Author: saadhak

भाऊ बीजेला अनन्य साधारण महत्व-साध्वी प. पू. सत्यसाधनाजी म. सा.

Sagevaani.com /जालना: आपल्याला प्रत्येकाला भगवंतांनी दोन डोळे, दोन हात दिले आहेत, तसेच भाऊबीजेचे आहे. भाऊ बीजेला अनन्य साधारण महत्व आहे. भाऊ आणि बहिणींचं नातं हे नेहमीसाठीच अतूट असते, तसंच नातं अांपणही ठेवायला हवं, असा हितोपदेश साध्वी प. प. सत्यसाधनाजी म. सा. यांनी येथे बोलतांना दिला. तपोधाम परिसरातील गुरु गणेश सभा मंडपात चार्तुमासानिमित्त आयोजित प्रवचनात त्या बोलत होत्या. यावेळी पुढे बोलतांना साध...

श्री जैन रत्न हितैषी श्रावक संघ तमिलनाडु ने उत्तराध्य्यन सूत्र सप्ताह मनाया

दिनांक : 2 नवम्बर 2024 शनिवार श्री जैन रत्न हितैषी श्रावक संघ तमिलनाडु ने उत्तराध्य्यन सूत्र सप्ताह मनाया | भगवान महावीर की अन्तिम देशना उतराध्ययन सूत्र के मूल वांचन व विवेचन वरिष्ठ स्वाध्यायी आर वीरेन्द्र कांकरिया ने किया | श्री जैन रत्न हितैषी श्रावक संघ के तत्वावधान मे स्वाध्याय भवन,साहूकारपेट चेन्नई मे मनाये गए उत्तराध्य्यन सूत्र सप्ताह मे अनेक श्रदालु श्रावक-श्राविकाओं द्वारा सामायिक परिवेश म...

आज्ञा ही परम मंगल है

*☀️प्रवचन वैभव☀️*   *🪷 सद् उपदेशक:🪷* *शासननिष्ठ सद्गुरु* *सूरि जयन्त सेन कृपाप्राप्त,* श्रुत साधक क्षमाश्रमण, मुनि श्रीवैभवरत्नविजयजी म.सा. ✒️ 1️⃣0️⃣3️⃣ 🪔 *_511)_* आज्ञा ही परम मंगल है.! *_512)_* अपने गुण वैभव को जानने मानने से उस पर श्रद्धा करने से गुण वैभव प्रगट होता है.! *_513)_* विचारों से व्यवहार का निर्माण होता हैं.! *_514)_* मान सम्मान, लोक संज्ञा को पुष्ट करने में समय बरबाद करना अधःपत...

जीव का अजीव से अलग करना मोक्ष की प्राप्ति के लिए आवश्यक है- युवाचार्य महेंद्र ऋषि

एएमकेएम में गौतम रास और उत्तराध्ययन सूत्र का हुआ स्वाध्याय एएमकेएम जैन मेमोरियल सेंटर में चातुर्मासार्थ विराजित श्रमण संघीय युवाचार्य महेंद्र ऋषिजी के सान्निध्य में शनिवार प्रातः गौतम रास और उत्तराध्ययन सूत्र के 36वें अध्ययन जीव-अजीव विभक्ति का स्वाध्याय हुआ। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। युवाचार्यश्री ने इस अवसर पर कहा कि नाम के अनुरूप इस अध्ययन में जीव और अजीव को अलग-अलग कर पूर...

भगवान महावीरांचा निर्वाण कल्याणक दिन संघातर्फे साजरा

Sagevaani.com /जालना: भगवान महावीरांचा निर्वाण कल्याणक दिन जालना येथील श्री वर्धमान जैन श्रावक संघाच्यावतीने उत्साहात आणि त्यांना यावेळी भावपूर्ण श्रध्दांजली अर्पण करण्यात आली. तपोधाम परिसरातील गुरु गणेश सभा मंडपात चार्तुमासानिमित्त आयोजित प्रवचनादरम्यान जप करण्यात आला. हा जप यावेळी विचारपीठावर संथारा प्रेरिका उपप्रवर्तीनी प. पू. सत्यसाधनाजी म. सा; साध्वी अर्हतज्योतीजी म. सा; साध्वी प.पू. हर्षप्रज...

समर्पित भाव से धर्म आराधक बन जीवन सार्थक बनाना है और सम्यकत्व को प्राप्त करना है- डॉ. राज श्री जी म.सा.

समर्पित भाव से धर्म आराधक बन जीवन सार्थक बनाना है और सम्यकत्व को प्राप्त करना है- डॉ. राज श्री जी म.सा. आज आकुर्डी स्थानक भवन में डॉ. मेघाश्री जी, साध्वी समिक्षाश्री जी एवं साध्वी जिनाज्ञा श्री जी ने उत्तराध्ययन सुत्र के 36 वे अध्याय का पठन किया और करवाया ! प्रतिपदा के पावन अवसरपर साध्वी मंडल ने सभी उपस्थित धर्मप्रेमियोंको नुतन वर्ष की शुभकामना दे सभोके धर्मआराधना, स्वास्थ्य की मंगलकामना की ! भगवा...

गुरु के आज्ञा में रहना ही धर्म है

गुरु के आज्ञा में रहना ही धर्म है! समयमात्र का हमे प्रमाद नहीं करना चाहिएँ! – डॉ. राज श्री जी म.सा. आकुर्डी स्थानक भवनमें आज उत्तराध्ययन सूत्रक् 35 वे अध्याय तक का पठन साध्वी जिनाज्ञा श्री जी ने किया!अपने उद् बोधन मे उन्होंने बताया समय का मुल्य हमें जानना है! चार संज्ञाये विस्तार से समझाई! मूल्यांकण, मूल्यवान, मुल्याहिन, मुल्याधिन! जब सम्यकत्व की प्राप्ति होगी मनुष्य जीवन सार्थक होगा! अपने उ...

कर्म के साथ पुरुषार्थ हो तो कहीं भटकने की जरूरत नहीं- मुनि हितेंद्र ऋषि

एएमकेएम में उत्तराध्ययन सूत्र का स्वाध्याय एएमकेएम जैन मेमोरियल सेंटर में चातुर्मासार्थ विराजित श्रमण संघीय युवाचार्य महेंद्र ऋषिजी के शिष्य मुनि हितेंद्र ऋषिजी ने शुक्रवार को उत्तराध्ययन सूत्र की विवेचना करते हुए बताया कि प्रभु महावीर ने अपने प्रधान शिष्य गौतम अणगार से कहा कि तुम देव शर्मा को प्रतिबोध देकर आओ। उन्होंने कहा गौतमस्वामी का विनय कैसा था। जहां विनय नहीं, वहां सब कुछ जीरो है। आपमें बाक...

कर्म उदयाला यालाच पाहिजेत-प. पू. हर्षप्रज्ञाजी म. सा.

Sagevaani.com /जालना: जप, तप, आणि आराधना जेव्हा आपण करत असतो, त्यावेळी आपले कर्म बांधिले जातात, त्यासाठी आपला भाव सुध्दा महत्वाचा आहे. भावच नसेल तर आपले कर्म सुध्दा बांधिले जात नाही, म्हणुन प्रत्येकाने कर्म करतांना भाव चांगलाच ठेवा, असा हितोपदेश साध्वी हर्षप्रज्ञाजी म. सा. यांनी येथे बोलतांना दिला. तपोधाम परिसरातील गुरु गणेश सभा मंडपात चार्तुमासानिमित्त आयोजित प्रवचनात त्या बोलत होत्या. पुढे बोलता...

जेंव्हा आनंद हा आत्म्यापासून मिळतो तेव्हा…-प. पू. हर्षप्रज्ञाजी म. सा.

Sagevaani.com /जालना: जेव्हा मनुष्याला दु:ख येते, तेव्हा तो घायाळ होतो, विचलित होऊन जातो, परंतू त्याच्या जीवनात जेव्हा आनंद येतो तेव्हा मात्र तो निराशा झटकून कामाला लागतो. परंतू जेव्हा हाच आनंद आत्म्यापासून येतो तेंव्हा तो ना आनंदी होतो ना दु:खी! अशा आनंदासाठीच आपणाला हवाा आहे तो आत्म्ंयापासून मिळालेला आनंद, असा हितोपदेश साध्वी हर्षप्रज्ञाजी म. सा. यांनी येथे बोलतांना दिला. तपोधाम परिसरातील गुरु ग...

नमोथ्थुणं” जाप सभी समस्याओं का निराकरण करती है

“ नमोथ्थुणं” जाप की आराधना सभी समस्याओं का निराकरण करती है! श्रध्दा एवं लगन से की आराधना प्रभु दर्शन देती है! -महासाध्वी डॉ. राज श्री जी म. सा. आज आकु्र्डी स्थानक भवन में उत्तराध्ययन सुत्र के 33वे अध्याय तक का पठन साध्वी जिना ज्ञा श्री जी द्वारा हुआ! तीन दिवसीय जप आराधना में आज “ नमोथ्थुणं” का सामुहिक जाप चारो दिशाओं तरफ़ मॅंह कर के किया गया ! सभी समस्याओं का निराकरण इस जापके माध्यम से होता है! आज...

विनय   साधना का  मेरूशिखर हैं

*☀️प्रवचन वैभव☀️*   *🪷 सद् उपदेशक:🪷* *शासननिष्ठ सद्गुरु* *सूरि जयन्त सेन कृपाप्राप्त,* श्रुत साधक क्षमाश्रमण, मुनि श्रीवैभवरत्नविजयजी म.सा. ✒️ 1️⃣0️⃣1️⃣ ⏰ *_501)_* विनय साधना का मेरूशिखर हैं.! *_502)_* दुर्गति से घातक दुर्मति है..! *_503)_* दुख मुक्ति, सुख प्राप्ति तो अतिरिक्त मुनाफा है, धर्म का फल तो स्वभाव में स्थिरता हैं.! *_504)_* अपने स्वार्थ में डूबा व्यक्ति किसी का भला नहीं कर सकता.! *...

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