चेन्नई. पुरुषवाक्कम स्थित एएमकेएम में विराजित महासती साध्वी कंचनकुंवर के सानिध्य में साध्वी डॉ. हेमप्रभा ने कहा वर्तमान में पाश्चात्य संस्कृति के प्रभाव से संस्कारों का संवर्धन, प्रवर्धन जटिल समस्या बन गया है। आजकल इंटरनेट गुरु बन गया है, मोबाइल प्राण, वाट्सएप-फेसबुक जीवन, कंप्यूटर-लैपटोप बाप और टीवी मां बन गई है। ऐसी पीढ़ी में संस्कारों का बीजारोपण कठिन है। आधुनिक युग में भौतिक सुविधाओं के मायाजाल की पाश्चात्य हवा ने शुद्ध खानपान, रहनसहन और चिंतन के जीवन को नष्ट कर दिया है। पहनावा एक जैसा हो गया है कि पता नहीं चलता कि स्त्री है या पुरुष। भौतिक साधन, अपार धन-वैभव, विलास की मनमोहक चकाचौंध ने समाज और संस्कृति के सामने गंभीर परिस्थितियां उत्पन्न कर दी है। सभी को पता है इन सभी के कारण लेकिन कोई भी इनसे बचना नहीं चाहता। समाज में फैल रहे कुसंस्कारों के कारण में सबसे अधिक दोष माता-पिता का है। आजक...
कुम्बलगोडु, बेंगलुरु (कर्नाटक): आत्मोत्थान के महापर्व पर्युषण की आध्यात्मिक धूम जन-जन को अपनी ओर आकृष्ट कर रही है। तभी तो जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के ग्यारहवें अनुशास्ता आचार्यश्री महाश्रमणजी की पावन सन्निधि में श्रद्धालुओं की इतनी विराट उपस्थिति हो रही है कि विशाल पंडाल भी मानों बौना साबित होता जा रहा है। जैन धर्म में विशेष स्थान रखने वाले इस महापर्व का आध्यात्मिक लाभ उठाने के लिए जन-जन उत्साहित, उल्लसित है। शनिवार को आचार्यश्री ने अपने प्रवास स्थल से कन्वेंशन हाॅल की ओर पधारे। आचार्यश्री ने महामंत्रोच्चार के साथ मुख्य कार्यक्रम का शुभारम्भ हुआ। साध्वी विशालयशाजी ने भगवान अरिष्टनेमि के जीवन वृतांत का वर्णन श्रद्धालुओं को सुनाया। मुख्यमुनिश्री महावीरकुमारजी ने संयम धर्म से संबंधित गीत का संगान किया। साध्वीवर्या साध्वी सम्बुद्धयशाजी ने संयम धर्म को विवेचित करते हुए लोगों को संयम के द्...
महावीर कल्याणक महोत्सव एवं डूप्लीकेट्स पदाधिकारियों की नाट्य प्रस्तुति का हुआ मनोरंजक आयोजन बेंगलूरु। पर्वाधिराज पर्युषण पर्व के पांचवें दिन यहां वीवीपुरम स्थित महावीर धर्मशाला में श्रमण भगवान महावीर स्वामी का कल्याणक महोत्सव नृत्य नाटिका के साथ मनाया गया, प्राचीन एवं अर्वाधीन नारी पर प्रवचन हुआ तथा मनोरंजक डूप्लीकेट्स पदाधिकारियों का वेशधारण कर चातुर्मासिक आयोजन की रुपरेखा का ना्ट्य मंचन किया गया। जैन दिवाकरीय शासनसिंहनी, ज्योतिष चंद्रिका साध्वीश्री डाॅ.कुमुदलताजी की पावन निश्रा में गुरु दिवाकर केवल कमला वर्षावास समिति के तत्वावधान मेें साध्वीश्री डॉ पद्मकीर्तिजी व राजकीर्तिजी के निर्देशन में महिला समिति एवं बालिका मंडल की इस प्रस्तुति का नेतृत्व उषा मूथा व संचालन रंजना गुलेच्छा ने किया। इस अवसर पर डाॅ.कुमुदलताजी ने धर्मसभा में उपस्थित बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि...
चेन्नई. ट्रिप्लीकेन स्थित तेरापंथ भवन में मुनि रमेश कुमार के सान्निध्य में पर्यूषण पर्व का चौथा दिन वाणी संयम दिवस के रूप में मनाया गया। इस मौके पर मुनि रमेश कुमार ने कहा- सत्य को सभी धर्म-दर्शनों ने स्वीकार किया है। सत्य और अहिंसा को अलग-अलग नहीं किया जा सकता। सत्य को भगवान व ब्रह्म भी कहा है। लोक में सार भूत तत्व भी सत्य को ही माना है। धार्मिक साहित्य सत्य की गौरव गाथाओं से भरे हैं, परन्तु जीवन व्यवहार में सत्य होना चाहिए। सच्चा धार्मिक वही कहलाता है जो सत्य को जीवन व्यवहार में अपनाता है। सत्य के मार्ग पर चलने वाला इस इहलोक और परलोक से भयभीत नहीं होता। वह अपने जीवन व्यवहार से सबको अभय दान देता है। गृहस्थ को धर्मस्थल और धर्म गुरुओं के सामने असत्य भाषा का प्रयोग कभी नहीं करना चाहिए। मुनि सुबोध कुमार ने कहा जो उत्तम विचारों का धनी है वह जीवन में आगे बढ़ता है । विचारों की पहचान वाणी और व्यवह...
चेन्नई. बुधवार को पुरुषवाक्कम स्थित एएमकेएम में विराजित साध्वी कंचनकंवर, साध्वी डॉ.सुप्रभा के सानिध्य में साध्वी डॉ.उदितप्रभा ने कहा पर्व आते हैं और चले जाते हैं लेकिन हमें स्वयं को जांचना चाहिए कि हमने प्रगति की या नहीं। अन्तरमन के दर्पण में झांकना है कि आत्मा से कषायों का मैल साफ कर रहे हैं या नहीं। हम गतिशील और क्रियाशील हैं पर प्रगतिशील हैं या नहीं। सम्यकत्व से अनादिकाल के भव भ्रमण का छेदन होता है। सम्यकत्व के दिव्य प्रकाश में अपनी आत्मा को जांचें। सम्यकदर्शी हैं तो की गई सभी क्रियाएं सम्यक ज्ञान, सम्यक दर्शन और सम्यक चारित्र हो जाएगी। सम्यक के स्पर्श से संसार सागर में कर्म रूपी मोती भी गल जाएंगे। राजा श्रेणिक ने समकित से ही तीर्थंकर नामकर्म का बंध किया। सम्यकदर्शन का प्रवाह अलौकिक है। आगम कहते हैं कि समकित से संसार सीमित हो जाता है और यह निश्चित हो जाता है कि वह जीवात्मा मुक्त होगी ही...
कुम्बलगोडु, बेंगलुरु (कर्नाटक): आचार्यश्री तुलसी महाप्रज्ञ चेतना सेवाकेन्द्र में चतुर्मास कर रहे जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के ग्यारहवें अनुशास्ता आचार्यश्री महाश्रमणजी की पावन सन्निधि में आरम्भ हुए पर्युषण महापर्व में ज्ञानगंगा की अविरल धारा इतनी गति से साथ प्रवाहित हो रही है कि आने वाले प्रत्येक श्रद्धालु अपने आपको आप्लावित महसूस कर रहा है। आचार्यश्री की मंगल सन्निधि में प्रातः से ही साधु-साध्वियों द्वारा ज्ञान प्राप्त करते हुए श्रद्धालु जब आचार्यश्री की मंगलवाणी का श्रवण कर लेते हैं तो मानों पूर्ण तृप्ति का अनुभव करते हैं। उसके उपरान्त भी पूरे दिन चारित्रात्माओं द्वारा नियमानुसार धर्म, अध्यात्म आदि के माध्यम से लोगों के जीवन में बदलाव लाने का प्रयास कर रहे हैं। यों माना जा सकता है कि आचार्यश्री की पावन सन्निधि में वर्तमान में मानों कोई महाकुम्भ लगा हुआ है। पर्युषण महापर्व के दूसरे ...
इंदौर। कृष्णागिरी पीठाधिपति यतिवर्य डॉ. वसंतविजयजी म.सा. ने बुधवार को कहा कि जैन धर्म का विशेष पर्यूषण का पावन पर्व कर्मबंधनों से बचने और आत्मा को परमात्मा से जोडऩे, अपने आप का आत्मपरीक्षण करने का संदेश देता है। यहां श्री नगीन भाई कोठारी चैरिटेबल ट्रस्ट के तत्वावधान में हृींकारगिरी तीर्थ धाम में प्रवचन कर रहे डॉ. वसंतविजयजी म.सा. ने कहा कि मोक्ष के लिए आत्म भाव जरुरी होता है इसके लिए त्याग, तपस्या और संयम जरुरी होता है। उन्होंने कहा कि आराधना, साधना आदि पर्यूषण पर्व में सभी क्रियाएं अच्छे भाव से ही सफल होती है। यदि श्रद्धालू का आत्मिक पवित्र सही होता है तो निश्चित ही धार्मिक-आध्यात्मिक, साधना, आराधना व भक्ति के सार्थक परिणाम देखने को मिलते हैं। साधना एक तरह से अधिक फलदायी होती है। उन्होंने कहा कि सांसारिक जगत को छोड़ते हुए अपने आप में रमण हो जाएं। इस दौरान पर्यूषण दिल से क्षमापना करने से म...
भगवान की भक्ति समझकर करें दूसरों की सेवा, होगी प्रगति : डॉ. वसंतविजयजी म.सा. इंदौर। तमिलनाडू प्रांत के विश्वविख्यात श्री पार्श्व पद्मावती शक्तिपीठ तीर्थधाम के कृष्णागिरी पीठाधिपति डॉ. वसंतविजयजी म.सा. ने रविवार को कहा कि किसी भी मनुष्य को किसी भी तरह की तकलीफ हो, समस्या हो या घर में अशांति, परेशानी हो तो 11 दिनों तक पूजा वस्त्र पहनकर भगवान पार्श्वनाथ जी की भक्ति, जाप करने के साथ-साथ 24 तीर्थंकरों की भक्ति करने से जिस तरह 12 वर्षों बाद उज्जैन में सिंहस्थ आता है ठीक उसी तरह आपकी जिन्दगी में भी 11 दिनों के जाप करने के बाद 12 दिन में बसंत बहार आ जाएगा। श्री नगीन भाई कोठारी चैरिटेबल ट्रस्ट के तत्वावधान में हृींकारगिरी तीर्थ धाम में दिव्य भक्ति चातुर्मास कर रहे डॉ. वसंतविजयजी म.सा.ने यह बात प्रवचन में कही। उन्होंने कहा कि दूसरों के हित को ध्यान में रखकर कर्म करेंगे तो निश्चित ही वह मनुष्य है, क्...
कुम्बलगोडु, बेंगलुरु (कर्नाटक): प्राणी को अपने किए हुए कर्म भोगने होते हैं। सबका अपना-अपना पुण्य और पाप होता है। इन्हीं पाप और पुण्यों के आधार पर मानव अपने-अपने कर्मों का फल भोगता है। स्वयं द्वारा किया हुए कर्म स्वयं को ही भोगना होता है। आदमी अपने पाप कर्मों के कारण जब कोई कष्ट भोगता है तो उस समय उसके परिजन वहां उपस्थित होते हैं और उसके सगे यह चाहते भी हों कि उसे कष्ट को बंटा सकूं तो कोई उसके कष्ट को कम नहीं कर सकता, बांट नहीं सकता। उसके मित्र, पुत्र, भाई आदि कोई भी उसके प्रति अपनी सहानुभूति अपनी संवेदना दे सके, दवा-इलाज करा सकता है, किन्तु उसके कष्टों को नहीं बांट सकता। क्योंकि कर्म कर्ता का ही अनुगमन करता है। इस प्रकार आदमी को अपना पाप और पुण्य स्वयं ही भोगना होता है। पुण्य और पाप को भोगने में द्रव्य, क्षेत्र, काल, व्यवस्था और बुद्धि का योग हो जाता है। ये सभी चीजें कर्म भोगने में हेतु बन...
सम्बोधि’ प्रवचनमाला के अंतर्गत आचार्यश्री ने की धर्म और अधर्म की व्याख्या कुम्बलगोडु, बेंगलुरु (कर्नाटक): जन-जन को सद्भावना, नैतिकता और नशामुक्ति का संदेश देने वाले जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के ग्यारहवें अनुशास्ता, भगवान महावीर के प्रतिनिधि, अहिंसा यात्रा के प्रणेता आचार्यश्री महाश्रमणजी वर्तमान में बेंगलुरु के कुम्बलगोडु में स्थित आचार्यश्री तुलसी महाप्रज्ञ चेतना सेवाकेन्द्र में दक्षिण भारत का दूसरा चतुर्मास कर रहे हैं। चतुर्मासकाल की व्यापक प्रभावना का आंकलन इसी बात से लगाया जा सकता है कि प्रतिदिन हजारों की संख्या में श्रद्धालु आचार्यश्री के दर्शनार्थ उपस्थित होते हैं, उनकी मंगलवाणी का श्रवण करते हैं, आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। गुरुवार को महातपस्वी आचार्यश्री महाश्रमणजी के दर्शनार्थ विश्व हिन्दू परिषद के परामर्शक व मार्गदर्शक श्री दिनेशचंद्रजी तथा राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के वरिष्ठ ...
वेपेरी स्थित जय वाटिका मरलेचा गार्डन में विराजित जयधुरंधर मुनि ने कहा राग और द्वेष संसार परिभ्रमण का मूल कारण है। राग द्वेष रूपी बीज से ही कर्म रूपी वृक्ष उत्पन्न होता है। मोह का क्षय होने पर ही मोक्ष की प्राप्ति हो सकती है। राग और द्वेष कषाय उत्पत्ति के निमित्त बनते हैं। व्यक्ति जिसके प्रति राग रखता है उसके अवगुण नहीं देखता और जिसके प्रति द्वेष रखता है उसके गुण नहीं देखता। अतः राग के कारण प्रशंसा और द्वेष के कारण निंदा की वृत्ति बढ़ती है। निंदा करना महापाप है ।कोई भी व्यक्ति दूसरों के द्वारा निंदा नहीं सुनना चाहता, पर स्वयं दूसरों की निंदा करता है। निंदा दूसरों की नहीं अपितु अपने ही अवगुणों की करनी चाहिए। परनिंदा एवं स्व प्रशंसा करने के बजाए स्व निंदा एवं पर प्रशंसा होनी चाहिए। निंदा करना कीचड़ उछालने के समान है जिससे उसके स्वयं के हाथ भी दूषित हो जाते हैं। पीठ पीछे निंदा करने में रस आने ...
इंदौर। राष्ट्रसंत डॉ वसन्तविजय जी म.सा. ने कहा कि प्राणी को हर कार्य पूर्ण निष्ठा और लगन से करना चाहिए तभी वह सफलता के मार्ग पर आसानी से पहुंच पायेगा। गुरुवार को यहां नगीन भाई कोठारी चैरिटेबल ट्रस्ट के तत्वाधान में ह्रींकारगिरी तीर्थ धाम में दिव्य भक्ति चातुर्मास कर रहे डॉ वसन्तविजयजी म. सा. ने कहा कि यदि हर कार्य में निष्ठा होगी तो हर कार्य अच्छे से होगा। यदि हमें सफलता मिलती है तो समझ लेना चाहिए कि हमारे द्वारा पूर्ण संयम और निष्ठा से ही कार्य किया गया है। सदैव देवताओं, गुरु और धर्म के प्रति भी पूर्ण श्रद्धा, निष्ठा व आस्था का भाव मनुष्य में है तो जीवन के पथ पर हमेशा मंज़िल तक आसानी से पहुंचा जा सकता है। चातुर्मास कार्यक्रम से जुड़े विजय कोठारी, वीरेंद्र कुमार जैन ने बताया कि आज सुबह के सत्र में संतश्री वज्रतिलक जी की निश्रा में सामूहिक व प्रतिक्रमण भक्तामर मन्त्र जाप किया गया। जय कोठारी न...