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अणुव्रत व्यक्ति के चरित्र निर्माण में बनता सहभागी: साध्वी गवेषणाश्री

अणुव्रत व्यक्ति के चरित्र निर्माण में बनता सहभागी: साध्वी गवेषणाश्री

★ अणुव्रत अमृत महोत्सव वर्ष सम्पूर्ति समारोह पर

★ अणुव्रत व्याख्यानमाला का हुआ आयोजन

Sagevaani.com :चेन्नई/तिरुकल्लीकुण्ड्रम: अणुव्रत समिति, चेन्नई द्वारा अणुव्रत आन्दोलन के 75वें स्थापना वर्ष पर उद्घोषित अणुव्रत अमृत महोत्सव का सम्पूर्ति समारोह अणुव्रत अनुशास्ता, युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमणजी की सुशिष्या साध्वी डॉ गवेषणाश्री ठाणा 4 के सान्निध्य में ‘अणुव्रत व्याख्यानमाला’ के अंतर्निहित जैन भवन, तिरुकल्लीकुण्ड्रम में आयोजित हुआ।

◆ अणुव्रत का दीपक जलता है झंझावातों में
साध्वी डॉ गवेषणाश्री ने व्याख्यानमाला में धर्म परिषद् को सम्बोधित करते हुए कहा कि अणुबम के युग में अणुव्रत व्यक्तित्व विकास का पायदान प्रस्तुत कर रहा है।अणुव्रत व्यक्ति के चरित्र निर्माण में सहभागी बनता है। आचार्य श्री तुलसी द्वारा प्रवर्तित अणुव्रत आन्दोलन पर्यावरण की सुरक्षा प्रदान करता है।

साध्वीश्री ने आगे कहा कि रंगोली का रंग सात घण्टे, मेहन्दी का रंग सात दिन रहता है, लेकिन अणुव्रत का रंग जीवन भर रहता है। अणुव्रत का दीपक जलता है झंझावातों में। छोटे से बीज में वटवृक्ष बनने की क्षमता होती है, उसी तरह अणुव्रत के छोटे छोटे नियम स्वीकरण से व्यक्ति का स्वयं का विकास होता है और उससे समाज, देश और विश्व विकास की परिकल्पना साकार होती हैं।

◆ सामाजिक कार्यों में भी हो अहिंसक जीवन शैली
विशेष प्रेरणा पाथेय प्रदान करते हुए साध्वीश्री ने कहा कि हम भगवान महावीर के अनुयायी है, जैनी है। हमारा सम्यक् दायित्व होना चाहिए कि हम अपने जीवन व्यवहार से अणुव्रती बने। अधिक से अधिक कलुषता मुक्त रहे। शादी विवाह, जन्मोत्सव इत्यादि में अहिंसक प्रवृत्तियों का समावेश हो। इहलोक और परलोक को सुधारने के लिए जीवन को नशामुक्त बनायें। मांसाहार के प्रयोग स्थलों से दूर रहे।

◆ अणुव्रत से होता अहिंसा का ऊर्ध्वारोहण
साध्वी श्री मयंकप्रभा ने कहा कि असली आजादी को अपनाने का नारा देते हुए, कुर्सी प्रधान की जगह पुनः कृषि प्रधान देश बने रहने एवं समाज के सर्वोदय के लिए गुरुदेव श्री तुलसी ने आज से 75 वर्ष पूर्व अणुव्रत का सूत्रपात किया। अणुव्रती बनने से जीवन में हिंसा का अवरोहण होता है और अहिंसा का ऊर्ध्वारोहण होता है। साध्वी श्री मैरुप्रभा ने जिन्दगी का सार, संयम, साधना करलो एवं साध्वी श्री दक्षप्रभा ने व्रत की महिमा भारी, तोड़े व्रत से भव बंधन..  गीतिकाओं की सुन्दर प्रस्तुति दी।

◆ चारित्र निर्माण सम्पन्न बने शिक्षा – डॉ धींग
विशिष्ट अतिथि अणुव्रत लेखक पुरस्कार से सम्मानित, साहित्यकार डॉ श्री दिलीप धींग ने कहा कि राष्ट्रीय निर्माण के लिए शिक्षा जरूरी है। वर्तमान की शिक्षा प्रणाली में चरित्र निर्माण पाठ्यक्रमों का समावेश जरूरी है। शिक्षा जगत में अणुव्रत के साथ जीवन विज्ञान के प्रयोगों से चारित्र निर्माण सम्भव है। अणुव्रत जीवन शैली से पर्यावरण संतुलन बना रह सकता है। उससे मानव के साथ पशु जगत भी सहजता से अपना व्यवस्थित जीवन जी सकते हैं।श्रम, स्वालम्बन से समाज उत्थान हो सकता है।

◆ अणुव्रत से होता मन और बुद्धि का संतुलन
अणुव्रत समिति प्रतिनिधि वक्ता श्री गौतमचन्द सेठिया ने कहा कि अणुव्रत से मन और बुद्धि का संतुलन हो सकता है। संवेदनाओं का प्रसार होता है, करुणा का विकास होता है। व्यक्तिवादी मनोवृति और सामाजिक उत्तरदायित्व की संतुलित प्रवृत्ति प्रशस्त बनती हैं।

◆ अणुव्रत रैली

इससे पूर्व कार्यक्रम के शुभारम्भ से पहले शहर के मुख्य मार्गों व बाजार में अणुव्रत रैली निकाली गई। जिसमें अणुव्रत के उद्घोष उच्चारित कियें गयें। जैन भवन में पहुंच रैली धर्म सभा में परिवर्तित हुई।
साध्वीश्री के नमस्कार महामंत्र समुच्चारण के साथ कार्यक्रम प्रारंभ हुआ। अणुव्रत समिति चेन्नई एवं तिरुकल्लीकुण्ड्रम के श्रावक समाज ने अणुव्रत गीत संगान के साथ मंगलाचरण हुआ। श्री सम्पतराज बरोला अध्यक्ष तेरापंथ सभा, तिरुकल्लीकुण्ड्रम और चेन्नई अणुव्रत समिति अध्यक्ष ललित आंचलिया ने स्वागत स्वर प्रस्तुत करते हुए अणुविभा द्वारा संचालित गतिविधियों का उल्लेख किया।

तिरुकल्लीकुण्ड्रम सभा के निवर्तमान अध्यक्ष बाबुलाल खांटेड़, ताराचन्द बरलोटा अणुव्रत कार्यकर्ता ने अपने विचार व्यक्त किए। अणुव्रत समिति कोषाध्यक्ष पंकज चौपड़ा, तिरुकल्लीकुण्ड्रम सभा मंत्री प्रशांत दुगड़ ने आभार व्यक्त किया। कुशल संचालन अणुव्रत समिति, चेन्नई मंत्री स्वरूप चन्द दाँती ने किया। तपोनिष्ठ श्रावक श्री चम्पालाल दुगड़, व्यवस्थापक श्री विनोद धोका आदि अनेकों कार्यकर्ताओं का कार्यक्रम में सराहनीय सहयोग रहा। साध्वीश्री के मंगलपाठ के साथ व्याख्यानमाला का समापन हुआ।

            स्वरुप चन्द दाँती
मंत्री
अणुव्रत समिति, चेन्नई

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