जैन साध्वी ने बताया कि तप को कैसे बनाया जा सकता है कारगर Sagevaani.com /शिवपुरी ब्यूरो। तप, मोक्ष का द्वार है, लेकिन तप के साथ-साथ जप, धर्म आराधना, संवर, सामायिक, पोषद और प्रतिक्रमण भी आवश्यक है। आज पहले की तुलना में तप करने वालों की संख्या बढ़ी है एक साथ 1500 सिद्धी तप और 307 मासखमण (30 उपवास की तपस्या) हो रही है, लेकिन इन तपस्याओं को करना कारगर तभी होगा जब हम एकांकी तप तक सीमित न हो और धर्मर् आर...
किलपाॅक जैन संघ में विराजित योगनिष्ठ आचार्य केशरसूरी समुदाय के वर्तमान गच्छाधिपति आचार्यश्री उदयप्रभ सूरीश्वरजी महाराज ने प्रवचन में कहा कि द्वारा यानी द्वार, नारी, गुफा बिना की शेरनी, कन्या, सुंदरी, ललिता, कुमारी सहित स्त्री के 92 नाम बताए गए हैं। स्त्री सत्वधारी, सत्ताधारी लोगों को भी वश में करके बाजी पलट देती है। कहा गया है कि पुरुष के पास शक्ति है तो स्त्री के पास सहनशक्ति है। स्त्री स्वर्ग का...
हमारे भाईन्दर में विराजीत उपप्रवृत्तिनि संथारा प्रेरिका सत्य साधना ज गुरुणी मैया आदि ठाणा 7 साता पूर्वक विराजमान हैl वह रोज हमें प्रवचन के माध्यम से नित नयी वाणी सुनाते हैं, वह इस प्रकार हैंl बंधुओं जैसे कि एक समय की बात है राजश्री प्रसंग चंद्र के बारे में बड़ा चर्चित प्रसंग है वह अपना राज पाठ त्याग करने के बाद संत बने थेl एक बार में जंगल में एक हाथ आकाश की ओर ऊपर की एक पांव के बल खड़े होकर घर तपस...
Sagevaani.com /चैन्नई। विरक्ति के मार्ग को जो अपनाता है वही भगवान को पा सकता है।गुरूवार साहुकारपेट जैन भवन के मरूधर केसरी दरबार में महासती धर्मप्रभा ने श्रावक श्राविकाओं को धर्म संदेश देतें हुए कहा कि काम और राम साथ में नही रह सकते है। राग -द्वेष,काम-क्रोध,लोभ-मोह और विषयो और विकारो का जब तक मनुष्य त्याग और विरक्ति नहीं कर देता है तब तक वह परमात्मा से नहीं मिल पाएगा और नाहि संसार से मुक्ति प्राप्त...
महावीर निर्वाण कल्याणक के नवम दिवस श्रुतदेव आराधना के सोलहवें अध्याय का पाठ Sagevaani.com /रायपुर। उत्तराध्ययन श्रुतदेव आराधना के नवम दिवस बुधवार को उपाध्याय प्रवर ने कहा कि ब्रह्मचर्य की महिमा गाई जाती है, लेकिन आज का चिकित्सा विज्ञान भारतीय आध्यात्मिक शास्त्र को चुनौती देता है। उनके अनुसार ब्रह्मचर्य अस्वस्थता को, मानसिक व्याधियों को जन्म देता है। महावीर भी कहते हैं कि ब्रह्मचर्य बीमारियों को और...
Sagevaani.com /Chennai: किलपाॅक श्वेताम्बर मूर्तिपूजक जैन संघ में विराजित योगनिष्ठ आचार्य केशरसूरी समुदाय के वर्तमान गच्छाधिपति आचार्यश्री उदयप्रभ सूरीश्वरजी म.सा. के शिष्य मुनि धन्यप्रभ विजयजी ने प्रवचन में कहा कि लोभ का कोई अंत नहीं होता। लोभ को दूर करना है तो संतोष गुण को अपनाना जरूरी है। उन्होंने सुख और आनंद में अंतर बताते हुए कहा कि सुख वह है, जो प्रतिबंधात्मक होता है और आनंद वह है जो प्रतिबं...
नार्थ टाउन में चातुर्मासार्थ विराजित गुरुदेव जयतिलक मुनिजी ने प्रवचन में फरमाया कि आत्म बंधुओं अकाम माया का उपदेश श्री उत्तरायण के पाँचवे अध्ययन में दिया। भगवान कहते है कि मरण के अर्थ को समझो मरण भी धर्म -ध्यान से युक्त होना चाहिए। अन्तिम सांस तक मन में धर्म का वास होना चाहिए धर्म रग-रग में खुन की हर बूंद में होना चाहिए । हर पल, हर समय धर्म स्मृति में होना चाहिए। ये भूलने योग्य नहीं। जो धर्...
Sagevaani.com /Chennai । जीवन में कर्मो की लीला बड़ी न्यारी है। बुधवार साहुकारपेट जैन भवन मे महासती धर्मप्रभा ने आयोजित धर्मसभा में श्रध्दांलूओ को सम्बोधित करतें हुए कहा कि संसार में मानव जीवन अति दुर्लभ है,बड़ी मुश्किल से यह मानव जीवन मिला है। मानव शरीर ही मोक्ष को प्राप्त कर सकता है।अपनी सोई हुई आत्मा को जगाने पर ही मनुष्य आत्मा पर कर्मों के आवरण को हटाकर अपनी आत्मा का कल्याण करवा सकता है। लेकिन म...
आचार्य श्री देवेंद्रसागरसूरीश्वरजी ने श्री सुमतिवल्लभ नोर्थटाउन श्वेतांबर मूर्तिपूजक जैन संघ में धर्म प्रवचन के माध्यम से श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि आधुनिकीकरण के नाम पर आज का भारतीय समाज पाश्चात्य प्रभावों से अछूता नहीं रहा हैं. यूरोपीय देशों के समाजों में माँ बाप, महिलाओं एवं बच्चों के दायित्व तथा भारतीय समाज में इनकी परम्परा बिलकुल उलट हैं. मगर पाश्चात्य प्रभाव में हमारा समाज भी इन ...
Sagevaani.com /चैन्नई। अभिमान नहीं करना और स्वाभिमान को छोड़ोगे नहीं तो जीवन में दुःख नहीं सुख पाओगे। मंगलवार साहुकार पेट जैन भवन मे श्री मद उत्तराध्ययन सूत्र के सोलहवें अध्याय का साध्वी स्नेहप्रभा ने वर्णन करतें हुए श्रध्दांलूओ से कहा कि अभिमान एक रोग है जिस मनुष्य को यह रोग लग जाता है वह जीवन भर दुःख झेलता है वह थोड़ी सी कामयाबी और अल्प धन के बल पर दुसरोँ के स्वाभिमान को गिराने वाला व्यक्ति जीवन म...
इस साल 1 नवंबर को करवा चौथ की पूजा चंद्र दर्शन व चंद्र अर्घ से पूर्ण होगी। 1 नवंबर को सुहागिन महिलाएं अपने सुहाग की लंबी उम्र की कामना करते हुए । करवा चौथ की पूजा करती है , करवा चौथ की कथा का पाठ किया जाता है। इस दिन महिलाएं सवेरे से व्रत रखकर शाम को चंद्र दर्शन करने के बाद भोजन करती है । करवा चौथ की कथा एक साहूकार के सात लड़के और एक लड़की थी । कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर सेठानी उ...
आत्मा पर जो वास्तविक नहीं है, जो नाशवंत है, जो क्षणिक है, वह पदार्थ शासन करे यह तो बिलकुल अनुचित है। धर्म का अधिकार प्राप्त करनेवाला व्यक्ति अन्य पदार्थों को स्वयं पर शासन नहीं करने देता। आनंदमयी बनकर प्रवाहित रहनेवाली नदी को समंदर में मिलना ही है। इसलिए उसने अपना स्वरुप विराट बना लिया। हमारी आत्मा को परमात्मा । स्वरूप प्राप्त करना है, तो छोटी बातों से दूर रहकर विराट लक्ष्य को प्राप्त करना । | ही ...