Author: saadhak

चारित्रमोह के कारण यह अव्रत आस्रव होता है

क्रमांक – 40 . *तत्त्व – दर्शन*  *🔹 तत्त्व वर्गीकरण या तत्त्व के प्रकार* *👉जैन दर्शन में नवतत्त्व माने गये हैं – जीव, अजीव, पुण्य, पाप, आस्रव, संवर, निर्जरा, बन्ध, मोक्ष।* *🔅 आश्रव* *यहां आश्रव के बीस भेदों का विवेचन किया जा रहा है :* *✨2. अव्रत आस्रव* *👉 अप्रत्याख्यानमविरतिः। चारित्रमोह के कारण यह अव्रत आस्रव होता है। चारित्र मोह जब तक सक्रिय रहता है तब तक अंश रूप में या पूर्ण र...

तर आपल्या आत्म्याचं कल्याण कसं होईल-प.पू.गुरुछायाजी म.सा.

Sagevaani.com /जालना: आपल्या आत्म्याचं कल्याण करायचं असेल तर प्रभूंची आराधना ही प्रत्येकाने केलीच पाहिजे,त्याशिवाय आपल्याला आत्म्याचं कल्यण करता येणार नाही,असा हितोपदेश साध्वी प.पू.गुरुछायाजी म.सा. यांनी येथे बोलतांना दिला. तपोधाम परिसरातील गुरु गणेश सभा मंडपात चार्तुमासानिमित्त आयोजित प्रवचनात त्या बोलत होत्या. यावेळी विचारपीठावर संथारा प्रेरिका उपप्रवर्तीनी प. पू. सत्यसाधनाजी म. सा. व अन्य काही ...

मंगल वीरता, शौर्य और साहस का प्रतीक है – युवाचार्य महेंद्र ऋषि

एएमकेएम में आठ वार की प्रवचन माला गतिमान एएमकेएम जैन मेमोरियल सेंटर में चातुर्मासार्थ विराजित श्रमण संघीय युवाचार्य महेंद्र ऋषिजी ने आठ वार पर प्रवचन देते हुए कहा कि सप्ताह का अर्थ है सात दिन। वार का संदर्भ प्रहर से है। प्रत्येक वार का अपना महत्व है और उसके साथ जुड़े हुए नाम का भी महत्व है। अनुभव से ऐसी धारणाएं आती है। वह महापुरुषों के अनुभव से आती है। मंगलवार की चर्चा करें तो इसमें मंगल है। काॅस्...

प्रत्येक वस्तु में  अनेक धर्म निहीत हैं

*विंशत्यधिकं शतम्* *📚💎📚श्रुतप्रसादम्* 🪔 *तत्त्वचिंतन:* *मार्गस्थ कृपानिधि* *सूरि जयन्तसेन चरणरज* मुनि श्रीवैभवरत्नविजयजी म.सा.   1️⃣0️⃣6️⃣ 🌅 प्रत्येक वस्तु में अनेक धर्म निहीत हैं.. समस्त धर्मो के बोध से पदार्थ का पूर्णबोध होता हैं, पूर्णबोध को प्रमाण कहते है.! ⚡ नय अर्थात वस्तु के एक अंश को जानना अन्य अंश का निषेध न करना.! 🤔 नय हमें वक्ता के आशय एवं संदर्भ को समझने की रीति सिखाता है.! 🪔 *प्र...

अहिंसा साईकल रॅली

अहिंसा साईकल रॅली के आयोजको ने लिए महासाध्वी डॉ. राज श्री म.सा. आदि ठाणा के मंगल आशिर्वाद! भगवान महावीर स्वामीजी का संदेश “ जिओ और जीने दो” जन जन तक पहुँचाने एवं अर्हम विज्जा प्रणेता उपाध्याय प्रवर पु. प्रविण ऋषिजी म. सा. के दर्शन, कर्नाटक गज केशरी, खद्दरधारी गुरुदेव पु. गणेशमलजी म.सा. के समाधि स्थल के दर्शनार्थ तीन दिवसीय चिंचवड़ से जालना(325 कि.मी.) की अहिंसा सायकल रॅली का आयोजन महावीर अॅडव्हेन्...

एक समय में बंधे  कर्मो की निर्जरा हेतु

*विंशत्यधिकं शतम्* *📚💎📚श्रुतप्रसादम्* 🪔 *तत्त्वचिंतन:* *मार्गस्थ कृपानिधि* *सूरि जयन्तसेन चरणरज* मुनि श्रीवैभवरत्नविजयजी म.सा.   1️⃣0️⃣5️⃣ 🌅 एक समय में बंधे कर्मो की निर्जरा हेतु *अपार ऊर्जा की* *आवश्यकता रहती है..* 🧘‍♂️ अंतर्मुहूर्त मात्र की क्षपक श्रेणीमें अनंत भवों के संचित कर्म भस्मीभूत हो जाते हैं.! ❌ विषय भोग में लिप्त व्यक्ति कभी भी भव वन को पार नहीं कर सकते क्योंकि 🔥 उनकी समस्त ऊर्जा ...

बोलो मगर प्यार से-साध्वी प. पू. सत्यसाधनाजी म. सा.

Sagevaani.com /जालना: एक ट्रक चालला होता, त्याच्या पाठीमागे लिहीले होते, बुरी नजरवाले तेरा मुंह काला, तर दुसर्‍या ट्रकच्या पाठीमागे लिहिले होते, बोलो मगर प्यार से…. प्यार बोले तो कलह होने का कामही नही! परंतू आज काल आम्ही कलह करण्यात फार गुरफटून गेलो आहोत. भांडण होण्याला काही तरी ठोस कारण हवे, परंतू भांडण होण्यालाही कारण लागत नाही, असा हितोपदेश साध्वी प. प. सत्यसाधनाजी म. सा. यांनी येथे बोलता...

गुरु अमर संयम वर्ष के अंतर्गत सम्मान समारोह 6 को

Sagevaani.com /बेंगलुरु। श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ, श्री राजाजी नगर के तत्वावधान में 6 नवंबर, ज्ञान पंचमी को विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य करने वालों का सम्मान समारोह उपप्रवर्तक पंकजमुनि और अमर-शिष्य डॉ. वरुणमुनि के सानिध्य में होगा। संघ अध्यक्ष प्रकाश चाणोदिया ने बताया कि समारोह में उत्तम स्वास्थ्य सेवाओं के लिए भगवान महावीर चिकित्सालय, बेंगलुरु को गुरु अमर स्वास्थ्य सेवा सम्...

मन में सुकून शीतलता से आता है – युवाचार्य महेंद्र ऋषि

एएमकेएम में आठ वार की प्रवचन माला की हुई शुरूआत एएमकेएम जैन मेमोरियल सेंटर में चातुर्मासार्थ विराजित श्रमण संघीय युवाचार्य महेंद्र ऋषिजी ने सोमवार को आठ वार की प्रवचन माला में सोमवार के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हमें शीतलता पसंद है क्योंकि वह सुकून देती है। हमारी ललाट को चन्द्र की उपमा दी गई है। मुख को चन्द्र के आकार जैसा बताया गया है। आज का वार सोमवार, सोम यानी चन्द्र, शशि। चन्द्र शीतलता प...

जैन दर्शन के अनुसार जीव और अजीव स्वतंत्र एवं निरपेक्ष हैं

क्रमांक – 38 . *तत्त्व – दर्शन*  *🔹 तत्त्व वर्गीकरण या तत्त्व के प्रकार* *👉जैन दर्शन में नवतत्त्व माने गये हैं – जीव, अजीव, पुण्य, पाप, आस्रव, संवर, निर्जरा, बन्ध, मोक्ष।* *🔅 आश्रव* *👉 जैन दर्शन के अनुसार जीव और अजीव स्वतंत्र एवं निरपेक्ष हैं। इनमें सम्बन्ध स्थापित करने वाला कोई तत्त्व होना आवश्यक है। इनमें जो सम्बन्ध स्थापित कराता है, वही आस्रव है। इसलिए आस्रव को कर्मों के आने क...

भाईदूज भाई-बहन के प्रेम, सुरक्षा और सौहार्द का प्रतीक है- युवाचार्य महेंद्र ऋषि

एएमकेएम में भाईदूज पर्व पर दिया संदेश एएमकेएम जैन मेमोरियल सेंटर में चातुर्मासार्थ विराजित श्रमण संघीय युवाचार्य महेंद्र ऋषिजी ने भाईदूज के अवसर पर धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि भाईदूज का भारतीय संस्कृति में बड़ा महत्व है। इस पर्व का सबसे बड़ा महत्व है कि यह दिन भाई-बहन के पवित्र रिश्ते के लिए मनाया जाता है। भाईदूज आर्य संस्कृति में वैदिक रुप से दीपावली के नववर्ष के पश्चात आती है। इस दिन बीज ...

कषायों की अनुमोदना नहीं होती

*☀️प्रवचन वैभव☀️*   *🪷 सद् उपदेशक:🪷* *शासननिष्ठ सद्गुरु* *सूरि जयन्त सेन कृपाप्राप्त,* श्रुत साधक क्षमाश्रमण, मुनि श्रीवैभवरत्नविजयजी म.सा. ✒️ 1️⃣0️⃣4️⃣ 🌸 *_516)_* कषायों की अनुमोदना नहीं होती.! *_517)_* क्रोध का शुद्ध पर्याय ही क्षमा हैं, क्षमा की विकृति क्रोध है.! *_518)_* भवयात्रा पर पूर्णविराम लगाना ही धर्मकरणी का उद्देश्य हैं.! *_519)_* स्व आत्म के अतिरिक्त कोई समर्थ नहीं हमारा हित करने ...

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