर्फ झुकना विनय नहीं, मन में सरलता भी होना चाहिए: साध्वी नूतन प्रभाश्री जी

साध्वी जी ने बताया जीवन निर्माण के लिए आवश्यक है भगवान महावीर की वाणी Sahevaani.com/शिवपुरी ब्यूरो। भगवान महावीर स्वामी ने उत्तराध्यन सूत्र में बताया है कि जीवन निर्माण के लिए विनय अत्यंत आवश्यक है। लेकिन अपने स्वार्थ के लिए सिर्फ झुकना और मीठे-मीठे शब्दों का उच्चारण करना ही विनय नहीं है। विनयवान होने के लिए मन में सरलता भी आवश्यक है। विनय से अपने लौकिक और लोकोत्तर दोनों जीवन को सफल और सार्थक बनाया जा सकता है। उक्त उदगार प्रसिद्ध जैन साध्वी नूतन प्रभाश्री जी ने भगवान महावीर की अंतिम देशना का कमला भवन में वाचन करते हुए व्यक्त किए। इसके पूर्व साध्वी वंदनाश्री जी ने मै तेरे गुणगाऊ महावीर जी, गुण ही गुण हो जाऊ महावीर जी भजन का गायन किया। साध्वी नूतन प्रभाश्री जी ने जीवन को उपयोगी बनाने के लिए भगवान महावीर की वाणी को आज भी सार्थक बताया। उन्होंने कहा कि भगवान महावीर ने बताया है कि अपने कानों को ...

संतों के चारित्रिक गुणों की होती है वंदना: देवेंद्रसागरसूरिजी

नवपदों में आठवां पद चारित्र पद का आता है जिसके ऊपर प्रकाश डालते हुए बिन्नी नोर्थटाउन के श्री सुमतीवल्लभ जैन संघ में चातुर्मास हेतु विराजित पूज्य आचार्य श्री देवेंद्रसागरसूरिजी ने कहा कि आचरण से साधुता होते हुए भी समाज में किसी व्यक्ति की तब तक वंदना नहीं की जाती जब तक वह साधु का वेश धारण न कर ले। साधु के पंच महाव्रतों और उनके गुणों की वंदना की जाती है। साधू का सत्‌ चरित्र और उनका परोपकारपूर्वक आचरण वंदनीय होता है। आचार्य श्री ने कहा कि द्रव्य और भाव चारित्र की अनुमोदना करते-करते जो देह त्यागता है उसे देव गति और उससे भी उत्कृष्ट सिद्धत्व दिलाने वाली गति प्राप्त होती है। हम इस जन्म में चारित्र ‌ न भी ले पाएं तो भी परमात्मा से ऐसी प्रार्थना करें कि मेरे हृदय में ऐसी उत्कृष्ट भावना जागे और मैं भी संयम जीवन अंगीकार कर चारित्र पद की आराधना कर सकूं।जब तक मनुष्य के चरित्र में संयमता नहीं आएगी तब त...

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