एएमकेएम में कार्यकर्ता सम्मान समारोह
चेन्नई. एएमकेएम में विराजित साध्वी कंचनकुंवर व साध्वी डॉ.सुप्रभा ‘सुधाÓ के सानिध्य में साध्वी डॉ.उदितप्रभा ‘उषाÓ ने कहा कि संसार में अनेक कलाएं हैं पर जीवन जीने की कला सर्वश्रेष्ठ है, जो इसे हस्तगत कर ले उसका जीवन धन्य है। लंबा जीवन नहीं, बल्कि अभिमन्यु और गजसुकुमाल मुनि की तरह श्रेष्ठता से जीना महत्वपूर्ण है। जो अंधकार में प्रकाश की तरह जीता है वही महान है।
महावीर, बुद्ध जीवन के कलाकार थे। ज्योति बनकर जीएं धुआं बनकर नहीं। जीवन का मूल्य बढ़ाना है तो चंदन से सीखें जो काटने, छीलने और घिसने पर भी हर परिस्थति में सुगंध ही देता है, दुखों से घबराता नहीं वही लोकप्रिय बनता है। पू.गुरुवर्या की शिक्षा है तन से सेवा करते रहिए, मन से सबको प्यार करें और विनम्र बनें तो सारा संसार तुम्हें चाहेगा।
जो व्यक्ति श्रद्धायुक्त, सृजनशील, आत्मविश्वास से समर्पित होता है वही सच्चा कार्यकर्ता होता है और समाज के परमार्थ के लिए जीता है। उसका सम्मान उसे सद्कार्यों को करने के लिए और उत्साह और प्रोत्साहन देता है। जो सेवा करता है उसकी अनुमोदना अवश्य करनी चाहिए। सेवा और मैत्री व्यवहार से समाज में उच्च स्थान प्राप्त होता है। इस चातुर्मास अवधि में कार्य करने वाले सभी कार्यकर्ताओं को अर्चना सुशिष्या मंडल की ओर से कृतज्ञता और साधुवाद।
साध्वी डॉ.इमितप्रभा ने कहा कि मिथ्यात्व के कारण आत्मा सुख और दु:ख दोनों महसूस करती है लेकिन उसे आत्मिक सुख प्राप्त नहीं हो पाता। आत्मिक सुख सम्यकत्व से ही प्राप्त हो सकता है। आत्मिक सुख के लिए तीन रत्न सम्यक ज्ञान, दर्शन और चारित्र पाने होंगे। प्रभु ने सम्यकदर्शन को एक की संज्ञा दी है जिसके आगे कितने ही जीरो लगाएं तो महत्ता बढ़ती जाती है।

सम्यकदर्शन के साथ आराधना करेंगे तो कर्म निर्जरा अनन्तगुणा होगी। आगमों में सम्यकदर्शन को प्राण कहा है, भगवान महावीर के उपदेश का अमृत है सम्यकदर्शन। सम्यकत्व के 67 बोल में आगार धर्म बताया है। व्यवहार समकित में जो सुदेश, सुगुरु और सुधर्म को मन, वचन और काया से मानता है, और प्रतिकूल परिस्थितियां आ जाए तो परंपरा के देवी-देवदेताओं को वंदन, स्मरण कर सकते हैं लेकिन अपने वितराग धर्म पर दृढ़ रहना है। जितनी आस्था होगी भव-भ्रमण कम होगा।
चातुर्मास समिति के मंत्री शांतिलाल सिंघवी ने चातुर्मासकाल में अपना सहयोग देनेवालों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि लगभग 10 वर्षों से महासतीवंृद से विनती के बाद यह चातुर्मास हमें बहुत विनती के बाद प्राप्त हुआ और अब संपन्न होने जा रहा है। महासतीवंृद का बहुत बड़ा उपकार है जो देश के सुदूरप्रांत में हमसभी को जिनवाणी श्रवण का अवसर प्रदान किया।
इस दौरान अनेकों धार्मिक कार्यक्रम, आयोजन, प्रतियोगिताएं, महापुरुषों की जयंतियां और पुण्यतिथियां मनाई गई जिनके लिए जिन-जिन महानुभावों का सहयोग प्रत्यक्ष या परोक्ष रहा हम सभी उनके प्रति हृदय से कृतज्ञता ज्ञापित करते हैं, जिसके बिना चातुर्मास सुचारू रूप से हो पाना मुश्किल है, उनका सहयोग समाज को इसी प्रकार मिलता रहे। सुनिल चोरडिय़ा ने गुरुवर्या के प्रति अपने श्रद्धाभाव रखे।
श्री मधुकर उमराव अर्चना चातुर्मास समिति के सम्मान समारोह में आवास निवास समिति, गोचरी समिति, भोजन समिति, प्रवचन समिति, तपस्या पारणा समिति, चिकित्सा समिति, एएमकेएम महिला मंडल, विहार समिति, टीम सिद्धा, पुरुषवाक्कम संघ, पेरम्बूर संघ, नॉर्थटाउन संघ, चिंतादरीपेट संघ, कोसापेट संघ, वर्धमान महिला मंडल, ऑल इंडिया जैन कांफ्रेंस, समितियों के पदाधिकारी, कार्यकर्ताओं का माला और प्रतीकचिन्ह से सम्मान किया।

चातुर्मास समिति अध्यक्ष के.नवरतनमल चोरडिय़ा, पारसमल सुराणा, जेठमल चोरडिय़ा, शांतिलाल सिंघवी, एम.नवरतनमल चोरडिय़ा, गौतमचंद गुगलिया, किशोरचंद चोरडिय़ा, हीराचंद पींचा, रमेश कांकरिया, पदमचंद सुराणा, उत्तमचंद सुराणा, रिषभ, पुखराज, अशोककुमार चोरडिय़ा, सुरेन्द्र मेहता, सज्जनराज भंडारी, कल्याण चोरडिय़ा, सुरेश डंूगरवाल, कमलचंद कोठारी, राकेश वैद, रमेश कांकलिया, रूपचंद चोरडिय़ा, विमलचंद सुराणा सहित अनेकों समितियों, उपसमितियों के पदाधिकारी व कार्यकर्ता उपस्थित रहे। संगीतक्लास की महिलाओं ने गुरुवर्याओं के प्रति आभार भजन से अपने भाव व्यक्त किए।
धर्मसभा में अनेकों उपनगरीय स्थानों से श्रद्धालु उपस्थित रहे। दोपहर में संगीत अंताक्षरी प्रतियोगिता हुई। उत्तरपश्चिम दिशा में तेरह लोगस्स की सामूहिक साधना करवाई गई। 10 नवम्बर को टीम उड़ान टीम द्वारा भिक्षुदया का कार्यक्रम होगा। 11 नवम्बर को महासतीवंृद के प्रति कृतज्ञता-आभार ज्ञापन समारोह आयोजित होगा। 12 नवम्बर को लोकाशाह जयंती मनाई जाएगी और 13 नवम्बर को प्रात: भक्तामर पाठ के बाद 7.30 बजे अर्चना सुशिष्यामंडल का विहार विजयराज चोरडिय़ा के निवास पर होगा।