चेन्नई. कोडमबाक्कम-वड़पलनी जैन भवन में विराजित साध्वी सुमित्रा ने कहा अंधेरा होने के बाद मनुष्य को कुछ दिखाई नहीं देता फिर भी मानव अपने जीवन के अंधकार को दूर नहीं कर रहा है। अचानक से लाइट जाने पर ऑख बंद जैसे हो जाती है।
उससे निकलने के लिए मनुष्य उपाय करता है। लेकिन जीवन के अंधकार को खत्म करने के लिए कुछ नहीं कर रहा है। जब तक मनुष्य प्रकास के महत्व को नहीं समझेगा अंधकार नहीं दूर होगा। नस्वर शरीर का कुछ भी पता नहीं है।
अभी सांसे आ रही है तो जीवन को बदल लो। अगले छड़ सांसे आएंगी या नहीं इसका पता किसी को नही है। जब तक सांस है तब तक शरीर को तपा कर आत्मा को शुद्ध किया जा सकता है। सांस जाते ही शरीर मिट्टी में मिल जाएगा और पाप खत्म होने तक भटकना पड़ेगा।
जीवन को अंधकार से प्रकास की ओर ले जाने के लिए विरक्ति की ओर बढ़ने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि सुखों का त्याग कर जो संयम अंगीकार करते है वो दूसरो के लिए प्रेणना की तरह बन जाते है। ऐसे लोगो को देख कर दूसरो के मन मे भी त्याग की भावना जगती है।
जब तक मनुष्य में त्याग की भावना नहीं जागेगी तब तक त्याग करना सम्भव नहीं हो सकता है। त्याग के लिए सबसे पहले आत्मा से उसकी भावना जागने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि दिखावे के लिए कुछ भी करना बेकार है। जो दिखावे के लिए त्याग करते हैं उनका समय तो जाता है पर कुछ हासिल नहीं हो पाता।
जीवन मे आगे जाना बड़ी बात नहीं होती है, बल्कि कैसे और किस मार्ग से आगे जा रहे है वह महत्वपूर्ण होता है। मार्ग सही रहा तो गलत व्यक्ति भी सही राह पा सकता है। लेकिन मार्ग गलत होने पर व्यक्ति कितना भी सही हो गलत मार्ग पर पहुच ही जाता है।
उन्होंने कहा कि सही और गलत के बारे में जानना मनुष्य का काम है। जो इसको जान जाएंगे वो सही मार्ग पर बढ़ते जाएंगे। यहा पर आन्नपूर्वी का जाप बड़े ही सुंदर से चल रहा है हर घर में जाप करवा रहे हैं जिससे घर में सुख शांति प्राप्त हो रही है। संचालन मंत्री देवीचंद बरलोटा ने किए।