1) कागज – जलती हुये अक्षर से : ज्ञानावरणीय कर्म 2)जीवित प्राणियों का अंग विच्छेदन से : दर्शनावरणीय कर्म 3) प्राणियों को कष्ट पीड़ा से : अशात वेदनिय कर्म 4) पटाखे फोड़ने का आनंद लेने से : मोहनिया कर्मा 5)पटाखों से जीवो का विनाश होने से : तिर्यंच के नरकायु 6) प्राणि जीवो के शरीर के नाश से : अशुभ नाम कर्म ...
क्रमांक – 37 . *तत्त्व – दर्शन* *🔹 तत्त्व वर्गीकरण या तत्त्व के प्रकार* *👉जैन दर्शन में नवतत्त्व माने गये हैं – जीव, अजीव, पुण्य, पाप, आस्रव, संवर, निर्जरा, बन्ध, मोक्ष।* *🔅 आश्रव* *👉 जिस परिणाम और प्रवृत्ति से आत्मा में कर्मों का आगमन होता है, उसे आश्रव कहा जाता है। जिस प्रकार मकान के दरवाजा होता है, तालाब के नाला होता है और नौका के छिद्र होता है, उसी प्रकार जीव के आश्रव होता ह...
क्रमांक – 36 . *तत्त्व – दर्शन* *🔹 तत्त्व वर्गीकरण या तत्त्व के प्रकार* *👉जैन दर्शन में नवतत्त्व माने गये हैं – जीव, अजीव, पुण्य, पाप, आस्रव, संवर, निर्जरा, बन्ध, मोक्ष।* *🔅 पाप तत्त्व* *पाप के अठारह प्रकार हैं-* *17. माया-मृषा : मायासहित झूठ बोलना माया-मृषा पाप है। इस पापमूलक प्रवृत्ति में माया और मृषा दोनों का संयोग है। क्रोध-मृषा, मान-मृषा और लोभ मृषा पाप को इसी के अन्तर्गत म...