Author: saadhak

संगति का जीवन में बड़ा गहरा प्रभाव पड़ता है : देवेंद्रसागरसूरि

Sagevaani.com /चेन्नई. श्री सुमतिवल्लभ नोर्थटाउन श्वेतांबर मूर्तिपूजक जैन संघ में आचार्य श्री देवेंद्रसागरसूरीश्वरजी ने प्रवचन देते हुए कहा कि मनुष्य के चरित्र निर्माण में संगति का बहुत प्रभाव पड़ता है। हमारे शास्त्रों में सत्संगति को बहुत महत्व दिया गया है। सत्संगति का अर्थ सच्चरित्र व्यक्तियों के संपर्क में रहना, उनसे संबंध बनाना है। सच्चरित्र व्यक्तियों की संगति से साधारण व्यक्ति भी महत्वपूर्ण ब...

अपने लक्ष्य को अर्जित करने के लिए कड़ी मेहनत करो: उपप्रवृत्तिनि संथारा प्रेरिका सत्य साधना ज गुरुणी मैया

हमारे भाईन्दर में विराजीत उपप्रवृत्तिनि संथारा प्रेरिका सत्य साधना ज गुरुणी मैया आदि ठाणा 7 साता पूर्वक विराजमान हैl वह रोज हमें प्रवचन के माध्यम से नित नयी वाणी सुनाते हैं, वह इस प्रकार हैंl बंधुओं जैसे कि निगाह रहे लक्ष्य पर ही सफलता प्राप्त करने का दूसरा सोपान हैl तुम अपने जीवन का लक्ष्य निर्धारित करो और लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए अपनी बुद्धि का उपयोग करते हुए सत्य आत्मक योजना तैयार करोl तुम...

जीवन विकास के सभी गुणों में ईमानदारी एक सर्वोत्तम गुण है : देवेंद्रसागरसूरि

जिस प्रकार काँटो के बीच में गुलाब का फूल सबका ध्यान आकर्षित करता है उसी प्रकार एक ईमानदार व्यक्ति समाज में लोगों का ध्यान आकर्षित करता है, समाज मे एक अच्छा उदाहरण प्रस्तुत करता है। ऐसे लोगों का सभी सम्मान करते हैं, उनकी बातें मानते हैं और उनका अनुसरण करते हैं। उपरोक्त बातें आचार्य श्री देवेंद्रसागरसूरिजी ने नोर्थटाउन के श्री सुमतिवल्लभ जैन संघ में प्रवचन देते हुए कही। वे आगे बोले कि ईमानदार व्यक्त...

जहां एक्सक्यूज़ आ गया, वहां विनाश का रास्ता खुल गया : प्रवीण ऋषि

उत्तराध्ययन श्रुतदेव आराधना के 15वें दिवस सत्तावीसइमं अज्झयणं खलुकिज्जं का पाठ Sagevaani.com /रायपुर। उपाध्याय प्रवर प्रवीण ऋषि ने कहा कि व्यक्ति जिंदगी में क्यों सफल नहीं होता है? जैसा उसका इरादा, उसकी सोच होती है, वैसा क्यों नहीं होता है? इसका एक बहुत छोटा सा कारण है एक्सक्यूज़ या बहाना। जिस व्यक्ति के पास बहाना होता है वह जीवन में केवल दुःखों को ही जन्म देता है। अनुत्तरदेशन में प्रभु महावीर बहान...

विभाव, दुर्भाव सामाजिक असंतुलन का कारण है – मुनि यशस्वीप्रभ विजय

किलपाॅक जैन संघ में विराजित आचार्यश्री उदयप्रभ सूरीश्वरजी म.सा. के शिष्य मुनि यशस्वीप्रभ विजयजी म.सा. ने प्रवचन में कहा कि ये पांच चीज विश्व को बहुत तकलीफ देती है, पर्यावरण असंतुलन, सामाजिक असंतुलन, संबंध का असंतुलन, शरीर का असंतुलन और आध्यात्मिक असंतुलन। प्रकृति के साथ खिलवाड़ करने और जीवहिंसा के कारण पर्यावरण असंतुलन बनता है। विभाव, दुर्भाव सामाजिक असंतुलन का कारण है। तनाव व रोगों में वृद्धि के ...

पर्यावरण संरक्षण से हर तरफ हरियाली एवं खूशियाली होगी: डॉ फतेहराज जैन

राजस्थान पत्रिका एवं एक्ष्नोरा इंटरनेशनल के संयुक्त तत्वावधान में चल रहे हरित प्रदेश अभियान द्वारा धुआं मुक्त दिपावली मनाने का संदेश कई स्कूल, कॉलेज, धार्मिक पाठशाला में विस्तार से जानकारी देते हुए डॉ फतेहराज जैन ने कहा कि धुआं एवं पटाखों की आवाज से अस्थमा, उम्र वाले लोगों, पक्षियों को हानि होती हैंl इसलिए धुआं मुक्त दिपावली मनाने का निर्णय लिया एवं पौधे वितरण कर पर्यावरण को बसाने की जानकारी देते ...

विनय + आचार = विनयाचार : जयतिलक मुनिजी

नार्थ टाउन में चातुर्मासार्थ विराजित गुरुदेव जयतिलक मुनिजी ने प्रवचन में फरमाया श्री उत्तराध्ययन सूत्र में ग्यारहवे अध्ययन के‌ अन्तर्गत बहुश्रुत का वर्णन है। ज्ञान पाने के लिए बाह्मय और आभ्यान्तर परिग्रह से मुक्त होना जरुरी है। ये संयोग कर्म बन्ध के कारण है। जो इन संयोग का त्याग कर देते है उन्हें आत्म ज्ञान में लीन होना चाहिए इस लिए भगवान ने सबसे पहले विद्या को महत्व दिया। विद्यावान व्यक्ति ही अहं...

प्रभु महावीर की अंतिम देशना श्री उत्तराध्ययन सूत्र वाचन

🚩 *प्रभु महावीर स्वामी निर्वाण कल्याणक महोत्सव* 🚩       🎈 *दीपावली महापर्व* 🎈    🎇 *जैन दिवाकर रत्न तरुण तपस्वी पूज्य श्री विमलमुनिजी म सा के सुशिष्य*    😷 *स्वर्ण संयम आराधक सरस वाणी भूषण सेवा शिरोमणी सेवा चक्रवर्ती परम पूज्य गुरुदेव श्री वीरेन्द्र मुनिजी महाराज*       🙏 *के पावन सानिध्यमे*     🏛 *मामबलम एस एस जैन संघ के तत्वाधान में*    📚 *मुनिश्री के मुखारविंद से प्रभु महावीर की अंतिम देशना श्र...

धर्म की पाल बांधने से जीवन संवरता है और आत्मा को मोक्ष की प्राप्ति .. महासती धर्मप्रभा

Sagevaani.com /Chennai। धर्म की पाल बांधने से जीवन संवरता है और आत्मा को मोक्ष । मंगलवार साहुकारपेट जैन भवन में महासती धर्मप्रभा ने श्रावक-श्राविकाओं को सम्बोधित करते हुए कहा कि संसार मे जितनें भी महापुरुष हुए उन्होंने धर्म की शरण लेकर अपनी आत्मा को मोक्ष दिलवाया। संसार में भक्ति का मार्ग मनुष्य के लिए मोक्ष की प्राप्ति के द्वार खोलता है परंतु भक्ति पूर्ण लगन से होनी चाहिए। भक्त पूरी तरह से स्वयं ...

दृढ़ निश्चय और लक्ष्य नहीं है तो मनुष्य जीवन मे सफलता प्राप्त नहीं कर पाएगा: महासती धर्मप्रभा

Sagevaani.com /चैन्नई। दृढ़ निश्चय और लक्ष्य नहीं है तो मनुष्य जीवन मे सफलता प्राप्त नहीं कर सकता है।सोमवार जैन भवन साहुकारपेट के मरूधर केसरी दरबार में महासती धर्मप्रभा ने आयोजित धर्मसभा में श्रोताओं को सम्बोंधित करतें हुए कहा कि जीवन मे सफलता वही इंसान प्राप्त कर सकता है और दुविधा मे रहने वाला जीवन में लक्ष्य प्राप्त नहीं कर सकता है। काम कोई भी हो उसमें सफलता तभी मिलती है जब उस काम को करने के लिए...

भगवान महावीर ने बताई ज्ञानी और अज्ञानी की पहचान: साध्वी नूतन प्रभाश्री जी 

भगवान ने बताया कि ज्ञानी और सम्यक ज्ञान का आराधक होता है पूज्यनीय  Sagevaani.com /शिवपुरी ब्यूरो। दीपावली की रात्रि को मोक्ष गमन से पूर्व भगवान महावीर ने 48 घंटे तक धर्मदेशना दी थी। जो उत्तराध्यन सूत्र में वर्णित है। उत्तराध्यन सूत्र के 11 वें अध्याय में भगवान महावीर स्वामी ने ज्ञानी और अज्ञानी व्यक्ति की पहचान बताई थी। भगवान ने बताया था कि ज्ञानी और सम्यक ज्ञान का आराधक पूज्यनीय होता है। केवल सिद...

जो समय का मूल्य जानता है वास्तव में वही पण्डित है: जयतिलक मुनिजी

नार्थ टाउन में गुरुदेव जयतिलक मुनिजी ने कहा कि भगवान ने समय मात्र के प्रमाद का निषेध किया है। एक समय भी अनन्त संसार का परिभ्रमण बढ़ा सकता है यदि प्रमाद में व्यतीत किया हो तो ज्ञानीजन कहते है कि जो समय का मूल्य जानता है वास्तव में वही पण्डित है।   गौतम गणधर एक क्षण का प्रमाद नहीं करते थे सदैव भगवान के चरणों में रहते, ज्ञान पिपासु रहते, फिर भी उनके मन में संशय आ गया कि मैं सिद्ध बुद्ध मुक्त होऊं...

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