साहुकारपेट

महापुरुषों के जीवन चारित्र से मिलती है प्रेरणा: गौतममुनि

साहुकारपेट जैन भवन में विराजित उपप्रवर्तक गौतममुनि ने मरुधर केशरी मिश्रीमल की जयंती के अवसर पर शनिवार को उनका गुणगान गाते हुए कहा कि जीवन को पावन बनाने के लिए महापुरुषों ने धर्म का सुंदर संदेश देकर जीवन को सजाया है। महापुरुषों की जयंती मनाते हुए मनुष्य को उनके जीवन से प्रेरणा भी लेनी चाहिए। इससे मनुष्य को जीवन जीने का तरीका सीखने को मिलता है। उन्होंंने कहा कि अपने जीवन में बदलाव करने के लिए ही महापुरुषों का जन्मदिवस मनाया जाता है। उनके द्वारा दी गई प्रेरणा को मनुष्य को अपने जीवन में उतार कर उनका अनुसरण करना चाहिए। इस प्रकार से मनुष्य भी अपना जीवन स्वच्छ कर सकता है। जीवन चारित्र से जीवन जीने की कला मिलती है, लेकिन यह तभी संभव है जब हम महापुरुषों के जीवन को जानेंगे। मुनि ने कहा कि गुरु भगवंतों से ज्ञान प्राप्त करने के बाद मुनि मिश्रीमल ने लोगों में उस ज्ञान को बांटा था। अपने जीवन को बेहतर कर...

नवकार स्वयं के शुभ व शुद्ध भावों में है: मुनि संयमरत्न विजय

साहुकारपेट के श्री राजेन्द्र भवन में मुनि संयमरत्न विजय व भुवनरत्न विजय ने कहा कि नवकार संप्रदायों में नहीं, स्वयं के बाहर नहीं, नवकार तो स्वयं के शुभ व शुद्ध भावों में, स्वयं की श्वास-श्वास में है। नवकार तो सूर्य की भांति स्पष्ट है, सिर्फ आंखें खोलने की देरी है। वह जड़ता नहीं, जीवन है। जो सोता है, वह खोता है। नवकार में आया हुआ ‘त’ कहता है कि नवकार में नौ तत्वों के अतिरिक्त देव, गुरु और धर्म ये तीन तत्व भी हैं। इन तीनों तत्वों में गुरु तत्व मध्य में है जो हमें देव अर्थात् परमात्मा की पहचान कराने के साथ-साथ धर्म का मार्ग भी बताते हैं। सात वारों में भी गुरुवार मध्य में आता है और जिसकी जन्म-कुंडली में गुरु शक्तिशाली हो, उसके अन्य ग्रह कुछ भी नहीं बिगाड़ सकते। जो चलता है, वह पहुंचता है जो जागता है वह पाता है। नवकार के भीतर भावात्मक रूप से प्रवेश करना चाहिए जो भावात्मक रूप से नवकार ...

दान करने वालों का जन्मों तक यशगान होता है: गौतममुनि

साहुकारपेट जैन भवन में विराजित उपप्रवर्तक गौतममुनि ने  कहा जग में आकर दान करने वालों का जन्मों तक यशगान होता है। दान करने से ही मनुष्य का कर्म महान बनता है। दान ही धन की शोभा बढ़ाता है। तीनों लोक में दानी का ही गुणगान होता है। ऐसा कर व्यक्ति अपने जीवन में आनंद का अनुभव कर सकता है। जब आत्मा संसार को छोडक़र चारित्र को स्वीकार करती है तो जीवन की रक्षा होती है। जिन शासन से सारा संसार जगमगाता है। इसमें कई महान आत्माएं हुई जो अपने साथ दूसरों के लिए भी उपकार और भलाई का कार्य किया। साधु वही होते है जो खुद के साथ दूसरों के धर्म कार्य में सहयोगी बनते हैं। ऐसे साधु ही जन जन के जीवन का कल्याण करते हैं। मनुष्य  दान, शील, तप और भावना के मार्ग पर चल कर अपने साथ दूसरों के जीवन का भी उत्थान कर सकता है। उनके इस त्याग से उनका जीवन चमक जाएगा। उन्होंने कहा धर्म के प्रति जिनके हृदय में श्रद्धा और आस्था होती है व...

नवकार में प्रवेश पाने वाला अष्टकर्मों को तोड़ देता है: मुनि संयमरत्न विजय

साहुकारपेट स्थित राजेन्द्र भवन में विराजित मुनि संयमरत्न विजय ने कहा नवकार में प्रवेश पाने वाला अष्टकर्मों को तोड़ देता है। नवकार का ध्यान करने पर माया से मुक्ति व सरलता से संयुक्ति होती है। नवकार में पांच बार ‘नमो’ आया है जो हमें अहंकार से मुक्त होने का संदेश देता है। अहंकार का भार ही हमें ऊपर उठने नहीं देता। हम अपने ही भार से दबे रहते हैं। आत्मा अहंकार के कारण ही परमात्मा से दूर हो जाती है। परमात्मा की ओर केवल वे ही गति कर पाते हैं, जो सर्वप्रकार से स्वयं भारमुक्त हो जाते हैं। परमात्मा के मंदिर में प्रवेश करने का अधिकारी वही है, जो स्वयं की अहंता के भार से मुक्त हो गया है। मनुष्य का शरीर तो उस मिट्टी के दीये की तरह है, जो मिट्टी से बना है और अंत में मिट्टी में ही विलीन हो जाता है और आत्मा उस दीपक की ज्योति की तरह है, जो सदैव ऊपर की ओर उठना व परम तत्व परमात्मा को पाना चाहती है...

चौदह पूर्व का सार है नवकार: मुनि संयमरत्न विजय

साहुकारपेट स्थित राजेन्द्र भवन में जारी नवदिवसीय नवकार महामंत्र की आराधना के पांचवें दिन मुनि संयमरत्न विजय ने एसो पंच नमुक्कारो पद के वर्णानुसार एलुर, सोनागिरि (जालोर), पंचासरा,चंद्रावती, नडिय़ाद, मुछाला महावीर, कापरड़ाजी व रोजाणा तीर्थ की भाव यात्रा करवाई। मुनि ने बताया कि नवकार के प्रभाव से हमें लोभ से निवृत्ति और संतोष की प्राप्ति होती है। नवकार के कुल 68 अक्षर होते हैं और 6+8 का योग करने पर 14 होते हैं। नवकार में चौदह बार न(ण) आता है जो नौ तत्व और पांच ज्ञान का प्रतीक है। 14 का अंक और चौदह ‘न’ इस बात का भी संकेत करते हैं कि नवकार मंत्र चौदह पूर्व का सार है। जिनशासन का सार और चौदह पूर्वों का समावेशक यह नवकार मंत्र जिसके मन-मंदिर में प्रतिष्ठित है, उसका संसार कुछ नहीं बिगाड़ सकता। बिना ज्ञान के दया धर्म का पालन करना असंभव है। ज्ञानी व्यक्ति एक श्वासोच्छवास में जितने कर्मों की...

मनुष्य जन्म बहुत ही अनमोल है: गौतममुनि

साहुकारपेट जैन भवन में विराजित उपप्रवर्तक गौतममुनि ने कहा मनुष्य जन्म बहुत ही अनमोल है इसलिए समय को व्यर्थ करने के बजाय सत्संग व प्रभु भक्ति में ध्यान लगाना चाहिए। यह भव बहुत ही महत्वपूर्ण है इसलिए सोच समझ कर ही आगे बढऩा चाहिए। उन्होंने कहा इस स्वार्थी दुनिया में बहुत ही संभल कर चलने की जरूरत है। मनुष्य को गुरुदेवों के सानिध्य में जाकर ज्ञान प्राप्ति करनी चाहिए। जिस तरह सागर में से एक बूंद जाने पर उसे कोई फर्क नहीं पड़ता उसी प्रकार गुरुदेवों के पास ज्ञान का भंडार होता है। उनके सान्निध्य में जाकर भव को व्यर्थ होने से बचा लेना चाहिए। जीवन में एक दूसरे के प्रति प्रेम भाव रखें। परिवार में अगर एकता और एक दूसरे को समझने का भाव होगा तो धर्म, तप करने का भी अलग ही आनंद मिलेगा। अपने स्वर्ग जैसे परिवार को नरक बनाने से बचें। उन्होंने कहा अपने इस अनमोल जीवन को राग- द्वेष से नहीं बल्कि प्रेम भाव से बिता...

निर्मल भाव से होता है आत्म-कल्याण : मुनि संयमरत्न विजय

चेन्नई. साहुकारपेट स्थित राजेन्द्र भवन में विराजित मुनि संयमरत्न विजय ने कस्तूरी-प्रकरण के भाव-प्रक्रम का वर्णन करते हुए कहा बिना भाव के किया गया कोई भी अनुष्ठान शुभ फल नहीं देता। हमारे भाव नि:शल्य-निर्दोष होने चाहिए। निर्दोष या निर्मल भावों से ही आत्म-कल्याण होता है। सद्भावना से सद्गति व दुर्भावना से दुर्गति होती है। बिना भाव से दिया गया दान व्यक्ति के लिए दुखदाई होता है, बिना भाव के किया गया शील का पालन कष्टदायी होता है। बिना भाव से किया गया तप मात्र शरीर को सुखाने जैसा ही होता है अत: जो भी क्रिया हम करें भाव के साथ करें। जिसके भीतर सद्भावना नहीं होती वह सोचता है कि दान देने से धन की हानि होगी, शीलपालन से भोग की सामग्री नष्ट हो जाएगी, तप करने से क्लेश होगा, पढऩे से कंठ सूखने लगेंगे, नमस्कार करने से मानहानि होगी, व्रत धारण करने से दु:ख होगा, लेकिन बुद्धिमान व्यक्ति सद्भावना के साथ सभी सत्...

आंतरिक सुख के लिए होती है जीववाणी: गौतममुनि

चेन्नई. साहुकारपेट जैन भवन में विराजित उपप्रवर्तक गौतममुनि ने कहा जीववाणी मनोरंजन के लिए नहीं बल्कि आंतरिक सुख देने के लिए होती है। कोई भी कार्य वाहवाही कमाने के लिए नहीं बल्कि आत्मा की निर्जरा के लिए की जानी चाहिए। भाग्यशाली लोग मन से परमात्मा की वाणी को जीवन में उतारने की कोशिश करते हंै। जीवन की छोटी-छोटी सफलता ही लोगों को आगे बढ़ाती है। इसलिए मनुष्य को उसके हर छोटे कार्य को भाव के साथ ही करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि धर्म और आराधना के कार्य को दिल से ही करना चाहिए। बिना मन के किए गए कार्य का कोई मतलब नहीं होता है। दिल से किया हुआ कार्य ही मनुष्य को मंजील तक पहुंचाता है। वर्तमान में लोग धर्म के कार्य तो करते हैं पर उनमे भाव नहीं होता। भाव से धर्म करने वाला मनुष्य अपने जीवन को पावन बना लेता है। अगर मनुष्य प्रवचन भी दिल से सुन कर बताए मार्गों पर चले तो उसके जीवन की दिशा ही बदल जाएगी। सागरमुन...

मुश्किल से होता है संत समागम : संत कृपाराम

चेन्नई. साहुकारपेट में विराजित संत कृपाराम ने कहा संतों का समागम बहुत मुश्किल से मिलता है। संतों का आशीर्वाद हमेशा शांति प्रदान करता है। संत दर्शन हमेशा भाग्य से ही प्राप्त होते हैं। गुरुदेव ने संत राजाराम के साथ माधवरम में जैन तेरापंथ नगर स्थित महाश्रमण सभागार में विराजित आचार्य महाश्रमण के दर्शन कर आशीर्वाद लेकर उनसे मुलाकात की। संत राजाराम ने कहा चेन्नई के श्रद्धालु भाग्यशाली हैं जिनको आचार्य महाश्रमण का सानिध्य एवं प्रवचन प्राप्त हो रहा है। ऐसा मौका बार बार नहीं मिलता। आचार्य जो सत्संग रूपी हीरे दे रहे हैं वे हमेशा हमारी जिंदगी में चमक रखेंगे, उनको संभाल के रखें एवं जीवन में उतारने का प्रयास करें। संत राजाराम और संत कृपाराम का तेरापंथ जैन समाज द्वारा अभिनंदन किया गया। इस मौके पर तेरापंथ सभाध्यक्ष धर्मीचंद लूंकड़, प्यारेलाल पीतलिया, गुरुकृपा सेवा समिति के मोहनलाल खत्री, अशोक रावल, विजय ...

दूसरों के प्रति सेवा भाव रखें: गौतममुनि

चेन्नई. साहुकारपेट जैन भवन में विराजित उपप्रवर्तक गौतममुनि ने सोमवार को कहा सेवा करना एक विशिष्ट और आंतरिक तप होता है। अपने परिवार, पड़ोसी और समाज के साथ अध्यात्म क्षेत्र में गुरुभगवंतों की सेवा करना जीवन को आनंद से भर देता है। मनुष्य में सेवा करने का भाव के साथ लक्ष्य भी होना चाहिए। उत्तम भाव रखने वाले लोग अपने दोस्त यार को भी धर्म के कार्यो से जोडऩे का प्रयास करते हैं। ऐसा करने पर अपने आप ही जीवन में खुशी के माहौल बनने लगते है। वर्तमान में लोग थोड़े से पैसे की वजह से गलत कार्य करने में लगे हुए हैं जबकि उन्हें ऐसा कभी नहीं करना चाहिए। धर्म के मार्ग पर चलने वाला मनुष्य ऐसा कभी नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि मनुष्य की आत्मा में पुण्य के प्रकाश का उदय होने पर भयंकर अंधकार में भी पुण्य का मार्ग मिल जाता है। जीवन से अपने प्रत्येक बुराई को समाप्त करने का प्रयास करते रहना चाहिए। समाज के उत्थान के ल...

तप से होता है कर्मों का नाश: मुनि संयमरत्न विजय

चेन्नई. साहुकारपेट स्थित राजेन्द्र भवन में विराजित मुनि संयमरत्न विजय ने कस्तूरी प्रकरण के तप-प्रक्रम का वर्णन करते हुए कहा कि जिस प्रकार बिना अग्नि के भोजन नहीं पकता, कोमल मिट्टी के बिना घड़ा नहीं बनता, तंतुओं के बिना कपड़ा नहीं बनता उसी प्रकार बिना तप के कर्मों का नाश नहीं होता। कुशलता रूपी कमल को विकसित करने के लिए सूर्य के समान, शील रूपी वृक्ष को बढ़ाने के लिए पानी के समान, विषय रूपी पक्षी को पकडऩे के लिए जाल समान, क्लेश रूपी बेल को जलाने के लिए अग्नि समान, स्वर्ग मार्ग की ओर जाने के लिए वाहन समान ऐसे मोक्ष दिलाने वाले तप को आकांक्षा, अपेक्षा रहित होकर करना चाहिए। इंद्रिय रूपी हाथी को सही मार्ग की ओर चलाने के लिए तप अंकुश के समान है, ऐसे मोक्ष प्रदायक तप को भोजन के प्रति निरासक्त होकर करना चाहिए। जैसे समुद्र के प्रति नदी, विनयवान के प्रति विद्या, सूर्य के प्रति किरण, वृक्ष के प्रति बेल...

कड़वी बोली से उत्पन्न होता है राग-द्वेष: गौतममुनि

चेन्नई. मनुष्य का प्रत्येक कार्य अगर आत्मा से हो तो वह दूसरों को भी आनंद प्रदान करता है। साहुकारपेट जैन भवन में विराजित उपप्रवर्तक गौतममुनि ने शनिवार को कहा कि जीवन में जिस चीज के करने से आत्मा को शांति और आनंद मिले वही करना चाहिए। दुख देने वाले चीजोंं से दूरी बना कर रखनी चाहिए। लेकिन गलत भाव से दूसरों में भी राग द्वेष की भावना उत्पन्न होती है। जीवन मेंं कोई भी कार्य करने से पहले मन में सरलता होनी चाहिए। अपने द्वारा कहा हुआ एक भी गलत शब्द दूसरों के मन में राग द्वेष की भावना उत्पन्न कर सकता है। इसलिए मनुष्य को किसी के सामने कुछ भी बोलने से पहले बहुत बार सोचने की जरूरत होती है। किसी को चुभने वाले शब्द का प्रयोग नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमेशा मीठे शब्द का ही प्रयोग करना चाहिए, क्योंकि एक कड़वा शब्द जीवन भर के रिश्ते को पल भर में खत्म कर सकता है। शब्दों में बहुत ताकत होती है और उस ताकत...

Skip to toolbar