वीरपत्ता की पावन भूमि आमेट के जैन स्थानक में साध्वी विनित प्रज्ञा ने अनित्य भावना को समझाते हुए कहा अनित्य का अर्थ है क्षणभंगुर या हमेशा बदलने वाला। अनित्य भावना हमें यह एहसास कराती है कि इस दुनिया में हमारा भौतिक शरीर, यौवन, सौंदर्य, स्वास्थ्य, धन, कामुक सुख, प्रसिद्धि, पारिवारिक संबंध आदि सब कुछ अस्थायी है और एक दिन नष्ट हो जाएगा। इन क्षणभंगुर चीजों से लगाव इनके खोने पर दुख देता है। हम अक्सर अपने दैनिक जीवन में इस नश्वरता का अनुभव करते हैं और उदास हो जाते हैं। यह अनित्यता सभी पर लागू होती है। जिस दिन भगवान राम को राजा बनाया जाना था, उसी दिन उनके जीवन में एक अजीब मोड़ आया। उनके पिता ने उन्हें 14साल के लिए वन जाने को कहा! राज्याभिषेक का उत्साह एक पल में उदासी और कयामत में बदल गया। साध्वी चंदनबाला ने कहा कोई भी कर्मों का फल प्राप्त किए बिना मुक्त नहीं हो सकता। कर्म के आगे किसी का जोर तथा रि...
*🌧️विंशत्यधिकं शतम्* *📚📚📚श्रुतप्रसादम्🌧️* 🌧️ 6️⃣5️⃣ ⚡ प्राण रहित देह को मुर्दा कहते है, वैसे ही समकित रहित जीव भी चलता फिरता मुर्दा है.! ❌ मुर्दा लोक में आदरपात्र नही है, *वैसे ही* *ये चल मुर्दा भी* *आध्यात्मिक क्षेत्र में* *अनादरणीय है…* *सम्मान पात्र नहीं है..!* समकित ही जीव का वैभव हैं, सम्मान है,भूषण है.! *_📔श्री भाव प्राभृत📔_* 🌷 *तत्त्वचिंतन:* *मार्गस्थ कृपानिधि* *सूरि जयन्तसेन चरण रज* मुनि श्रीवैभवरत्नविजयजी म.सा. *🦚श्रुतार्थ वर्षावास 2024🦚* श्रीमुनिसुव्रतस्वामी नवग्रह जैनसंघ @ कोंडीतोप, चेन्नई महानगर
मां बाप जिंदगी के पेड़ की जे पेड़ कितना ही बड़ा क्यों हो जाए कितना ही हरा भरा क्यों ना हो जाए जड़ काटने से हरा भरा नहीं हो सकताl जिन बच्चों की खुशियों के लिए एक बार अपनी मेहनत की पाई पाई हंसते-हंसते उन पर खर्च कर देता है वही बच्चे जब बाप की आंखें धुंधली हो जाती हैl तो उन्हें कटरा भर रोशनी देने से क्यों कतराते हैं? आज आप कोई यहां बैठे हैं जिनके साथ मां-बाप है पर कोई ऐसे हैं की जिनकी मां बाप नहीं चाहे मन से लड़ लेना बुलाना देना मन को डांट देना पर मां की कितनी अच्छी ममता कितनी हैl भोली भाली फिर भी वह थाली लेकर आती है कहती है बेटा खा ले म माही होती हैl धरती का भगवान मां बाप ही है इन मां बाप को कभी छोड़ना मत इनको कभी सताना मत पर आज इस कलयुग के बेटे अपनी मां-बाप को क्या क्या सुना जाते हैंl वह तो अपने दिलों से भी उनको निकाल दिया तो घर से निकाल दिया तो कौन सी बड़ी बात है साध्वी आगमश्री जी ने अपने ...
बहुमंडल ने नाटक के माध्यम से कुसुम प्रभा म. सा. के जीवन पर डाला प्रकाश Sagevaani.com /सिरसा। एसएस जैन सभा की ओर से आत्म शुक्ल-शिव जन्म जयंती एवं कुसुम प्रभा म. सा. की दीक्षा जयंती पर भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में महासाध्वी ज्ञान प्रभा म. सा. व मधुबाला म. सा. ठाणे-8 का पावन सान्निध्य रहा। कार्यक्रम में मक्खन लाल गोयल ने अध्यक्ष हरियाणा प्रांतीय तेरापंथ सभा ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत की और लीलावती जैन धर्मपत्नी स्व. अभयनंदन जैन ने ध्वजारोहण कर कार्यक्रम का आगाज किया। इस मौके पर पद्मश्री अवार्ड व भाई कन्हैया आश्रम के संचालक स. गुरविंद्र सिंह व एडवोकेट संजीव जैन ने विशिष्ट अतिथि के तौर पर उपस्थिति दर्ज करवाई। कार्यक्रम में कुसुम प्रभा म. सा. के जीवन पर बहुमंडल द्वारा नाटक प्रस्तुत किया गया। इस मौके पर छोटे-छोटे बच्चों ने अनेक सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत कर उपस्थिति का मन मोह लि...
*☀️प्रवचन वैभव☀️* 🌧️ 6️⃣4️⃣ 🌺 316) भय मृत्यु से अधिक घातक है.. क्योंकि इसके कारण शक्ति का विकास अवरुद्ध होता हैं.! 317) किसी के कषाय करने पर हम भी कषाय करें तो अनर्थदंड का दोष लगता है.! 218) संसार की सभी स्थितियों का Expiry date के साथ आगमन होता है, ये त्रैकालिक सत्य को समकिति साधक जानता है, इसलिए आर्तध्यान नही करता.! 319) दर्शनाचार अर्थात धर्म की विकास यात्रा..! 320) जहां वात्सल्य होता है वहां गिनती नहीं होती.! बनावट,दिखावा नही होता.! 🌧️ *प्रवचन प्रवाहक:* *सूरि जयन्तसेन चरणरज* मुनि श्रीवैभवरत्नविजयजी म.सा. *🦚श्रुतार्थ वर्षावास 2024🦚* श्रीमुनिसुव्रतस्वामी नवग्रह जैनसंघ @ कोंडीतोप, चेन्नई महानगर
जालना: जीवन हे नेहमीच चांगल्या पध्दतीने जगले पाहिजे. खूप कठीण परिश्रमानंतर आपल्याला हा मानव जन्म मिळाला असून त्याचा सदुपयोग करुन घेतला पाहिजे, असा हितोपदेश साध्वी प.पू. हर्षप्रज्ञाजी म. सा. यांनी येथे बोलतांना दिला. तपोधाम परिसरातील गुरु गणेश सभा मंडपात चार्तुमासानिमित्त आयोजित प्रवचनात त्या बोलत होत्या. यावेळी विचारपीठावर संथारा प्रेरिका उपप्रवर्तीनी प. पू. सत्यसाधनाजी म. सा व अन्य काही साध्वींची याप्रसंगी उपस्थिती होती. पुढे बोलतांना साध्वी प.पू. हर्षप्रज्ञाजी म. सा. म्हणाल्या की, मानव हा जन्म उगीच आपल्याला प्राप्त झालेला नाही. त्याचा सदुपयोग आपण केला पाहिजे, करायला शिकले पाहिजे. आत्मा तर बनलो आहोत परंतू परमात्मा कधी बनणार? याचा विचार आपण केला पाहिजे. संसार तर नेहमीच आहे. परंतू हे जीवन नेहमीच मिळणारे नाही. म्हणूनच त्याचा सदुपयोग करायला हवा. आपण आतापर्यंत अनेक साधू- साध्वींचे प्रवचन ऐकले ...
वीरपता की पावन भूमि आमेट के जैन स्थानक में साध्वी आनंद प्रभा ने कहा जिस तरह हमारे परिवार के सदस्यों के प्रति हमारा फर्ज होता है उसी तरह ही परमात्मा के प्रति भी हमारा फर्ज बनता है जिसने इस दुनिया में हमारे को भेजा। मोह माया में फंसकर मनुष्य परमात्मा को भूल जाता है जिस कारण उसे दुखों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि दुख आने पर फिर परमात्मा की याद आती है अगर हम नित्य प्रति भगवान का सिमरन करें तो हमें किसी तरह की विपदा का सामना नहीं करना पड़ेगा। अगर भगवान के भक्तों पर विपदा आती भी है तो भगवान स्वयं अपने भक्तों की रक्षा को दौड़े चले आते हैं। उन्होंने कहा कि मनुष्य को जीवन में नाम सिमरन की कमाई करनी चाहिए जो लोक में भी काम आती है और परलोक में भी काम आती है। मीडिया प्रभारी प्रकाश चंद्र बडोला वह मुकेश सिरोहियां ने बताया कि साध्वी चंदन बाला एव साध्वी विनित प्रज्ञा ने भी अपने उद्बोधन श्रावक और...
*🌧️विंशत्यधिकं शतम्* *📚📚📚श्रुतप्रसादम्🌧️* 🌧️ 6️⃣3️⃣ 🪔 किसी जीव पर प्रहार करना अर्थात स्वयं पर प्रहार करने जैसा है जीवदया अपनी ही दया हैं.! 🛑 नेत्र रोग,अंधापन विकृत देह,भीभत्स रूप संपत्ति की निर्धनता आदि प्रतिकूलता से भरी जिंदगी जीवहिंसा का ही परिणाम है.! 🌻 अतः हिंसा का परित्याग करो.! *📗श्रीसार समुच्चय कुलक* 🌷 *तत्त्वचिंतन:* *मार्गस्थ कृपानिधि* *सूरि जयन्तसेन चरण रज* मुनि श्रीवैभवरत्नविजयजी म.सा. *🦚श्रुतार्थ वर्षावास 2024🦚* श्रीमुनिसुव्रतस्वामी नवग्रह जैनसंघ @ कोंडीतोप, चेन्नई महानगर
Sagevaani.com /जालना: नऊ वर्षाचे असतांना आई आणि बारा वर्षाचे असतांना वडीलांचे छत्र हरवल्यानंतर मुलमुनी म. सा. अत्यंत कठीण परिस्थितीतून गेलेl परंतू ते डगमले नाहीत तर खंबीरपणे उभे राहिले, असा हितोपदेश संथारा प्रेरिका उपप्रवर्तीनी प. पू. सत्यसाधनाजी म. सा. यांनी येथे बोलतांना दिलाl तपोधाम परिसरातील गुरु गणेश सभा मंडपात चार्तुमासानिमित्त आयोजित प्रवचनात त्या बोलत होत्या. यावेळी विचारपीठावर संथारा प्रेरिका उपप्रवर्तीनी प. पू. सत्यसाधनाजी म. सा व अन्य काही साध्वींची याप्रसंगी उपस्थिती होतीl प्रवचनाच्या प्रारंभीच साध्वी प. पू. सत्यसाधनाजी म. सा. यांनी प्रभूंचे गुणगाण केले. दुनियामें देव अनेक है। पर अरिहंत क्या कहना॥ पुढे बोलतांना साध्वी प. पू. सत्यसाधनाजी म. सा. म्हणाल्या की, ज्यांच्या डोक्यावरील आई- वडीलांचे छत्र हरपते त्यांना खर्या अर्थाने जीवनाचा अर्थ कळतो. राजस्थानमध्ये गादिया कुटूंबात जन्मल...
Sagevaani.com /चेन्नई: तेरापंथ जैन विद्यालय, पट्टालम, चेन्नई का 26वॉ खेल दिवस नेहरू स्टेडियम में प्रातःकालीन बेला में दिवस मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ ईष्ट वंदना से किया गया। विद्यालय प्रबंधन समिति सदस्यों व मुख्य अतिथि के द्वारा ध्वजारोहण किया गया। छात्रों द्वारा भव्य मार्चपास्ट किया गया। खेल सचिव शशिप्रभा ने मशाल प्रज्जवलित की। मुख्य अतिथि श्री धर्मेन्द्र प्रताप यादव आईएएस, प्रिंसीपल सेकेट्री टू गवर्मेन्ट हैंडलूम, हैंडीक्राफ्ट, टैक्सटाइल एंड खादी डेवलेपमेंट गवर्मेंट ऑफ तमिलनाडु का सम्मान विद्यालय कार्यकारिणी के सदस्यों द्वारा किया गया। स्वागत भाषण प्रधानाचार्य श्रीमती आशा क्रिस्टी ने दिया। मुख्य अतिथि ने विद्यालय के राजकीय स्तर पर प्रतिभाशाली छात्रों को सम्मानित किया। कप्तानों ने निष्पक्ष जाँच के लिए शपथ ग्रहण ली। पश्चात् सन् 2024 के खेलों की उद्घोषणा की गई। चारों हाउस के बच्चों ने ...
वीरपत्ता की पावन भूमि आमेट के जैन स्थानक मे साध्वी चन्दन बाला ने कहा जो आत्मा को परतंत्र करता हैं, दु:ख देता है, संसार में परिभ्रमण कराता है उसे कर्म कहते हैं। अनादि काल से जीव का कर्म के साथ सम्बन्ध चला आ रहा है, इन दोनो का अस्तित्व स्वत: सिद्ध है। ‘मैं हूँ।” इस अनुभव से जीव जाना जाता है और जगत में कोई दरिद्र है कोई धनवान है, कोई रोगी है कोई स्वस्थ्य है इस विचित्रता से कर्म का अस्तित्व जाना जाता है। वे कर्म मुख्य रुप से आठ प्रकार के हैं – (1) ज्ञानावरणी (2) दर्शनावरणी (3) वेदनीय (4) मोहनीय (5) आयु (6) नाम (7) गोत्र (8) अंतराय साध्वी विनीत प्रज्ञा ने कहा शास्त्रों में कहा गया है कि जो व्यक्ति जैसा कर्म करता है उसे वैसा ही फल प्राप्त होती है। माना जाता है कि जो व्यक्ति के कर्मों के आधार पर अपना जीवन व्यतीत करता है, उसे जीवन के सभी क्षेत्रों में सफलता प्राप्त होती है। ऐसे म...
साधना पथ के योगी! साधना की अभिव्यक्ति है ध्यानयोगी आध्यात्म योगी, मौन साधक है आचार्य डॉ. शिवमुनीजी म.सा.- साध्वी डॉ. राज श्री जी म.सा. आज आकुर्डी स्थानक भवनमें तीन महापुरुषों का जन्मोत्सव आध्यात्मिक रुपसे महासाघ्वी डॉ. राज श्रीजी डॉ. मेघा़श्रीजी, साध्वी समिक्षा श्री जी, साध्वी जिनाज्ञा श्री जी के सानिध्य में अनेक गणमान्य श्रावक श्राविका के उपस्थिती में मनाया गया! “ पुच्छिसुणं” जाप के 13 वे गाथा का संपुट हुआ! साध्वी समिक्षा श्री जी ने “ मिला मुझको तो वरदान है, खिला खुशियोंका उद्यान है !” यह सुंदर भजन सादर किया! डॉ. राज श्री जी, डॉ. मेघा़श्री जी साध्वी जिनाज्ञा श्री जी ने श्रमण संघ के प्रथम आचार्य पु. आत्मारामजी म. सा. चतुर्थ पट्टधर डॉ. शिवमुनीजी म.सा, दादगुरुणीसा कुसुमवती जी के गुण विशेष आध्यात्म आस्था का गौरवपूर्ण उल्लेख करएवं अनुभव कथन किये! Near (गुरु के पास रहकर ज्ञान पाना) Hear (गुरुवा...