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जैन शास्त्र मंत्रो के शुद्ध उच्चारण ध्यान में करने का शास्त्र है

जैन शास्त्र मंत्रो के शुद्ध उच्चारण ध्यान में करने का शास्त्र है

नागदा जं. निप्र– महावीर भवन में महासति पूज्य दिव्यज्योतिजी म.सा. ने कहा कि जैन धर्म एवं समाज की स्थापना करने वाले भगवान महावीर ने 12 वर्ष 6 माह तक लगातार पदमासन में बैठकर ध्यान करते हुए मंत्रो का शुद्ध उच्चारण जिसमें अनंत शक्तियां विद्यमान है करते हुए मोक्ष मार्ग से केवल ज्ञान प्राप्त किया। महासति दिप्तीश्रीजी म.सा. ने कहा कि जब तन, मन, नीयत साफ है तभी मंत्रो का प्रभाव दिखलाई देता है। महासति सौम्याश्रीजी ने कहा कि नवकार महामंत्र में समस्त प्राणीयों एवं महापुरूषों को याद किया जाता है। इसमें भगवान से कुछ मांगा नहीं जाता है। पूज्य वैभवश्रीजी ने कहा कि मंत्र ही आपको शान्ति दे सकता है। पूज्य काव्याश्रीजी म.सा. एवं पूज्य नाव्याश्रीजी म.सा. ने धार्मिक स्तवन सुनाया गया।

 मीडीया प्रभारी महेन्द्र कांठेड़ एवं नितिन बुडावनवाला ने बताया कि श्रीमती मेघा संदीप कांठेड़ के 3 उपवास के शुभ अवसर पर अमृतबेन मारू एवं मनोरमाजी भण्डारी ने शॉल माला से सम्मानीत किया। जाप की प्रभावना सोनाली नितिन बुडावनवाला एवं कचरूलालजी कुशलजी भंसाली ने वितरीत की। आगत अतिथियों का स्वागत एवं अतिथि सत्कार प्रकाशचन्द्र नरेश विपिन नितिन बुडावनवाला ने लाभ लिया। संचालन राजेन्द्र कांठेड़ ने किया एवं आभार श्रीसंघ अध्यक्ष प्रकाशचन्द्र जैन लुणावत एवं चातुर्मास अध्यक्ष सतीश जैन सांवेरवाला ने माना।

दिनांक 10/09/2022

 मीडिया प्रभारी

    महेन्द्र कांठेड

  नितिन बुडावनवाला

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