Sagevaani.com/चेन्नई. बिन्नी के श्री सुमतिवल्लभ नोर्थटाउन जैन संघ में पूज्य आचार्य श्री देवेंद्रसागरसूरिजी ने धर्म प्रवचन देते हुए कहा कि जीवन बड़ा अमूल्य है। इसमें संसार का सौंदर्य भरा हुआ है, पर उसका आनंद तभी मिल सकता है जब जीवन जीने की कला को समझें। अध्यात्म जीवन जीने की कला सिखाता है, यह एक दिव्य विधा है।
यह मनुष्य को हर दुख, कष्ट, विपत्ति और चिंता से छुटकारा दिलाकर आनंद से सराबोर करता है। केवल कुछ समय के लिए नहीं, बल्कि काल की सीमाओं से परे जाकर अनंत काल के लिए। अध्यात्म आत्मा का विज्ञान है। इसे कहीं बाहर नहीं खोजना है, बल्कि इसकी कुंजी हमारे अपने ही भीतर है। अध्यात्म का अर्थ है अपने मूल स्वभाव में लौटना जहां शांति, आनंद और स्थायी समाधान है। अध्यात्म तनावग्रस्त मन को शांति प्रदान करता है। अध्यात्म का संपूर्ण जोर इस बात पर है कि व्यक्ति अपनी मूर्छा से जागे और जान ले कि वह शुद्ध और बुद्ध है। उन्होंने आगे कहा कि अध्यात्म हमारे देश की आत्मा है जो पूरे विश्व के लिए एक महत्वपूर्ण देन है। अध्यात्म जीवन का अर्थ और जीने का तरीका समझने में मदद करता है।
इसलिए यह जीवन के लिए बहुत आवश्यक है। हमारे जीवन का उद्देश्य अपनी आत्मा का मिलाप परमात्मा से कराना है। परमात्मा से मिलने पर ही परम ज्ञान, परम शांति प्राप्त होती है। अध्यात्म का अर्थ अपनी आंतरिक शांति से जुड़ाव है। आंतरिक शांति जीवन में तनाव से दूर रहना और खुश रहना सिखाती है। अध्यात्म जीवन के गहरे रहस्यों से पर्दा हटाने का काम करता है। धर्म से जुड़ाव रखें या ना रखें, अध्यात्म से जुड़ाव रखना ही चाहिए। भारत अध्यात्म की प्रयोग भूमि है, आज भी दुनिया भर से अनेक लोग आध्यात्मिक शांति की खोज में भारत आते हैं और कई तो यहीं के होकर रह जाते हैं। अध्यात्म मन का विस्तार है जो व्यक्ति को मानवता से जोड़ता है और संपूर्ण विश्व को वसुधैव कुटुंबकम के सूत्र में बांधता है ।