नार्थ टाउन में चातुर्मासार्थ विराजित गुरुदेव जयतिलक मुनिजी ने प्रवचन में फरमाया कि अभुख्वाहणा -जो निरन्तर चलती रहे। भगवान ने उत्तराध्ययन के रूप में सारी साधना का निचोड किया है आठवां अध्ययन में कापिलीय का वर्णन है उसने ऐसा क्या किया जो भगवान ने जन-जन को शिक्षा देने के लिए उत्तराध्ययन सूत्र में वर्णन किया। हर बात का समाधान प्राप्त करने के लिए विधा चाहिये। व्यक्ति को महत्व इसलिए दिया जाता है कि उनके ...
हमारे भाईन्दर में विराजीत उपप्रवृत्तिनि संथारा प्रेरिका सत्य साधना ज मैया आदि ठाणा 7 साता पूर्वक विराजमान हैl वह रोज हमें प्रवचन के माध्यम से नित नयी वाणी सुनाते हैं, वह इस प्रकार हैंl बंधुओं जैसे कि उत्साह भरा हो जीवन हर लम्हा जीवन का अर्थ समझिए जीवन को उसके अर्थ प्रदान कीजिएl रो रो कर जीवन जीना जीवन जाए चार दिन का हो या 40 वर्ष का हो जब तक जिए प्रत्येक क्षण को आनंद भाव से जी आनंद आत्मा का मौलिक ...
हमारे भाईन्दर में विराजीत उपप्रवृत्तिनि संथारा प्रेरिका सत्य साधना ज गुरुणी मैया आदि ठाणा 7 साता पूर्वक विराजमान हैl वह रोज हमें प्रवचन के माध्यम से नित नयी वाणी सुनाते हैं, वह इस प्रकार हैंl बंधुओं जैसे कि सखा हो तो कृष्ण सुदामा जैसा जिस प्रकार की सुनिए जीवन में आप मित्र बनना चाहते हैं तो अपने से बेहतर लोगों को ही मित्र बनाएंl अगर कॉलेज में पढ़ते हैं युवक यूवतिया को दोस्त बनाएं पर अपनी सीमाएं जरू...
Sahevaani.com /चेन्नई. श्री सुमतिवल्लभ नोर्थटाउन श्वेतांबर मूर्तिपूजक जैन संघ में प्रवचन के माध्यम से श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए पूज्य आचार्य श्री देवेंद्रसागरसूरिजी ने कहा कि आज व्यक्ति का जीवन इतना जटिल हो गया है कि तनाव के कारण खुशी के दो पल भी अपने लिए निकालना कठिन हो चुका है। इसका एक कारण यह भी है कि हमने खुशी, सुरक्षा, आश्रय सबकी अपेक्षा दूसरों से या बाह्य जगत से कर रखी है। इसलिए अधिकतर...
किलपाॅक जैन संघ में विराजित योगनिष्ठ आचार्य केसरसूरी समुदाय के वर्तमान गच्छाधिपति आचार्यश्री उदयप्रभ सूरीश्वरजी महाराज ने प्रवचन में कहा कि आराधना को मोक्ष तक सक्रिय रखने के लिए छः आवश्यक निरंतर करना जरूरी है। उन्होंने कहा ज्ञान सुषुप्त होता है, उसको सक्रिय करने के लिए क्रिया आवश्यक है। आवश्यक क्रियाओं को छोड़ने वाले सांसारिक व्यक्ति से भी खराब कर्मी है। आवश्यक क्रिया परमात्मा का बताया हुआ मार्ग ह...
साध्वी जी ने इसके पूर्व 45 दिन का सिद्धी तप भी किया था, जैन समाज ने तपस्या की अनुमोदना की तपस्वी रत्ना की उपाधि से अलंकृत प्रसिद्ध जैन साध्वी पूनम श्री जी ने 40 दिन की तपस्या कर प्राचीन काल में परदेशी राजा द्वारा की गई तपस्या को दोहराया। उनकी तपस्या का अनुकरण कर युवा पीयूष कर्नावट ने भी 12-12 बेले (दो उपवास) की तपस्या की और अंतिम बार एक तेला कर तपस्या की पूर्णाहुति की। पीयूष कर्नावट के अलावा श्राव...
लालगंगा पटवा भवन में बह रही महावीर के अंतिम वचनों की अमृत गंगा आज के लाभार्थी परिवार : गौतमचंदजी नीलेश बोथरा परिवार, प्रकाशचंद महेंद्र कुमार गोलछा परिवार एवं श्रीमती प्रेमलता प्रकाशचंद सुराना परिवार Sagevaani.com /रायपुर। उपाध्याय प्रवर प्रवीण ऋषि ने कहा जो अपने अतीत को जनता है, वह अपने भविष्य का निर्णय कर सकता है। मृगापुत्र ने अपने अतीत को जाना, कि कैसे उसके अशुभ में से शुभ का जन्म होता था और शुभ...
Sagevaani.com /चैन्नई। कर्म भगवान को भी नहींं छोड़ते है। शुक्रवार साहुकारपेट जैन भवन मे महासती धर्मप्रभा ने आयोजित धर्मसभा में श्रध्दांलूओ को सम्बोधित करतें हुए कहा कि कर्मफल भोगने से स्वंय भगवान नहींं बच सके तो अन्य संसारिक जीवों की क्या बिसात है जो वह कर्मो से बच पाएंगे। संसार में कर्म ही प्रधानता है कर्मो का फल तो लोगों को भोगना ही पड़ता है,चाहे वह इस जन्म में भोगे या अगले जन्म में भोगें बिना संस...
मरुधर केसरी जैन महिला कॉलेज, वानीयंबाडी का 1 नवंबर 2023 बुधवार को सुबह 10.30 बजे बैच 2020-21 के लिए दीक्षांत समारोह आयोजित किया गया। कॉलेज के अध्यक्ष श्री एम. विमल चंद जैन, सचिव श्री. सी. लिकमीचंद जैन, (पूर्वाध्यक्ष, राजस्थानी एसोसिएशन तमिलनाडु), मुख्य अतिथि जेप्पियार यूनिवर्सिटी चेन्नई की संस्थापक और चांसलर डॉ रेजिना जे मुरली, सम्मानित अतिथि राजस्थानी एसोसिएशन तमिलनाडु के अध्यक्ष श्री एन. मोहनलाल...
आचार्य श्री देवेंद्रसागरसूरीश्वरजी ने सुमतिवल्लभ नोर्थटाउन जैन संघ में प्रवचन देते हुए कहा कि इस दुनिया में धर्म को लेकर जितनी बहस हुई है, उतनी शायद ही किसी और चीज पर हुई होगी। इसके पक्ष और विपक्ष बनते रहे हैं। आज तो और भी, सारी समस्याओं के लिए धर्म को ही दोषी ठहराया जा रहा है। लेकिन यह एक अजीब सी बात है कि धर्म को किसी ने भी सही अर्थों में नहीं लिया। उलटे उसे टकराव का एक स्थायी मुद्दा बना दिया गय...
दुर्भाग्य को सौभाग्य में कैसे बदलें, श्रुतदेव आराधना के 10 वें दिवस उपाध्याय प्रवर ने बताया Sagevaani.com /रायपुर। उपाध्याय प्रवर ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि क्यों एक व्यक्ति अपने सौभाग्य को दुर्भाग्य में बदल देता है? क्या सोच होती है उसकी? परमात्मा उस व्यक्ति को पापी कहते हैं। उसे सौभाग्य तो मिला था, लेकिन उसने अपने कर्मों के कारण नहीं अपनी सोच के कारण उसे पाप बना दिया। क्या जीवन शैली ह...
आत्मबन्धुओ क्षुल्लक निरग्रन्थिय- साधु के अन्दर कैसी चर्या होनी चाहिए इसका विधान है। साधु गृहत्यागी होते हैं जिन वस्तुओं का त्याग कर दिया, गृहत्याग कर दिया, ममत्व भाव नहीं रखना भी संयम को सुरक्षित रखता है वो जानते है कि किस लक्ष्य के लिए मैनें संयम लिया है। गृहत्याग करने के बाद कैसे रहना । विधा दो प्रकार की विधा और अविधा। जीव में उपयोग लक्ष्ण होता है जड़ में उपयोग लक्ष्य नहीं होता है अविधा को मित्...