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पर्युषण पर्वाचा आज पहिला दिवस, धार्मिक अनुशासनास प्रारंभ

जालना (प्रतिनिधी) : आज जालना येथे पर्युषण पर्वाचा शुभारंभ मोठ्या श्रद्धाभावाने करण्यात आला. हे पर्व जैन धर्मातील अत्यंत महत्त्वाचे असते. आत्मशुद्धी, संयम, क्षमाशीलता, आणि धार्मिक अनुशासन या मूल्यांवर आधारित या पर्वाचा पहिला दिवस प.पू. रमणीकमुनीजी म.सा. यांच्या मार्गदर्शनाखाली हे पर्व साजरे करण्यात आले. या सोहळ्यात शहरभरातील विविध भागांतून मोठ्या संख्येने श्रद्धालू उपस्थित होते. धार्मिक विधी आणि भक्तिभाव पर्वाच्या पहिल्या दिवशी उपस्थित श्रद्धालूंनी गुरू गणेश धाम येथे पवित्र वातावरणात सहभागी होऊन प्रभु महावीर स्वामींच्या अमृतवाणीचा अनुभव घेतला. प.पू. रमणीकमुनीजी म.सा. यांनी उपस्थितांना समजावून सांगितले की, पर्युषण हा आत्मशुद्धीचा महत्त्वपूर्ण काळ आहे, जिथे प्रत्येक जैन अनुयायीने आपल्या मन, वाणी आणि कर्मावर संयम ठेवणे आवश्यक आहे. भक्तांनी या दिवशी विशेष उपवास केला, प्रातःकाल आणि संध्याकाळी जप...

प्रणाम और प्रार्थना से ग्रह दिशा बदलती है: साध्वी स्नेहाश्रीजी म.सा .

इन्सान के जीवन की सबसे बड़ी पॅुंजी होती है दुऑं की दौलत, पर्वाधिराज पर्यषण पर्व का जपतप आराधना से शुभारंभ हुआ ! महाराष्ट्र सौरभ, उपप्रवरतिनी पु. चंद्रकला़श्री जी म.सा.,शासन सुर्या पु स्नेहाश्रीजी म.सा. एवं मधुरकंठी पु. श्रुतप्रज्ञाश्री जी म.सा. आदि ठाणा 3 के पावन सानिध्य मे चातुर्मास गतिमान हो रहा है! आज पर्युषण पर्व के प्रथम पुष्प मे स्नेहाश्री जी ने अपने पुर्वाधिराज के स्वागत मे “ मेरे महावीर भगवान, मेरे मनमंदीर मे आओ” स्तवन पेश कर पर्वपर्युषण प्यारा जग को जगाने आया, भव्य संदेश मनोहर सबको सुनाने आया! रात्र पुरी हुई, अंधकार पुरा हो गया! सम्यकत्व का सुर्योदय हुआ! मंगलमय प्रभात हुई! सभी पर्व का राजा पर्युषण पर्व आया है! इंसान के जीवन की सबसे बड़ी पुंजी दुऑंओ की दौलत होती है! प्रणाम से चरण वंदना पंचांग साष्टांग प्रणाम के परिणाम अच्छे होते है! प्रणाम से ग्रह दशा बदलती है! अपने दिन की शुरुवात ...

आत्माका पर्व पर्युषण महापर्व: साध्वी संबोधि

महापर्व पर्युषण आत्म-जागरण का पर्व है। अपने आप पर अनुशासन का पर्व है। विभाव से स्वभाव की ओर बढ़ने का पर्व है। अपने आपको बाहर से समेटकर भीतर से संलग्न करने का पर्व है। पर्युषण पर्व समग्र कषायों से विरति का संकल्प लेते हुए क्षमा-विनय-सरलता, समता, संतोष और स‌द्भाव-सौहार्द की अभिवृद्धि करने का पर्व है। सर्वथा विशुद्ध, इस आध्यात्मिक पर्व में आत्म-निरीक्षण, आत्म-चिंतन, आत्म-रमण और स्वभाव-रमण कीऔर जीवन के प्रति विशिष्ट चिंतन जगाने वाले इस पर्व की आराधना पूर्ण सजगता के साथ की जानी चाहिए। पर्युषण का अर्थ आत्मा के चारों ओर प्रमाद आदि के कारण कर्मों और कषायों का जो कचरा एकत्रित हो गया है, उस कचरे को जलाकर नष्ट कर दे, उस प्रक्रिया का नाम पर्युषण है।  आत्मा के समीप आना, आत्मा के सम्मुख रहना या आत्मा के द्वारा आत्मा का, स्वयं के द्वारा स्वयं का ध्यान लगाना है। अपना ध्यान और ज्ञान करना सचमुच बहुत बड़ी बा...

 आध्यात्मिक पर्व है – पर्यूषण: डॉ वरुण मुनि जी

श्री गुजराती जैन संघ गांधीनगर में चातुर्मास विराजित दक्षिण सूर्य ओजस्वी प्रवचनकार डॉ श्री वरुण मुनि जी म .सा. ने बुधवार को पर्यूषण पर्व के प्रथम दिवस पर पर्युषण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पर्यूषण यह आध्यात्मिक पर्व है। इस पर्व को मनाने के लिए देवलोक से देवता भी मेरु पर्वत पर आकर अष्ट दिवस तक इस पर्व को धूमधाम से महोत्सव रूप मानते हैं। संसार के भौतिक राग रंग को छोड़कर, आमोद प्रमोद, सांसारिक प्रवृत्तियों को छोड़कर आध्यात्मिक साधना, तप त्याग आराधना, सामायिक, प्रतिक्रमण संवर दया पौषध, उपवास, जप तप के साथ प्रतिदिन प्रार्थना, प्रवचन जिनवाणी श्रवण करना और अपनी आत्मा के निकट रहना ही पर्यूषण पर्व का महान संदेश जगत के जीवन के लिए और साधक आत्माओं के लिए कर्म निर्जरा की पावन प्रेरणा प्रदान करता है। यह पर्व अंधकार से प्रकाश की ओर, हिंसा से अहिंसा की ओर, पशुता से मानवता की ओर एवं भोग से त्याग क...

तप और त्याग का महायज्ञ है पर्युषण : मुनि डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार

आचार्य महाश्रमण के प्रबुद्ध सुशिष्य मुनि डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार, मुनि रमेश कुमार, मुनि पद्म कुमार एवं मुनि रत्न कुमार के पावन सान्निध्य एवं श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा के तत्वावधान में सभी संघीय संस्थाओं के सहयोग से बुधवार को पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व का पहला दिन खाद्य संयम दिवस के रूप में मनाया गया। इस अवसर पर मुनि डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार ने उपस्थित अपार जनमेदिनी को फरमाया कि जैन धर्म का पर्वाधिराज पर्युषण आज से खाद्य संयम दिवस के रूप में प्रारंभ हो गया है। उन्होंने कहा कि पर्युषण महापर्व तप व त्याग का महायज्ञ है। हमें अपनी इंद्रियों को, चेतनाओं को जगाना है। आठ दिनों तक रात्रिभोजन का त्याग, जमीकंद का त्याग, प्रवचन श्रवण आदि का नित्यक्रम बनाना है।   मुनि रमेश कुमार ने कहा कि पर्युषण महापर्व हमारी आंतरिक चेतना को जगाने के लिए आता है। हमारे भीतर जो उन्नत धार्मिक भावनाएं भरी हैं हम उसे साधना...

जेवढा कसायभाव कमी होत जाईल तेवढाच मैत्रीभाव वाढेल-प.पू.रमणीकमुनीजी म.सा.

जालना : प्रकाश कटेल तर अंधकार येईल, अगदी त्याचप्रमाणे कसायभाव जसा-जसा कमी होत जाईल,तीतकाच मैत्रीभाव वाढेल. आणि मैत्रीभाव वाढला की आपण प्रभूंच्या जवळ जाऊ, असे वाणीचे जादुगार श्रमण प.पू. रमणीकमुनीजी म.सा. यांनी येथे बोलतांना सांगितले. ते गुरु गणेश सभा मंडपात चार्तुमासानिमित्त आयोजित विशेष प्रवचनात श्रमणसंघीय सलाहकार, वाणीचे जादुगार प.पू. रमणीकमुनीजी म.सा.बोलत होते. यावेळी विचार पिठावर अन्य साध्वींची उपस्थिती होती. पुढे बोलतांना श्रमणसंघीय सलाहकार, वाणीचे जादुगार, प.पू.रमणीकमुनीजी म. सा. म्हणाले की, आपल्या घरातील प्रकाश कधीही कमी करत जाऊ नका. आज-काल तर घरांमध्ये जेव्हढा प्रकाश कमी तेव्हढी झोप आपल्याला लागते. परंतू प्रकाश कधीही कमी करत जाऊ नका. संसारी सुख हे मनाचा आहे. दुसरे काय? आपल्याला जर का आत्म्याजवळ पोहचायचे असेल तर कसाय भाव कमी करा आणि मैत्रीभाव आपोआप वाढत जाईल. मैत्रीभाव वाढला की, आपण ...

शुभ भावों से आत्मा की सिद्धि: डॉ श्री वरुण मुनि जी

श्री गुजराती जैन संघ गांधीनगर में चातुर्मास विराजित दक्षिण सूर्य ओजस्वी प्रवचनकार डॉ श्री वरुण मुनि जी म सा ने लेश्याओ के शुभ अशुभ परिणामों पर चर्चा करते हुए कहा कि सभी जीवों में भाव लेश्या परिणामों के साथ बदलती रहती है।सदा शुभ भावों के चिंतन करते हुए अपने व्यक्तित्व को आकर्षक मजबूत बनाया जा सकता है। प्रथम तीन लेश्याए अ प्रशस्त होने के कारण जीव के अधिक पाप कर्म का बंधन करवाती है इसलिए इन तीनों का परित्याग कर देना चाहिए। अन्तिम तीन लेश्या तेजो,पद्म और शुक्ल लेश्या जीवात्मा को शुभ गति प्रदान करने वाली है। उन्होंने आगे कहा कि व्यक्ति को हमेशा सकारात्मक दृष्टिकोण रखना चाहिए पाज़िटिव सोच व्यक्ति को सभी क्षेत्रों में सफलता का द्वार खोल देती है। उन्होंने आगे कहा कि शुभ कर्मों का फल शुभ होता है और अशुभ कर्मों का फल अशुभ होता है। जैसी मति वैसी गति और जैसे दृष्टि वैसी सृष्टि का सिद्धांत हम सब पर लाग...

कषाय आत्मा में सद्गुणों को समाप्त कर देते है: साध्वी संबोधि

कषाय स्वयं ऐसी भयंकर आग है जोआत्मा के सद्गुणों का विनाश कर देती है।कषाय साधक के तन-मन और वचन को संतप्त, व्याकुल एवं अशान्त कर देती हैं। जब तक कषाय जीव के साथ संलग्न है तब तक संसार में गमनागमन जारी रहता है। क्रोध-मान-माया और लोभ ये चार कषाय हैं जो मन-वचन-काया की चंचलता को बढ़ाने वाले एवं कर्मों को आकर्षित करने वाले ‘आश्रव’ भी हैं तथा कर्मों को टिकाकर रखने वाले ‘बन्ध’ का कारण भी है। क्रोध रोजमर्रा जीवन की ज्वलन्त समस्या है। इसका द्वेष, ईर्ष्या या वैर और उद्विग्नता से गहरा सम्बन्ध है। एक क्षण भर का किया हुआ प्रबल क्रोध, करोड़ पूर्व वर्षों में अर्जित तप को नष्ट कर देता है। जीवन की मूलभूत समस्या अहंकार है जो मनुष्य को अंधा बना देती है। मान (अहंकार) आत्म-गुणों का घातक है। भगवान महावीर ने कहा मान से व्यक्ति अधम गति, अधम जाति एवं अधम कक्षा में पहुँच जाता है।तात्पर्य यह है क...

संसार अनंत, सुख क्षणभंगुर; वैराग्य हेच खऱ्या मुक्तीचे द्वार

प्रवचन – 19.08.2025 – प पू श्री मुकेश मुनीजी म सा – (बिबवेवाडी जैन स्थानक) “संसार भावना – वैभवातून वैराग्याकडे” जैन धर्मातील 12 भावना हे आत्मशुद्धीचे महत्त्वाचे साधन आहे. त्यातील संसार भावना आपल्याला शिकवते की – हा संसार अखंड दुःखाचा प्रवाह आहे. जन्म, मरण, लाभ, हानी, ऐश्वर्य, मानमरातब – हे सर्व क्षणिक आहे. या भावनेतून वैराग्य निर्माण होते व आपले पाऊल मोक्षमार्गाकडे वळते. ऐश्वर्यसंपन्न शालिभद्र – ३२ राण्या, अमर्याद संपत्ती, वैभवशाली जीवन! तरीही त्यांच्या मनाला शांती नव्हती. एक दिवस त्यांना सत्याची जाणीव झाली की – “ही संपत्ती, हे वैभव क्षणभंगुर आहे. खरे सुख आत्म्यात आहे.” त्यांच्या मनात वैराग्य जागले. आणि त्यांनी ठरवले की – संसार सोडून अनागार जीवन स्वीकारायचे. शालिभद्र “सर्वांचा नाथ” बनला, वैभवाचा नाही – तर वैराग्याचा! शालिभद्राची दीक्षा घेतल्य...

तपस्या दृढ़ मनोबल का परिचायक : मुनि डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार

तपस्विनी दिव्या भटेरा व प्रज्ञा सेठिया का तपोभिनंदन कल से पर्युषण पर्व का शुभारंभ आचार्य महाश्रमण के प्रबुद्ध सुशिष्य मुनि डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार, मुनि रमेश कुमार, मुनि पद्म कुमार एवं मुनि रत्न कुमार के पावन सान्निध्य एवं श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा के तत्वावधान में मंगलवार को स्थानीय तेरापंथ धर्मस्थल में श्रीमती दिव्या भटेरा (धर्मपत्नी : श्री सिद्धार्थ भटेरा) तथा सुश्री प्रज्ञा सेठिया (सुपुत्री : अशोक कुमार सेठिया) दोनों के नौ (9) की तपस्या के उपलक्ष्य में तपोभिनंदन समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर तेरापंथी सभा, गुवाहाटी की ओर से साहित्य एवं प्रशस्ति-पत्र प्रदान कर तपस्वी भाई के तप की अनुमोदना की गई। इस अवसर पर मुनि डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार ने दोनों तपस्विनी बहनों के तप की अनुमोदना करते हुए कहा कि तपस्या दृढ़ मनोबल का परिचायक है। जिनके मन में जागरण होता है, वही तपस्या के क्षेत्र में आग ...

त्रिदिवसीय आवासीय शिविर डिवाइन टच सामायिक स्वाध्याय भवन, किलपाक में सम्पन्न

श्री जैन रत्न श्राविका मण्डल, तमिलनाडु के संचालन में आचार्य भगवन्त पूज्यश्री हीराचन्द्रजी म.सा भावी आचार्यश्री महेन्द्रमुनिजी म्.सा की आज्ञानुवर्तिनी महासतीजी श्री सुमतिप्रभाजी म.सा ठाणा 7 के सानिध्य में बालिकाओं के संस्कार रोपण हेतु त्रिदिवसीय आवासीय शिविर डिवाइन टच का आयोजन किलपाक में स्थित चातुर्मास स्थल सामायिक स्वाध्याय भवन में रखा गया,जिसमें 110 बालिकाओं ने भाग लिया | संस्कारीय शिविर में महासतीजी श्री सिन्धुप्रभाजी म.सा,श्री तितिक्षाजी म.सा,श्री वर्षाजी म.सा,श्रीमती संगीताजी मेहता,सीमाजी भंसाली, विनीताजी सुराणा,श्री दिनेशजी भंसाली,अशोकजी बोकड़िया ने विभिन्न कक्षाओं के माध्यम से नैतिकता व व्यवहारिकता,धार्मिकता आदि सद्गुणों को समझाते हुए प्रेरणास्प्रद उद्बोधन दिया | शिविर समापन कार्यक्रम में बालिकाओं ने शिविर में हुए अपने अनुभव बताए व विजेताओं की घोषणा श्राविका मण्डल की मन्त्री दीपिकाजी...

समस्त दुखों का कारण प्रमाद: साध्वी संबोधि 

हितकारी शुभ कार्यों में अरुचि रखना तथा धर्मक्रियाओं में अनुत्साह दिखाना प्रमाद है। प्रमादी मनुष्य का करणीय-अकरणीय का बोध धुंधला हो जाने से उसकी जागृति खो जाती है। प्रमाद का अर्थ मात्र आलस्य या नींद लेना ही नहीं है अपितु आत्मविस्मृति का नाम प्रमाद है। इसी कारण प्रमादी मनुष्य करने योग्य कार्य नहीं करता और नहीं करने योग्य कार्य में रुचि दिखाता है। प्रभु महावीर ने समस्त दुःखों का मूल कारण प्रमाद को बताया है। जितने भी कर्मबन्ध होते हैं वे चाहे किसी भी माध्यम से हुए हों किन्तु उनके मूल में प्रमाद है। उच्च कोटि के साधक भी कभी अपरिहार्य कारण से तो कभी अकारण ही प्रमाद का सेवन करके अपनी आत्म-विकास की साधना को अवरुद्ध कर लेता है। प्रमाद तो एक प्रकार से जीते जी मृत्यु है। गणधर गौतम स्वामी जैसे महान् साधक को भी प्रभु महावीर ने प्रमाद-त्याग की बार-बार प्रेरणा देते हुए कहा, मनुष्य का जीवन वृक्ष से टूटे ह...

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