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आचार्य प्रवर चतुर्थ पटधर श्री शिव मुनि मसा कि जन्म जीवनी का हुआ वाचन 

आचार्य प्रवर चतुर्थ पटधर श्री शिव मुनि मसा कि जन्म जीवनी का हुआ वाचन 

कोडमबाक्कम वडपलनी श्री जैन संघ प्रांगण में आज रविवार तारीख 18 सितंबर को प.पू.सुधा कवर जी म सा आदि ठाणा 5 के सान्निध्य में उनके मुखारविंद से:-आचार्य प्रवर चतुर्थ पटधर श्री शिव मुनि मसा का जन्म 1942 में पंजाब में श्री चिरंजीवी लाल एवं विद्या देवी दंपत्ति के यहां हुआ था!

उनका जन्मोत्सव बड़ी धूमधाम से मनाया गया! उनका नाम शिवकुमार रखा गया था! 30 वर्ष की भरपूर जवानी में, यौवन की दहलीज में पांव रखते ही, उन्होंने भोग के बदले योग को चुन लिया था! मोह के दलदल में फंसने के बजाय संयम अंगीकार करने का निश्चय किया! विदेश भ्रमण एवं विदेशी संस्कृति की चकाचौंध देखने के पश्चात भी उन्होंने हमारी संस्कृति को ही चुना! उनके साथ उनकी तीन बहनों ने भी जैन भागवती दीक्षा को अंगीकार किया! आचार्य श्री जी 35 साल से निरंतर एकांतर कर रहे हैं! तप इनके जीवन के प्राण है! उनके जीवन की महानता अभ्यांतर तप है और यह तप अभी भी गतिमान है!

2015 में इंदौर में हुए साधु सम्मेलन में आचार्य श्री शिव मुनि महाराज साहब ने बहुत अच्छा मार्गदर्शन दिया! वे इतने सरल थे कि जहां कहीं भी साधु साध्वियों से विचार विमर्श हुआ, वहीं पर क्षमा याचना भी कर लेते थे और आज भी उतने ही सरल है! ज्ञान साधना और तनाव मुक्त जीवन मन के विकारों को नष्ट कर देता है! प्रखर वक्ता श्री विजय प्रभा जी ने फरमाया के आचार्य श्री के माता-पिता के सुसंस्कार और आचार्य श्री आत्मा राम जी की अमृतवाणी ही उन के प्रेरणा के स्रोत थे! जिसने जन्म लिया है उसकी मृत्यु निश्चित है! हमारा जीवन एक कच्चे घड़े के समान है जो तनिक धक्का लगते ही टूट जाता है! उस इंद्रधनुष के समान है जो देखते ही देखते विलुप्त हो जाता है!

आज आचार्य श्री जी क 81 वां जनम दिन है! वैराग्य भाव जागृत होने के पश्चात गुरु के चरणों में वंदन करने के पश्चात आचार्य श्री को संसार असार लगने लगा! जब उन्होंने अपने माता-पिता से आज्ञा मांगी तब उन्हें धक्का लगा और वे कहने लगे! संयम कांटे की धार है, नंगे पांव चलना पड़ता है! लेकिन वैराग्य के दृढ़ भाव एवं दृढ़ संकल्प होने की वजह से वे तनिक भी विचलित नहीं हुए! हल्दी का रंग समय के साथ लुप्त हो जाता है! लेकिन तिरयंच का रंग कभी भी विलुप्त नहीं होता! बहुत प्रयत्न करने के बाद माता-पिता को समझ में आ गया कि यह पवित्र आत्मा घर में रहने वाली नहीं है! यह तो समाज कल्याण एवं मानव कल्याण के लिए आतुर आत्मा है और उन्होंने स्वीकृति प्रदान कर दी! हम उनके चिरायु होने की प्रार्थना करते हैं!

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