आचार्य भगवंत विश्वकल्याण सुरिश्वरजी के सानिध्य मे 82 दिवसीय “धर्म- चक्र तप” श्रीमती कल्पना जी बसवंतलालजी कोचर द्वारा संप्पन्न! लोणी (धामणी) – प्रतिष्ऱ्ठाचार्य, पुना जिला तिर्थउद्धारक आचार्य पु. विश्वकल्याण जी म.सा. आदि ठाणा लोणी धामणी मे चातुरमासार्थ विराजमान है! गुरुदेवने धर्म संदेश मे तप अनुमोदना कर सत्संग, तप, दान, धर्म, आराधना और संघटित रह कर कार्य करनेका एहलान किया! गुरुदेव के निश्रा मे श्रीमती कल्पना जी कोचर ने 82 दिवसीय “ धर्मचक्र- तप आराधना” कर एक उच्चांक प्रस्थापित कियाl संघ समाज सह कोचर परिवारका नाम रोशन किया! इसके पुर्व अनेक 11 बार विविध तपधारणा कर आत्माका कल्याण किया है! श्री उव्वसग्गहरं तप, पॉंच मेरु पर्वत तप, शत्रुंजय गिरिराज तप, सौभाग्य तप, मेरुदंड तप, तीन उपध्यान तप(110 दिन)108 पार्श्वनाथ तप, अठाई तप पॉंच बार, 24 तिर्थंकर भगवान तप,आयंबील ओली तप 28 बार, वर्षितप, और अब ...
Sagevaani.com /जालना: समोरा- समोर घेतले जाते ते दर्शन! दर्शन या शब्दाचा अर्थ असा आहे की, देखना! आपण एखादी मुव्ही बघायला जातो, ती तीन तासाची मुव्ही पाहयला आपल्या आत्मदर्शन होते? तर नाही ना, अशाच प्रकारे आपण दर्शन तर घेतो पण आत्मदर्शन कुठे आहे, हा प्रश्न शेवटी उरतोच, असा हितोपदेश साध्वी प.पू. हर्षप्रज्ञाजी म. सा. यांनी येथे बोलतांना दिला. तपोधाम परिसरातील गुरु गणेश सभा मंडपात चार्तुमासानिमित्त आयोजित प्रवचनात त्या बोलत होत्या. यावेळी विचारपीठावर संथारा प्रेरिका उपप्रवर्तीनी प. पू. सत्यसाधनाजी म. सा व अन्य काही साध्वींची याप्रसंगी उपस्थिती होती. पुढे बोलतांना साध्वी प.पू. हर्षप्रज्ञाजी म. सा. म्हणाल्या की, तुम्ही या गणेश दरबारात येतात, कशासाठी येतात. तर गुरु गणेशलालजी म. सा. यांचं दर्शन घेण्यासाठी! आपण सुट्ट्यांच्या दिवसात लोणावला, महाबळेश्वर, हॉटेलात जातो तेथे गेल्यानंतर काय करतो तर जी वस्तू...
आज हमको उत्तम धर्म मानव भाव उत्तम गुरु और सर्वज्ञ प्रभु का शासन मिल गया है इस भाव में जाकर हमने क्या किया है, जीवन को कैसे दिया है..? जीवन कैसे बनाना है सुगंधित सुभाषित बनाना है बहुत भाव से गंदगी जमा की है भीतर के घर में कचरे का कोई पार नहीं हैl अगर कचरे को साफ नहीं किया तो भविष्य अंधकार में यहां से जाने का समय होगा तब कर्म सत्ता हमें पूछेगीl तुझे इस अच्छे भव में भेजा सतगुरु के पास बैठाया तू वहां बैठकर क्या करके आया मानव बनकर आया या समय ज्ञान प्राप्त करके आयाl साधुता को धारण कर सिद्ध गति का परमिशन लेकर आया बताओ आपके पास क्या जवाब है? दिन बनकर यानी कहना पड़े कि मैं सिर्फ टाइम पास करके आया जाना पक्का हैl मुद्दत मिली है तो जवाब देने की तैयारी रखना पड़ेगा ना जिंदगी को साफ सुथरा करके सुगंध से भर दl आप कहेंगे हम तो सवेरे स्नान करके स्प्रे सेंट अत्तर सब कुछ लगा कियाl हमारे सब भाइयों कहना तो बहुत ...
*☀️प्रवचन वैभव☀️* 🌧️ 6️⃣2️⃣ 🪔 306) एक ही लक्ष्य देहनाश के पूर्व कर्मनाश.! 307) कोई व्यक्ति या देवता न मेरा दुख ले सकता हैं न मुझे दुख दे सकता हैं.! मेरे अंतर के मलिन परिणाम ही मेरे दुख का कारण हैं.! 308) प्रभु कहते है की थोड़ा दुख सहन करलें अनंत सुख भेट में मिलेगा.! 309) बूंद मात्र विषय भोग की लालसा में अनंत दुखो की कैद मिलेगी.! 310) देह के ममत्व का त्याग होगा वही से साधना का मंगल प्रारंभ होगा.! 🌧️ *प्रवचन प्रवाहक:* *सूरि जयन्तसेन चरणरज* मुनि श्रीवैभवरत्नविजयजी म.सा. *🦚श्रुतार्थ वर्षावास 2024🦚* श्रीमुनिसुव्रतस्वामी नवग्रह जैनसंघ @ कोंडीतोप, चेन्नई महानगर
*☀️प्रवचन वैभव☀️* 🌧️ 6️⃣1️⃣ 🪔 301) शल्य रहित अंतर में प्रभु पधारते हैं.! 302) वीतराग धर्म की आराधना से भाव परिवर्तन नही हो रहा तो हमे अपनी रीत का निरीक्षण करना चाहिए.! 303) जिसका व्यवहार कमजोर होता है.. लोक विरुद्ध,शास्त्र विरुद्ध आज्ञाविरुद्ध हो ऐसे लोगो का निश्चय भी खोखला ही होता है..! 304) जिस सुख के आने से धर्म छूट जाए आत्मार्थी को ऐसे सुख का.? 305) इच्छाओं के अंत से मोक्ष का प्रारंभ होता हैं.! 🌧️ *प्रवचन प्रवाहक:* *सूरि जयन्तसेन चरणरज* मुनि श्रीवैभवरत्नविजयजी म.सा. *🦚श्रुतार्थ वर्षावास 2024🦚* श्रीमुनिसुव्रतस्वामी नवग्रह जैनसंघ @ कोंडीतोप, चेन्नई महानगर
करीब 250 व्यक्तियों का संघ गया गुरु दर्शन को सूरत Sagevaani.com /साहूकारपेट, चेन्नई: जो व्यक्ति क्रोध, गुस्से की गिरफ्त में आ जाता है, वह सदैव स्वयं तो अशांत रहता है ही, साथ में परिवारीक वातावरण को भी अशांत बना देता है। उपरोक्त विचार तेरापंथ सभा भवन में ‘कषाय मुक्ति’ प्रवचन माला के अन्तर्गत गुरुवार को मुनि हिमांशुकुमारजी ने कहें। मुनि श्री ने आगे कहा कि क्रोध विष, आग, चण्डाल, वायरस, पागलपन, अंधें, तुफान, दीमक के समान है। क्रोधी व्यक्ति का जीवन अस्तव्यस्त हो जाता है। हमारे अवचेतन मन में बार बार उत्पन्न होने वाले नकारात्मक विचार, प्रभाव के कारण स्रावों का गलत दिशाओं में गति होने से व्यक्ति क्रोधित दशा में रहता है। मुनि श्री ने क्रोध आने के कारणों का धर्मपरिषद् से लेते हुए अनेकों कारण बताते हुए कहा कि रागभाव, मन के विपरीत कार्य होने, अहं पर चोट के कारण, शारीरीक कमजोरी, ब...
*☀️प्रवचन वैभव☀️* 🌧️ 6️⃣0️⃣ 🪔 296) आत्म विस्मरण आत्म घातक प्रवृत्ति है.! 297) प्रायश्चित की सिर्फ क्रिया करेंगे, लेकिन विराधना के भावो का प्रायश्चित नही करेंगे तो शल्यमुक्ति असंभव है.! 298) तत्त्व स्वरूप में स्थिर चित्त होना ही जन्म की सफलता हैं.! 299) जो पाप हो रहा है वो मन से आनंद से राग से हो रहा है और धर्म सिर्फ काया से करना ये कैसे चलेगा बताओ…? 300) क्रिया कितनी भी श्रेष्ठ शुद्ध विधिसंपन्न हो लेकिन मन में मलिनता है तो कोई सार नही है ऐसी क्रिया का.! 🌧️ *प्रवचन प्रवाहक:* *सूरि जयन्तसेन चरणरज* मुनि श्रीवैभवरत्नविजयजी म.सा. *🦚श्रुतार्थ वर्षावास 2024🦚* श्रीमुनिसुव्रतस्वामी नवग्रह जैनसंघ @ कोंडीतोप, चेन्नई महानगर
स्वाध्याय नंदनवन है, दिव्य चक्षु है, ध्यान का प्रवेशद्वार है – साध्वी डॉ. राज श्री जी सम्यक द्रुष्टी से धर्म आराधना हो- डॉ. मेघाश्रीजी। वचनशक्ति सबसे बड़ी शक्ति है! शब्द बाण का और बिणा का भी काम करता है! एक चुप्पी हजारो समस्या का समाधान है। साध्वी जिनाज्ञाश्री जी। आज आकुर्डी स्थानक भवनमे “ पुच्छिसुणं” जाप अनुष्ठान के दसवी गाथा का संपुट हुआ! डॉ. मेधाश्री जी ने सामुहिक रुपसे जाप करवाया! साध्वी समिक्षा श्री जी ने “ मॉं का आशिर्वाद चारों धामसे न्यारा है, मॉं है तो हर सहारा है!” यह सुंदर भजन प्रस्तुत किया! डॉ. राज श्री जी ने स्वाध्याय के लाभ बताते हुये कहा हमे स्वाध्याय रुपी नंदनवन में भ्रमण करना है!अनेक भोगोके संचित कर्मों का स्वाध्याय से क्षमा क्षय होता है! अपने द्वारा अपने आत्मा का अध्ययन करना है! साध्वी जिनाज्ञाश्री जी ने मनुष्य जन्म की चार गतविधियॉं मराठी में बहुत ख़ुबी से बताई “ जन्...
आज उप प्रवर्तक पूज्य गुरुदेव श्री पीयूष मुनि जी महाराज आदि ठाणा एवं प्रतिभा पुंज गुरूणी श्री अनीता जी महाराज आदि ठाणा के पावन सान्निध्य में श्रमण संघीय युग प्रदान वर्तमान आचार्य भगवन डॉ श्री शिव मुनि जी महाराज की 83 वीं जन्म जयंती के उपलक्ष्य में श्रावक श्राविकाओं ने गुरू चरणों में अपने भाव रखे। गुरूदेव एवं गुरूणी जी महाराज ने उनके जीवन पर प्रकाश डाला। चतुर्विध संघ को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।
आमेट के वीरपत्ता की पावन भूमि पर एकाभवअवतारी चर्चा चक्रवर्ती युग प्रधान दादा गुरुदेव जयमल जी महाराज साहब का 317 जन्म महोत्सव एवं आचार्य डॉक्टर शिव मुनि जी महाराज एवं साध्वी डॉ चन्द्र प्रभा जी महाराज का जन्म दिवस बुधवार को बड़े हर्षो उलास एवं तेला तप की आराधना द्वारा तपाचार्य जयमाला जी महाराज आदि ठाना 6 वे तेरा पन्थ से साध्वी विशद प्रज्ञा आदि ठाना 4 के शुभ सानिध्य में मनाया गयाl जिसमें सुबह महावीर भवन से भव्य वरघोड़ा बैंड बाजा के साथ जैन पताका हाथ में लिए सभी श्रावक एवं श्राविकाएं लाइन लगाकर महावीर भवन से शुरू होकर सब्जी मंडी लक्ष्मी बाजार बस स्टैंड होते हुए प्रवचन पंडाल में पहुंचे उसके बाद धर्म सभा की शुरुआत में जैन ध्वजारोहण धर्मचंद जी कोठारी परिवार द्वारा किया गयाl उसके बाद चंदन बाला महिला मंडल द्वारा स्वागत गीत गया गया मीडिया प्रभारी प्रकाश बडोला ने बताया की समारोह के अध्यक्ष मांगीलाल ल...
*☀️प्रवचन वैभव☀️* 🌧️ 5️⃣9️⃣ ⚡⚡ 291) जब तक स्मृति के पाप खत्म नहीं होंगे तब तक धर्म का प्रारंभ होना असंभव हैं.! 292) संत सज्जन की आशातना का पाप आत्मा के साथ वज्रलेप की तरह जुड़ता हैं.! 293) जिनकी सहनशक्ति कमजोर होती है उनका समय भी कमजोर.! 294) अनादि अज्ञान का अंत अनंत सुख का प्रारंभ हैं.! 295) शिव से है देह की महिमा, बाकी एक रात भी कोई घर में नही रखता.! 🌧️ *प्रवचन प्रवाहक:* *सूरि जयन्तसेन चरणरज* मुनि श्रीवैभवरत्नविजयजी म.सा. *🦚श्रुतार्थ वर्षावास 2024🦚* श्रीमुनिसुव्रतस्वामी नवग्रह जैनसंघ @ कोंडीतोप, चेन्नई
रत्नदिप जैसा शासन हमें मिला है, मानव जीवन आध्यात्मिक कमाई का केंन्द्र मिला है, आध्यात्मिक रत्नो को हमें बटोरना है! डॉ. राज श्री जी। आज आकुर्डी स्थानक भवनमें “ पुच्छिसुणं” जाप के ऑंठवी गाथा का संपुट संप्पन्न हुआ! आज अनंत चतुर्दशी का पर्व उपवास के तप आराधना से मनाया गया ! 25 बहनोने एक निरंकर उपवास कर 14 वे तिर्थंकर अनंतनाथ भगवानकी आराधना महासतीयोके सानिध्यमें की! अनंतचतुर्दशी का पर्व चौरासी नाथकी संवत्सरी रुपमे मनाया जाता है! अनंत चतुर्दशीका पावनपर्व विष्णु भगवानकी आराधनासे मनाया जाता है! आध्यात्मिक खजाना धर्म की पॅुंजी है ! यह सुरक्षीत धन है! डॉ. मेघाश्री जी ने “ पुच्छिसुणं” का जाप करवाया! साध्वी समिक्षा श्री जी ने “ उम्र थोडीसी हमको मिली थी, मगर ओ भी घटने लगी देखते देखते” यह सुंदर भजन पेश किया! कु.मिक्षा ओस्तवाल इस बालिका ने लोग्गस का पठन किया! आज महासाध्वी उपप्रवर्तिनी डॉ. प्रियदर्शनाजी, ...