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गुनवन्तचन्द्रजी महाराज के देवलोकगमन होने पर  गुणानुवाद सभा

गुनवन्तचन्द्रजी महाराज के देवलोकगमन होने पर  गुणानुवाद सभा

उपाध्याय प्रवर श्री गुनवन्तचन्द्रजी महाराज के देवलोकगमन होने पर स्वाध्याय भवन, चेन्नई मे गुणानुवाद सभा

दिनांक 24 मई 2024 शुक्रवार को श्री जैन रत्न हितैषी श्रावक संघ, तमिलनाडु के तत्वावधान मे स्वाध्याय भवन, साहूकारपेट, चेन्नई मे जयगच्छीय उपाध्याय प्रवर गुनवन्तचन्द्रजी महाराज के पुण्य धरा पीपाड राजस्थान मे संथारा पूर्वक देवलोकगमन हो जाने पर गुणानुवाद किया गया |

श्री जैन रत्न हितैषी श्रावक संघ तमिलनाडु के कार्याध्यक्ष आर नरेन्द्रजी कांकरिया ने गुणानुवाद करते हुऐ कहा कि आपका जन्म दार्जलिंग के सोदाना ग्राम मे 5 अक्टूबर 1956 को देवचन्दजी- इन्द्रादेवीजी बैंगाणी के यहां हुआ, बाल्यकाल नागौर जिले के लाडनू ग्राम व कलकता मे बीता | आपके बड़े भ्राता ने भी भागवती दीक्षा ली और जिनशासन की प्रभावना की थी | युवा गुणवन्तचन्द्र ने सोलह वर्ष की युवा वय मे संसार से विरक्ति होने के पश्चात उन्नीस वर्ष की उम्र मे श्रदेय श्री जीतमलजी महाराज के मुखारविन्द से झूंठा रायपुर मे दीक्षित हुए व सोजत शहर मे छेदोपस्थापनीय चरित्र मे आरुढ़ हुए |

श्रदेय पूज्यश्री लालचंदजी महाराज के पास शिक्षा व आगम तत्वों के गूढ़ रहस्यों का अध्ययन किया | दीक्षित होने के पश्चात प्रथम चातुर्मास पीपाड शहर मे हुआ | आपका जीवन निर्लिप्ततापूर्ण रहा | 48 वर्षो तक संयम का दृढ़तापूर्वक पालन किया | करीब सोलह वर्षो से कभी लेटे नहीं, बैठे-बैठे ही रात्रि को भी जागृति रखते थे |

करीब तीन वर्षों से सानिध्य मे नेकचन्द्रजी मुनि की अस्वस्थता के कारण पीपाड विराजे | पिछले सप्ताह तेले व बेले की तपस्या करने के पश्चात जागृतिपूर्वक साधक के मुख्य मनोरथ संलेखना- संथारा करते हुए 23 मई 2024 को मध्यान्ह मे समाधिपूर्वक देवलोकगमन हुए |

वरिष्ठ स्वाध्यायी वीरेन्द्रजी कांकरिया ने उपाध्याय प्रवर व उनके सानिध्य मे सेवारत रहने वाले नेकचंद्र मुनि के चरित्रमय जीवन के अनेक संस्मरणों का उल्लेख किया |

गुणानुवाद सभा मे रुपराजजी सेठिया, गौतमचंदजी मुणोत, महावीरचन्दजी छाजेड़, इन्द्रचंदजी व अम्बालालजी कर्णावट,दीपकजी व योगेशजी श्रीश्रीमाल ने संथारा साधक की पावन स्मृति मे चार लोगस्स का ध्यान किया | तीर्थंकरों महापुरुषों आचार्य- उपाध्याय भगवन्तों,चरित्र आत्माओं की जयजयकार पूर्वक गुणानुवाद सभा पूर्ण हुई |

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