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जो धर्म की शरण में जायेगा परिणाम अपने आप पायेगा

प्रकाशनार्थ नागदा जं. निप्र- मीडिया प्रभारी महेन्द्र कांठेड़ एवं नितिन बुडावनवाला ने बताया कि धर्मसभा में महासति श्री दिव्यज्योतिजी म.सा., महासति दिप्तिश्रीजी म.सा., पूज्य काव्याश्रीजी म.सा. ने कहा कि जो भी मानव धर्म की शरण में जायेगा, उसका परिणाम अपने आप पायेगा। धर्म के प्रभाव एवं आस्था एवं विश्वास से जो भी अपनी शारीरिक एवं मानसिक समस्याओं का समाधान सुगमतापूर्वक प्राप्त कर सकता है एवं उसका कुछ भी नहीं बिगड़ता है। हमारा धर्म अहिंसक है, हिंसा में विश्वास नहीं करता है। हमको अपने जीवन में 24 घंटे में केवल 60 मिनट ही धार्मिक कार्यो के साथ जप, तप के साथ धार्मिक सत्संग करना चाहिये। मीडिया प्रभारी ने बताया कि आज से सत्ताईस दिन तक सत्ताईस बहनों का सामुहिक उवसग्गहर स्त्रोत का जाप प्रारम्भ किया । प्रश्न मंच की प्रभावना श्रेणीक बम एवं अतिथि सत्कार का लाभ राजेन्द्र कांठेड़ ने लिया। तपस्या में रमेश तांतेड़...

महासती जी श्री सायमप्रभाजी म. सा के सानिध्य मे आज प्रवचन हुए

व्यारा के अम्बेश भवन मे महासती जी श्री सायमप्रभाजी म. सा के सानिध्य मे आज प्रवचन हुए बहार से अलग अलग संघो से मेहमान पधारे व्यारा श्री संघ के जैन पाठशाला के बच्चों ने आज म.सा के सानिध्य मे दया के कार्यक्रम मे भाग लिया सभी बच्चों ने एक ही बैठक पर 5 सामायिक 4 घंटे तक बैठकर की बहुत ही सुन्दर उदाहरण पेस किया इन छोटे छोटे बच्चों की सभी ने अनुमोदना की और व्यारा संघ के सभी मेंबर्स के घरों मे चार ही महीने रोज आयम्बिल का म. सा के समक्ष सबने अपने अपने नाम लिखवाये | व्यारा संघ के आज के प्रवचन की जलकिया | संचालन श्री रणजीतजी बडोला ने किया |

रविवारीय स्पेशल प्रवचन

श्रमण संघीय उप प्रवर्तक श्री अमूत मुनि जी मसा पूज्य अखिलेश मूनि जी मसा पूज्य डॉ वरूण मूनि जी मसा आदी ठाणा 3 के सानिध्य में अलवारपेट ऐतिराजा निलायम में आयोजित रविवारीय स्पेशल प्रवचन श्री मरूधर केसरी रूप-सुकन अमूत चातुर्मास वैयावच्च समिति (चेयरमैन श्री आनंदमल‌ जी छल्लाणी ,अध्यक्ष श्री जवरीलाल जी कटारिया के मार्गदर्शन)तमिलनाडु के तत्वावधान में करीब 1000-1100 गुरु भक्तों की उपस्थिति में सानंद संपन्न हुआ ।। सुश्रावक श्री सुनील सा खेतपालिया अध्यक्ष संकल्प केलपी श्वेतांबर जैन संघ , वरिष्ठ समाजसेवी दीपचंद सा लुणिया वरिष्ठ समाजसेवी सुनील जी बाफना, वरिष्ठ समाजसेवी सुवालाल जी कर्नावट आदी अनेक गणमान्य सज्जन उपस्थित रहे ।।

कषाय भाव आने पर मौन ही औषधि है – साध्वी सुयशा

जयजिनेंद्र, कोडम्बाक्कम वड़ापलनी श्री जैन संघ के प्रांगण में आज ता:17 जुलाई रविवार, प.पू. सुधाकंवर जी मसा के मुखारविंद से:-आज उत्तराध्ययन की महिमा और तीसरे अध्ययन बताया! सम्यक पराक्रम, सम्यक दर्शन! सम्यक दर्शन वह बीज है जो चरित्र को वटवृक्ष बना देता है! जब तक सम्यक दर्शन नहीं आता तब तक मोक्ष के द्वार नहीं खुलते! हमें पुरुषार्थ करना चाहिए! आठ कर्मों में सबसे ज्यादा मोहनीय कर्म से लोग ज्यादा ग्रसित है इन कर्मों की निर्जरा होनी चाहिए। सम्यग दर्शन सिर्फ सामायिक करने से यह माला फेरने से नहीं होते! सम्यग दर्शन को आंतरिक चक्षुओं से देखना होगा! बाहर की आंख खुलती है तो संसार दिखता है! भीतरी आंख खुलेगी तो दृष्टि बदल जाएगी और सृष्टि भी बदल जाएगी!हमें अवस्था को नहीं व्यवस्था को बदलना होगा! भव को नहीं भाव को बदलना होगा! दिशा बदलेगी तो दशा स्वत: ही बदल जाएगी! सम्यक्त्वी की आत्मा और मिथ्यात्वी की आत्मा म...

जिनवाणी श्रवण करने का मौका भाग्यशालियों को ही प्राप्त होता है: महासती श्री प्रियदर्शना जी महाराज

जिनवाणी जल के समान है जिस प्रकार जल सभी जीवो की प्यास बुझाता है उसी प्रकार जिनवाणी भी अनंत भव भ्रमण से अतृप्त आत्मा की तृष्णा मिटाता है। जिनवाणी श्रवण करने का मौका भाग्यशालियों को ही प्राप्त होता है। उपरोक्त उद्गगार दिवाकर भवन पर विराजित पूज्य महासती श्री प्रियदर्शना जी महाराज साहब एवं कल्पदर्शना जी महाराज साहब ने धर्मसभा को फरमाते हुए बताएं आपने बताया कि सिर्फ बोलना ही गुण नहीं है अपितु भक्ति के साथ जिनवाणी श्रवण करना वे श्रोता का प्रथम गुण है। पूज्य महासती जी के इस पावन सानिध्य में 48 दिवसीय भक्तांबर अनुष्ठान कि आज चौहदवी गाथा का अनुष्ठान सानंद संपन्न हुआ। आज के लाभार्थी गुप्त महानुभव रहे उपरोक्त जानकारी देते हुए श्री संघ अध्यक्ष इंदरमल दुकड़िया एवं कार्यवाहक अध्यक्ष ओमप्रकाश श्रीमाल ने बताया कि दिनांक 23 जुलाई से 29 जुलाई को गुरु आनंद जन्म जयंती सप्ताह मनाया जावेगा जिसमें प्रथम दिन 3-3 ...

धर्म के मार्ग से ही जीवन के अवगुण दुर हो सकते है– प्रवर्तक सुकनमुनि महाराज

17 जुलाई खवासपुरा अपने अवगुणो को वहीं व्यक्ति दुर कर सकता जिसके मन मे धर्म के प्रति श्रध्दां व दुसरो के लिए करूणा दया परोपकार त्याग की भावना हो वह प्राणी ही अपनी यश किर्ती मे वृद्धि के साथ संसार मे महान बन पाएगा! धर्म के मार्ग पर चलने पर ही जीवन के अवगुण दुर होगें प्रवर्तक सुकनमुनि महाराज ने रविवार को आयोजित विषेश धर्मसभा मे श्रध्दांलूओ से कहें ! महेश मुनि, नानेशमुनि, हितेश मुनि आदि सभी संतो ने महापुरुषों के जीवन चारित्र का वाचन करते हुयें कहां कि जगत मे जितने भी महापुरुषों हुये है उन्होनें ने मनुष्यभव मे कठिनाईयो को भोगकर जीवन कौ महान बनाया ! श्री संघ के पदाधिकारी जी राकेश कोठारी,नथमल कोठारी ने जानकारी देते हुये बताया कि धर्म सभा में चैन्नाई निवासी रिखब चन्द बोहरा और पीपाड़ की चन्दनबाला महिला मंडल की बहनों ने गुरूभगंवतो के चातुर्मास करवाने पर खवासपुरा संघ की बधाई देते हुये धर्म सभा मे विचा...

गंगा से बढ़कर पवित्र पानी नही, आत्म ग्लानि से बढ़कर कोई ग्लानि नही : श्री अरुणाप्रभाजी मसा

गंगा से बढ़कर पवित्र पानी नही, आत्म ग्लानि से बढ़कर कोई ग्लानि नही। सुनी तो है बहुत सी वाणी लेकिन जिनवाणी से बढ़कर कोई वाणी नही। जिनवाणी एक दर्पण के समान है जैसे दर्पण हमारे अस्त व्यस्त कपड़े शरीर के दाग धब्बे दिखा देता है वैसे ही जिनवाणी का जिसने चिंतन मनन कर लिया और उसमें गहरे उतर गए तो वह व्यक्ति अपने अंदर के पाप रूपी दागों को स्वयं देख सकता है। आदि व्याधि और उपाधी को जिनवाणी समाप्त कर सकती है । आदि मतलब मानसिक दुख/पीढ़ा/तकलीफ व्याधि मतलब शारीरिक बीमारी और उपाधि मतलब पारिवारिक दुःख ॐ ऋम श्रीं क्लिम नमो लोए सव्व साहूणं का जाप करने से आदि व्याधि उपाधी दूर हो सकती है। जिनवाणी का गहराई से अध्य्यन सभी दुखों को दूर करता है । शिक्षक जीवन बनाता है, डाक्टर जीवन बचाता है, जिनवाणी जीवन सँवारती है । जिस प्रकार बीमार को डाक्टर कड़वी गोली देता है तो व्यक्ति बेमन से लेता है फिर भी ठीक हो जाता है, वैसे ही जि...

पूज्या गुरुवर्या ने आज प्रवचन में शरीर के आठ विभाग के बारे में बतलाया

पूज्या गुरुवर्या ने आज प्रवचन में शरीर के आठ विभाग के बारे में बतलाया। जिसमें आत्मा- राष्ट्रपति, दिमाग- प्रधानमंत्री, आंख- निरीक्षण मंत्री, नाक- स्वास्थ्य मंत्री, हाथ- रक्षा मंत्री, हृदय- प्रसारण मंत्री…क्रमशः होते हैं। जिस प्रकार मकान बनाने हेतु सरिया, सीमेंट तथा ईंटों का प्रयोग होता हैं, उसी प्रकार हमारा शरीर हड्डी, मांस तथा चमड़ी से बना हुआ हैं। आज प्रवचन में धारावी की चन्दनबाला पाठशाला के छोटे- छोटे बच्चों ने कव्वाली पर एक सुंदर प्रस्तुति दी, जिसका विषय था एक धार्मिक व्यक्ति को अधार्मिक पत्नी मिल जाए, तो क्या होता हैं? प्रवचन पश्चात प्रतिदिन चार प्रश्न पूछे जाते हैं। उत्तर देने वाले को पारितोषिक दिया जाता हैं। श्री संघ में प्रतिदिन दोपहर 2 से 3 नवकार मन्त्र का जाप होता हैं। आज दोपहर 3 बजे एक प्रतियोगिता भी आयोजित की जा रही हैं, जिसका विषय हैं- 24 तीर्थंकर। श्री संघ में आयम्बिल की ...

 धन कमाना संसार परिवार चलाने के लिए आवश्यक है:  प पू महिमा श्री जी 

चेहरे की मुस्कराहट से सामने वाला कितना भी क्रोधी नम्र हो जाता है। वर्तमान मे बच्चे तो है मगर उनका बचपन गायब है। वर्तमान मे अपने तो बहुत है मगर अपनापन गायब है। आज कल मुस्कराहट भी नकली हो गई है।हमे ना सिर्फ चेहरेपर मुस्कराहट नही अंतर मे भी प्रेम भाव रखने चाहिए तभी जीवन का माहोल भी खुशीओ से भरा भरा रहेगा।                          मानव भगवान को मंदिर और किताबो मे ढूंढता है मगर भगवान तो स्वयं के हृदय मे विराजमान है।इसलिए जीवन मे सर्व प्रथम स्वयं को जानना होगा तभी जीवन मे सुखी हो सकते है। हम जीवन मे मुस्कराहट के साथ व्यवहार करेंगे तो सभी कार्य अच्छी तरह से पूर्ण होंगे।               प पू महिमा श्री जी ने अपने उदबोधन मे कहा की धन कमाना संसार परिवार चलाने के लिए आवश्यक है। मगर अपने जीवन का उत्थान करने के लिए धर्म आवश्यक है। धन तो अपनी पुण्य वाणी से आता है और कर्मो के का,ण चला भी जाता है । कहते है ...

नमोत्थुणं के पाठ से होता रोग-शोक का नाश – मुनि सुधाकर

माधावरम्, चेन्नई 16.07.2022 ; आचार्य श्री महाश्रमणजी के शिष्य मुनि श्री सुधाकरजी ने जैन तेरापंथ नगर, माधावरम में नमोत्थुणं की प्रेरणा देते हुए श्रद्धालुओं को संबोधित करते हूए कहा नमोत्थुणं का पाठ शाश्वत है। स्वर्ग लोक के चौसठ इन्द्र व असंख्य देवी-देवताओं का परिचित पाठ है। नमोत्थुणं के पाठ से साधक के पाप कर्म का भी पुण्य कर्म में संक्रमण हो जाता है। शास्त्रों में ऐसे अनेकों उदाहरण मिलते हैं। सिद्धों व अरिहंतो की स्तुति व स्तवन से आधि, व्याधि और उपाधि से मुक्ति मिलती है। नमोत्थुणं का पाठ रोग-शोक का नाश करता है। इससे अद्भुत शक्ति व शांति की तरंगें पैदा होती है, जो वातावरण को भी आनंदमय, मंगलमय बना देती है। मुनि श्री ने आगे कहा नमोत्थुणं को प्रणिपात व शुक्रत्व के नाम से भी जाना जाता है।   मुनिश्री ने विवेचना करते हुए आगे कहा विनम्रता व समर्पण, धर्म का पहला मंत्र है। हमें अहम की नहीं अर्हम् की स...

संसार पाप की दुनिया हैः- श्री मंगलप्रभा जी म.सा

यह संसार पाप की दुनिया है, पाप क इसस संसार से हमें आगम ही बचा सकते है। हम आगम का पाठ नहीं कर सकते है तो कम से कम इसका श्रवण कर हम हमारी आत्मा को परमात्मा बना सकत है और आगम के बताए गये मार्ग पर चल कर हम आत्मा का कल्याण कर कर्मों की निर्जरा कर सकते है। उक्त उद्गार श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ ग्रेटर हैदराबाद, के तत्वावधान में काचीगुड़ा स्थित श्री पूनमचंद गांधी जैन स्थानक भवन में धर्मसभा को संबोधित करते हुए उपप्रवर्तिनी महासती श्री मंगलप्रभा जी म.सा ने व्यक्त किये। संघ के संघपति स्वरूपचंद कोठारी ने आज यहाँ जारी प्रेस विज्ञप्ति में जानकारी देते हुए महासती ने जीवन में आगम की महत्ता को दर्शाते हुए कहा कि आगम को दर्पण की उपमा दी गयी जो हमे हमारी आत्मा से साक्षात्कार कराते है। आगम हमारी आत्मा में व्याप्त कषायों के कचरे को साफ कर आत्मा का कल्याण करते हैं। महासती ने फरमाया की हम आत्मा की त...

महापुरुषांच्या कथा श्रवणाने व्यथा दूर होतात.- पू .श्री . विश्वदर्शनाजी म सा

श्रीरामपूर दि. 16 (वार्ताहर) महापुरुषांच्या कथा ऐकण्याची संधी सर्वानाच मिळत नाही. महापुरुषांच्या कथा ऐकल्यावर प्रत्येकाच्या व्यथा दूर होतील. या कथा जीवनाला नवीन देतात. असे प्रतिपादन प्रखर व्याख्यात्या प.पु.विश्वदर्शनाजी म .सा यांनी जैन स्थानकमध्ये प्रवचनातून केले. महापुरुषांची महती सांगताना पू . विश्वदर्शनाजी म्हणाल्या कि,महापुरुषांचे नाव जिभेवर येणे हे पुण्य आहे. टी .व्ही वर दाखविल्या जाणाऱ्या मालिकांच्या कथातून पश्चाताप होतो. महापुरुषांच्या कथा या मार्गदर्शक ठरतात . त्या जीवन जगण्याची प्रेरणा देतात. धर्मकथा कधीही रटाळ वाटत नाही. त्यांच्या चिंतनाने ,मननाने मनाची मरगळ दूर होते. उद्यानामध्ये फुलांचे सौंदर्य आपण पाहतो. त्याच्या मुळीचा विचार करीत नाही. या मुळात जे कष्ट घेतलेले असतात .त्यामुळेच फुल उगवते म्हणून वरवरचे सौंदर्य ,रुतो, पाहण्यापेक्षा आतील मूळ पाहावे .” उपर शेरवानी ,नीचे परेश...

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