वीरपत्ता की पावन भूमि आमेट के जैन स्थानक मे साध्वी चन्दन बाला ने कहा कि भगवान महावीर से उनके शिष्य गौतम के द्वारा पूछे गए प्रश्न की भगवान यह संसार कब तक चलता रहेगा के समाधान में कहा कि जब तक मनुष्य में राग-द्वेष रहेगा तब तक उसका संसार चलता रहेगा। मनुष्य में राग ज्यादा होता है और निरंतर चलता रहता है, परंतु द्वेष थोड़ा-थोड़ा होता है। उन्होंने राग और द्वेष को विस्तार से समझाया। कहा कि मनुष्य को अपनी आत्मा के कल्याण हेतु एवं मोक्ष प्राप्त करने के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए राग और द्वेष से मुक्त होने का प्रयास करना चाहिए। राग से बचो, द्वेष से अपने आप बच जाओगे। पहले राग अपने शरीर से होता है। जब कोई दुर्घटना होती है तो आदमी पहले खुद को बचाता है। ये मानसिकता हर प्राणी जगत की है ।
साध्वी विनीत प्रज्ञा ने कहा कि आध्यात्मिकता के लिए राग-द्वेष को जीतना ही संसार को जीतना है। राग-द्वेष के कारण आदमी अवसाद में रहता है। भगवान महावीर ने कहा कि जो राग द्वेष को जीत लेता है वह खुद को जीत लेता है जिन शब्द का अर्थ राग-द्वेष के विजेता होता है और जिन शब्द से ही जैन शब्द आया है। हम राग द्वेष से मुक्त भगवान के उपासक है। साधु धर्म में राग खतरनाक है और गृहस्थ वर्ग में द्वेष खतरनाक है ।
साध्वी आनन्द प्रभा ने कहा कि राग द्वेष की भावना पर नियंत्रण रखना जरुरी है। असत्य वचन से सदैव बचना चाहिए।किसी भी विषय में कषाय के वश होकर या द्वेष भावना से किसी के गुण अवगुणों बताने में सहज रहना चाहिए। जिसके प्रति हमारा राग है वह भले ही खराब हो परंतु उसे अच्छा बताते हैं और जिसके प्रति द्वेष की भावना होती है, उसे हम अच्छा होने पर भी बुरा बताते है। उन्होंने कहा कि श्रावक के व्रतों में मन वचन काया से जिससे देश में अशांति हो या फिर जाति धर्म को कलंक लगे ऐसा झूठा लेख न में लिखूंगा। योग से इस दूसरे व्रत में बहुत ही सावधानी रखने की जरूरत है। सत्य बोलने पर कठिनाईया संकट भी आ सकता है परंतु जो सत्यवादी होता है वह किसी भी संकट व दुखों का सामना करने को तैयार रहते हैं घबराते नहीं हैं और अपने सत्य धर्म पर द्दढ रह कर अपने कर्मों की बेडिय़ों को तोड़कर परम पद को प्राप्त करते हैं।
मिडिया प्रभारी प्रकाश चंद्र बड़ोला ने बताया कि इस धर्म सभा में गुरु माता जयमाला मा. सा. के सांसारिक छोटे भाई किरण चंद बाफना, मूलचंद बाफना एवं नोखा मंडी से धर्म चन्द बफाना, गुरु माताजी मा. सा. की पोती भव्या बाफना ने गुरु माता को उनकी फोटो बनाकर सप्रेम भेंट दी, डूंगला से प्रेम बाई मोगरा मांगीलाल मेहता भी पधारे ,सूरत से नरेंद्र मंडोत अपने परिवार के साथ पधारे सभी का स्वागत सत्कार श्री संघ आमेट ने शाल-माला पहनाकर किया । इस धर्म सभा का संचालन ललित डांगी ने किया ।