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धर्म के लिए दो घड़ी भी काफी: साध्वी सुमित्रा

चेन्नई. कोडमबाक्कम-वड़पलनी जैन भवन में विराजित साध्वी सुमित्रा ने कहा एक दिन में मनुष्य को साठ घड़िया मिलती हैं अगर उन साठ में से मनुष्य दो घड़ी भी बंद कर्मो की निर्जरा कर ले तो उसकी अट्ठावन घड़ियां अपने आप ही सार्थक हो जाएंगी। पुण्य का उदय कभी भी हो सकता हैं। लाख कठिनाई आने के बाद भी अगर उससे निकलने के मार्ग बन जाते हैं तो यह मनुष्य के पुण्य के उदय की वजह से ही संभव है। पुण्य का उदय कब होगा इसका पता नही चलता है पर होता जरूर है। इसलिए इस कीमती समय में दो पल भी अगर पुण्यवाणी का काम कर लिया जाय तो जीवन मे बदलाव आ सकता है। उन्होंने कहा कि जीवन मिलना आसान नही है। बहुत ही तप के बाद यह मौका मिला है। अगर इसमे पुण्य के कार्य नही कर रहें है तो पाप करने से तो बच ही जाना चाहिए। जिस प्रकार से पुन्य का उदय होने पर खुशहाली आती है, ठीक उसी प्रकार पाप के उदय होने पर सब चला जाता है। उन्होंने कहा की चार महीने ...

आध्यात्मिक रुप से चिंतनशील होकर दया, करुणा के साथ क्षमा लें व दें: साध्वीश्री डाॅ.कुमुदलताजी

28 सितंबर को महामंगलकारी अनुष्ठान के बेनर का हुआ विमोचन बेंगलूरु। स्थानीय वीवीपुरम स्थित महावीर धर्मशाला में मंगलवार को संवत्सरी महापर्व का भव्य आयोजन हुआ। बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं के क्षमापना की इस महफिल रुपी श्रद्धा के सैलाब में आस्था और भक्ति की डूबकी अनुष्ठान आराधिका, शासनसिंहनी साध्वीश्री डाॅ.कुमुदलताजी ने अपने प्रवचन के माध्यम से लगवाई। गुरु दिवाकर केवल कमला वर्षावास समिति के तत्वावधान चातुर्मासिक पर्व के श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के 50वें दिन पर्वाधिराज पर्व पर्युषण के समापन अवसर साध्वीजी ने स्वयं बेहद मृदुभावों एवं हृदय के अंतःकरण के साथ मंच से सभी साध्वीमंडल की ओर से ‘मिच्छामी दुक्कड़म’ के उद्घोष कर श्रावक-श्राविकाओं से क्षमापना की। उन्होंने कहा कि क्षमापना से कोई छोटा-बड़ा नहीं होता है। संवत्सरी महापर्व को दो दिलों को जोड़ने का साधन बताते हुए साध्वीश्री ने कहा कि...

शत्रु को भी अपना बना सकते हैं मधुर वचन से

चेन्नई. श्री एसएस जैन संघ माम्बलम के तत्वावधान एवं स्वाध्यायी अशोक नाहर व सुरेंद्रकुमार डांगी के सान्निध्य में टी.नगर में बर्किट रोड स्थित जैन स्थानक में संवत्सरी पर्व मनाया गया। इस मौके पर अशोक नाहर ने कहा क्रोध को क्षमा से, मान को नम्रता से, माया को सरलता से व लोभ को संतोष से जीता जा सकता है। कम खाओ, गम खाओ, नम जाओ के सिद्धांत पर जीने वाले जीवन में शारीरिक व मानसिक तौर पर स्वस्थ रहते हैं। मधुर वचन से शत्रु को भी अपना बनाया जा सकता है। सुरेंद्रकुमार डांगी ने अंतगड़सूत्र के माध्यम से तप-त्याग की महिमा बताई। संघ के उपाध्यक्ष डा. उत्तमचंद गोठी ने कहा पर्वों में सबसे बड़ा पर्व संवत्सरी है। यह पर्व भोग से हटकर योग, अंधकार से प्रकाश, अधर्म से धर्म, राग से विराग, वासना से उपासना, मृत्युता से अमरता की ओर ले जाने का संदेश देता है। यह ईष्र्या-द्वेष को मिटाकर पे्रम, वात्सल्य और करुणा का संदेश देता ह...

सबसे बड़ा वही जो कठोर व्यवहार पर भी क्षमा करे:  साध्वी कंचनकंवर

चेन्नई. पुरुषवाक्कम के एएमकेएम में विराजित साध्वी कंचनकंवर एवं अन्य सहवर्तिनी साध्वीवृंद के सानिध्य में संवत्सररी महापर्व मनाया गया। इस मौके पर साध्वी डॉ. सुप्रभा ने कहा संवत्सरी का पर्व तन, मन और जीवन शुद्धि का दिन है। स्वयं का निरीक्षण, परीक्षण करें, स्वयं को देखें। जो अर्थयुक्त है उसे स्वीकार करें और व्यर्थ को छोड़ें। आज के समय में बहुत प्रदूषण है, लेकिन सबसे ज्यादा आदमी के मन, वचन और विचारों में प्रदूषण सबसे ज्यादा है। स्वयं के मन पर चोट करें तो ही संवत्सरी मनाना सार्थक होगा। साध्वी डॉ.उदितप्रभा ने कहा संवत्सरी का पर्व नई चेतना, नई भावना और नई चमक लिए दस्तक दे रहा है।   साध्वी डॉ. हेमप्रभा ने कहा संवत्सरी महापर्व वर्ष में एक बार आने वाला विशिष्ट यज्ञ है जिसमें सभी पापकर्म और विकारों की आहुति दी जाती है। पूर्ण उत्साह, परिपूर्ण क्षमा भावना से जीव की शुद्धि की जाती है। पर्वाधिराज अपने आप ...

त्याग, आराधना एवं तपस्याओं का रहा ठाट

केएलपी अभिनंदन के प्रांगण में संवत्सरी महापर्व चेन्नई. यहां पट्टालम के पेरम्बूर बैरेक्स-स्ट्रेहांस रोड पर स्थित केएलपी के अभिनंदन अपार्टमेंट में श्री पर्यूषण महापर्व आराधना उत्सव धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। सोमवार को प्रभु भक्ति के कार्यक्रम हुए। रंगारंग भक्ति गीत संगीत के कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे। इस दिन संगीत सम्राट नरेंद्र वाणीगोता मुम्बई ने म्यूजिक बैंड के साथ शानदार प्रस्तुति दी। प्रभु भक्ति के गीत संगीत से प्रांगण का पूरा वातावरण भक्तिमय हो रहा था। इन कार्यक्रमों में अभिनंदन वासियों ने अति उमंग एवं उत्साह के साथ भाग लिया। इससे पहले आचार्य विजय तीर्थभद्रसूरीश्वर के शिष्य मुनि तीर्थनमन विजय, मुनि तीर्थहंस विजय, तीर्थअर्हमविजय का अभिनंदन के प्रांगण में प्रवचन हुआ। प्रांगण में बने नए भव्य एवं अतिविराट श्री सुमति जिनमंदिर प्रारूप दर्शन तथा 24 तीर्थंकर...

स्वयं को बदल लें, दुनिया स्वयं बदल जाएगी: साध्वी कंचनकंवर व डॉ.सुप्रभा

चेन्नई. पुरुषवाक्कम स्थित एएमकेएम में विराजित साध्वी कंचनकंवर व डॉ.सुप्रभा के सानिध्य में साध्वी डॉ.उदितप्रभा ने कहा कि जैसा व्यवहार हम दूसरों के साथ करते हैं वैसा ही हमारे साथ होता है। दूसरों में स्वयं को देखकर व्यवहार करें। जो दूसरों को कष्ट देता है वह स्वयं भी कष्ट पाता है। प्रभु कहते हैं कि किसी के द्वारा आपके प्रति किया गया व्यवहार हमारे द्वारा किए गए कृत्यों की ही सौगात है। यह संसार एक सूना जंगल है जिसमें आपके व्यवहार प्रतिध्वनित होकर पुन: तुम्हारे पास लौटते हैं। आदर्श महापुरुषों के जैसा बनना है तो उनके जैसा शांत, शीतल, नम्र और सहनशील बनें। साध्वी डॉ.हेमप्रभा ने कहा कि प्रभु ने संसार में मनुष्य के चार दुर्लभ अंगों की चर्चा की है। पहला- मानव जन्म दुर्लभ है लेकिन उसमें भी मनुष्यत्व का जन्म होना कठिन है। दूसरा- संतों के दर्शन बहुत पुण्य से ही होते हैं। संत तीर्थ से भी बढक़र होते हैं, उनक...

आत्मज्योति को प्रज्ज्वलित करता है पर्यूषण महापर्व:  मुनि ज्ञानेंद्र कुमार

चेन्नई. तेरापंथी सभा साहुकारपट चेन्नई के तत्वावधान में मुनि ज्ञानेंद्र कुमार के सान्निध्य में तेरापंथ विद्यालय के विशाल प्रांगण में उमड़े हजारों श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि तपस्या उत्कृष्ट भाव से की जाती है उस उत्कृष्ट भाव से ही कर्मों की निर्जरा होती है। पर्यूषण महापर्व में उत्कृष्ट भाव जागृत होते हैं जिससे आत्मा की शक्ति और ज्योति जागृत होती है। आज सैकड़ों सैकड़ों तपस्वी बड़ी तपस्या में रत है। हम उनकी तपस्या के प्रति हार्दिक मंगल शुभकामना प्रकट करते हैं। जो तप नहीं कर सकते वह तपस्वी की तप की अनुमोदना भी करें उसकी सेवा और समाधि में योगभूत बनता है। वह भी विपुल कर्म निर्जरा का अधिकारी बन जाता है। भगवान महावीर के 27 भवों का रोचक वर्णन करते हुए कहा कि इस जहां में अनेक लोग आते हैं चले जाते हैं लेकिन कुछ शख्स ऐसे होते हैं जो अमिट पदचिन्हों के निशान छोड़ देते हैं। भगवान महावी...

घृणा पापी से नहीं पाप से करनी चाहिए: जयधुरंधर मुनि

चेन्नई. वेपेरी स्थित जय वाटिका मरलेचा गार्डन में विराजित जयधुरंधर मुनि ने कहा सतसंगत से जीवन का कण-कण खिल जाता है। पापी आत्मा भी सत्संग से पावन बन जाती है। सत पुरुषों का संग दानवता की ओर बहने वाली शक्ति की धारा को मानवता की और मोडती है। दूध में मिला हुआ जल भी दूध ही बन जाता है जबकि शराब की बोतल में भरा हुआ पानी भी शराब ही लगता है। अच्छे वातावरण में रहने से स्वयं में अच्छाई आएगी बुरे लोगों के साथ बैठेंगे तो जीवन में बुराई आएगी। दीपक में तेल होने पर भी जब तक ज्योतिर्मान प्रदीप से उसका संयोग नहीं होता तब तक उसमें ज्योति नहीं आ सकती। इसी प्रकार सत्पुरुष के समागम के बिना सम्यक ज्ञान प्राप्त नहीं हो सकता। जैसा कार्य और वातावरण होता है वैसा ही रंग जीवन में आता है। महान व्यक्तियों के साथ रहने वाला स्वयं महान बन जाता है। योवन संपत्ति सत्ता और अविवेक यह चारों अगर मिल जाते हैं तो अनर्थ हो जाता है। नि...

तप की अग्नि ही आत्मा को कुंदन बनाती है: साध्वीश्री डाॅ.कुमुदलताजी

सेवाभावी श्राविकाओं का किया बहुमान, संवत्सरी महापर्व मंगलवार को बेंगलूरु। यहां वीवीपुरम स्थित महावीर धर्मशाला में चातुर्मासार्थ विराजित अनुष्ठान आराधिका, ज्योतिष चंद्रिका व शासनसिंहनी साध्वीश्री डाॅ.कुमुदलताजी ने सोमवार को जिनशासन में गणेश चतुर्थी दिवस की महत्ता पर तथा पर्वाधिराज पर्युषण पर्व के सातवंे दिन तप के महत्व व संस्कारों पर प्रकाश डालते हुए प्रवचन दिया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि धर्म, जिनशासन और प्रभु महावीर के प्रति आस्था में तप के महत्व एवं संस्कारों की खूब महत्ता है। गुरु दिवाकर केवल कमला वर्षावास समिति के तत्वावधान में गतिमान ऐतिहासिक एवं यशस्वी चातुर्मास के तहत इस वर्ष पहली बार श्रमण संघ में हो रही बड़ी संख्या मेें तपस्याओं की अनुमोदना करते हुए साध्वीश्री ने कहा कि तप से जीवन निर्मल, उज्ज्वल, पवित्र बनता है। तप की अग्नि में तपकर ही आत्मा कुंदन बनती है। प्रभु महावीर के 12 प्रक...

दो महापुरुषों को श्रद्धांजलि देने उमड़ा जन सैलाब

भिक्षु दया कार्यक्रम और प्रवर्तक पन्नालाल जयंती और आचार्य शुभचंद्रमुनि पुण्यतिथि पर चेन्नई. रविवार को पुरुषवाक्कम स्थित एएमकेएम जैन मेमोरियल सेन्टर में विराजित उमराव ‘अर्चना’ सुशिष्या साध्वी कंचनकंवर, साध्वी डॉ.सुप्रभा ‘सुधा’ के सानिध्य में राजस्थान केसरी प्रवर्तक पन्नालाल महाराज की 132वीं जयंती और आचार्य शुभचंद्र महाराज की पुण्यतिथि सामायिक और तप त्याग के साथ मनाई गई। महापुरुषों को श्रद्धांजलि देने के लिए भिक्षु दया का आयोजन किया जिसमें बड़ी संख्या में समाज के पुरुषों और बच्चों ने भाग लिया और एक दिन की भिक्षुचर्या का पालन किया। साध्वी डॉ.उदितप्रभा ‘उषा’ ने कहा कि दो-दो महापुरुषों की जन्म व पुण्यतिथि मना रहे हैं। हमारा देश अनेकों त्यागी, गुरु, धर्म आराधना, साधना और अर्चना से भारत विश्व गुरु कहलाया। गुरु की कृपा से पाप, ताप, संताप, अभिशाप सभी दूर होते हैं। प्रवर्तकश्री का व्यक्तित्व अपार स्...

श्रद्धा और भक्ति के साथ की गई आराधना में होती है शक्ति: साध्वीश्री डाॅ.कुमुदलताजी

बेंगलूरु। यहां वीवीपुरम स्थित महावीर धर्मशाला में रविवार को जैन दिवाकरीय, ज्योतिष चंद्रिका व शासनीसिंहनी साध्वीश्री डाॅ.कुमुदलताजी ने आस्था, वास्ता और रास्ता विषयक प्रवचन दिया। इस अवसर पर प्रवर्तकश्री पन्नालालजी म.सा. की 133वीं जन्मजयंती प्रसंग पर गुणानुवाद भी हुआ। गुरु दिवाकर केवल कमला वर्षावास समिति के तत्वावधान में साध्वीवृंद के मुखारविंद से सामूहिक मंगलाचरण एवं गुरु दिवाकर चालीसा वाचन के साथ शुरु हुई धर्मसभा में साध्वीश्री ने परमात्मा के प्रति श्रद्धा एवं आस्था को मजबूत रखने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि श्रद्धा और भक्ति के साथ की गई आराधना में बहुत शक्ति होती है। धर्म को भी तर्क का नहीं, बल्कि श्रद्धा एवं आस्था का विषय बताते हुए साध्वीश्री ने कहा कि सन्यास से अर्थ परिवार छोड़ना नहीं, सारे संसार को परिवार बना लेना है। आस्था अंतरंग का विषय है। मन में श्रद्धा हो तो तर्क नहीं उठता, जहां श...

विकार और विलास युग को विचार और विकास युग में बदलें: जयधुरंधर मुनि

वेपेरी स्थित जय वाटिका मरलेचा गार्डन में  जयधुरंधर मुनि ने युवक-युवती संस्कार शिविर के अंतर्गत विशेष प्रवचन में कहा युवा पीढ़ी समाज की भावी कर्णधार है। उन्हें सुसंस्कृत एवं सही दिशा प्रदान करना जरूरी है। जिस प्रकार वन में भटकने पर पुनः सही रास्ता प्राप्त करना दुष्कर होता है, उसी प्रकार युवावस्था में भटक जाने वाले का जीवन बर्बाद हो जाता है। आज के इस विकार एवं विलास के कगार पर खड़े युग को विचार एवं विकास युग में बदलने की नितांत आवश्यकता है।   व्यसन और फैशन की दुनिया में फंसे हुए युवकों को  चार ‘भ’ को कभी भूलना नहीं चाहिए। ‘भेष अर्थात वेशभूषा – व्यक्ति की पहचान कराती है । शालीन वस्त्र पहनने चाहिए। भाषा विवेकपूर्ण होते हुए माधुर्यता लिए हुए होनी चाहिए। भोजन में सात्विक आहार किया जाना चाहिए और चाहे देश में हो या विदेश में हो भगवान को भी नहीं भूलना चाहिए। चकाचौंध की इस दु...

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