Author: saadhak

दिपावली पर्व एवं भ महावीर निवाणोत्सव के उपलक्ष में 237 वां अनाज खाद्य सामग्री एवं वस्त्र वितरण का कार्यक्रम दिनांक 26 को

वर्धमान साधार्मिक सेवा एवं जीव दया समिति की ओर से दिपावली पर्व एवं भ महावीर निवाणोत्सव के उपलक्ष में 237 वां अनाज खाद्य सामग्री एवं वस्त्र वितरण का कार्यक्रम दिनांक 26//10// 2024 को ए एम के एम श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन महासंघ जैन संघ श्री युवाचार्य चातुर्मास स्थल के प्रांगण में प्रज्ञा महर्षि युवाचार्य पू श्री महेन्द्र ॠषि जी म सा आदि ठाणा, आनंद श्रमणी रत्ना पू श्री कंचन कंवर जी म सा आदि ठाणा के...

करुणा इंटरनेशनल के अध्यक्ष श्री शांतिलाल जैन एवं महामंत्री सज्जन राज सुराणा बने

 दिनांक 26 अक्टूबर 2024 को नुगमबाक्कम् स्थित पॉम ग्रोव होटल में करुणा अंतरराष्ट्रीय का वर्ष 2024-26 के पदाधिकारियों का पदारोहण समारोह सोरेत्साह सम्पन्न हुआ । जिसमें करुणा इंटरनेशनल के पदाधिकारियों, संरक्षकों, गणमान्य महानुभावों, उत्साही कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री अरुणकुमार जैन थे जो इंटलेक्ट डिजाइन अरेना कम्पनी के संस्थापक एवं मालिक है। डॉ. भद्रेशकुमार जैन के करुणा गीत...

माणव उत्तराध्ययन बोल-प. पू. हर्षप्रज्ञाजी म. सा.

Sagevaani.com /जालना: हे माणव तू जन्माला आला आहेस तर श्रीमद् उत्तराध्ययन बोल! तुम्ही- आम्ही खरोखरच धन्यवान आहोत, पुण्यवान आहोत की, जी प्रभूंची अंतीम वाणी ऐकण्याचं भाग्य तुम्हा- आम्हाला लाभले आहे, असा हितोपदेश साध्वी प. पू. हर्षप्रज्ञाजी म. सा. यांनी येथे बोलतांना दिला. तपोधाम परिसरातील गुरु गणेश सभा मंडपात चार्तुमासानिमित्त आयोजित प्रवचनात त्या बोलत होत्या. पुढे बोलतांना साध्वी प. पू. हर्षप्रज्ञाज...

संसार में वही फंसेगा जो आसक्ति में फंसा हुआ है- युवाचार्य महेंद्र ऋषि

 एएमकेएम में उत्तराध्ययन सूत्र के 25 व 26वें अध्यायों का हुआ स्वाध्याय एएमकेएम में चातुर्मासार्थ विराजित श्रमण संघीय युवाचार्य महेंद्र ऋषिजी ने उत्तराध्ययन सूत्र के 25वें यज्ञीय अध्याय की विवेचना करते हुए कहा कि भगवान महावीर ने चारों आघाती कर्म नष्ट किए और सिद्ध बुद्ध हो गए। यदि हमें भी कर्मों की निर्जरा करनी है तो पाप से बचना पड़ेगा। इस अध्याय में एक सुंदर प्रसंग है। वाराणसी नगरी में दो सगे भाई ज...

पाप के अठारह प्रकार हैं

क्रमांक – 35 . *तत्त्व – दर्शन*  *🔹 तत्त्व वर्गीकरण या तत्त्व के प्रकार* *👉जैन दर्शन में नवतत्त्व माने गये हैं – जीव, अजीव, पुण्य, पाप, आस्रव, संवर, निर्जरा, बन्ध, मोक्ष।* *🔅 पाप तत्त्व* *पाप के अठारह प्रकार हैं-* *09. लोभ : पदार्थों की लालसा या लालच प्रवृत्ति लोभ पाप है।* *10. राग : प्रियता और रागात्मक प्रवृत्ति राग पाप है। राग व्यक्त और अव्यक्त दोनों प्रकार का है। रागात्मक प्रव...

स्वाध्याय का सिंचन नकारात्मक तत्वों को दूर करता है- युवाचार्य महेंद्र ऋषि

एएमकेएम में उत्तराध्ययन सूत्र के 23वें और 24वें अध्याय का हुआ स्वाध्याय एएमकेएम जैन मेमोरियल सेंटर में चातुर्मासार्थ विराजित श्रमण संघीय युवाचार्य महेंद्र ऋषिजी ने रविवार को उत्तराध्ययन सूत्र की 23वें अध्ययन केशी गौतमीय की विवेचना करते हुए कहा कि हमने पिछले अध्यायों में देखा कि उत्तराध्ययन सूत्र में अनेकों संवाद दिए गए। हर जगह ऐसी चर्चाएं आती है, जिनके माध्यम से हम गूढ़ रहस्यों को समझ सकें। ऐसा ही...

“समाज-भुषण” “ समाज- रत्न” श्रीमान विजयकांत जी कोठारी का “ सहस्र- चंद्र दर्शन” संप्पन्न

“समाज-भुषण” “ समाज- रत्न” श्रीमान विजयकांत जी कोठारी का “ सहस्र- चंद्र दर्शन” संप्पन्न! गुरु भगवंतो का पाया आशिर्वाद! पुनाः महाराष्ट्र गौरव, खान्देश भुषण पु. गौतम मुनीजी म. सा. के पावन सानिध्य मे विजयकांतजी को आज विविध सामाजिक, राजनितीक संस्थाओं द्वारा नवाजा गया! इस मंगलमय पावन अवसरपर विजयकांतजी का गुण गौरव करते समय उनके अविरत, अविश्रांत परिश्रम की, लगन, कार्यक्षमता, सकारत्मकता, संकल्प पुर्ति, निद...

उत्तराध्ययन सुत्र समुद्रासारखं असलं तरीही-प. पू. हर्षप्रज्ञाजी म. सा.

Sagevaani.com /जालना: श्रीमद् उत्तराध्ययन सुत्र हे समुद्रासारखं असलं तरीही प्रभूंनी आमच्यासाठी त्यात लहान- लहान सुत्राचा समावेश केला आहे. जो की आपल्यासाठी आहे. समुद्राचं पाणी आपण पूर्णपणे पीऊ शकत नाहीत, परंतू घड्यात असलेलं पाणी ग्लासाने थोडे- थोडे पीऊ शकतो, अगदीत्याच प्रमाणे उत्तराध्यन सुत्राचेही आहे, असा हितोपदेश साध्वी प. पू. हर्षप्रज्ञाजी म. सा. यांनी येथे बोलतांना दिला. तपोधाम परिसरातील गुरु ग...

बड़े दोषों का कारण है छोटे दोष

*☀️प्रवचन वैभव☀️*   *🪷 सद् उपदेशक:🪷* *शासननिष्ठ सद्गुरु* *सूरि जयन्त सेन कृपाप्राप्त,* श्रुत साधक क्षमाश्रमण, मुनि श्रीवैभवरत्नविजयजी म.सा. ✒️ 9️⃣8️⃣ 🔊 *_486)_* बड़े दोषों का कारण है छोटे दोष.! *_487)_* ज्ञानी दुःख के कारणों के प्रति घृणा द्वेष या क्रोध नही रखते.! *_488)_* कदाग्रह सुकुन छीन लेता है.! *_489)_* पाप क्रिया से अधिक घातक है पाप की रुचि.! *_490)_* जो चीज व्यर्थ है,नश्वर है उसकी प्र...

जब तक भोगों की अधीनता नहीं छोड़ते, अनाथता सबके लिए है- युवाचार्य महेंद्र ऋषि

एएमकेएम में उत्तराध्ययन सूत्र का स्वाध्याय एएमकेएम जैन मेमोरियल सेंटर में चातुर्मासार्थ विराजित श्रमण संघीय युवाचार्य महेंद्र ऋषिजी ने उत्तराध्ययन सूत्र के 20वें महानिर्ग्रंथीय अध्याय की विवेचना करते हुए कहा कि यह एक तरह से सभी के मानसिक, आत्मिक स्वास्थ्य को निरंतर करने वाला एक रसायन है। यह रसायन आप अलग-अलग भावों में ले सकते हैं। जन्म की बीमारी, उपाधि- व्याधि मिटाना चाहते हैं तो उसके लिए यह रसायन ...

संसारापेक्षाही दिक्षा घेण्यात आनंद-प. पू. हर्षप्रज्ञाजी म. सा.

Sagevaani.com /जालना: संसार हा क्षणभंगुर आहे, त्यात सर्वत्र दु:खच दु:ख आहे. असे असतांनाही मनुष्य त्यालाच का चिकटून बसला आहे, हे कळत नाही. दिक्षा घेणे हे कधीही चांगले आहे. यात दु:ख नसून सुखाची अनुभूती आल्याशिवाय राहत नाही, म्हणून दिक्षा ही केव्हाही चांगलीच आहे, असा हितोपदेश साध्वी प. पू. हर्षप्रज्ञाजी म. सा. यांनी येथे बोलतांना दिला. तपोधाम परिसरातील गुरु गणेश सभा मंडपात चार्तुमासानिमित्त आयोजित प्...

श्री हरिभद्राचार्यजी ने भावपूजा को सफल बनाने 33 कर्तव्यों का विधान किया है

*विंशत्यधिकं शतम्* *📚💎📚श्रुतप्रसादम्* 🪔 *तत्त्वचिंतन:* *मार्गस्थ कृपानिधि* *सूरि जयन्तसेन चरणरज* मुनि श्रीवैभवरत्नविजयजी म.सा.   9️⃣7️⃣ 📜 श्री हरिभद्राचार्यजी ने भावपूजा को सफल बनाने 33 कर्तव्यों का विधान किया है.. ⚡ माता पिता विद्यागुरु, धर्मगुरु आदि गुरुजनों के प्रति विनय बहुमान भाव रखना.! ⚡ हेय के त्याग में उपादेय का आचरण के यथाशक्ति प्रवृत्ति अवश्य करें.! ⚡ कुछ बोलने से पहले कार्य करने से...

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