परम पूज्य धैर्योश्रीजी म सा ने अंतगढ़ सूत्र का वाचन किया अरिस्टनेंमी भगवान के शासन के चरित्र आत्माओं का वर्णन कियाl देवकी महारानी इनके पुत्र के विलाप का रोचक घटना के माध्यम से आंखों के सामने दृश्य खड़ा कर दिया मां क्या होती हैl उसकी ममता को कोई नाप नहीं सकता मां तेरा जवाब नहीं तेरा साया ही मेरा उजाला हैl मां को दे देवत्व का स्थान देने वाली एकमात्र संस्कृति भारतीय संस्कृति हैl आज इस धरती को श्रवण कुमार की जरूरत है जिस घर में मां की सेवा होती है वही घर स्वर्ग होता हैl शासन में दो की महिमा गई है एक जननी दूसरी जन्म भूमि कहां भी है जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी। इसी विषय को लेकर सातवीं आगम श्री जी महाराज साहब ने मां की ममता के बारे में बताया जननी और जन्मभूमि इन दोनों से विराट विशाल कोई भी नहीं है साधना का पहला चरण माता-पिता की सेवा करना पर आज घर-घर में मां के हालात क्या है और मां की और आंख...
*🌧️विंशत्यधिकं शतम्* *📚📚📚श्रुतप्रसादम्🌧️* 🌧️ 4️⃣5️⃣ 🪔 सत्संग से धर्म श्रवण.. धर्म श्रवण से तत्त्वज्ञान.. तत्त्वज्ञान से विशिष्ट ज्ञान.. विशिष्ट ज्ञान से पाप विरक्ति.. ⚪ पाप विरक्ति से संयम.. संयम से आश्रव का संवर.. ⚪ संवर से तप तप से कर्म निर्जरा निर्जरासे कर्मरहित स्थिति निष्कर्मी अवस्था से मोक्षप्रप्ति.. 💐 अतः सत्संग ही सर्व कल्याण का सर्व रिद्धि सिद्धि का सर्व साधना आराधना का शाश्वत परमानंद का मूल हैं.! *📚श्री भगवतीजी आगम📚* 🌷 *तत्त्वचिंतन:* *मार्गस्थ कृपानिधि* *सूरि जयन्तसेन चरण रज* मुनि श्रीवैभवरत्नविजयजी म.सा. *🦚श्रुतार्थ वर्षावास 2024🦚* श्रीमुनिसुव्रतस्वामी नवग्रह जैनसंघ @ कोंडीतोप, चेन्नई महानगर
आज परम श्रद्धेय उप प्रवर्तक पूज्य गुरुदेव श्री पीयूष मुनि जी महाराज आदि ठाणा एवं प्रतिभा पुंज गुरूणी श्री अनीता जी महाराज आदि ठाणा के पावन सान्निध्य में पर्युषण पर्वों के तीसरे दिन प्रवचन श्रवण करते हुए श्रावक श्राविकाएं। आज सुश्रावक श्री सतीश कुमार जैन कसूर वालों का व्रतों की अठाई तप करने पर श्री संघ जालंधर द्वारा तपाभिनंदन करते हुए एस एस जैन सभा रजि जालंधर प्रधान श्री सतपाल जैन, पूर्व प्रधान श्री विमल प्रकाश जैन, महामंत्री श्री उष्ण जैन, मंत्री मुस्कान जैन, धार्मिक कमेटी चेयरमैन श्री अमित जैन, हस्पताल कमेटी चेयरमैन श्री नरेंद्र जैन। सभी तपस्वियों का हार्दिक सुख साता पूछते हुए उनके तप का अनुमोदन करते हैं।
वीरपत्ता की पावन भूमि आमेट के जैन स्थानक मे पर्व पर्युषण के तीसरे दिन साध्वी डॉ चन्द्र प्रभा जी म. सा ने कहा जीवन को कैसे जिया जाएl जीने की कला का नाम ही जीवन है। एक ऐसी कला जिसमें सौंदर्य हो, शांति हो, सत्य हो, शिवत्व हो- कला मनोभावों की मार्मिक अभिव्यक्ति होती है। हम कला को न जीवन से विलग कर सकते है और न उसको जीवन के शाश्वत मूल्यों से निरपेक्ष ही कर सकते हैजीवन बड़ा अमूल्य है। इसमें संसार का सौंदर्य भरा हुआ है, पर उसका आनंद तभी मिल सकता है जब जीवन जीने की कला को समझें। अध्यात्म जीवन जीने की कला सिखाता है, यह एक दिव्य विधा है। यह मनुष्य को हर दुख, कष्ट, विपत्ति और चिंता से छुटकारा दिलाकर आनंद से सराबोर करता है। भारत भूमि के समृद्ध होने में ही भारतवासियों की भी सुख-शांति है, क्योंकि जिस व्यक्ति के माता-पिता दुखी हों उसका जीवन सुखी कैसे हो सकता है। मां-पिता के आशीर्वाद और उनकी दुआओं से ही ज...
Sagevaani.com /रायकोट (भल्ला) एस एस जैन सभा रायकोट के प्रमुख मार्ग दर्शक धर्मवीर जैन ने कहा कि आत्मा की शुद्धि का पर्व है पर्युषण। सम्पूर्ण जैन जगत मे यह आठ दिन का पर्व विशेष महत्व रखता है।यह पर्व हमे प्रेरणा देता है कि अपनी आत्मा मे रह रहे विकारो को दुर कर आत्म शुद्धि करे। उन्होंने कहा कि जगह-जगह साधु साध्वीया की कृपा से इन दिनो धर्म की प्रभावण विशेष रूप से होती है। यह पर्व हमे संदेशा देता है कि हम सोचे हम कहा से आए है,और हमारा क्या लक्ष्य है। हम स्वय अपने बारे मे सोचे।हर व्यक्ति जितना दुसरो के बारे मे जानने की कोशिश करता है अपने बारे मे नही जो अपने भीतर झाँककर अपने अवगुण दुर करेगा तभी महान बन सकता है,तो आये हम भी अपने बारे मे चिंतन करे। धर्मवीर जैन ने कहा कि जप तप द्वारा इन पर्व का लाभ ले। उन बुराईयो को छोडे जिनसे हमारी आत्मा का अहित होता है। इससे ही मैत्री भाव बनेगा पर्युषण की मधुर बेला...
Sagevaani.com /माधावरम्: युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण की विदुषी सुशिष्या साध्वी श्री डॉ गवेषणाश्रीजी के सान्निध्य में अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद के तत्वावधान में तेयुप चेन्नई द्वारा ‘अभिनव सामायिक’ कार्यक्रम आचार्य महाश्रमण तेरापंथ जैन पब्लिक स्कूल, माधावरम्, चेन्नई में आयोजन हुआ। डॉ साध्वी गवेषणाश्रीजी ने कहा कि समता एक मौलिक तथ्य है, इसका प्रतिपक्षी है ममता। समता और ममता दो शब्दों से सारा संसार बंधा हुआ है। सारी समस्याएं और समाधान इसके साथ जुडे हुए है। जिसमें समता का विकास हो, सहिष्णुता चरम शिखर तक पहुंचे, वहीं सामायिक है। सामायिक प्रदर्शन नहीं आत्मदर्शन है, अभिव्यक्ति नहीं अनुभूति है। सामायिक का महत्व बताते हुए डॉ साध्वी गवेषणाश्रीजी ने कहा कि भगवान महावीर समता के साधक थे। उन्होंने सिर्फ सिद्धांत दिये ही नहीं, अपितु उसको अपने जीवन में भी अपनायें। अनेकों संघर्ष और ताप...
तपस्या जीवन की सारी समस्या दुर कर देती है ! मोक्ष मार्ग की सफ़र मोक्ष यान में करनी चाहिए! दान, धर्म, तप आराधना कर पाप कर्म का बोझ हल्का करना चाहिये! तपके तोरण सजाने चाहिए! तपस्या रुपी चाबीसे मुक्ति के / मोक्ष के द्वार खुल सकते है – डॉ. राज श्री जी। T- Tempreture – क्रोध को ख़त्म करना है! Tolerance- स्थिरता आना चाहिए! A- Ability योग्यता / क्षमता। Alert – सावधानी बरतनी है! P- purity पवित्रता/ उज्वलता। . Politeness-विनम्रता A- Activness कार्यतप्तरता Acceptance- स्वीकार S- Self Cintrol- आत्म नियंत्रण। Sacrifice- त्याग Y- Yes – स्विक्रुति A-Angerless क्रोध विरहीत Achievement- प्राप्ति( मुक्ति की प्राप्ति करना)। डॉ. मेघाश्री जी। कर्म निर्जरा के लिए तप होना ज़रूरी है! त्याग तपस्या करो भाव मनमे धरो – साध्वी ज़िनाज्ञाश्री – आकुर्डी- निगडी- प्राधिकरण श्री संघ के ...
*☀️ प्रवचन वैभव☀️* 🌧️ 4️⃣5️⃣ *💧 पर्युषण तत्त्वधारा-10💧* 221) जीवन में यदि हिंसा है तो दुख आना ही आना हैं.! 222) समस्त जीवसृष्टि के प्रति जिसके हृदय में करुणा है वही जैन है और वही अहिंसा पाल सकता हैं.! 223) जो अपने को शुद्ध धर्म से जोड़ेगा वही ईश्वर की प्राप्ति कर सकता हैं.! 224) जितने तीव्र भावो से पाप किया होगा, उतनी तीव्रता से उसका फल मिलेगा.! 225) अहिंसा की थियरी तो अनेक धर्मो में बताई है लेकिन जैन दर्शन जितना अहिंसा का सूक्ष्म स्वरूप एवं उसे जीवन में उतारने का मार्ग अन्यत्र नहीं मिलेगा.! 🌧️ *प्रवचन प्रवाहक:* *युग प्रभावक वीर गुरुदेव* *सूरि जयन्तसेन चरण रज* मुनि श्रीवैभवरत्नविजयजी म.सा. *🦚श्रुतार्थ वर्षावास 2024🦚* श्रीमुनिसुव्रतस्वामी नवग्रह जैनसंघ @ कोंडीतोप, चेन्नई महानगर
श्री अंबेश सौभाग्य नवयुवक मं डल संयुक्त मेवाड़ के आह्वान पर भीलवाड़ा में दो दिवसीय रक्तदान शिविर का आयोजन किया गयाl प्रथम दिन मानव अधिकार संघर्ष समिति के जिला अध्यक्ष मनीष बंब के नेतृत्व में रक्तदान हुआ, जिसमें 45 यूनिट रक्त संग्रह किया गयl दूसरे दिन जैन युवा सेवा संस्थान की ओर से रक्तदान शिविर लगाया। इसमें 55 यूनिट रक्तदान हुआ। अध्यक्ष धर्मचंद बाफना, मंत्री पीयूष खमेसरा ने बताया कि सुबह 10 से दोपहर 3 बजे तक चले शिविर में कुल 55 यूनिट रक्तदान हुआ जिसमे महिलाओं के साथ साथ कई युवाओं ने पहली बार रक्तदान किया। जैन युवा सेवा संस्थान के मार्गदर्शक भूपेंद्र पगारिया श्री अंबेश सौभाग्य नवयुवक मंडल संयुक्त मेवाड़ के अध्यक्ष प्रमोद सिंघवी,संरक्षक अनिल खटोड़ ने विचार रखे। इस दौरान वरिष्ठ समाजसेवी ज्ञानचंद सांखला, रिखभ भंडारी, मानसिंह डांगी, नवरत्न संचेती, राजेंद्र सुराना, हेमंत कोठारी, नवरत्न बंब, कैल...
श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ राजाजीनगर बैंगलोर के तत्वावधान में उप प्रवर्तक पंकजमुनि के सानिध्य में डॉ वरुणमुनि ने पर्युषण महापर्व के द्वितीय दिवस कहा कि यह संसार अनादिकाल से है और अनंतकाल तक रहेगा । जैन कालचक्र दो भाग में विभाजित है : उत्सर्पिणी और अवसर्पिणी काल। अवसर्पिणी काल में समयावधि,हर वस्तु का मान,आयु,बल इत्यादि घटता है जबकि उत्सर्पिणी में समयावधि,हर वस्तु का मान और आयु, बल इत्यादि बढ़ता है। उन्होंने कहा कि पर्युषण महापर्व मात्र जैनों का पर्व नहीं है, यह एक सार्वभौम पर्व है। पूरे विश्व के लिए यह एक उत्तम और उत्कृष्ट पर्व है, क्योंकि इसमें आत्मा की उपासना की जाती है। संपूर्ण संसार में यही एक ऐसा उत्सव या पर्व है जिसमें आत्मरत होकर व्यक्ति आत्मार्थी बनता है। अंतकृतदशांक सूत्र का वांचन आठ कर्मों को काटने के लिए आठ दिनों के लिए होता है। कल्पसूत्र जैन धर्म का सबसे महत्वपूर्ण श...
Sagevaani.com / माधावरम्: स्वाध्याय वह दर्पण है जिसमें अपना रूप देखा जा सकता है, जीवन को निखारा जा सकता है। परमात्मा की प्राप्ति के दो ही रास्ते है- ध्यान और स्वाध्याय। आध्यात्मिक चेतना को जगाना स्वाध्याय है। शिक्षा की अनेक विधाएं विकसित हुई है, किन्तु केवल पुस्तकीय ज्ञान डिग्रीयां दे सकता है स्वयं की पहचान नहीं- उपरोक्त विचार डॉ. साध्वीश्री गवेषणाश्रीजी ने आचार्य महाश्रमण तेरापंथ जैन पब्लिक स्कूल, माधावरम् चेन्नई के प्रांगण में पर्यूषण महापर्व की आराधना में साधनारत साधकों को सम्बोधित करते हुए कहें। भगवान महावीर के जीवन दर्शन पर प्रकाश डालते हुए साध्वीश्रीजी ने कहा- वर्धमान, ज्ञानपुत्र, सन्मान, महावीर कैसे बने! का विवेचन करते हुए भगवान के प्रथम सम्यक्त्व भव का विवेचन किया। साध्वी श्री मेरुप्रभाजी ने कहा- स्वाध्याय का शाब्दिक अर्थ है- पढ़ना। सम्यग रूप से चिंतन करना, स्वाध्याय से ज्ञानावरण...
पर्युषन पर्व की आराधना करते हुए बताया यह पर्व संदेश देने आया है आत्म गुनो का करो अविष्कार विकारों का करो बहिष्कार जीवन को करो स्वीकार पापोका करो इनकार यह सब पाव दिखलाता हैl स्वयं में जीने का रास्ता सीखना है इस पर्व में फेश रीडिंग, ड्रेस रीडिंग हेयर रीडिंग करना नहीं है अब हमें सोल रीडिंग करना है पर आज हम कौन सा रीडिंग कर रहे हैंl ध्यान में रहे भाई हो तो ऐसा इसके बारे में बताते हुए कहां अच्छे रिश्ते और वादों की शर्तों की जरूरत नहीं होती उसके लिए दो बातों की खूबसूरत दो लोगों की जरूरत होती हैl एक जिस पर भरोसा कर सके, इसको समझ सके बस यह दो ही बातें चाहिए भाई भाई का एक सुंदर रिश्ता होता है पर इस रिश्ते में पेट्रोल डालने वाला तीसरा ही होता हैl वीकनेस संतोषी होता है लोगों को अच्छा हुआ अच्छा रहना किसी का आगे बढ़ाना सुहाता नहीं हैl आज हम देख रहे संसार की हालत में क्या है क्या परिस्थितियों बन गई है प...