पर्युषण महापर्व – आज वाणी संयम दिवस
आचार्य महाश्रमण के प्रबुद्ध सुशिष्य मुनि डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार जी, मुनि रमेश कुमार जी , मुनि पद्म कुमार जी एवं मुनि रत्न कुमार जी के पावन सान्निध्य एवं श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा के तत्वावधान में सभी संघीय संस्थाओं के सहयोग से शनिवार को पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व का चौथा दिन वाणी संयम दिवस के रूप में मनाया गया।
इस अवसर पर मुनि डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार जी ने उपस्थित अपार जनमेदिनी को फरमाया कि मनुष्य को मधुर व मीठी वाणी बोलनी चाहिए। वाणी के कारण दूसरे को अपना व पराया बनाया जा सकता है। व्यक्ति को कला पूर्ण एवं कम बोलने का प्रयास करना चाहिए। अधिक से अधिक मौन रहने का प्रयास करना चाहिए। मुनिश्री ने भव परम्परा से गुजर रहे भगवान महावीर के सोलहवें भव का प्रसंग सुनाये।
मुनि रमेश कुमार जी ने तेरापंथ धर्मस्थल के खचाखच भरे जयसभागार में उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं को संबोधित करते हुए कहा कि वाक्पटुता बहुत बड़ी कला है। मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है तथा अपने घर-परिवार में मनमुटाव-कलह का मुख्य कारण है-असंयमित भाषा का प्रयोग। इसलिए कब, कहां, कैसे बोलना है इसका ध्यान रखना चाहिए। भाषा में अपरिमित शक्ति है। हर अक्षर अपने आप में मंत्र है। इसलिए शब्दों का चयन हमेशा सोच-समझकर करें तथा सदैव हितकारी, कल्याणकारी निर्बध्य भाषा का प्रयोग करें।
पर्युषण पर्व पर अखंड जाप के क्रम में रविवार को बीकानेर, गंगाशहर, भीनासर, देशनोक, नोखा, नाल, उदासर, कालू व लुणकरणसर का जाप होगा। तेरापंथी सभा के अध्यक्ष बाबूलाल सुराणा एवं मंत्री राजकुमार बैद ने सभीण मग समाजबंधुओं से पर्युषण महापर्व के दौरान आध्यात्मिक लाभ लेने का आह्वान किया है।
मुनि रत्न कुमार जी ने उत्तराध्ययन में वर्णित श्रमण कुमार केशी और गौतम स्वामी के प्रश्नोत्तर के प्रसंग सुनाये। इस आशय की जानकारी भा के भवन आवंटन समिति के संयोजक राकेश बैंगानी ने यहां जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में दी।
*श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा गुवाहाटी असम*





