महावीर निर्वाण कल्याणक महोत्सव का शिखर दिवस 13 नवंबर को Sagevaani.com /रायपुर (वीएनएस)। 21 दिवसीय महावीर निर्वाण कल्याणक महोत्सव अब अपने चरम पर पहुंच रहा है। लालगंगा पटवा भवन में परमात्मा के समोशरण का निर्माण हो रहा है। आनंद जन्मोत्सव, नवकार तीर्थ कलश अनुष्ठान जैसे शीर्ष आयोजनों के बाद रायपुर की धन्य धरा पर 21 दिवसीय महावीर निर्वाण कल्याणक महोत्सव का अनुष्ठान का समापन होने जा रहा है। रायपुर श्रमण ...
लालगंगा पटवा भवन में 11 नवंबर से प्रारंभ होगी परमात्मा के समोशरण की आराधना Sagevaani.com /रायपुर। उपाध्याय प्रवर प्रवीण ऋषि ने कहा कि जैसे मछली आटे को देखती है कांटे को नहीं, वैसे ही हम विषय को मछली की तरह आटे के रूप में देखते हैं और उसे ग्रहण कर लेते हैं। और वह कांटा हमें पकड़ कर रखता है। हमारी पांचों इन्द्रियां जान भी सकती हैं और भोग भी सकती हैं। जब ये जानने के लिए उपयोग में आती हैं तो आत्मा का व...
Sagevaani.com /चैन्नई। धन,धर्म की आधार शिला है। शुक्रवार साहुकारपेट जैनभवन में धनतेरस के पावन प्रंसग पर महासती धर्मप्रभा ने सभी श्रध्दांलूओ को धर्मसंदेश देतें हुए कहा कि धन, धर्म की आधार शिला है। लक्ष्मी को प्राप्त करने बाद जीवन में शांति नहीं और शरीर मे सुख नही वो धन किसी भी काम नहीं है।धन के सद उपयोग से मनुष्य पुण्य का उपार्जन करके जीवन को सफल बना सकता है,लेकिन करता नहींं वह धन का स्वामी नहीं बन...
इस साल धनतेरस धन्वंतरि जयंती 10 नवंबर 2023 को आ रही है, धनतेरस के दिन आपको सवेरे स्नान कर अच्छे वस्त्र धारण कर । अपने घर के उत्तर पूर्व में महालक्ष्मी गणेश की स्थापना करें, व भगवान विष्णु को धनवंतरी के रूप में पूजा करें धनतेरस के दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा इसलिए करनी चाहिए । भगवान धन्वंतरि आरोग्यता के देवता है । इनकी पूजा करने से आपके घर से सारे रोग दोष मिट जाते हैं ,भगवान धन्वंतरि आयुर्वेद के देव...
गुरुदेव जयतिलक मुनिजी ने नार्थ टाउन के ए यम के यम स्थानक में कहा कि संसार अनादि काल से है जिसमें जीव का जन्म मरण भी अनादिकाल से हो रहा है। जीव के जन्म मरण की संख्या असीमित है जिसकी गणना में गणित भी फेल है। इसलिए भगवान ने कहा कि जीव का जन्म मरण अनादिकाल से है। मनुष्य गति को प्राप्त होना सरल नहीं है। प्रबल पुष्यवाणी से ये गति प्राप्त होती है। जिस प्रकार मोबाइल में बहुत सारे सिस्टम होते है पर जानकारी...
परमात्मा की भक्ति के साथ शुक्रवार से शुरू होगा महावीर निर्वाण कल्याणक का तेला Sagevaani.com/रायपुर। उपाध्याय प्रवर प्रवीण ऋषि ने कहा कि तप के बिना कोई शुद्ध नहीं होता। परमात्मा कहते हैं कि जिसके करने से पाप समाप्त हो जाए उसे तप कहते हैं। जैसे आग ईंधन को राख कर देती है, वैसे ही अनादिकाल के पाप संस्कारों को जो नष्ट कर दे, वह तप है। लेकिन ऐसा तप जीवन में कैसे संभव हो सकता है? क्या किसी से लेना भी तप ...
हमारे भाईन्दर में विराजीत उपप्रवृत्तिनि संथारा प्रेरिका सत्य साधना ज गुरुणी मैया आदि ठाणा 7 साता पूर्वक विराजमान हैl वह रोज हमें प्रवचन के माध्यम से नित नयी वाणी सुनाते हैं, वह इस प्रकार हैंl बंधुओं जैसे कि भाइयों रिश्ते बनाना उतना ही आसान है जिससे मिट्टी पर मिट्टी से लिखता लेकिन रिश्ते निभाना उतना ही मुश्किल हैl जिसे अपनी पर पानी से लिखना परिवार में तीसरा रिश्ता होता हैl इनके कारण परिवार में लडाई...
कुष्ठ आश्रम में श्रीसंघ साहुकारपेट ने मनाया दिपावली पर्व Sagevaani.com /Chennai। मानव की प्रतिष्ठा में ही धर्म है।कोई भी धर्म श्रेष्ठ और महान हो सकता है, लेकिन मानवता से बड़ा कोई धर्म नहीं हो सकता। गुरूवार जैन भवन में महासती धर्मप्रभा ने श्रीसंघ साहुकारपेट के सभी पदाधिकारियों को कुष्ठ आश्रम में कुष्ठ रोगियों की सेवा कार्य केलिए साधूवाद देतें हुए कहा कि मानव सेवा ही सच्ची सेवा है गरीब लोगों के बीच ...
कल्याण, उपकार, अच्छाई, हित, नेकी, ये वे चीजें हैं जिसकी धुरी पर ही ये संपूर्ण संसार का अस्तित्व जीवंत है। इन पर्यायवाची को अगर समेटा जाए तो जिस सहजशब्दया प्रवृत्ति का पता चलता है उसे भलाई या परोपकार के नाम से जाना जाता है। एक ऐसी प्रवृत्ति जो प्राणी जन्मजात स्थायी रूप से प्राप्त करता है। उपरोक्त बातें श्री सुमतिवल्लभ नोर्थटाउन मूर्तिपूजक जैन संघ प्रवचन देते हुए आचार्य श्री देवेंद्रसागरसूरिजी ने कह...
ए यम के यम स्थानक नार्थ टाउन में गुरुदेव जयतिलक मुनिजी ने कहा भगवान ने मद का निषेध किया है। आठ प्रकार के मद जैसे जाति, कुल, रूप, ऐश्वर्य आदि नही करने चाहिए। मद का उल्टा दम होता है। अर्हंत पद की प्राप्ति के लिए मद का मर्दन करना आवश्यक है। जो सरल है, विनयी है उसमें ही गुणों का आगमन होता है। विनय को ही इसलिए धर्म का मूल कहते है । अहंकारी व्यक्ति किसी का भला नही कर सकता । मद का अर्थ पागलों की त...
किलपाॅक जैन संघ में विराजित योगनिष्ठ आचार्य केसरसूरी समुदाय के वर्तमान गच्छाधिपति आचार्यश्री उदयप्रभ सूरीश्वरजी म.सा. ने प्रवचन में परिषह अध्ययन का विश्लेषण करते हुए कहा कि जो आत्मा विनय गुण को दृढ़ बनाता है, वह परिषह कर सकता है। परिषह सहन करने के लिए आत्मबल की आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा विचार ज्यादा उसे ही आता है, जिसे स्वीकारभाव नहीं होते। विनय करने से ध्रुतिबल और संघयनबल मिलते हैं, तब परिषह...
लालगंगा पटवा भवन में गूंज रहे प्रभु महावीर के अंतिम वचन Sagevaani.com /रायपुर। उपाध्याय प्रवर प्रवीण ऋषि ने कहा कि संसार के समस्त जीव शक्ति संपन्न हैं। और जहां शक्ति होती है, वहां पराक्रम होता है। शक्ति यदि श्रद्धापूर्ण है तो सम्यक पराक्रम होता है। शक्ति यदि संशय, मिथ्यात्व से संपन्न है तो मिथ्या पराक्रम होता है। सम्यक पराक्रम भगवत्ता की ओर ले जाता है, वहीं मिथ्या पराक्रम शैतानियत की ओर ले जाता है...