जैन साध्वी जी ने बताया कि पंडित मरण से होती है जीव की सदगति Sagevaani.com /शिवपुरी ब्यूरो। जन्म लेने वाले जीव का मृत्यु को प्राप्त करना निश्चित होता है। लेकिन अपने जन्म और मृत्यु को सार्थक करने की साम्र्थय सिर्फ मनुष्य में है। भगवान महावीर ने हमें जहां जीने की कला सिखार्ई है वहीं वह मृत्यु की कला भी सिखाते हैं। भगवान महावीर के अनुसार जीवन उत्सव है वहीं मृत्यु महोत्सव है उक्त वात प्रसिद्ध जैन साध्व...
हमारे भाईन्दर में विराजीत उपप्रवृत्तिनि संथारा प्रेरिका सत्य साधना ज गुरुणी मैया आदि ठाणा 7 साता पूर्वक विराजमान हैl वह रोज हमें प्रवचन के माध्यम से नित नयी वाणी सुनाते हैं वह इस प्रकार हैंl बंधुओं जैसे कि अधिक आशा से उपजे निराशा बुढ़ापे में अपने भाग्य का रोना ना रो जो प्रकृति से मिल रहा है उसे प्रेम से स्वीकार करें बच्चों से अधिक आशाएं केप्राय कहते हैं कि बेटा तो बुढ़ापे का सहारा है पर मैं कहती ह...
नार्थ टाउन में गुरुदेव जयतिलक मुनिजी ने प्रवचन में फरमाया कि जीवन का कोई भरोसा नहीं है जीवन असंस्कृत है जब तक इस शरीर में श्वास चलती है तब इंजन रूपी शरीर गतिमान है। श्वास बिगड गयी, थम गयी तो इसे सुधारने वाला न देवगति में है ना मनुष्य गति में। सर्वज्ञ, सर्वदर्शी तीर्थकंर सभी का उपाय बताने में समर्थ है परन्तु रुकी हुई साँस को गतिमान करने का उपाय उनके पास भी नहीं है फिर साधारण मनुष्य का क्या कहे। कित...
8 टीमों के 250 प्रतिभागियों ने लिया हिस्सा Sagevaani.com /Chennai राजस्थान काॅस्मो क्लब (आरसीसी) के तत्वावधान में रविवार को तीन अलग-अलग खेलों की एकदिवसीय इंटर क्लब स्पोर्ट्स प्रतियोगिता का आयोजन मीनम्बाक्कम स्थित अगरचंद मानमल जैन कॉलेज में किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि ग्रैंड मैग्नम के एमडी विजय सुराणा, विशिष्ट अतिथि आटो माॅल के चैयरमेन हस्तीमल चौधरी, अभिषेक सुराना और एएम जैन कॉलेज के प्रबंध ...
योगनिष्ठ आचार्य केशरसूरी समुदाय के वर्तमान गच्छाधिपति आचार्यश्री उदयप्रभ सूरीश्वरजी के शिष्य मुनि ध्यानप्रभ विजयजी ने प्रवचन में कहा कि सम्यक् दर्शन का अर्थ है भगवान की वाणी के ऊपर पूर्ण श्रद्धा रखना। सम्यक् दर्शन को पारसमणि, चिंतामणि, चंद्रकांतमणि आदि की उपाधि दी गई है। उन्होंने कहा सम्यक् दर्शन होने के बाद ही हमारे भव शुरू होते हैं। परमात्मा के उपकार से हमें दुर्लभ मनुष्य भव मिला है। मनुष्य भव ह...
आचार्य श्री देवेंद्रसागरसूरिजी ने श्री सुमतिवल्लभ नोर्थटाउन जैन श्वेतांबर संघ में प्रवचन देते हुए कहा कि दृढ़तापूर्वक किया गया निश्चय संकल्प कहलाता है। संकल्पजनित् दृढ़ता ही संकल्प को वह बल प्रदान करती है कि संकल्पी अपने लक्ष्य के प्रति आस्थावान बना रहता है और उसे पाने के लिए अपने कर्म की अग्नि जगाए रखता है। दृढ़ता के कारण ही व्यक्ति अपने लक्षित कर्म से विचलित नहीं होते। वे निरंतर कर्मलीन रहते हुए...
लालगंगा पटवा भवन में बह रही महावीर के अंतिम वचनों की अमृत गंगा Sagevaani.com/रायपुर। उपाध्याय प्रवर प्रवीण ऋषि ने कहा कि मंगल राहों पर चलने वाले बहुत होते हैं, लेकिन जहाँ-जहाँ चरण धरें वह राह मंगल हो जाए, ऐसे चरणों को संत चरण कहते हैं। सोमवार को लालगंगा पटवा भवन में जारी श्रीमद उत्तराध्ययन श्रुतदेव आराधना के सप्तम दिवस उपाध्याय प्रवर ने उत्तराध्ययन सूत्र के 11, 12 एवं 13 वें अध्याय के पाठ किया। आर...
Sagevaani.com/चैन्नई। परमात्मा की शरण मे जाने से पहले मनुष्य को स्वंय की आत्मा की शरण में जाना पड़ेगा। तभी वह परमात्मा तक पहुंच सकता है। सोमवार को साहुकारपेट जैन भवन साध्वी स्नेहप्रभा ने श्रीमद उत्तराध्ययन सूत्र के तेरहवें अध्याय अज्झयणं चित्तसंभूइज्जं पाठ का वर्णन करते हुए श्रध्दांलूओ से कहा कि संसार मे आत्मा से बढ़कर कुछ भी नहीं है। और मनुष्य संसारिक और भौतिक वस्तुओं से परमात्मा को प्राप्त करना चा...
मनुष्य को सामाजिक प्राणी कहा जाता है इसका अर्थ है मानव समाज के लिए है तथा समाज मानव के लिए हैं. दोनों का अस्तित्व पूरी तरह से एक दूसरे पर आश्रित है पूरक हैं. उपरोक्त बातें श्री सुमतिवल्लभ नोर्थटाउन श्वेतांबर मूर्तिपूजक जैन संघ में आचार्य श्री देवेंद्रसागरसूरिजी ने प्रवचन देते हुए कही, वे आगे बोले कि मानव ने स्व भावना का त्याग कर पर भावना को आधार बनाकर समाज बनाया तो समाज ने भी मानव के सर्वांगीण विक...
किलपाॅक जैन संघ में विराजित योगनिष्ठ आचार्य केशरसूरीजी समुदाय के वर्तमान गच्छाधिपति आचार्यश्री उदयप्रभ सूरीश्वरजी म.सा. ने नवपद के गुणों की विवेचना करते हुए कहा कि अरिहंत परमात्मा का सबसे बड़ा गुण यह है कि वे मार्गदर्शक है। मार्गदर्शक यानी यथार्थ प्ररूपणा, स्यादवाद आदि। यह कार्य कोई दूसरा नहीं कर सकता। ज्ञानावरणीय कर्मों का क्षय होने पर ही परमात्मा केवलज्ञानी बन सकते हैं। वे जीवात्मा की पात्रता, ...
नार्थ टाउन के ए यम के यम स्थानक में गुरुदेव जयतिलक मुनिजी ने प्रवचन में फरमाया कि आत्म बंधुओ :- चार अंग संसार में दुर्लभ है। पहला है मनुष्य जन्म, ये मनुष्य जन्म अनन्त -2 समय तक संसार में परिभ्रमण कर, प्रबल पुण्यवाणी होने पर पाता है। निगोद में जीव एक समय में 17 बार जन्म-मरण करता है। फिर भी मुक्त नहीं हो पाता। इतने जन्म-मरण के बाद भी निगोद में जीव को रहना पड़ता है । भयंकर वेदना निगोद मे मिलती है। ऐसी...
राजस्थानी एसोसिएशन तमिलनाडु (रजत) की ओर से राजस्थानी बाजार की शुरुआत 28 व 29 अक्टूबर को किलपाक स्थित सेंट जार्ज स्कूल के विंग्स कन्वेशन सेंटर में की गई। मुख्य अतिथि तमिल सिनेमा की सुप्रसिद्ध अभिनेत्री कलैमामणी सुकन्या रमेश एवं विशिष्ट अतिथि नीलिम रानी एवं रेफेक्स इंडस्ट्रीज के डाइरेक्टर जगदीश बूरड़ ने फीता काट कर बजार का शुभारंभ किया। अध्यक्ष मोहनलाल बजाज ने सभी का स्वागत किया। राजस्थानी बाजार में...