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भगवान महावीर स्वामी का ज्ञान हमको जीने की कला सिखाता है: महासति दिव्यज्योतिजी म.सा

भगवान महावीर स्वामी का ज्ञान हमको जीने की कला सिखाता है: महासति दिव्यज्योतिजी म.सा

नागदा जं. निप्र- महावीर भवन में पूज्य महासति दिव्यज्योतिजी म.सा. ने कहा कि प्रभु महावीर का ज्ञान असीमित एवं अनंत था जैसे समुद्र की लहरो को कोई भी गिन नहीं सकता है वैसे ही बचपन से लगाकर पचपन तक, सुबह से लेकर शाम तक एवं रात से लगाकर प्रातःकाल ब्रम्ह मुहूर्त तक आपकी दिनचर्या कैसी होनी चाहिये ? क्या खाना क्या नहीं खाना, किस समय किन सिद्धान्तो नियमों का पालन करते हुए अपने ज्ञान, ध्यान से, कर्मो की निर्जरा कर धर्म के बंधन में बंधते हुए सुखी सम्पन्न, स्वच्छ निर्मल भावों से हम यह लोक एवं परलोक दोनो सुधार सकते है एवं निरोगी काया प्राप्त कर सकते है।

पूज्य महासति काव्याश्रीजी एवं नाव्याश्रीजी ने भगवान महावीर के जीवन चरित्र का वाचन करते हुए बताया कि प्रभु ने 12 वर्षो से भी अधिक जंगल में पद्मासन की मुद्रा में बैठक ध्यान साधना की । आज सभी योग गुरू इस आसन को निरोगी काया बनाने का सर्वोत्तम साधन बताते है। इसके बाद प्रभु के उपवास प्रणाली को भी शरीर के सभी विजातीय तत्व कचरा शरीर से बाहर निकालने का सबसे सस्ता, सरल एवं निःशुल्क उपाय मानते है।

 मीडिया प्रभारी महेन्द्र कांठेड़ एवं नितिन बुडावनवाला ने बताया कि पुच्छीसूनमसपुर जाप की प्रभावना निर्मला वर्धमानजी नवादावाला ने वितरीत की। तेला की लड़ी का लाभ इन्दुजी लोढा ने लिया। अतिथि सत्कार का लाभ संतोषजी रोहितजी मोहितजी कोलन ने लिया। संचालन सतीश जैन सांवेरवाला ने किया एवं आभार प्रकाशचन्द्र जैन लुणावत एवं सतीश जेन सांवेरवाला ने माना।

दिनांक 05/09/2022

 मीडिया प्रभारी

    महेन्द्र कांठेड

  नितिन बुडावनवाला

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