पर्युषण महापर्व – आज वाणी संयम दिवस आचार्य महाश्रमण के प्रबुद्ध सुशिष्य मुनि डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार जी, मुनि रमेश कुमार जी , मुनि पद्म कुमार जी एवं मुनि रत्न कुमार जी के पावन सान्निध्य एवं श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा के तत्वावधान में सभी संघीय संस्थाओं के सहयोग से शनिवार को पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व का चौथा दिन वाणी संयम दिवस के रूप में मनाया गया। इस अवसर पर मुनि डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार जी...
21 अगस्त को वनबंधु परिषद चेन्नई महिला समिति ने वरिष्ठ नागरिक दिवस का आयोजन किया। इस आयोजन में समिति ने उन युगल को आमंत्रित किया जिन्होंने अपनी शादी के साठ वर्ष पूर्ण कर लिए थे। कुल 8 युगल इस कार्यक्रम में शामिल हुए । इनके मनोरंजन के लिए समिति ने अंताक्षरी और कुछ प्रश्न उत्तर तैयार किए जिसमें उन्होंने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। सभी वरिष्ठ सदस्यों से उनकी पसंदीदा फिल्म एवं उनके पसंदीदा हीरो हीरोइन के ब...
दिनांक 23 August शनिवार 2025, *118* वे अमावस्या* के उपलक्ष मैं *जैन सेवा मंडल* बैंगलोर कैंट, कि और से तीमैया रोड स्थित सेठ श्री *किशनलाल फूलचंद लुनिया मेटरनिटी होम”* (“पुअर हाउस हॉस्पिटल”) के बाहर अल्पाहार अन्नाधानम का कार्यक्रम रखा गया ! इस अवसर पर ताराचंद लुणावत, महावीर चंद गादिया, शांतिलाल चुतर, भिकम चंद लूनिया, भरत मेहता, मनोहर गुलेचा, महेंद्र सेन, अशोक खिवंसरा, आनंद चुतर, मा...
चंदनबाला तेला तप महायज्ञ में हुए 175 तेले पर्युषण महापर्व का चतुर्थ दिवस विजयनगर, बैंगलोर: जैन श्वेतांबर तेरापंथी सभा, विजयनगर के तत्वावधान में पर्युषण महापर्व के चतुर्थ दिन दिनांक 23 अगस्त को साध्वी श्री संयमलताजी ठाणा 4 के पावन सानिध्य में “वाणी संयम दिवस” का आयोजन अर्हम् भवन में हुआ। धर्म परिषद को सम्बोधित करते हुए साध्वी श्री संयमलताजी ने कि कहा कि वाणी व्यक्तित्व का आईना है। वाण...
श्री गुजराती जैन संघ गांधीनगर में चातुर्मास विराजित दक्षिण सूर्य ओजस्वी प्रवचनकार डॉ श्री वरुण मुनि जी म.सा. ने पर्व पर्यूषण आराधना के चौथे दिन धर्म सभा में उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि नशा नाश का द्वार है। नशे के कारण व्यक्ति के साथ उसके परिवार की सुख शांति भी भंग हो जाती है। इतिहास में अनेकों उदाहरण मिलते हैं जहां नशे व्यसनों के चक्कर में पड़ कर अनेकों जिन्दगीया बर्बाद हो गयी।उ...
पर्युषण पर्व का त्रुतिय पुष्प प्रारंभ हुआ! पु. श्रुतप्रज्ञाश्री जी ने अंतगडसुत्र का वाचन किया , गुरुमॉं पु. चंद्रकला श्रीजी ने प्रभु महावीर के समवसरण की यात्रा करायी! मेरे महावीर भगवान मेरे मनमंदीर मे आओ! बचपन में माता पिता का हाथ, जवानी मे परिवार का सांथ, बुढापे मे परमात्मा की शरण स्वीकारो! बुढ़ापा जीवन का मुख्य अध्याय है ! भोग नही योग के साधन बनो! दुनीया मे आये बिना वस्र आये, जब जाओ महावीरजी का ...
प्रवचन – 22.08.2025 – प पू श्री मुकेश मुनीजी म सा – (बिबवेवाडी जैन स्थानक) जैन धर्मातील “चार अनंत चतुर्विध” भावनांमध्ये — मैत्री, करुणा, मुदिता आणि उपेक्षा — यामध्ये पहिली भावना म्हणजे मैत्री. “मैत्री भवतु सर्वेषां जीवनाम्” अर्थ: सर्व जीवांशी माझं नातं मैत्रीपूर्ण असो. हे केवळ उच्चारायचं वाक्य नाही, तर आत्म्याच्या व्यवहारात उतरवण्यासारखं एक दिव्य सूत्र आहे. सुदा...
पर्युषण महापर्व में आज मनाया सामायिक दिवस आचार्य महाश्रमण के प्रबुद्ध सुशिष्य मुनि डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार जी , मुनि रमेश कुमार जी , मुनि पद्म कुमार जी एवं मुनि रत्न कुमार जी के पावन सान्निध्य एवं श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा के तत्वावधान में सभी संघीय संस्थाओं के सहयोग से शुक्रवार को पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व का तीसरा दिन सामायिक दिवस के रूप में मनाया गया। इस अवसर पर सभी को सामूहिक रूप से अभिनव...
जालना : पर्यूषण पर्वाच्या तिसर्या दिवसाची सुरुवात अंतर्कृत दशांग सूत्राच्या पवित्र पठणाने झाली. या प्रसंगी उपस्थित भक्तांशी संवाद साधताना परम पूज्य रमणिकमुनिजी म. सा.यांनी जिनवाणी श्रवणाचे महत्त्व गहनपणे सांगितले. महाराजांनी स्पष्ट केले की, भगवान महावीर स्वामींच्या वचनातून प्राप्त झालेले हे ज्ञान अत्यंत मौल्यवान आहे आणि त्याचा स्वीकार न करता जीवनात खर्या अर्थाने आत्मिक प्रगती साधणे अशक्य आहे. आत...
श्री गुजराती जैन संघ गांधीनगर में चातुर्मास विराजित दक्षिण सूर्य ओजस्वी प्रवचनकार डॉ श्री वरुण मुनि जी म सा ने शुक्रवार को धर्म सभा में उपस्थित श्रद्धालुओं को पर्यूषण पर्व के तीसरे दिन अन्तगड सूत्र के माध्यम से सूत्र में वर्णित महान करुणा मूर्ति मोक्षगामी आत्मा श्री गजसुकुमाल मुनि के चरित्र पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि अपूर्व सहनशीलता, क्षमा,समता और करुणा की प्रतिमूर्ति थे महान साधक गजसुक...
विश्व के समस्त प्राणियों की एकमात्र यही कामना है कि मुझे सुख मिल जाये और मेरे जीवन के तमाम दुःख टल जाये। सुख प्राप्ति के लिए मनुष्य अनेक प्रकार की प्रवृत्ति करता है, नानाविधि प्रयास करता है किन्तु अफसोस यह है कि हर प्रवृत्ति और प्रयास उसे दुःख के महागर्त में डुबो देता है इसीलिए दुनिया का एक भी व्यक्ति ऐसा नहीं मिलेगा जो दुःखी न हो। यह संसार विचित्रता, विविधता और विषमता से भरा हुआ है। ऐसे संसार मे...
कर्म के कारण आत्मा का एक जन्म से दूसरे जन्म को प्राप्त करना संसार है। संसार के सब प्राणी समान नहीं है। सबकी बुद्धि, वैभव और क्षमता भिन्न-भिन्न हैं। जिसके पास यह साधन उपलब्ध है उसका मन गर्व से भर जाता है, और जिसके पास साधन नहीं होते उसके मन में हीन भावना पनपती है। इस दोहरी बीमारी की चिकित्सा संसार-अनुप्रेक्षा द्वारा होती है। यह संसार परिवर्तनशील है। इसमें कोई भी व्यक्ति निरन्तर एक स्थिति में नहीं ...