Author: saadhak

पटाखे जलाने से आठ प्रकार के कर्म बनते हैं

    1) कागज – जलती हुये अक्षर से   : ज्ञानावरणीय कर्म   2)जीवित प्राणियों का अंग विच्छेदन से   : दर्शनावरणीय कर्म   3) प्राणियों को कष्ट पीड़ा से   : अशात वेदनिय कर्म   4) पटाखे फोड़ने का आनंद लेने से   : मोहनिया कर्मा   5)पटाखों से जीवो का विनाश होने से   : तिर्यंच के नरकायु   6) प्राणि जीवो के शरीर के नाश से   : अशुभ नाम कर्म ...

आकुर्डी स्थानक भवन में पॉंच दिवसीय दिपावली विशेष कार्यक्रम का आयोजन

आकुर्डी स्थानक भवन में पॉंच दिवसीय दिपावली विशेष कार्यक्रम का आयोजन! दिपोत्सव आत्म की पवित्रता से मनाना है! आत्म की चेतना जगानी है – डॉ. राज श्री जी ! महासाध्वी डॉ. राज श्री जी म.सा. डॉ. मेघाश्री जी म. सा. साध्वी समिक्षा श्री जी म.सा. एवं साध्वी जिनाज्ञा श्री जी म.सा. के पावन सानिध्य में उत्तराध्ययन सुत्र का वाचन, पठन बड़ी आस्था के साथ जारी है! आज 30 वे आध्याय तक का वाचन हुआ! विविध द्रुष्टां...

अंहकारी आणि घमेंडखोर व्यक्ती आयुष्यात कधीच पुढे जात नाही-प. पू. हर्षप्रज्ञाजी म. सा.

Sagevaani.com /जालना: अंहकारी आणि घमेंडखोर व्यक्ती आयुष्यात कधीच पुढे जात नाही, त्यासाठी मनुष्याने नेहमीच अहंकार आणि घमेंड बाजूला ठेवली पाहिजे, असा हितोपदेश साध्वी प. पू. हर्षप्रज्ञाजी म. सा. यांनी येथे बोलतांना दिला. तपोधाम परिसरातील गुरु गणेश सभा मंडपात चार्तुमासानिमित्त आयोजित प्रवचनात त्या बोलत होत्या. पुढे बोलतांना साध्वी प. पू. हर्षप्रज्ञाजी म. सा. म्हणाल्या की, उत्तराध्यायन सुत्र हे उगीच ना...

श्रावक वही, जो सच्ची श्रद्धा को अपनाए: मुनि हितेंद्र ऋषि

एएमकेएम में उत्तराध्ययन सूत्र का स्वाध्याय एएमकेएम जैन मेमोरियल सेंटर में चातुर्मासार्थ विराजित श्रमण संघीय युवाचार्य महेंद्र ऋषिजी के शिष्य हितमित भाषी मुनि हितेंद्र ऋषिजी ने उत्तराध्ययन सूत्र के 31वें और 32वें अध्याय का स्वाध्याय करते हुए कहा कि प्रभु महावीर की अंतिम देशना का उत्तराध्ययन सूत्र के माध्यम से हम स्वाध्याय कर रहे हैं। विचार कीजिए पूर्वधर आचार्यों ने वह लेखन करने का पुरुषार्थ नहीं कि...

धुंआ मुक्त दीपावली मनाए

राजस्थान पत्रिका, एक्सनोरा इंटरनेशनल द्वारा धुंआ मुक्त दीपावली अभियान एक सप्ताह से कई स्कूल, कॉलेज, सार्वजनिक जगह पार्क, धार्मिक पाठशाला आदि जगह पर हजारों विद्यार्थियों को विशेष जानकारी देते हुए सभी विद्यार्थियों को धुंआ मुक्त दीपावली मनाने की प्रतिज्ञा दीl इस मौके पर मुख्य अतिथि डॉक्टर के मुथू कुमार प्रोग्राम ऑफिसर डिपार्टमेंट ऑफ एनवायरमेंट एंड क्लाइमेट चेंज गवेनमेंट ऑफ तमिलनाडु ने धुंआ मुक्त दीप...

आत्मा के बिना  अन्य बाह्य पदार्थो के  स्वरूप की अनुभूति असंभव हैं

*विंशत्यधिकं शतम्* *📚💎📚श्रुतप्रसादम्* 🪔 *तत्त्वचिंतन:* *मार्गस्थ कृपानिधि* *सूरि जयन्तसेन चरणरज* मुनि श्रीवैभवरत्नविजयजी म.सा.   1️⃣0️⃣0️⃣ 🕉️ 🧘‍♂️ आत्मा के बिना अन्य बाह्य पदार्थो के स्वरूप की अनुभूति असंभव हैं.! 😊 एक बार आत्म स्वरूप में रुचि लगने के बाद उसका स्वरूप जानकर बाह्य पदार्थो की आत्मा से भिन्नता का बोध हो जाने से अन्य पदार्थ निरर्थक लगते हैं 🪔 आत्मज्ञानी को अन्य पदार्थो का ज्ञान भी ...

जिस परिणाम और प्रवृत्ति से आत्मा में कर्मों का आगमन होता है, उसे आश्रव कहा जाता है

क्रमांक – 37 . *तत्त्व – दर्शन*  *🔹 तत्त्व वर्गीकरण या तत्त्व के प्रकार* *👉जैन दर्शन में नवतत्त्व माने गये हैं – जीव, अजीव, पुण्य, पाप, आस्रव, संवर, निर्जरा, बन्ध, मोक्ष।* *🔅 आश्रव* *👉 जिस परिणाम और प्रवृत्ति से आत्मा में कर्मों का आगमन होता है, उसे आश्रव कहा जाता है। जिस प्रकार मकान के दरवाजा होता है, तालाब के नाला होता है और नौका के छिद्र होता है, उसी प्रकार जीव के आश्रव होता ह...

तेरापंथ जैन विद्यालय में अणुव्रत डिजिटल डिटॉक्स कार्यक्रम का आयोजन किया गया

Sagevaani.com /चेन्नई: अणुव्रत विश्व भारती सोसायटी और अणुव्रत समिति, चेन्नई के सहयोग से तेरापंथ एजुकेशनल एंड मेडिकल ट्रस्ट ने 29 अक्टूबर 2024 को तेरापंथ जैन विद्यालय में “अणुव्रत डिजिटल डिटॉक्स” कार्यक्रम का आयोजन किया।   कार्यक्रम में सातवीं से नौवीं कक्षा तक के छात्रों को मुनि श्री हेमंतकुमारजी ने संबोधित किया और उन्हें डिजिटल डिटॉक्स के बारे में विस्तार से बताया। मुनिश्री ने छा...

अधूरे मन से किया गया काम व्यक्ति को लक्ष्य तक नहीं पहुंचाता – युवाचार्य महेंद्र ऋषि

श्रमण संघीय आचार्य देवेन्द्र मुनि का हुआ गुणानुवाद एएमकेएम जैन मेमोरियल सेंटर में चातुर्मासार्थ विराजित श्रमण संघीय युवाचार्य महेंद्र ऋषिजी के सान्निध्य में उत्तराध्ययन सूत्र का स्वाध्याय हुआ। मोक्ष- मार्ग- गति अध्याय की विवेचना करते हुए उन्होंने कहा कि हमने यज्ञ अध्ययन में वास्तविक, आध्यात्मिक और साधु की समाचारी के स्वरूप को समझा। जो- जो साधन है, उनके लिए सुंदर व्यवस्था इस अध्ययन में की गई। इसका ...

समस्त  जीवो के  कल्याण में प्रत्यक्ष या परोक्ष श्रीअरिहंत  प्रभु का ही प्रभाव हैं

*☀️प्रवचन वैभव☀️*   *🪷 सद् उपदेशक:🪷* *शासननिष्ठ सद्गुरु* *सूरि जयन्त सेन कृपाप्राप्त,* श्रुत साधक क्षमाश्रमण, मुनि श्रीवैभवरत्नविजयजी म.सा. ✒️ 9️⃣9️⃣ ⚡ *_491)_* समस्त जीवो के कल्याण में प्रत्यक्ष या परोक्ष श्रीअरिहंत प्रभु का ही प्रभाव हैं.! *_492)_* विरती सुरक्षा कवच हैं.! विरतीवंत को दुआ ही मिलती हैं.! *_493)_* किसी के सुख में निमित्त बनने में बड़ा आनंद है.! *_494)_* जो अपने विकास में ध्यान...

जीवन धन्य बनालो-प. पू. हर्षप्रज्ञाजी म. सा.

Sagevaani.com /जालना: प्रवचनाच्या प्रारंभीच जीवन धन्य बनालो, हे गीत गाऊन त्यांनी आपल्या प्रवचनास प्रारंभ केला. त्या म्हणाल्या की, मानवाने जन्माला आल्यानंतर आपले जीवन कशाने धन्य बनेल, हे शोधले पाहिजे, परंतू दुर्देवाने तो हे शोधू शकत नाही, अशाने कसे त्याचे जीवन धन्य बनेल, असा हितोपदेश साध्वी प. पू. हर्षप्रज्ञाजी म. सा. यांनी येथे बोलतांना दिला. तपोधाम परिसरातील गुरु गणेश सभा मंडपात चार्तुमासानिमित्त...

पाप के अठारह प्रकार हैं

क्रमांक – 36 . *तत्त्व – दर्शन*  *🔹 तत्त्व वर्गीकरण या तत्त्व के प्रकार* *👉जैन दर्शन में नवतत्त्व माने गये हैं – जीव, अजीव, पुण्य, पाप, आस्रव, संवर, निर्जरा, बन्ध, मोक्ष।* *🔅 पाप तत्त्व* *पाप के अठारह प्रकार हैं-* *17. माया-मृषा : मायासहित झूठ बोलना माया-मृषा पाप है। इस पापमूलक प्रवृत्ति में माया और मृषा दोनों का संयोग है। क्रोध-मृषा, मान-मृषा और लोभ मृषा पाप को इसी के अन्तर्गत म...

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