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बिना भक्ति के मानव को मुक्ति नही मिलेगी– प्रवर्तक सुकनमुनि महाराज 

14 जुलाई खवासपुरा बिना भक्ति के संसार से मुक्ति नही मिलने वाली गुरूवार को संत शिरोमणी प्रवर्तक सुकनमुनि महाराज ने श्री मरूधर केसरी रूप सुकन दरबार मे विशाल धर्मसभा मे उपस्थित गांववासियों जैन समाज से कहां कि परमात्मा की वाणी जीवंत वाणी है जिनवाणी को सुनकर करोड़ो भव जिवों ने संसार से मुक्ति पाई ! चोरासी लाख योनियों मे मानव योनी ही ऐसी योनी है जिससे संसार के जन्म मरण के चक्रो से छुटकारा पाया जा सकता है तो वह मनुष्य योनी से मर्यादित होकर धर्म आराधना और साधना मे सलंग्न रहने वाला प्राणी ही संसार सागर से भव सागर को पार करवा पाएगा! युवाप्रणेता महेश मुनि, हरीश मुनि,नानेश मुनि,हितेश मुनि आदि सभी संतो ने कहां कि साधना वो मार्ग है जिससे प्राणी अपने जीवन का उध्दार और कल्याण कर पाएगा ! श्री संघ खवासपुरा के मंत्री अशोक कोठारी ने बताया कि प्रवर्तक सुकनमुनि और सभी संतो के प्रवचन 10 बजे से 11 बजे तक दोपहर 3 ब...

अमूत मूनि का कल्प चातुर्मास प्रवेश हूआ सम्पन्न

चार महीने धर्म से जूडने का समय -चातूर्मास गुरूवार अलवर पेट स्थित श्री उच्चब राज गौतम चंद ललवानी हाउस में उपपर्वतक अमूत मूनि अखिलेश मूनि,वरूण मूनि कल्प चातुर्मासार्थ प्रवेश श्री मरूधर केसरी रूप-सुकन अमूत चातुर्मास समिति के तत्वावधान में सम्पन्न हुआ। इससे पूर्व आध्यात्मिक प्रवेश शोभा यात्रा कोऑपरेटिव कॉलोनी से तीर्थंकरों एवं गुरु भगवंतो के जयकारे लगाते हूए निकलकर विभिन्न बाजारों से होती हुई लालवानी हाउस पहुंची। जैन कॉन्फ्रेंस युवा शाखा, महिला शाखा, अलवार पेट ,मइलापूर ,टी नगर आदी श्री संघो शोभायात्रा में विशेष रूप से उपस्थित रहे। तत्पश्चात शोभा यात्रा धर्म सभा में परिवर्तित हुई । अखिलेश मुनि ने सर्वप्रथम मंगलाचरण किया, एवम शांतिनाथ प्रभु , गुरु मरुधर केसरी आदि पर स्तवन का कर शुभारंभ किया लालवानी परिवार की बहू एवं बेटियों ने स्वागत गीत गाया । अतिथी स्वागत भाषण के माध्यम से श्री आनंद मल छल्लाणी...

अवसर को पहचानने वाले का ही जीवन सफल होता हैः- साध्वी श्री मंगलप्रभाजी

जीवन में अवसर बार-बार नहीं आते है और जब आते है उसे पहचानना आवश्यक होता है, जो इंसान अवसर को पहचान लेता है और अवसर का सदुपयोग करता है तब उसका जीवन सफल हो जाता है। चातुर्मास भी हमारी आत्मा का कल्याण करने का अवसर है, इस अवसर को पहचान कर जो श्रावक-श्राविका जिनवाणी, वीतराग वाणी, तप,ध्यान,उपवास,ज्ञान, दान,शील का पालन करते है, उनकी आत्मा का कल्याण हो जाता है और उनका जीवन सफल हो जाता हैं। उक्त उद्गार श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ ग्रेटर हैदराबाद, के तत्वावधान में काचीगुड़ा स्थित श्री पूनमचंद गांधी जैन स्थानक भवन में धर्मसभा को संबोधित करते हुए उपप्रवर्तिनी महासती श्री मंगलप्रभा जी म.सा ने व्यक्त किये। संघ के संघपति स्वरूपचंद कोठारी ने आज यहाँ जारी प्रेस विज्ञप्ति में जानकारी देते हुए महासती जीवन जीने की कला को समझाते हुए कहा कि मानव जीवन बार-बार नहीं मिलता है और एक बार ही मिलने वाले मानव ...

हमारी जीवन में ना तो break है और ना ही reverse है!

कोडमबक्कम वड़पलनी श्री जैन संघ के प्रांगण में आज सुयशाश्री मसा ने हमारी इच्छाएं एवं संतुष्टि के बारे में कहा! 365 दिन 12 महीने 24 घंटे हम भौतिक सुख के बारे में ज्यादा सोचते है और यह भी सोचते हैं कि धरम ध्यान को बाद में कर लेंगे! प्रतिदिन 24 घंटे मी 1440 मिनट 86,400 क्षण हमारे जीवन में आते हैं! हमारी गाड़ी में ब्रेक भी है गियर भी है रिवर्स गियर भी है! लेकिन हमारी जीवन में ना तो break है और ना ही reverse है! इसलिए इस जिंदगी को बहुत संभल कर जीना पड़ता है! हमारे जिंदगी में हमारी संपत्ति, हमारे स्वजन और हमारा शरीर बहुत महत्वपूर्ण है! स्वजन कभी भी खो सकते हैं! शरीर में कभी भी कोई भी बीमारी आ सकती है और कुछ भी हो सकता है! कितना भी रुपया, पैसा, सोना, चांदी हो, घमंड हो! हमारा एक निर्णय हमें अर्श से फर्श पर पटक सकता है! सरकार का एक नियम हमें बर्बाद कर सकता है! नोटबंदी जैसे कड़े कानून कभी भी हमें मजब...

हमारा जो शरीर है वो अनित्य है अशाश्वत है

उत्तराध्यान सूत्र के 18वें अध्याय की 23वीं गाथा में भगवान महावीर ने बताया है की हमारा जो शरीर है वो अनित्य है अशाश्वत है। इस शरीर पर भरोसा नही करना चाहिए, यह कभी भी नष्ट हो जाएगा। सावन भादों में चंद पलों के लिये बिजली चमकती है फिर घोर अंधेरा हो जाता है, शाम के समय कुछ मिनटों के लिये सूरज की लालिमा छाती है फिर अंधेरा छा जाता है। हमारा शरीर भी इसी बिजली की क्षणिक चमक एंव सूरज की लालिमा के समान है । संसार के जितने भी पदार्थ है वे सब अनित्य है, जो कभी भी समाप्त हो सकते है, तन और धन दोनों का कोई भरोसा नही है, तन कांच के बर्तन के समान है, ताश के पत्तो के महल के समान है। क्षण क्षण हमारा शरीर क्षीण हो रहा है । यह सारगर्भित प्रवचन तप चक्रेश्वरी आयम्बिल आराधिका पूज्या श्री अरुणाप्रभाजी म.सा. ने नीमचौक स्थानक की धर्मसभा में प्रदान किये।     शतावधानी पूज्याश्री गुरु कीर्ति जी मसा ने फरमाया क...

गुरु दीवार नहीं द्वार हैं

बैंगलोर श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ सीटी शाखा चिकपेट डबल रोड मकाना गार्डन के तत्वाधान में गुरु पूर्णिमा के पावन प्रसंग पर साध्वी डॉ अक्षयज्योति ने कहा गुरु हमें भवसागर पार पहुंचाता है। गुरु उस कलाकार का नाम है जो शिष्य के कोरे कागज रूपी जीवन में विशिष्ट रंगों को उकेरकर सुंदर सजीव चित्र बना देता है। माता पिता जन्म देते हैं गुरु जीवन देते हैं। जो बीच को बरगद बना दे, वह गुरु ही होता है । साध्वी डॉ चंदना ने कहा गुरु कुशल शिल्पकार होते हैं जो छैनी हथौड़ी से ऊपरी परत हटाकर पूजनीय मूर्ति बना देते हैं । सदगुरु और योग्य शिष्य का मिलना बहुत दुर्लभ है ।योग्य शिष्य गुरु की गरिमा को बढ़ा देता है। इस अवसर पर साध्वी अक्षदा ने सु मधुर स्वर में गुरु के प्रति समर्पित भाव से सुंदर गीतिका प्रस्तुत की। इस अवसर पर हलसूर से किशनलाल कोठारी, डोंटबालापुर से चंपालाल मकाना, उद्योगपति बाबूलाल राका, चिकबल्ला...

गुरु होते जिन्दगी के नवनिर्माण करने वाले : मुनि सुधाकर

तेरापंथ स्थापना पर बताई गुरु की महिमा माधावरम्, चेन्नई 13.07.2022 ; जो शिष्य गुरु के चरणों में अहंकार – मंमकार का विसर्जन कर अपने आप को सर्वात्मना समर्पित कर देता है, वह हर कार्य में सफल हो जाता है, सिद्धि को प्राप्त कर सकता है। उपरोक्त विचार मुनि सुधाकर ने जय समवसरण, जैन तेरापंथ नगर, माधावरम् में गुरु पूर्णिमा एवं 263वें तेरापंथ स्थापना दिवस पर “गुरु ही गंगा, गुरु ही तीर्थ” विषय पर व्याख्यानमाला में कहें।   गुरु की व्याख्या करते हुए मुनि सुधाकर ने कहा गु यानी अंधकार और रु यानी मिटाने वाले, अर्थात जीवन के अंधकार को मिटाने वाले गुरु होते हैं। गुरु के आशीर्वाद से ही आत्मबल, मनोबल, ज्ञानबल जागृत होता है। गंगा पाप का नाश करती है, चंद्रमा ताप का नाश करता हैं, कल्पवृक्ष अभिशाप का नाश और संत संताप का नाश करते हैं। वही गुरु के आशीर्वाद से पाप, ताप, संताप, अभिशाप चारों का नाश हो ज...

सच्चे हृदय से अपने गुरु के प्रति समर्पित शिष्य को इश्वर खुद ढूंढता है: सुयशा श्री जी मसा

कोडमबाक्कम वडपलनी श्री जैन संघ के प्रांगण में आज गुरु पूर्णिमा दिवस ता: 13/07/2022 बुधवार को “प्रज्ञा ज्योति संबोधी कुशल प.पू. गुरूवर्या “सुधा कंवर जी” म सा आदि ठाणा 5 के सान्निध्य में चातुर्मास की भव्य शुरुआत हुई। सर्वप्रथम णमोकार मंत्र, गुरुर ब्रह्मा विष्णु, एवं पैंसठिया जाप सम्पन्न हुआ और बाद मे “सुयशा श्री जी मसा” का व्याख्यान हुआ!मसा ने आज के दिन को “चातुर्मास स्थापना दिवस” के नाम से सम्बोधित किया! धर्म की अलग अलग परिभाषा को, धर्म आराधना, अहिंसा का पालन करना, सामायिक करना, साधु सेवा करना, तपस्या करना, धर्म के प्रति जागृत होना, लोगों की सेवा करना, आंतरिक भावों की शुद्धिकरण, आत्मा की शुद्धिकरण इत्यादि को एक प्रक्रिया के रुप में एक परम्परा के रूप में बताया! गुरु के उद्बोधन से मनोवृत्ति, लालसा पर अंकुश लगता है और पत्थर को मूर्ति बनाने में, बीज को ...

जिनके जीवन में गुरु नहीं उसका जीवन शुरू नहीं: महासती श्रीप्रियदर्शनाजी महाराज

दिवाकर भवन जावरा पर चातुर्मास हेतु विराजित जिनशासन चंद्रिका,मालव गौरव पूज्य महासती श्रीप्रियदर्शनाजी महाराज साहब तत्व चिंतिकाश्री कल्पदर्शना जी महाराज साहब ने आज गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर धर्म सभा को संबोधित करते हुए फरमाया कि जिनके जीवन में गुरु नहीं उसका जीवन शुरू नहीं गुरु कृपा से ही शिष्य के जीवन का विकास हो सकता है। भगवान से भक्तों को जोड़ने का कार्य भी गुरु ही कर सकते हैं पूज्य श्री कल्पदर्शना जी महाराज साहब ने भी बताया कि पतंग कितनी भी सुंदर हो बिना डोर के ऊपर नहीं जा सकती, बीज कितना भी अच्छा हो बिना खाद पानी के वृक्ष नहीं बन सकता। उसी प्रकार व्यक्ति कितना भी होशियार हो बिना गुरु कृपा के जीवन की ऊंचाइयों को प्राप्त नहीं कर सकता है 84 लाख योनियों में भ्रमण करते हुए माता पिता तो हर जन्म में मिलेंगे लेकिन गुरु की सेवा का मौका मुश्किल से मिलता है इसलिए गुरु भगंवतो की सेवा समर्पण भाव...

चातुर्मास में अपने जीवन में बोधी के बीज का रोपण करेः- साध्वी श्री मंगल प्रभा जी म.सा

सांसारिक जीवन में आत्मा का कल्याण के लिए चातुर्मास के चार माह के दौरान हर किसी धर्म प्रेमी बंधु को चाहिये कि वे अपने जीवन में बोधी का बीजारोपण करे। बोधी के बीज के रोपण से न केवल आत्मा का कल्याण होता है, बल्कि यह हमारे जीवन को सदगति प्रदान करता है। चातुर्मास हमारे सांसारिक जीवन को आत्मकल्याण की दिशा प्रदान करता है। आत्मा के कल्याण के लिए कम से कम चातुर्मास के दौरान जीवन में त्याग,तप, धर्म आराधना को महत्व देना चाहिए, जिससे की हम आत्म कल्याण के मार्ग पर आगे बढ़ सके। श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ ग्रेटर हैदराबाद, के तत्वावधान में काचीगुड़ा स्थित श्री पूनमचंद गांधी जैन स्थानक भवन में संचालित चातुर्मास धर्मसभा में शासन दीपिका उपप्रवर्तिनी महासती श्री बसंतकंवरजी म.सा की सुशिष्या उपप्रवर्तिनी महासती श्री मंगलप्रभा जी म.सा ने गुरु पूर्णिमा व चातुर्मास के प्रारम्भ पर अपने उद्बोधन में उक्त उ...

गुरूचा हात धरला तर सर्व संकटे दूर होतात

श्रीरामपूर दि.13 (वार्ताहर) प्रत्येकाच्या जीवनात पाणी व वाणी याला खूपच महत्व आहे. दोन्हीचा वापर संयमाने केला नाही तर पश्चातापाची वेळ येईल.गुरुकृपा मिळाली कि, सर्व संकटाचे निवारण होते. पण त्याकरिता गुरुवार अटल श्रद्धा हवी त्यांच्या विचारानुसार वागले तर जीवनाचे सोने होईल. असे विचार प्रखर व्याख्यात्या साध्वी पू. श्री विश्वदर्शनाजी म .सा यांनी चातुर्मास प्रारंभ प्रवचनाच्या शुभारंभ प्रसंगी व्यक्त केले. पू. विश्वदर्शनाजी गुरुपौर्णिमेचे महत्व विषद करताना म्हणाल्या ,चातुर्मास हा ज्ञान प्राप्तीचा काळ आहे. वाणीवर संयम ठेवण्याचा निर्धार करावा .चातुर्मासात जितकी धर्म साधना ,उपासना कराल त्याचे चांगले फळ मिळेल. असे स्पष्ट करून त्या म्हणाल्या कि धर्म स्थानकात परवानगी शिवाय प्रवेश मिळेल .कोणतीही देणगी द्यावी लागत नाही. प्रत्येकाने धर्मानुसार नियम पाळलेच पाहिजे. तरच जीवनात आनंद निर्माण होईल .        गुरुवर...

प्रभावशाली व्यक्तित्व के धनी आचार्य श्री भिक्षु

तेरापंथ धर्मसंघ के आध्यप्रवर्तक आचार्य श्री भिक्षु के 297वें जन्मदिन, 265वें बोधी दिवस एवं 263वें तेरापंथ स्थापना दिवस पर विशेष    जब-जब धर्म का बिखराव होता हैं, तब-तब धरती पर महापुरुषों का जन्म होता हैं। भगवान महावीर के निर्वाण के बाद लगभग 600 वर्ष बाद जैन धर्म दो भागों में विभक्त हो गया – श्वेताम्बर और दिगम्बर! वीर निर्माण की 19वीं शताब्दी आते आते 107 भागों में जैन धर्म बंट चुका था। विक्रम संवत 1783 को राजस्थान कांठा क्षेत्र के कंटालिया में साधारण परिवार में माँ दीपा की कुक्षी में बालक भीखण का जन्म हुआ। सामान्य परिस्थितियों में लालन पालन के बाद युवा अवस्था में आचार्य रघुनाथ के पास वैराग्य भाव से दीक्षा स्वीकार की। उत्पातिया बुद्धि के आधार पर लगभग 5 वर्षों में ही आगमों का गहन अध्ययन कर लिया।     कहते है जब व्यक्ति का प्रबल पुण्योदय होने वाला होता हैं, तो योग भी सामने चल कर आते हैं। ...

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