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आचार्य स्वयं बनते हैं अरिहंत-सिद्ध: साध्वी कंचनकंवर

गुणानुवाद सभा का आयोजन चेन्नई. पुरुषवाक्कम स्थित एएमकेएम में विराजित साध्वी कंचनकंवर के सान्निध्य में आचार्य आनन्दऋषि की जन्म जयंती और साध्वी उम्मेदकंवर की पुण्यतिथि पर गुणानुवाद सभा हुई। इस अवसर सामूहिक एकासन समेत अनेक कार्यक्रम हुए। साध्वी डॉ.सुप्रभा ने कहा सूर्य, चंद्र जहां हमें प्रकाश नहीं दे सकते वहां हमें दीपक का प्रकाश राह दिखाता है, उसी प्रकार आचार्य आनन्दऋषि का जीवन रूपी दीपक हमारे जीवन को अपने ज्ञान, तप, और आदर्शों से सदैव प्रकाशित कर रहे हैं। आचार्य के तीन प्रकार कहे गए हैं- शिल्पाचार्य, कलाचार्य, धर्माचार्य। आचार्य पांच व्रतों का पालन कर इंद्रियों को जीतते हैं, पांच गुप्ति का पालन करते हैं तथा स्वयं के समान दूसरों को भी धर्ममार्ग पर अग्रसर करते हैं। आ.आनन्दऋषि का जीवन धर्माचार्य है। उन्होंने साध्वी समुदाय के लिए अनेक ऐतिहासिक प्रस्ताव पास किए और श्रमण संघ के संगठन को सुदृढ़ और ...

अनवरत जारी है ‘सम्बोधि’ ग्रन्थ प्रवचनमाला

कुम्बलगोडु, बेंगलुरु (कर्नाटक): जन-जन को सन्मार्ग दिखाने वाले, अखण्ड परिव्राजक, महातपस्वी, परम साधक आचार्यश्री महाश्रमणजी ने बुधवार को आचार्यश्री तुलसी महाप्रज्ञ चेतना सेवा केन्द्र परिसर में बने भव्य ‘महाश्रमण समवसरण’ में उपस्थित चारित्रात्माओं सहित श्रद्धालुओं को आचार्यश्री महाप्रज्ञजी द्वारा विरचित संस्कृत भाषा के ग्रन्थ ‘सम्बोधि’ के माध्यम से साधना करने वाले के लिए आहार संयम के महत्त्व को वर्णित किया तथा चारित्रात्माओं को विशेष प्रेरणा प्रदान करते हुए वर्ष में उनके द्वारा हुए प्रतिसेवना की आलोयणा लेने और उसे पूरी कर अपनी आत्मशुद्धि करने को उत्प्रेरित किया।  आचार्यश्री के इस चातुर्मासिक प्रवास के कारण प्रौद्योगिकी क्षेत्र में अग्रणी महानगर की मानों आबोहवा ही बदली हुई-सी है। अब तो आध्यात्मिकता की बयार बह रही है, आचार्यश्री महाश्रमणजी के श्रीमुख से अमृत की वर्षा हो रही है जो लोगों के हृदय ...

साधक संयमित जीवन जीएं: साध्वी डाॅ.कुमुदलताजी:  साध्वीश्री डाॅ.कुमुदलताजी

बेंगलूरु। विश्वविख्यात अनुष्ठान आराधिका एवं शासनसिंहनी साध्वीश्री डाॅ.कुमुदलताजी ने बुधवार को यहां वीवीपुरम स्थित महावीर धर्मशाला में अपने प्रवचन में साधक को संयमित जीवन जीने की सीख देते हुए कहा कि भगवान महावीर का संदेश है कि मानव जीवन को वासना में नहीं उपासना में अपना जीवन लगाना चाहिए। गुरु दिवाकर केवल कमला वर्षावास समिति के तत्वावधान में आयोजित चातुर्मासिक प्रवचन में उन्होंने कहा कि संसार के भौतिक सुख क्षणिक नाशवान है। इससे पूर्व साध्वीश्री महाप्रज्ञाजी ने एक गीतिका के माध्यम से समय के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि समय रहते हुए व्यक्ति को धर्माराधना करते हुए अपने जीवन के हर पल को सार्थक करना चाहिए। साध्वीश्री डाॅ.पद्कीर्तिजी ने सुखविपाक सूत्र का वाचन करते हुए कहा कि जीवन का सच्चा सुख त्याग में है। सुखी जीवन के तीन सूत्रों की व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा कि व्यक्ति को सदैव अपने ...

हम सभी को अनंत जीवन देने वाले ईश्वर के प्रेम की जरुरत : डॉ. वसंतविजयजी म.सा.

इंदौर। कृष्णगिरि पीठाधिपति, यतिवर्य, राष्ट्रसंत डॉ. वसंतविजयजी म.सा. ने बुधवार को कहा कि हम सभी भिखारी हैं। हमें ईश्वर के प्रेम की आवश्यकता है जो हमारे जीवन को अर्थ देता है, हमें अनन्त जीवन प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि हमें ईश्वर ने ही चुना और आशीर्वाद दिया है जो हमें हर माता-पिता की तरह अपने वरदानों से भर देना चाहते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ईश्वर ही एक ऐसी शक्ति है जिनकी नजरें किसी का अनदेखा नहीं करतीं। जो भी उसका अनुभव कर लेते हैं वे उसके बंधनरहित मोक्ष सुख को प्राप्त करते हैं। श्री नगीनभाई कोठारी चैरिटेबल ट्रस्ट के तत्वावधान में श्री हृींकारगिरी तीर्थ धाम इंदौर में दिव्य भक्ति चातुर्मास कर रहे डॉ. वसंतविजयजी म.सा. ने यह उद्गार अपने नियमित प्रवचन में कहे। ट्रस्टी विजय कोठारी व वीरेंद्र कुमार जैन ने बताया कि आज भी धाम में डॉ.वसंतविजयजी म.सा. से मांगलिक आशीर्वाद लेने वालों में भोपाल, ...

धर्म से होगी सच्चे सुख की प्राप्ति: साध्वी सुमित्रा

चेन्नई. कोडमबाक्कम-वड़पलनी जैन भवन में विराजित साध्वी सुमित्रा ने कहा कि मनुष्य अपनी अज्ञानता की वजह से सुख प्राप्ति के लिए इधर उधर भटक रहा है और फिर भी सच्चे सुख की प्राप्ति नही हो पा रही है। सच्चे सुख और शाश्वत की प्राप्ति सिर्फ धर्म में हो सकती है। संसार में रहते हुए मानव संयम में रहकर अपने जीवन को मर्यादित बना सकता है। उन्होंने कहा कि गृहस्थ जीवन में रह कर भी मनुष्य ब्रह्मचर्य और सदाचार जीवन का पालन कर सकता है। परमात्मा कहते है कि ब्रह्मचर्य का मतलब आत्मा का रमन करना होता है। जिस समय श्रावक अपनी आत्मा का रमन और चिंतन मनन करते है वह ब्रह्मचर्य का जीवन जीने लगते है। उन्होंने कहा कि पहले के समय में हमारे बुजुर्ग उस परिवार को अपनी बेटियां देते थे, जहां धर्म से लोग जुड़े हो और समाज में उनके धर्म की चर्चा हो। उनके पास पैसा भले ना हो ज्यादा लेकिन धर्म कर्म में आगे रहते हों। अगर संस्कारी बेटी ...

गृहस्थ धर्म का पालन विवेक से करें: वीरेन्द्रमुनि

सेलम. यहां शंकर नगर स्थित जैन स्थानक में विराजित वीरेन्द्रमुनि ने सुख विपाक सूत्र की विवेचना करते हुए कहा आर्य जम्बू स्वामी के पूछने पर आर्य सुधर्मा स्वामी ने कहा कि भगवान महावीर स्वामी अदिनशत्रु राजा व प्रजा और युवराज सुबाहू कुमार को आगार धर्म और अणगार धर्म का विवेचन के साथ सुना रहे थे, अणगार धर्म यानी कि मुनि धर्म जिसमें पांच महाव्रत 5 समिति और 3 गुप्ती का पालन करते हुए जीवन निर्वाह करते हैं वही तारणहार कहलाते हैं। आगार धर्म यानी कि छूट है जिसके घर- परिवार है वह आगार धर्म है। जिसने घर परिवार को त्याग दिया है और पांच महाव्रत आदि धारण करके भगवान के बताए संयम के मार्ग पर चल रहे हैं वे अणगार कहलाते हैं। भगवान ने आपके व्रतों में छूट दी है तो उसका विवेक (यतना) के साथ गृहस्थ धर्म का पालन करना चाहिए। श्रावक के 12 व्रत हैं उनमें से पहला अहिंसा व्रत है।   अहिंसा व्रत का पालन  करना बहुत ही कठिन है,...

शाश्वत सुख पाने के लिए सुनें जिनवाणी: साध्वी कंचनकंवर

चेन्नई. पुरुषवाक्कम स्थित एएमकेएम जैन मेमोरियल सेन्टर में विराजित साध्वी कंचनकंवर के सान्निध्य में साध्वी डॉ.सुप्रभा ने कहा सुख के दो प्रकार हैं-बाह्य और आभ्यन्तर। बाह्य सुख परिवर्तनशील, क्षणिक और नष्ट होता है जबकि अभ्यन्तरसुख, शाश्वत और आध्यात्मिक। इसे पाने के लिए पांच बातें आवश्यक हैं-तन में साधना हो, मन में सद्भावना हो व दूसरों के प्रति ईष्र्या-द्वेष न हो, धन में संतोष हो, जीवन में सहिष्णुता हो तथा वचन में सत्यता हो। इन बातों को जीवन में उतारनेवाला व्यक्ति जीवन में सफल होता है। जिस प्रकार कच्चा घड़ा पानी संचय योग्य नहीं होता है, उसे पक्का करने के बाद ही जल से भर सकते हैं उसी प्रकार मुश्किलों का सामना करने के लिए व्यक्ति को साधना से सामथ्र्य प्राप्त होता है। कभी भी सुखों में अधिक फूलना नहीं चाहिए और दु:खों में घबराना नहीं चाहिए। भौतिक सुख तो क्षणभंगुर है, आज यह वस्तु सुख देती है कल दूसरी...

टकराव नहीं समझौता करना चाहिए: जयधुरंधर मुनि

चेन्नई. वेपेरी स्थित जय वाटिका मरलेचा गार्डन में विराजित जयधुरंधर मुनि ने कहा प्रभु महावीर ने सत्य का साक्षात्कार करने के पश्चात जन-जन के कल्याणार्थ अनेक सिद्धांत की प्ररूपणा की। भगवान का हर शब्द हर वाक्य अपने आप में एक सिद्धांत है पर मुख्यत: भगवान के तीन सिद्धांत बताए जाते हैं-अहिंसा, अनेकांतवाद और अपरिग्रह। जिस प्रकार 3 नदियों के मिलन स्थान को संगम माना जाता है जो अत्यंत ही पवित्र स्थल गिना जाता है , इसी प्रकार जहां इन 3 सिद्धांतों का संगम हो जाता है वहां जीवन पवित्र बन जाता है। अहिंसा और अपरिग्रह दोनों सिद्धांत आचरण से संबंधित हैं जबकि अनेकांतवाद विचारों से संबंध रखता है । श्रावक के आचार और विचार दोनों में ही शुद्धि होती है। श्रावक का तीसरा गुण बताया गया है सौम्यता। सौम्य बनने के लिए अनेकांत दृष्टि अपनाना बहुत जरूरी है। वर्तमान में जो कलह, झगड़ा एवं क्लेश का वातावरण हर जगह फैला हुआ है उ...

महातपस्वी महाश्रमण ने दिखाया दुःख मुक्ति का मार्ग

कुम्बलगोडु, बेंगलुरु (कर्नाटक): जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के ग्यारहवें अनुशास्ता महातपस्वी आचार्यश्री महाश्रमणजी दक्षिण भारत का दूसरा चतुर्मास बेंगलुरु में करा रहे हैं। आचार्यश्री के यहां विराजमान हो जाने से मानों महाकुम्भ लगा हुआ है। रविवार का दिन तो ऐसा लगता है, मानों पूरा बेंगलुरु ही उमड़ पड़ता है। विशाल प्रवचन पंडाल, आचार्यश्री का प्रवास स्थल व विशाल चातुर्मासिक परिसर भी मानों पूरे दिन जनाकीर्ण बना रहता है। अपने आराध्य के दर्शन, सेवा, उपासना और मंगल आशीष प्राप्ति के लिए उमड़े जनसैलाब को देखकर ऐसा लगता है मानों कोई महाकुम्भ लगा हो और लोग अपनी आस्था के अनुसार श्रीचरणों में अपनी भावात्मक डुबकी लगा अपने जीवन को धन्य बनाते हैं।  रविवार को प्रातः से ही आचार्यश्री तुलसी महाप्रज्ञ चेतना सेवा केन्द्र श्रद्धालुओं से हुजूम उमड़ने लगा था। अपने दैनिक कार्यों से एक दिन की फुर्सत पाने वाले श्रद्धालु...

भगवान की भक्ति में सबकुछ न्यौच्छावर कर दें: डॉ वसंतविजयजी म.सा.

इंदौर। भगवान की भक्ति में यदि सबकुछ न्यौच्छावर करना पड़े तो पीछे नहीं रहना चाहिए। जीवन में धर्म व संस्कार के साथ-साथ उपकार की प्रवृत्ति भी बेहद जरुरी है। जिस किसी भी व्यक्ति के जीवन में इन बातों का समावेश होता है, उनके जीवन में दरिद्रता कभी नहीं आती। यह कहा कृष्णगिरि पीठाधिपति, यतिवर्य, राष्ट्रसंत डॉ वसंतविजयजी म.सा. ने। वे रविवार को यहां ह्रींकारगिरि तीर्थ धाम स्थित श्री नगिनभाई कोठारी चेरिटेबल ट्रस्ट के तत्वावधान में ‘मंदी के दौर मेें तेजी का सीक्रेट फार्मूला’ विषयक प्रवचन दे रहे थे। इस प्रवचन कार्यक्रम में उद्योगपति, बिल्डर्स सहित अनेक महिला श्राविकाएं भी मौजूद रहीं। उन्होंने जीवन में धर्म की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए यह भी कहा कि संतों के आशीर्वाद से ही श्रावक-श्राविका से अच्छे कार्य होते हैं। उन्होंने कहा कि मन में पैदा हुए शुभ भावों पर तुरंत अमल करना चाहिए। वसंतविजयजी ने...

महापुरुषों की गाथा कितनी भी गाई जाए कम है: डाॅ.कुमुदलताजी

बाल संस्कार शिविर व रक्तदान शिविर का भी हुआ आयोजन बेंगलूरु। गुरु दिवाकर केवल कमला वर्षावास समिति के तत्वावधान में रविवार को यहां वीवीपुरम स्थित महावीर धर्मशाला में विश्वविख्यात अनुष्ठान आराधिका शासनसिंहनी साध्वीश्री डाॅ.कुमुदलताजी, महाप्रज्ञाजी, डाॅ.पद्मकीर्तिजी व राजकीर्तिजी की निश्रा में संतद्वय का जन्मजयंती प्रसंग गुणानुवाद सभा, गुरु चालिसा सहित विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों के साथ मनाया गया। श्रमण संघीय आचार्यश्री आनंदऋषिजी के 120वें तथा उपाध्यायप्रवर श्री केवलमुनिजी के 106वें जन्मजयंती अवसर पर डाॅ.कुमुदलताजी ने कहा कि धर्म व गुरु के प्रति श्रद्धा से ही मनुष्य का बेड़ा पार संभव है। उन्होंने कहा कि संत धरातल का वैभव होते हैं, संत हमें विकृति से संस्कृति की ओर ले जाते हैं। साध्वीश्री ने कहा कि संतों का जीवन समाज व संघ की एकता के लिए समर्पित रहता है अर्थात वे इस धरा पर नर के रुप में नारायण ब...

उल्लास व उमंग के साथ विधिपूर्वक भक्ति भाव में जुट जाएं : डॉ. वसंतविजयजी म.सा.

इंदौर। मां पद्मावती के परम् उपासक, सिद्धसाधक, राष्ट्रसंत, श्रीकृष्णगिरी शक्ति पीठाधिपति, यतिवर्य डॉ. वसंतविजयजी म.सा. ने शनिवार को कहा कि श्रावक-श्राविकाओं को चाहिए कि वे उल्लास, उमंग, शुद्ध भाव के साथ देव, गुरु, धर्म की साधना, आराधना व भक्ति विधिपूर्वक करें। उन्होंने कहा कि यदि अनन्य भाव से सामयिक व प्रतिक्रमण की क्रियाओं के मर्म को समझकर भक्ति करेंगे तो उसका लाभ भी अधिक मिलता है। श्री नगीनभाई कोठारी चैरिटेबल ट्रस्ट के तत्वावधान में हृींकारगिरी तीर्थ धाम में दिव्य भक्ति चातुर्मास कर रहे राष्ट्रसंत यतिवर्य डॉ. वसंतविजयजी म.सा.ने प्रवचन करते हुए यह भी कहा कि शुद्ध, निर्मल, देव, गुरु व धर्म के प्रति निष्ठा, परमात्मा की वाणी के प्रति निष्काम, श्रद्धा भाव रखने वाला पुण्यों का पोषण करता है। जीव मात्र के कल्याण के लिए शुभ भावना रखे। ट्रस्टी विजय कोठारी ने बताया कि हृींकारगिरी तीर्थ धाम में प्रति...

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