*☀️ प्रवचन वैभव☀️* 🌧️ 4️⃣8️⃣ *💧 पर्युषण तत्त्वधारा-13💧* 236) जो प्राप्त हुआ है उसके अहंकार को *मद..* जो हम नही है या जो हमारे पास नहीं है फिर भी अहंकार करना उसको मान कहते है.! 237) मद एवं मान के कटुफल तीर्थंकर को भी भुगतने पड़े हैं ये भूलना मत.. 238) नयसार के कल्याण का कारण संत समागम और मरीचि के पतन का कारण था लोभ और मद 239) देह की शिथिलता के कारण जो दोष लगे वह क्षम्य है मन की शिथिलता के कारण जो दोष आते है वह अक्षम्य हैं.! 240) जो भीतर से शुष्क हो उसके बाहरी मीठे व्यवहार में कोई सार नही होता..! 🌧️ *प्रवचन प्रवाहक:* *तीर्थ प्रभावक वीर गुरुदेव* *सूरि जयन्तसेन चरण रज* मुनि श्रीवैभवरत्नविजयजी म.सा. *🦚श्रुतार्थ वर्षावास 2024🦚* श्रीमुनिसुव्रतस्वामी नवग्रह जैनसंघ @ कोंडीतोप, चेन्नई महानगर
*🌧️विंशत्यधिकं शतम्* *📚📚📚श्रुतप्रसादम्🌧️* 🌧️ 4️⃣7️⃣ 🪔 पेट के ६ भाग करें.. 👉3 भाग आहार लें 👉🏿2 भाग पानी के लिए 👉🏻1 भाग वायु संचार के लिए.. ⚡ इस शास्त्रोक्त विधान का उल्लंघन करके अति आहार लेना शारीरिक मानसिक स्वास्थ्य हेतु घातक है.! 🛑 इस मर्यादा से अतिरिक्त आहार लेने से वायुसंचार हेतु जरूरी मार्ग अवरूद्ध हो जाता है जिसके कारण वायु प्रकोप से हार्ट एटेक आदि अनेक घातक रोग होते है.! ⚡ देह स्वस्थ नही होगा तो साधना भी असंभव है अतः अविरत साधना हेतु देह स्वस्थ होना जरूरी है और स्वस्थ देह हेतु मर्यादित आहार जरूरी है.! *📗श्री यति दिन कृत्य📘* 🌷 *तत्त्वचिंतन:* *मार्गस्थ कृपानिधि* *सूरि जयन्तसेन चरण रज* मुनि श्रीवैभवरत्नविजयजी म.सा. *🦚श्रुतार्थ वर्षावास 2024🦚* श्रीमुनिसुव्रतस्वामी नवग्रह जैनसंघ @ कोंडीतोप, चेन्नई महानगर
एकांत, मौन, एवं ध्यान इन तीन सुत्रे को भगवान महावीर ने अपनाया! उनके जीवन में प्रेम, क्षमा वात्सल्य का झरणा प्रवाहित था! – साध्वी डॉ. राजश्री जी महाराज द्वारा उद् भोदन! Competition (स्पर्धा), Comparison ( तुलना), Connection ( जुड़ना ) भगवान महावीर स्वामी के विचारोसे हो- डॉ. मेघना श्री जी महाराज नारी पतिके लिए चारित्र्य, संतान के लिए ममता, समाज के लिए सेवा, विश्व के लिए दया एवं जिवमात्रा के लिए स्नेह संजोगनेका काम करती है! “साध्वी जिनाज्ञा श्री जी! आकुर्डी निगडी प्राधिकरण श्री संघ के प्रांगण मे आज डॉ. राज श्री जी म.सा. आदि ठाणा 4 के सानिध्य मे भ. महावीर जन्म कल्याणक महोत्सव बडे श्रध्दा पुर्वक मनाया गयाl इस शुभअवसरपर चातुर्मासार्थ बडी दानराशी देने वाले दानदात परिवारका सन्मान जितोपुना चाप्टर के चेअरमन, अ.भा. नाट्य परिषद पिॅ. चिं. के कार्याध्यक्ष, जैन विद्याप्रसारक मंडल के जॉ सेक्रेटरी प्...
आधुनिक बनने की होड़ में आध्यात्मिक दृष्टि से पिछड़ते जा रहे- समीक्षाप्रभाजी म.सा. पर्युषण पर्व के पांचवे दिन आधुनिक नहीं आध्यात्मिक बने विषय पर प्रवचन Sagevaani.com /सूरत,। तपस्या करना सहज नहीं है, तप करने के लिए तन को तपाना पड़ता है। जो तन को तपाते है वहीं तपस्वी बन पाते है। जो तपस्या नहीं कर सकते वह भी तपस्वियों की अनुमोदना कर पुण्य प्राप्त कर सकते है। ये विचार मरूधरा मणि महासाध्वी जैनमतिजी म.सा. की सुशिष्या सरलमना जिनशासन प्रभाविका वात्सल्यमूर्ति इन्दुप्रभाजी म.सा. ने श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ गोड़ादरा के तत्वावधान में महावीर भवन में पर्वाधिराज पर्युषण पर्व की आठ दिवसीय आराधना के पांचवे दिन गुरूवार को आधुनिक नहीं आध्यात्मिक बने विषय पर प्रवचन में व्यक्त किए। उन्होंने बताया कि पूज्य प्रवर्तक पन्नालालजी म.सा. की जयंति शुक्रवार को तप त्याग व दया व्रत के साथ मनानी है। इस अवसर पर अध...
*☀️ प्रवचन वैभव☀️* 🌧️ 4️⃣7️⃣ *💧 पर्युषण तत्त्वधारा-12💧* 231) हम अपने भावो के मालिक है पदार्थो पर कोई अधिकार नहीं अतः भाव रहित त्याग कल्याणकारी नही बन सकता.! 232) संयोग से संयोग हुआ, वियोग से संयोग छूट जावेगा, इससे अधिक कोई संबंध नहीं आत्म के अतिरिक्त पदार्थो से..! 233) सबसे मुश्किल समकित प्राप्ति हैं.! 234) समकित अतिमुल्यवान है उसे पाने के लिए नम्र सरल संतोषी विनय विवेकशील बनना ही पड़ेगा.! 235) दोषों का त्याग श्रेष्ठ त्याग सद्गुणों का दान श्रेष्ठदान है.! 🌧️ *प्रवचन प्रवाहक:* *युग प्रभावक वीर गुरुदेव* *सूरि जयन्तसेन चरण रज* मुनि श्रीवैभवरत्नविजयजी म.सा. *🦚श्रुतार्थ वर्षावास 2024🦚* श्रीमुनिसुव्रतस्वामी नवग्रह जैनसंघ @ कोंडीतोप, चेन्नई महानगर
वीरपत्ता की पावन भूमि आमेट के जैन स्थानक मे पर्व पर्युषण के पांचवें दिन साध्वी चन्दन बाला ने कल्पसूत्र के माध्यम से कहा कि कल्पसूत्र में भगवान महावीर के विस्तृत जीवन का वर्णन हैl यह कल्पसूत्र साक्षात् कल्पवृक्ष समान हैl इस सूत्र में अनानुपूर्वी से कथन होने से सर्वप्रथम महावीर प्रभु का चरित्र बीज समान हैंl पाशर्वनाथ का चरित्र अंकुर समान है, नेमिनाथ का चरित्र स्कंध समान है, ऋषभदेव का चरित्र डाली के समान हैं, स्थविरावली पुष्प के समान है, सामाचारी का ज्ञान सुगंध समान है और मोक्ष की प्राप्ति फल समान हैl पर्युषण महापर्व के पांचवे दिन में कल्पसूत्र के दो व्याख्यानों का स्वाध्याय (वाचन) होता है । महावीर प्रभु की आत्मा ने मरीचि और त्रिपृष्ट वासुदेव के भव में भयंकर पाप किए थे, जिसके फलस्वरुप उन्हें दो बार नरक में भी जाना पड़ा था । भगवान महावीर ने 13 महीनों तक देवदुष्य वस्त्र को धारण किया, उसके बाद ...
Sagevaani.com माधावरम्: पर्यूषण महापर्व के पाँचवें दिन तेरापंथ जैन पब्लिक स्कूल, माधावरम्, चेन्नई में आराधनारत साधकों को ‘अणुव्रत दिवस’ के रूप में समायोजित विषय पर सम्बोधित करते हुए साध्वी डॉ गवेषणाश्री ने कहा कि आदमी के मन में अबूझ प्यास है- धन की, पदार्थ की, सुविधा की इतनी गहरी है कि जल्दी से बुझ नहीं पाती, ईच्छाओं का अंत होता ही नहीं। अनियंत्रित ईच्छाओं की पूर्ति का परिणाम होता है- अनैतिकता। कम तोल-माप इत्यादि इस सारी दुविधाओं को मिटाने का एक सक्षम अवदान है- अणुव्रत। अणुव्रत जीता जागता धर्म है। भगवान महावीर के जीवन की यशोगाथा मानव जाति के लिए इतिहास की अद्भूत घटना है। उनके उपदेशों का सार अणुव्रत ही है। साध्वी श्री मयंकप्रभा जी ने कहा कि आकाश में इन्द्रधनुष जब आता है, तब कितना सुन्दर और आकर्षक लगता है, वैसे ही जीवन के आकाश में व्रत, त्याग, धर्म की चेतना जुड़ जाये, तो जीवन स...
धैर्योश्री जी म सा नहीं अंतगड सूत्र की वाचना की कृष्ण महाराज ने धर्म दलाली कैसे की इसका वर्णन कियाl जो भी दीक्षा लेगा उसके परिवार का भरण पोषण का भार में उठाऊंगा ऐसे कृष्ण महाराज ने कहा बड़ा ही सुंदर वर्णन किया गयाl कृष्ण महाराज की पटरानी ने कैसी दीक्षा ग्रहण की उसका वर्णन कियाl साध्वी आगम श्री जी महाराज अपने दान के बारे में बताया देवे सो देवता रखे सो राक्षस पहले लोगों के हाथ बड़े लंबे थे पर आज छोटे हो गएl दान किसके लिए देना है दूसरों का दुख दर्द देख कर दर्द से दिल मन द्रवित होते और अनुकंपा से सामने वाले व्यक्ति को जो चाहिए पैसा दान देना चाहिएl साता उप जाना चाहिए इससे मानव हृदय की कीमत हो जाती हैl आज हमारी संपत्ति का उपयोग हम चार कोर्ट में कर रहे हैंl पहले कोर्ट है व्हाइट कोट जो डॉक्टर के यहां पर पैसा जा रहा है दूसरा है काला कोट सारा पैसा कोर्ट कचहरी में खर्च हो रहा हैl तीसरा है खाकी कोट पु...
प्रणाम मे अनुशासन। वात्सल्य, विनय की भावना होती है! प्रणाम करने से परिणाम अच्छे होते है! विनय ही धर्म का मुल है! “ ज्यों नमे ते सबसे हमें! ज्यों जगाये निष्टा उसकी बढ़ती है प्रतिष्ठा !साध्वी जिनाज्ञा श्री जी। शील की चुंदड सदाचार का महासागर है ! शाश्वत सुखोको प्राप्त करानेवाली है! शास्वत सुखोको प्राप्त करनेके लिए मनुष्य चारित्रवान होना चाहिए! – डॉ. राज श्री जी म.सा. आकुर्डी- निगडी- प्राधिकरण श्री संघ के प्रांगण मे चातुर्मासार्थ विराजीत महासाध्वी डॉ. राजश्री जी म.सा. आदि ठाणा 4 के निश्रा मे पर्वाधिराज पर्युषण पर्वका धर्मअनुरागीयों ने बडे उल्हास एवं उमंग के साथ सामुहिक प्रार्थना, अखंड 8 दिवसीय 24 घंटे का “नवकार महामंत्र” जाप, प्रवचन , तप आराधना आदिके माँध्यमसे स्वागत हो रहा है !आजका प्रवचन का विषय था “ चरित्रवान होता है महान”. आज के कार्यक्रम मे पुना के प्रसिध्द उद्योजक भामाशा श्रीमान रम...
Sagevaani.com /माधावरम्: भाग्य से मनुष्य के पास 3 शक्तियां है- मन, वचन और काय। इनका उपयोग कैसे करें, क्यों करें, यह विवेक पर निर्भर है। कम बोलने, मधुर-मीठा बोलने, वाणी संयम करने से शक्ति का सवर्धन होता है। ज्यादा बोलने वाला लघुता को प्राप्त करता है। इसीलिए पायल स्त्रियों के पैरों में पहना जाता है और हार गले में। मधुर स्वरों के कारण शत्रु भी अर्थात् विभीषण भी राम का बन गया और कटु वचन के कारण रावण ने अपने भाई को खो दिया। उपरोक्त विचार अष्टदिवसीय पर्यूषण महापर्व साधना शिविर के चौथे दिवस वाणी संयम का महत्व बताते हुए डा. साध्वी श्री गवेषणाश्रीजी ने आचार्य महाश्रमण तेरापंथ जैन पब्लिक स्कूल के प्रांगण में साधकों को प्रेरणा देते हुए कहे। साध्वीश्रीजी ने आगे कहा कि भगवान महावीर ने मौन को तप माना है। भगवान महावीर का जीवन दर्शन ऊर्जा से संपन्न और जीवन बोध देनेवाला है। साध्वी श्री मयंकप्रभाजी ने कहा...
आज पर्वाधिराज पर्युषण का चौथे दिन भगवान महावीर का जन्मोत्सव बडी धूमधाम से मनाया गया। पूज्यनीय गुरुभगवंतों ने जन्म वाचन का महत्व ओर भगवान महावीर की महिमा का गुणगान किया। प्रवचन का आज का विषय था ” भावना का महत्व” और ” घर एक मंदिर” पर प्रकाश डाला। पूज्यनीय महासती प्रियंकाजी महाराज साहब ने भावना का विवेचन कर कहा कि भावना ही पुन्य पाप, राग वैराग्य, सांसारिक जीवन एवं मोक्ष, आदि का कारण है, अतः हमें हमारी भावना की शुद्धता को परखते रहकर, सदा कुत्सित भावनाओ का त्याग एवं उत्तम भावना भानी चाहिए । पूज्यनीय महासती सरिताश्रीजी महाराज साहब ने घर को मंदिर बनाने की प्रेरणा देते हुए कहा कि घर केवल इंट पत्थर का घरौंदा नहीं, बल्कि खुशियां, सामर्थ्य, एकता, उच्च संस्कार और अच्छी भावनाओ से परिपूर्ण होना चाहिए। परस्पर विश्वास, सहयोग, सामंजस्य, शुद्ध विचार से सराबोर हो । घर के वरिष्ठ जनों क...
*🌧️विंशत्यधिकं शतम्* *📚📚📚श्रुतप्रसादम्🌧️* 🌧️ 4️⃣6️⃣ 🪔 छह विगई १) दूध, २) दही, ३) घी ४) तेल, ५) गोल, ६) कड़ा विगई(मिठाई) ⚡ विगई की प्रकृत्ति विकार में परिवर्तित होना हैं, 📌 उसके भक्षण से मोह का उदय होता हैं.! 📌 मोह के उदय से आत्म हित चिंतक पुरुषार्थवंत साधक भी दुष्कर्म के प्रवृत्त हो जाते है.! 🛑 *देह स्वस्थ,निरोगी* *मजबूत होते हुए भी* *स्वाद आसक्ति के कारण* *जो विगई भक्षण करता है* *उसके लिये ये निषेध कहा है.!* ✅ देह कमजोर हो तो, रोग उपचार चलता हो तो, विशिष्ट दीर्घ तप चलता हो तो, शास्त्रों में गुरु/वडिल की आज्ञा से उचित मात्रा में विगई वापरने का विधान है.! 🔴 निष्कारण विगई वापरने से परिणाम विकृत बनते है, विगई की विकृत्ति से बचने उपरोक्त कारण के सिवा विगई नही वापरनी चाहिए.! *📘श्री पंचवस्तुक ग्रंथ📘* 🌷 *तत्त्वचिंतन:* *मार्गस्थ कृपानिधि* *सूरि जयन्तसेन चरण रज* मुनि श्रीवैभवरत्नविजयजी म.सा. *🦚श्रु...