“वसंत पंचमी पर विवेक, ज्ञान व साधना का संदेश—पूज्य गुरु भगवंतों का प्रेरक प्रवचन समागम”
भारत गौरव डॉक्टर श्री वरुण मुनि जी महाराज
राष्ट्र संत श्रमण संघीय उपप्रवर्तक परम पूज्य श्री पंकज मुनि जी महाराज, भारत गौरव डॉक्टर श्री वरुण मुनि जी महाराज एवं मुनिरत्न श्री रुपेश मुनि जी महाराज की दक्षिण भारत में धर्म-प्रभावक यात्रा सानंद गतिमान है। पिछले दस दिनों से पूज्य गुरु भगवंतों का मडगांव स्थित जैन स्थानक में मंगलमय प्रवास रहा। इस दौरान प्रतिदिन प्रवचनों एवं जप-साधना की श्रृंखला निरंतर चलती रही। मूर्तिपूजक, स्थानकवासी, तेरापंथी एवं दिगंबर समाज के श्रद्धालु भाई-बहनों ने गुरु दर्शन एवं प्रवचनों का लाभ लिया।
परम गुरु भक्त श्री प्रकाश जी गन्ना की भाव भरी विनती को ध्यान में रखते हुए पूज्य गुरुदेव उनके निवास स्थान विद्यानगर पधारे। वहां भी रात्रिकालीन प्रवचनों का सुंदर समागम आयोजित हुआ, जिसमें बच्चों, युवाओं एवं वृद्ध श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।
अपने प्रवचनों में पूज्य गुरुदेव ने वसंत पंचमी के पावन पर्व का महत्व बताते हुए फरमाया कि जैसे शीत ऋतु में प्रकृति भीतर से शांत रहती है, वैसे ही हमें भी ध्यान की गहराई में उतरकर मौन साधना करनी चाहिए। वसंत ऋतु इस बात का संकेत है कि प्रकृति द्वारा संचित ऊर्जा अब प्रकट होने का अवसर पाती है। इसी प्रकार ध्यान, मौन एवं स्वाध्याय से हमारे भीतर जो ऊर्जा एकाग्र होती है, उसे समाज के कल्याण एवं उत्थान में लगाना चाहिए।
पूज्य गुरुदेव ने कहा कि इस दिन मां भगवती सरस्वती की आराधना श्रद्धा से की जाती है। “सरस्वती” का अर्थ है “ज्ञान”, अतः अपने भीतर आत्मज्ञान को जगाना ही वास्तविक सरस्वती पूजा है। मां सरस्वती के वाहन “हंस” का उदाहरण देते हुए उन्होंने समझाया कि जैसे हंस दूध और पानी में से दूध को ग्रहण कर पानी छोड़ देता है, वैसे ही जीवन में हमें भी विवेक दृष्टि अपनाकर असार को छोड़कर सार को ग्रहण करना चाहिए।मां सरस्वती के हाथों में वीणा का संदेश बताते हुए पूज्य गुरुदेव ने कहा कि जीवन में प्रेम, मधुरता, स्नेह एवं सद्भाव का संगीत होना चाहिए। उनके हाथों में पुस्तक यह संकेत देती है कि केवल संसार की पुस्तकों का ही नहीं, बल्कि स्वयं की “जीवन-पुस्तक” का भी अध्ययन करें और उसे सुंदर ढंग से सजाने-संवारने का प्रयास करें। मां शारदा के हाथों में जप-माला यह संदेश देती है कि अधिक से अधिक अपने इष्ट का जप करें, क्योंकि जिसका इष्ट बलिष्ठ होता है, संसार भी उसका अनिष्ट नहीं कर सकता। इन सूत्रों को जीवन में अपनाने से ही जीवन में सच्चा वसंत आता है। इस अवसर पर मुनिरत्न श्री रुपेश मुनि जी महाराज ने मधुर गुरु-भक्ति गीत प्रस्तुत किया तथा परम पूज्य श्री पंकज मुनि जी महाराज के मुखारविंद से मंगल पाठ का श्रवण कर सभी गुरु भक्तों ने स्वयं को धन्य अनुभव किया।
इसके पश्चात पूज्य गुरु भगवंत मडगांव से विहार कर श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर, पोंडा पधारे। यहां एक-दो दिन का प्रवास रहेगा तथा रात्रिकालीन प्रवचन 8:30 बजे से 9:30 बजे तक होंगे। समाज के प्रमुख श्री सुरेश जी जैन, श्री भरत भाई पाटिल एवं श्री अभिजीत जी ने बताया कि हमारा यह परम सौभाग्य है कि गुरु भगवंतों का पुनः हमारी नगरी में मंगल पदार्पण हो रहा है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से अपील की कि अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर पूज्य गुरु भगवंतों की मंगलमयी अमृतवाणी का श्रवण कर अपने जीवन को धन्य बनाएं।