महाश्रमणी साध्वीप्रमुखाजी से मिला मिला मंगल सम्बोधन कुम्बलगोडु, बेंगलुरु (कर्नाटक): जब से जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के वर्तमान अनुशास्ता, भगवान महावीर के प्रतिनिधि, शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमणजी का बेंगलुरु में चतुर्मासकाल आरम्भ हुआ है, पूरा बेंलगुरु मानों महाश्रमणमय बना हुआ है। देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचने वाले हजारों श्रद्धालु चतुर्मास प्रवास परिसर में रहकर अपने आराध्य की आराधना का लाभ ले रहे हैं तो बेंगलुरुवासी भी अपने आराध्य की दर्शन, सेवा उपासना में निरंतर जुटे हुए हैं। रविवार को तो ऐसे लगता है मानों श्रद्धालुओं का ज्वार उमड़ आया हो। बेंगलुरुवासियों की विराट उपस्थिति से पूरा चतुर्मास परिसर जनाकीर्ण नजर आता है। आचार्यश्री के एक जयकारे की ललक, आचार्यश्री के की अमृतवाणी के रसपान करने की अभिलाषा और आचार्यश्री की सेवा में उपस्थित होने का उत्साह श्रद्धालुओं को शहर से कुछ दूरी और ज...
इंदौर। हृींकारगिरी तीर्थ धाम में दिव्य भक्ति चातुर्मास कर रहे कृष्णगिरी पीठाधिपति, यतिवर्य, विश्वसंत डॉ. वसंतविजयजी म.सा. ने रविवार को अपने दिव्य प्रवचन में कहा कि संतों की वाणी सुनेंगे तो न केवल पापों का नाश होगा बल्कि सफलता दर सफलता हाथ लगती जाएगी। राष्ट्रसंत डॉ वसंतविजयजी म.सा. ‘सुपर लॉ ऑफ अट्रेक्शन’ विषय तथा मिच्छामी दुक्कड़म एवं न्यूटन के लॉ एवं व्यापार में तेजी पर, जीवन को धर्ममय, परम् समृद्धि, सुख एवं आनंदमय बनाने पर श्रावक-श्राविकाओं को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि बड़ा बनने के लिए बड़ी मेहनत करनी होगी उसके लिए जरुरी है आपमें वह कार्य करने की क्षमता हो। अपनी-अपनी व्यवस्थाओं को ठीक ढंग से सही करेंगे तो सफलता मिलेगी। इसी सफलता को पाने के लिए एकाग्रता जरुरी है। जिस कर्म में सफल होना है उसका मेडिटेशन करते रहना चाहिए, मन सात्विक होना चाहिए। मध्यप्रदेश के इतिहास में प...
अनुष्ठान आराधिका-शासनसिंहनी का मित्रता दिवस पर विशेष व्याख्यान बेंगलूरु। अंतर्राष्ट्रीय स्तर की अनुष्ठान आराधिका, शासन सिंहनी साध्वीश्री डाॅ.कुमुदलताजी ने रविवार को ‘फ्रेंडशिप डे’ के उपलक्ष्य में अपने प्रभावशाली प्रवचन में कहा कि अच्छा मित्र बेशकीमती हीरे के समान होता है। उन्होंने कहा कि परमात्मा से हमें मिलने वाली तीन चीजों में माता-पिता, संतान और मित्र शामिल है। साध्वीश्री ने कहा कि मित्रता का चयन निश्चित रुप से व्यक्ति स्वयं करता है, लेकिन जैसा मित्र होगा वैसा ही व्यक्ति का चरित्र होगा। डाॅ.कुमुदलताजी ने ‘मित्रता’ शब्द को विस्तार से परिभाषित किया साथ ही कहा कि जिस प्रकार प्रभु महावीर ने उत्तराध्ययन सूत्र मेें बताया है कि आत्मा ही अच्छे-बुरे कर्मों की भोक्ता है उसी प्रकार आत्मा ही हमें हमारे अच्छे मित्र की पहचान कराती है। स्थानीय वीवीपुरम स्थित महावीर धर्मशाला में गुरु दिवाकर केवल कमला ...
बीजेएस व आरएसके के संयुक्त तत्वावधान में विवाह योग्य युवक-युवतियों के लिए परिचय सम्मेलन का अभिनव कार्यक्रम बेंगलूरु। भारतीय जैन संघटना (बीजेएस) एवं राजस्थान संघ कर्नाटका (आरएसके) के संयुक्त तत्वावधान में रविवार को यहां के बीबीयूएल सीबी भंडारी जैन गल्र्स काॅलेज में जैन समाज के विवाह योग्य युवक-युवतियों के लिए परिचय सम्मेलन का अभिनव कार्यक्रम ऐतिहासिक रुप से एवं सफलता के साथ आयोजित किया गया। इस अवसर पर बीजेएस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रफुल पारख ने बतौर मुख्य वक्ता अपने संबोधन से सैकड़ों की तादात में उपस्थितजनों को प्रभावित किया। पारख के साथ राजस्थान संघ के फाउण्डर चेयरमैन रमेश मेहता, अध्यक्ष रतनीबाई मेहता, बीजेएस के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य ओमप्रकाश लूणावत, प्रदेशाध्यक्ष दिनेश पालरेचा (होसपेट) व अन्य पदाधिकारियों के करकमलों से दीप प्रज्वलन के साथ शुरु हुए कार्यक्रम में पंजीकृत हुए 93 य...
सपने कभी पूरे नहीं होते और संकल्प अधूरे नहीं रहते चेन्नई. पुरुषावाक्कम के एएमकेएम जैन मेमोरियल सेंटर में विराजित महासती साध्वी उमराकंवर ‘अर्चना’ की शिष्या साध्वी कंचनकुंवर के सानिध्य में राजस्थान प्रवर्तिनी साध्वी सुप्रभा ‘सुधा’ ने कहा कि संसार के नौ प्रमुख तत्वों में सबसे प्रमुख दो तत्व आश्रव और संवर है। आश्रव संसार भ्रमण का कारण है जबकि संवर मोक्ष का कारण है। संपूर्ण संसार एक कंटीले वन और शून्य की भांति है। अपने चरम चक्षु बंद कर अपने अन्तरचक्षुओं से देखने का प्रयास करें। जिस प्रकार रेगिस्तान में भी पानी की स्थिति का भ्रम होता है उसी प्रकार इस संसार में पांच तरह के आस्रवों की बरसात निरंतर होती रहती है जिसमें सभी जीव भीग रहे हैं। इनसे ही कर्म किया जाता है और इन सभी का करण मिथ्यात्व है, इसी से संसार का परिभ्रमण होता है। इस आश्रव के द्वार को बंद कर दें तो अन्य सभी द्वार बंद हो जाएंगे नहीं तो...
कुम्बलगोडु, बेंगलुरु (कर्नाटक): मानवता के कल्याण के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाले मानवता के मसीहा, जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के एकादशमाधिशास्ता, विश्व संत महातपस्वी आचार्यश्री महाश्रमणजी की पावन सन्निधि में भारत सहित 14 देशों के श्रद्धालुओं को हुजूम उमड़ा तो बेंगलुरु की धरती पर एक और नया स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया। पहली बार तेरापंथ धर्मसंघ की ‘संस्था शिरोमणि’ जैन श्वेताम्बर तेरापंथी महासभा के तत्त्वावधान में तेरापंथ के इतिहास का पहला एन.आर.आई. समिट में तेरह देशों के अप्रवासी भारतीय उपस्थित हुए। जिन्हें आचार्यश्री के दर्शन, प्रवचन श्रवण और उपासना का अवसर प्राप्त हुआ। ऐसा सुअवसर प्राप्त कर सभी अप्रवासी भारतीय प्रफुल्लित नजर आ रहे थे। शनिवार को आचार्यश्री तुलसी महाप्रज्ञ चेतना सेवा केन्द्र की फिजा कुछ बदली-बदली-सी थी। आज मौका था तेरापंथ धर्मसंघ के इतिहास में पहली बार एक साथ तेरह देशों में ...
कुम्बलगोडु, बेंगलुरु (कर्नाटक): शुक्रवार को आचार्यश्री तुलसी महाप्रज्ञ चेतना सेवा केन्द्र में बने ‘महाश्रमण समवसरण’ में उपस्थित श्रद्धालुओं को जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के वर्तमान अनुशास्ता, महातपस्वी, शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमणजी ने पावन प्रेरणा प्रदान करते हुए कहा कि मनुष्य के भीतर अनेक वृत्तियां होती हैं। यह पुरुष अनेक चित्तों अर्थात् भावों वाला होता है। आदमी कभी आक्रोश में दिखाई देता है, कभी अहंकार का नाग उसके भीतर फुफकारने लगता है तो कभी माया की वृत्ति उभर जाती है। कभी लोभ, लालसा का वेग भी दिखाई देने लगता है। वहीं कई बार आदमी बड़ा क्षमाशील दिखाई देने लगता है। कभी बहुत विनम्र, ऋजु व संतोषी भावों वाला जान पड़ता है। हमारे इस मन के पट्ट पर अनेक दृश्य उभरते हैं। यह मनुष्य के मन की एक स्थिति है। मन कभी चंचल तो कभी विकृतिपूर्ण भी हो जाता है। इन वृत्तियों में एक है-लोभ की वृत्ति। आदमी के...
चेन्नई. पुरुषवाक्कम स्थित एएमकेएम में विराजित साध्वी कंचनकंवर के सान्निध्य में साध्वी डॉ. सुप्रभा ने कहा जो साधक शीत, उष्ण सहन करे वही सच्चा साधक है। शीत-उष्ण जीवन की अनुकूलता और प्रतिकूलता को कहा गया है। जिनमें धैर्य और सहिष्णुता है वही सफल, श्रेष्ठ, सामाजिक और आध्यात्मिक साधक है। हमें सभी परिस्थितियों में धैर्य होना चाहिए। जो पहाड़ की चढ़ाई के शुरू में उत्साह लेकिन बीच की बाधा में नहीं घबराता वही चढ़ाई पूर्ण करता है। सहने वाला ही रहता है। किसी की बात सुनकर हंसी न उड़ाएं। प्रमाद के कारण महाभारत और रामायण जैसा विनाश हो जाता है। जिसे हम अपना समझ रहे हैं उन्हें पराया होते देर नहीं लगती, यही संसार है। जीवन में सहिष्णुता, धैर्य, भाषा संयमित होनी चाहिए। किसी की बुराई उजागर न करें। हम जैसा व्यवहार दूसरों के साथ करते हैं वैसा ही हमें प्राप्त होता है। साध्वी डॉ.हेमप्रभा ने बताया सुबाहुकुमार प्रतिप...
राष्ट्रसंत डॉ. वसंतविजयजी म.सा. ने शुक्रवार को प्रवचन में कहा कि व्यक्ति को पुण्योदय से सांसारिक सुख, वैभव, धन व सम्पत्ति, संतान की सुविधाएं मिलती है। यह सुख-सुविधाएं कोई भी किसी भी प्रकार से स्थायी नहीं है, यह समय अनुसार बदलती रहती है। अगर वास्तविक आत्मसुख लेना है तो परमात्मा के चरणों में शरण लेने से ही वह मिलेगा। उन्होंने कहा कि मोक्ष का लक्ष्य बनाकर देव, गुरु की साधना-आराधना व भक्ति के मार्ग पर चलेंगे तो निश्चित ही आत्मसुख ग्रहण कर पाएंगे। ट्रस्टी जय कोठारी ने बताया कि इससे पहले संत श्री वज्रतिलक जी की निश्रा में प्रातः के सत्र में प्रतिक्रमण व सामूहिक भक्तामर मंत्र जाप किया गया। साथ ही धाम में प्रतिष्ठापित मूलनायक परमात्मा पार्श्वनाथजी की प्रतिमा का विधिकारक हेमंत वेदमूथा मकशी द्वारा 50 दिवसीय 18 अभिषेक शुक्रवार को भी जारी रहा।
चेन्नई. वेपेरी स्थित जय वाटिका मरलेचा गार्डन में विराजित जयधुरंधर मुनि ने कहा जिनवाणी का श्रवण करने पर साधक के भीतर परिवर्तन की लहर जागृत होती है। परिवर्तन ही चेतना का सूचक होता है।जो कर्म में शूर होता है वही धर्म में भी शूर बन सकता है। जैसे व्यक्ति दिशा बदलता है वैसे ही उसकी दशा बदल जाती है। चातुर्मास निरीक्षण, परीक्षण और शिक्षण का अवसर होता है। निरीक्षण दूसरे व्यक्ति का नहीं अपितु स्वयं उनका करना चाहिए। श्रावक के चौथे गुण लोकप्रियता का वर्णन करते हुए कहा कि हर मनुष्य लोकप्रिय बनना चाहता है, लेकिन उसके लिए उसे सहयोग ,उदारता, मैत्री, ईमानदारी , कर्तव्यनिष्ठा ,सदाचार आदि गुणों को अपनाना होगा। सिर्फ धन से लोकप्रियता हासिल नहीं हो सकती है, क्योंकि धन को लोग जान सकते हैं पर उसके लिए जान नहीं दे सकते हैं। बेईमान, धोखेबाज, अप्रमाणिक, भ्रष्टाचारी कभी लोकप्रिय नहीं बन सकता है। जैनियों की प्रतिष्ठा...
चेन्नई. साहुकारपेट के जैन भवन में विराजित साध्वी सिद्धिसुधा ने कहा आत्मा को मजबूती से जानने की जरूरत है। इसे नहीं जानने की वजह से लोग भटक रहे हैं। आत्मा निराकार और शुद्ध होती है। वायु से भी हल्की आत्मा होती है लेकिन मनुष्य के कर्मो के बोझ से आत्मा बोझिल बन रही है और भटक रही है। जीवन मे आगे जाने के लिए आत्मा से बोझ हटाने की जरूरत है। मनुष्य चाहे तो एक मिनट में भी जीवन को सार्थक कर सकता है और न चाहे तो पूरा जीवन भी व्यर्थ कर सकता है। मौत आये उससे पहले जीवन को मोक्ष के मार्ग की ओर मोड़ लेना चाहिए। संसार की उदासीनता में फंसे रहना संवेग होता है और परमात्मा के प्रति सच्चा प्रेम आना निर्वेग होता है। संसार के प्रति उदासीनता आते ही मनुष्य परमात्मा के प्रति बढऩे लगता है। लोगों को लगता है कि सामायिक कर परमात्मा के करीब आ गए हैं, लेकिन ऐसा नहीं है। परमात्मा के साथ योग और संसार के साथ वियोग आने पर निर्...
कुम्बलगोडु, बेंगलुरु (कर्नाटक): धर्म में आस्था, संगठन से जुड़ाव और अपने से मिलने की भावना प्रगाढ़ होती है तो आदमी सात समुन्दर पार भी पहुंच सकता है। कभी अपने व्यावसायिक, शिक्षा तथा अन्य किसी माध्यम से भारत की धरती से दूर किन्तु अपनी भारतीयता को हृदय में जागृत करने, अपने संस्कारों को पुष्ट बनाने, अपने देव, गुरु और धर्म के प्रति अपनी आस्था का समर्पण करने तथा अपने संघ से मजबूती के साथ जुड़ने के लिए जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के एकादशमाधिशास्ता, अखण्ड परिव्राजक, शांतिदूत, महातपस्वी आचार्यश्री महाश्रमणजी की पावन सन्निधि में ऐतिहासिक रूप से चैदह देशों में निवासित कुल 113 अप्रवासी तेरापंथी लोग पहुंच रहे हैं। संस्था शिरोमणि जैन श्वेताम्बर तेरापंथी महासभा के तत्वावधान में “कनेक्ट” थीम पर आधारित इस द्विदिवसीय एन.आर.आई. समिट को लेकर भारत में ही नहीं विदेशों में भी उत्साह चरम पर है। वर्षों...