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तप त्याग व सामायिक दिवस के रूप में मनाया गया दीक्षा दिवस

तप त्याग व सामायिक दिवस के रूप में मनाया गया दीक्षा दिवस

सेवा समिती द्वारा 401 वां मानव सेवा कार्यक्रम आयोजित

चेन्नई: टी.नगर : श्री एस एस जैन संघ माम्बलम-टी.नगर के तत्वावधान में लोकमान्य संत पूज्य श्री रूपचंदजी म सा एवं स्वर्ण संयम आराधक पूज्य श्री वीरेन्द्रमुनीजी महाराज का दीक्षा दिवस तप त्याग एवं 2- 2 सामायिक के साथ बर्किट रोड़ स्थित जैन स्थानक में मनाया गया। मुनिश्री वीरेंद्रमुनीजी म सा ने मंगलाचरण करवाया। मुनिश्री ने शेरे राजस्थान गुरूदेव रूपचन्दजी म सा के व्यक्तित्व कृतित्व व संयम जीवन पर सारगर्भित प्रवचन देते हुए उन्हें जिनशासन का महान प्रभावक राष्ट्र संत बताया।

अजैन होते हुए भी मात्र 13 वर्ष की उम्र में उन्होंने भागवती जैन दीक्षा अंगीकार की। उनके गुरू का नाम पूज्य श्री मोतीलालजी महाराज था लेकिन उनके स्वर्गवास के पश्चात वो मरूधर केसरी मिश्रीमलजी म.सा.के पास आ गए और जीवन पर्यंत उनके नाम को खूब रोशन किया। उन्होंने देशभर में अनेक गौशाला एवं जन परोपकारी संस्थाओं का निर्माण करवाया।

        संघ अध्यक्ष डॉ उत्तमचन्द गोठी ने आगंतुक श्रावक श्राविकाओं का स्वागत अभिनंदन करते हुए दोनों संतों के जीवन चारित्र का परिचय धर्म सभा में रखा कहा कि दीक्षा दिवस मोक्ष मार्ग की ओर अग्रसर होने का पहला कदम हैं। डॉ गोठी ने कहा कि भोग से योग, अंधकार से प्रकाश, असत्य से सत्य, राग से वीतराग व *अधर्म से धर्म की ओर अग्रसर होने का राज मार्ग हैं दीक्षा। डॉ गोठी* ने पूज्य श्री वीरेंद्रमुनीजी म सा के 59 चतुर्मासों का वर्णन धर्म सभा के सामने रखा और मुनिश्री को श्री संघ की तरफ से शुभ कामनाएँ प्रेषित की।

    इस प्रसंग पर भगवान महावीर सेवा समिती द्वारा 401 वा मानव सेवा व अन्नदानं का कार्यक्रम भी आयोजित किया गया जिसमे लगभग 300 लोगों को मिष्ठान युक्त भोजन दान दाताओं ने अपने हाथों से परोसा। धर्म सभा का संचालन डॉ उत्तमचन्द गोठी ने किया।

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