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शिक्षा को बढ़ावा दिया अच्छी बात है, लेकिन संस्कृति को बचाना भूल गए: साध्वी नूतन प्रभाश्री जी

शिक्षा को बढ़ावा दिया अच्छी बात है, लेकिन संस्कृति को बचाना भूल गए: साध्वी नूतन प्रभाश्री जी

भारत विकास परिषद के संस्कार शिविर में जैन साध्वियों ने बताया कि कैसे बचाए जा सकेंगे मानवीय मूल्य

शिवपुरी। संस्कार रहित शिक्षा उस एटम बम के समान है जिसका रचनात्मक उपयोग की अपेक्षा विध्वंशात्मक उपयोग होने की संभावना अधिक है। शिक्षा को बढ़ावा मिले अच्छी बात है, लेकिन शिक्षा के साथ-साथ संस्कार भी दिए जाने चाहिए। हमने शिक्षा को तो बढ़ावा दिया है, लेकिन संस्कृति को बचाना भूल गए हैं।

उक्त उद्गार प्रसिद्ध जैन साध्वी नूतन प्रभाश्री जी ने स्थानीय पोषद भवन में भारत विकास परिषद द्वारा आयोजित संस्कार शिविर में उद्बोधन देते हुए व्यक्त किए। उन्होंने पारिवारिक और मानवीय मूल्यों तथा बच्चों में संस्कार का बीज कैसे रोपें, इस पर ज्ञानवर्धक व्याख्यान दिया। प्रारंभ में भारत विकास परिषद के अध्यक्ष सतीश शर्मा और सचिव प्रगति खेमरिया ने अपने उद्बोधन में जैन साध्वियों का स्वागत करते हुए उनसे मार्गदर्शन मांगा।

साध्वी नूतन प्रभाश्री जी ने बताया कि जो संस्कार बच्चों को माता-पिता देते हैं वह कहीं नहीं मिल सकते, लेकिन यह ध्यान रखना चाहिए कि बच्चे माता-पिता के जीवन को भी देखते हैं और माता-पिता के जीवन एवं चरित्र का उन पर गहरा असर पड़ता है। वह आपके कथन नहीं, बल्कि आपके जीवन को देखते हैं। बच्चों के भविष्य निर्माण के लिए आवश्यक है कि पहले माता-पिता अपना निर्माण करें। जैसे माता-पिता होते हैं बच्चे वैसा ही बनने का प्रयास करते हैं।

गुरूणी मैया साध्वी रमणीक कुंवर जी ने बताया कि बच्चों को संस्कार माता-पिता का गर्भ से ही देना चाहिए। जैसे ही बच्चा गर्भ में आए वैसे ही माता-पिता को अपना जीवन स्वच्छ, निर्मल और आदर्श बनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि हम बच्चों के लिए तो सीमा रेखा खींचते हैं, लेकिन हमारे लिए कोई सीमा रेखा नहीं होती। जैसी अपेक्षा हम अपने बच्चों से करते हैं वैसा ही हमें भी होना चाहिए। साध्वी वंदनाश्री जी ने सुमधुर स्वर में भजन का गायन करते हुए अपनी भावना व्यक्त की कि जिस घर की नारी संस्कारी, उसका सारा घर आभारी…।

साध्वी नूतन प्रभाश्री जी ने भारत देश को संस्कार भूमि की उपमा दी और उन्होंने कहा कि यह वह उर्वरा भूमि है जिसमें भगवान राम, भगवान कृष्ण, गौतम और बुद्ध ने जन्म लिया है। अनेक देशभक्त, सेवाभावी, समाजसेवियों और महापुरुषों ने इस भूमि से अपनी जीवन यात्रा प्रारंभ की है। फिर क्या कारण है कि आज भारत में संस्कारों की कमी महसूस की जा रही है। इसका मुख्य कारण यह है कि हमारी जीवनशैली पर पाश्चात्य संस्कृति का असर हो रहा है। हम अपने बच्चों को इसी रंग ढंग में ढाल रहे हैं।

पूर्व की गौरवशाली संस्कृति को भूलते जा रहे हैं। पहले बच्चे अपने माता-पिता और घर के सभी बड़े सदस्यों को सुबह उठकर प्रणाम करते थे। प्रतिदिन मंदिर जाते थे, लेकिन आज यह सब देखने को नहीं मिल रहा है। हमारा सारा रूझान बच्चों को संस्कार देने की अपेक्षा उन्हें पैसा कमाने की मशीन बनाने पर अधिक केन्द्रित है। साध्वी जी ने कहा कि धन दौलत से हमें सुविधाएं मिल सकती हैं, लेकिन सुख नहीं। बच्चों को संस्कार ना देने के कारण ही वृद्धाश्रम में भीड़ बढ़ती जा रही है।

साध्वी जी ने संस्कार शिविर आयोजित करने के लिए भारत विकास परिषद की सराहना की और कहा कि समय-समय पर वह इसी तरह शिविर आयोजित करते रहें जिससे देश का भविष्य सुरक्षित हो सके। अंत में संस्कार शिविर की संयोजिका खुशबू जैन ने अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए जैन साध्वियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

नपाध्यक्ष गायत्री शर्मा और पार्षद जैन ने साध्वियों से लिया आशीर्वाद नगर पालिका अध्यक्ष गायत्री शर्मा और पार्षद ओमप्रकाश जैन ओमी ने मंगलवार को पोषद भवन पहुंचकर जैन साध्वी रमणीक कुंवर जी और साध्वी नूतन प्रभाश्री जी से आशीर्वाद लिया तथा सत्संग में भाग लिया। साध्वी रमणीक कुंवर जी ने नपाध्यक्ष गायत्री शर्मा को मार्गदर्शन देते हुए कहा कि आप नपाध्यक्ष के रूप में सेवा के मार्ग पर हो।

आप जिस पद पर हो उसका उपयोग कर धन भी कमा सकती हो और यश भी कमा सकती हो। लेकिन आपने जनता के दिलों को जीता तो यह जनता जर्नादन आपको भूल नहीं पाएगी और राजनीति में आप उन्नति के शिखर पर आसीन होंगी। उन्होंने कहा कि ईश्वर का जिन पर आशीर्वाद होता है उन्हें ही सेवा का मौका मिलता है।

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