(no subject)
सुंदेशा मुथा जैन भवन कोन्डितौप चेन्नई में जैनाचार्य श्रीमद् विजय रत्नसेन सुरीश्वरजी म.सा ने कहा कि :- मनुष्य जन्म की प्रत्येक पल अति कीमती है । इस जन्म को पाकर ही जीवात्मा परलोक और परमलोक – मोक्ष की साधना कर सकता है फिर भी जगत के अधिकतर लोग मनुष्य जन्म को पाकर व्यर्थ गवाँ देते है। बहुमुल्य अपने समय को फालतू और निष्प्रयोजन कार्यों में प्रसार कर देते है ।
जैसे कुंभार आदि अल्प -आय के कार्यों को जिन्दगी भर करने पर भी धनवान नहीं बनते है, जबकि हीरे का व्यापारी थोडे ही काल में अपने व्यापार से अपार धन को प्राप्त कर लेता है। वैसे ही नरक – तिर्यंच और देवों के भवो में सहन किये जाने वाले दुःखो से जीवात्मा अति अल्प प्रमाण मे पापो का क्षय कर सकता है। जबकि मनुष्य अपने जीवन में अति अल्पकाल में बडे प्रमाण में पाप क्षय कर पुण्य का बंध कर सकता है। प्रभु के बताए मार्ग की आराधना में जीवन की सच्ची सफलता है।
देवतागण अति सुख में मश्गुल बने हुए है, नारक जीव प्रतिपल अति दुःख को सहन कर रहे है और पशुओं का जीवन अज्ञानता , परवशता और अति भूख के कारण पीड़ित है। मात्र मनुष्य जन्म ही ऐसा है कि वह धर्म के वचनों को समझकर उसपर यथायोग्य आचरण कर सकता है। दुनिया उस मनुष्य का जीवन सफल मानती है जिसने अपने जीवन में धन -संपत्ति का संचय किया है। परंतु इसमें कोई तथ्य नहीं है। वास्तव में मनुष्य जन्म की सफलता दान -दया -परोपकार एवं आत्म हितकर रत्नत्रयी की आराधना में है।
कांच तुल्य नश्वर संपत्ति को छोड़ दर्शन ज्ञान और चारित्र रत्न पाने ही विशेष प्रयत्नशील बनना चाहिए।
दि .6सितम्बर को आचार्य श्री रत्नसेनसुरि द्वारा आलेखित New message for a new day पुस्तक का भव्य विमोचन एवं सुकृत अनुमोदन भावयात्रा प्रवचन दरम्यान होगी।