हमारे भाईन्दर में विराजीत उपप्रवृत्तिनि संथारा प्रेरिका सत्य साधना ज गुरुणी मैया आदि ठाणा 7 साता पूर्वक विराजमान हैl वह रोज हमें प्रवचन के माध्यम से नित नयी वाणी सुनाते हैं, वह इस प्रकार हैंl
बंधुओं जैसे कि हमारे जीवन जीने का ढंग कैसा हो यह निर्णय हम कर सकते हैंl अब मैं जो बातें कहीं नहीं चाह रहा हूं ऊपर वाले के नहीं हमारे हाथ में हैंl संबोधि साधना भगवान के हाथ में जो है उसकी सिखावन कम और जो हमारे हाथ में उसकी सिखावन ज्यादा देगीl
जैसे जबान देना ऊपर वाले के हाथ में है लेकिन उसका उपयोग कैसे करना हमारे हाथ में हाथ पाव देना भगवान का काम था और पावों से चलकर कहां जाना यह हमारा काम हैl हाथ ईश्वर ने दिए उनसे क्या करना है यह हमारे विवेक पर हैl भगवान हमें आंख नाक कान जवान हाथ पाव अंग उपांग कभी फिट करके 9 महीने में बाहर निकालता है और इनका उपयोग हमें कितने साल तक करना पड़ता हैl जीवन की अंतिम सांस तक उपयोग क्यों करना पड़ता है भगवान ने उनके हाथ में जो थाl
वह 9 महीने में पूरा किया उसके बाद की बाजी हमारे हाथ में छोड़ दीl साधना जीवन का यह मार्ग देती है कि इंसान जीवन को बेहतरीन तरीके से कैसे जी सकेl देखो भाई पत्नी जो है वही रहेगी और जो पति है वही रहेंगेl इतना ही नहीं उनके जो नेचर है वह भी लगभग वही रहने वाले हैंl पति को सुधारने के चक्कर में आप हार जाती हैंl यह सुधरने वाले नहीं तो जिसका जो नेचर हैl
वह भी सही रहेगा जो हमारे भाग्य में लिखा था वही हमारा जीवन साथी हमारे पास तो हम उसी के साथ सुखी रहे या दुखी रहे यह अपने हाथ में हैl इसका निर्णय भी हमें लेना है कि जिंदगी को कैसे जिया जाएl चाहे तो उसको स्वर्ग बना सकते हैं और चाहे तो उसको नरक भी बना सकते हैं घर एक मंदिर है और हमें विकल्प लेना है कि स्वयं को सुधारने का भीतर के कचरे को अगर हमने साफ कर लिया तो जो भी अमृत आएगा वह अमृत ही बना रहेगा l
जय जिनेंद्र जय महावीर🪷🪷🪷🪷🪷🪷



