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श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाई

अयनावरम स्थित जैन दादावाड़ी में चातुर्मासार्थ विराजित साध्वी कुमुदलता व अन्य साध्वीवृन्द के सान्निध्य में सोमवार को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाई गई। इस अवसर पर साध...

अटूट विश्वास के धनी थे मरुधर केशरी: साध्वी धर्मप्रभा

श्री एसएस जैन संघ एमकेबी नगर एवं साध्वी धर्मप्रभा व स्नेहप्रभा के सान्निध्य में मरुधर केशरी मिश्रीमल एवं वरिष्ठ प्रवर्तक रूपमुनि की जन्म जयंती मनाई गई। विशिष्ट ...

पदार्थ को हटा दें तो विषय स्वत: निष्फल हो जाएंगे: उपाध्याय प्रवर प्रवीणऋषि

सोमवार को श्री एमकेएम जैन मेमोरियल सेंटर, पुरुषावाक्कम, चेन्नई में चातुर्मासार्थ विराजित उपाध्याय प्रवर प्रवीणऋषि महाराज एवं तीर्थेशऋषि महाराज के प्रवचन कार्यक्...

जीवन में जो घटनाएं घटती हैं वे मनुष्य का नसीब हैं: गौतममुनि

साहुकारपेट जैन भवन में विराजित उपप्रवर्तक गौतममुनि ने जन्माष्टमी पर भगवान श्रीकृष्ण के जन्म से पहले की कुछ घटनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कुछ महापुरुष ऐसे ...

चातुर्मासिक प्रवचन की कड़ी: विमलशिष्य वीरेन्द्र मुनि

कोयम्बत्तूर आर एस पुरम स्थित आराधना भवन में चातुर्मासिक प्रवचन की कड़ी में विमलशिष्य वीरेन्द्र मुनि ने जैन दिवाकर दरबार में धर्म सभा को संबोधित करते हुवे कहा कि ...

कर्मवाद के न्यायालय में नहीं कोई भेदभाव : आचार्य श्री महाश्रमण

भगवान महावीर के जीव ने अनन्त भव किये हैं| आगमों में उनके 27 मुख्य भवों का वर्णन मिलता हैं| उनका जीव नीचे में सातवीं नरक तक गया, तो कभी चक्रवर्ती, वासुदेव भी बना...

कम समय में दम का कार्य कर गए तरुणसागर जी: संयमरत्न विजय

साहुकार पेठ स्थित राजेन्द्र भवन में विराजित आचार्य संयमरत्न विजय कोंडीतोप में विराजित आचार्य पुष्पदंतसागर  के क्रांतिकारी शिष्य तरुणसागर को श्रद्धांजलि- अर्पित ...

नर्तन नरक का भी कारण है – आचार्य पुष्पदंत सागर

कोंडीतोप स्थित सुंदेशा मुथा भवन में विराजित आचार्य पुष्पदंत सागर ने कहा कि जिस पत्थर से पुल का निर्माण होता है उसी से दीवार भी बनती है। जो फूल भगवान को चढ़ते है...

परमात्मा कारण देखते हैं और यह संसार परिणाम: प्रवीणऋषि

पुरुषवाक्कम स्थित एमकेएम में विराजित उपाध्याय प्रवर प्रवीणऋषि ने कहा परमात्मा कारण देखते हैं और यह संसार परिणाम को देखता है। जब कारण बदल जाएगा तो परिणाम अपने आप...

अगर राम मर्यादा पुरुषोत्तम थे तो कृष्ण कर्मयोगी : ज्ञानमुनि

यहां शांति भवन में ज्ञानमुनि एवं लोकेश मुनि के सन्निध्य में कृष्ण जन्माष्टमी मनाई गई। अवसर पर ज्ञानमुनि ने कहा अगर श्री राम मर्यादा पुरुषोत्तम थे तो श्री कृष्ण ...

भक्त की भक्ति में है मुक्ति का आकर्षण: संयमरत्न विजय

साहुकारपेट स्थित राजेन्द्र भवन विराजित मुनिगण संयमरत्न विजय व भुवनरत्न विजय के सान्निध्य में मासखमण, सिद्धि तप, भक्तामर तप आदि तपश्चर्या के निमित्त त्रिदिवसीय म...

सकारात्मक विचार व्यक्ति को पशुपति बना देते हैं

कोंडीतोप स्थित सुंदेशा मूथा भवन में विराजित आचार्य पुष्पदंत सागर ने कहा व्यक्ति को चाहिए कि वह फूलों की तरह सुगंध बांटे एवं सदाचार का पालन करे। जानवर, जानवर की ...

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