पर्युषण पर्व का त्रुतिय पुष्प प्रारंभ हुआ! पु. श्रुतप्रज्ञाश्री जी ने अंतगडसुत्र का वाचन किया , गुरुमॉं पु. चंद्रकला श्रीजी ने प्रभु महावीर के समवसरण की यात्रा करायी! मेरे महावीर भगवान मेरे मनमंदीर मे आओ! बचपन में माता पिता का हाथ, जवानी मे परिवार का सांथ, बुढापे मे परमात्मा की शरण स्वीकारो! बुढ़ापा जीवन का मुख्य अध्याय है ! भोग नही योग के साधन बनो! दुनीया मे आये बिना वस्र आये, जब जाओ महावीरजी का वस्र धारण करो बहनों चंदनबाला का वस्र धारण करो! बुढ़ापा अभिशाप नही , आशिर्वाद है! जब दादाजी बनोगे दादागिरी छोड़ देना! दिल दर्या रखो, खुला रखो यह संदेश पु स्नेहाश्रीजी ने पारिवारिक द्रष्टांत देकर दिया! आलंदी से आये महावीर लुणावत ने 16 उपवास के प्रत्याख्यान लिए! संघाध्यंक्ष सुभाष ललवाणी ने उपस्थित महानुभावों का स्वागत किया एवं दानराशी घोषित करनेवाले परिवारो का शब्दसुमनो से स्वागत किया!
प्रवचन – 22.08.2025 – प पू श्री मुकेश मुनीजी म सा – (बिबवेवाडी जैन स्थानक) जैन धर्मातील “चार अनंत चतुर्विध” भावनांमध्ये — मैत्री, करुणा, मुदिता आणि उपेक्षा — यामध्ये पहिली भावना म्हणजे मैत्री. “मैत्री भवतु सर्वेषां जीवनाम्” अर्थ: सर्व जीवांशी माझं नातं मैत्रीपूर्ण असो. हे केवळ उच्चारायचं वाक्य नाही, तर आत्म्याच्या व्यवहारात उतरवण्यासारखं एक दिव्य सूत्र आहे. सुदामा हे गरीब ब्राह्मण, कृष्ण द्वारकेचा राजा. तरीही कृष्णानं आपल्या लहानपणच्या मित्राला विसरला नाही. गरीबीत आलेल्या सुदाम्याला पाहून श्रीकृष्णाने त्याचे पाय धुतले. त्याच्या डोळ्यात पाणी आले, पण त्याच्या हृदयात होती खरी मैत्री. ही होती निष्कलंक, निस्वार्थ, दिव्य मैत्री. दुर्योधनाने कर्णाला राजा केलं, मान दिला. आणि कर्णाने अखेरपर्यंत आपलं मित्रधर्म निभावलं—युद्धभूमीत आपल्या मृत्यूचा स्वीकार करताना सुद्...
पर्युषण महापर्व में आज मनाया सामायिक दिवस आचार्य महाश्रमण के प्रबुद्ध सुशिष्य मुनि डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार जी , मुनि रमेश कुमार जी , मुनि पद्म कुमार जी एवं मुनि रत्न कुमार जी के पावन सान्निध्य एवं श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा के तत्वावधान में सभी संघीय संस्थाओं के सहयोग से शुक्रवार को पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व का तीसरा दिन सामायिक दिवस के रूप में मनाया गया। इस अवसर पर सभी को सामूहिक रूप से अभिनव सामायिक का प्रयोग कराया गया, जिसमें सैकड़ों भाई-बहनों ने भाग लिया। इस अवसर पर मुनि डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार जी ने उपस्थित अपार जनमेदिनी को फरमाया कि सामायिक बहुत बड़ी साधना है। समुचितपूर्वक, समतापूर्वक एवं विधिपूर्वक करने से एक सामायिक भी आत्म कल्याण में सहायक हो सकती है। सामायिक का मतलब है समभाव यानी समता भाव में रमण करना। सामायिक इंद्रियों की प्रवृत्ति को शांत करती है और उसे अध्यात्म की ओर ले जात...
जालना : पर्यूषण पर्वाच्या तिसर्या दिवसाची सुरुवात अंतर्कृत दशांग सूत्राच्या पवित्र पठणाने झाली. या प्रसंगी उपस्थित भक्तांशी संवाद साधताना परम पूज्य रमणिकमुनिजी म. सा.यांनी जिनवाणी श्रवणाचे महत्त्व गहनपणे सांगितले. महाराजांनी स्पष्ट केले की, भगवान महावीर स्वामींच्या वचनातून प्राप्त झालेले हे ज्ञान अत्यंत मौल्यवान आहे आणि त्याचा स्वीकार न करता जीवनात खर्या अर्थाने आत्मिक प्रगती साधणे अशक्य आहे. आत्मिक संपदा आणि मोहनिया कर्मांवर विजय महाराजांनी सांगितले की, आत्मिक ज्ञान ही खरी संपदा आहे, जी ऐकण्यापुरती मर्यादित नसून प्रत्यक्ष जीवनात लोभ, क्रोध, मोह यावर विजय मिळवण्यासाठी वापरली पाहिजे. त्यासाठी त्याग, संयम आणि नियमित साधना हा अविभाज्य मार्ग आहे. भक्तांनी ध्यान, प्रार्थना आणि आत्मावलोकन करून आपल्या आत्म्याची प्रबलता वाढवावी. पर्वांचे उद्दिष्ट आणि आध्यात्मिक संदेश पर्यूषण पर्वाचा मुख्य हेतू श...
श्री गुजराती जैन संघ गांधीनगर में चातुर्मास विराजित दक्षिण सूर्य ओजस्वी प्रवचनकार डॉ श्री वरुण मुनि जी म सा ने शुक्रवार को धर्म सभा में उपस्थित श्रद्धालुओं को पर्यूषण पर्व के तीसरे दिन अन्तगड सूत्र के माध्यम से सूत्र में वर्णित महान करुणा मूर्ति मोक्षगामी आत्मा श्री गजसुकुमाल मुनि के चरित्र पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि अपूर्व सहनशीलता, क्षमा,समता और करुणा की प्रतिमूर्ति थे महान साधक गजसुकुमाल मुनि। जिनके मस्तक पर सोमिल ने गर्म गर्म अंगारे रख दिये थे। पर करुणा मूर्ति गजसुकुमाल मुनि ने उस अपार तीव्र वेदना को भी समभाव से सहन किया और सामने वाले पर जरा भी क्रोध विषम भावों को नहीं लाते हुए महान क्षमा के गुण को धारण करते हुए सब कर्मो की निर्जरा कर परम पद मुक्ति को प्राप्त किया। ऐसे अपूर्व सहनशीलता समता और क्षमा का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत करते हुए आगम के इतिहास के स्वर्णिम पृष्ठो पर अपना ना...
विश्व के समस्त प्राणियों की एकमात्र यही कामना है कि मुझे सुख मिल जाये और मेरे जीवन के तमाम दुःख टल जाये। सुख प्राप्ति के लिए मनुष्य अनेक प्रकार की प्रवृत्ति करता है, नानाविधि प्रयास करता है किन्तु अफसोस यह है कि हर प्रवृत्ति और प्रयास उसे दुःख के महागर्त में डुबो देता है इसीलिए दुनिया का एक भी व्यक्ति ऐसा नहीं मिलेगा जो दुःखी न हो। यह संसार विचित्रता, विविधता और विषमता से भरा हुआ है। ऐसे संसार में जीते हुए हर कदम पर दुःख तो होंगे ही परन्तु आते हुए दुःखों को हम सुख में बदलें, यही हमारी विशेषता है। दुःख को रोकना मनुष्य के बस की बात नहीं है किन्तु आये हुए दुःखों को सुख में बदलना उसके हाथ में है। ज्ञानियों का कथन है कि दुःखों के बीच यदि शांति से जीना हो तो अपनी दृष्टि को बदल लो क्योंकि दृष्टि से ही सुख-दुःख का संवेदन होता है। यदि कोई दुःख का संवेदन करे तो उसे अवश्य दुःख होगा और न करे तो नहीं ...
कर्म के कारण आत्मा का एक जन्म से दूसरे जन्म को प्राप्त करना संसार है। संसार के सब प्राणी समान नहीं है। सबकी बुद्धि, वैभव और क्षमता भिन्न-भिन्न हैं। जिसके पास यह साधन उपलब्ध है उसका मन गर्व से भर जाता है, और जिसके पास साधन नहीं होते उसके मन में हीन भावना पनपती है। इस दोहरी बीमारी की चिकित्सा संसार-अनुप्रेक्षा द्वारा होती है। यह संसार परिवर्तनशील है। इसमें कोई भी व्यक्ति निरन्तर एक स्थिति में नहीं रहता। जन्म के साथ ही रोग, बुढ़ापा और मृत्यु का दुःख उसे घेरे रहता हैं। कहीं जन्म की खुशियाँ मनाई जाती हैं तो कहीं रोगी का पीड़ित स्वर सुनाई देता है। कहीं विवाह उत्सव रचा जा रहा है तो कहीं चिताएं जल रही हैं। वस्तुतः यह संसार असार और दुःखमय है। संसार के रंगमंच पर प्राणी विभिन्न पात्रों के साथ पिता-पुत्र, पति-पत्नी, भाई-भाई आदि के रूप में विविध सम्बन्ध बनाता है। किसी से मैत्री करता है तो किसी से दुश्...
चिंचवडः येथील प्रसिध्द उद्योजक, चिंचवड श्टेशन श्री संघाचे पुर्व अध्यक्ष, जैन विद्या प्रसारक मंडलाचे विश्वस्त श्री जयप्रकाशजी रांका यांचा अम्रुतमहोत्सवी सन्मान आकुर्डी निगडी प्राधिकरण श्री संघाच्या विश्वस्तांनी शाल माळा, व वपुष्पगुच्छ देऊन केला व सुद्दरुढ आरोग्याची मंगलकामना केली. याप्रसंगी संघाध्यक्ष सुभाषजी ललवाणी, वरिष्ट उपाध्यक्ष विजयजी गांधी, विश्वस्त धनराजजी छाजेड, कोषाध्यक्ष नेनसुखजी मांडोत व सोबत सौ रेखाजी रांका
पर्युषण पर्व के द्वितीय पुष्पमे साध्वी स्नेहाश्री जी ने स्तवन के माध्यमसे अपनी बात रखी! स्वर्ग सरीखा लगे सु्नेहरा, मंदीरसा सुंदर हो, ऐसा अपना घर हो! हॅंसी खुंशी हो, जहॉं सभी सुखकर हो, कर्मयोग के किस्मत से मिली जमी हो! प्रेम, त्याग और मर्यादा, जिसकी नींव बड़ी हो! विश्वास के दिवारे से बना परिवार हो! रहे रोशनी ज्ञानकी उसमें, आगम भावके दरवाज़े हो! चंद्रमा जैसी रोशनी, माता-पिता ईश्वर हो! प्रेम प्यार , मिठास का रस कैसा घोले, ईश्वर के हिफ़ाज़त का त्योहार हो! दिवरानी- जिठानी में बहन बहन का प्यार हो, होली की सौग़ात हो हर शाम माता पिता के चरणो की मालिश कर दिवाली हो! एक दुसरो के प्रति सदैव स्नेह भाव बना रहे और उसी मे जीवन की भव्यता और दिव्यता है! अंतगड सुत्र का वाचन साध्वी श्रुतप्रज्ञा श्रीजी कर रहे है! गुरुमॉं समवसरण की यात्रा करा रहे है! 18 बहनो ने दयाव्रत धारण किया है! गांधी परिवार द्वारा सामुहिक ...
जालना (प्रतिनिधी) : जालना शहरात सुरु असलेल्या पर्युषण पर्वाच्या दुसर्या दिवसाचे आयोजन आज अत्यंत भक्तिभावाने झाले. सकाळपासूनच श्रावक-श्राविकांनी जिनालयात मोठ्या संख्येने उपस्थित राहून धर्मप्रवचनाचा लाभ घेतला. या प्रसंगी प.पू. रमणीकमुनीजी म.सा. यांनी आपल्या ओजस्वी शैलीत उपस्थितांना जिनवाणी श्रवणाचे महत्त्व समजावून सांगितले. जिनवाणीचे औषधासारखे महत्त्व मुनीश्रींनी प्रवचनात सांगितले की – जसे डॉक्टरांचे औषध आपल्याला समजले नाही तरी ते शरीरावर प्रभाव करते, त्याचप्रमाणे जिनवाणीचे शब्द आपल्याला समजले नाहीत तरी आत्म्यावर त्याचा प्रभाव पडतो. श्रवण करताना प्रत्येक शब्द परमाणु प्रमाणे कानांवर स्पर्श करतो आणि आत्मिक शुद्धतेकडे नेतो. भगवान अरिष्टनेमींचे चरित्र सभेत मुनीश्रींनी भगवान अरिष्टनेमींच्या जीवनातील द्वारिका नगरीतील सहस्रनाम वनातील प्रसंगाचे तपशीलवार वर्णन केले. श्रीकृष्ण व देवकी यांच्याशी...
श्री गुजराती जैन संघ गांधीनगर में चातुर्मास विराजित दक्षिण सूर्य ओजस्वी प्रवचनकार डॉ श्री वरुण मुनि जी म .सा. ने पर्व पर्यूषण के दुसरे दिन गुरुवार को धर्म सभा में उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि संसार में माता पिता की सेवा ईश्वर की सेवा के समान है। श्रीकृष्ण ने अपने माता पिता की आदर्श सेवा भक्ति, उनकी हर आज्ञा का विनम्रता से पालन करके जगत के समक्ष एक अनुपम, दिव्य आदर्श उदाहरण प्रस्तुत किया है। उन्होंने कहा कि माता पिता अपने जीवन का सर्वस्व बलिदान करते हुए अपनी संतान का पालन पोषण करते हुए अपने बच्चों को संसार की हर खुशी प्रदान करने के लिए दिन रात अथक परिश्रम मेहनत करते हैं। वही बच्चे बड़े होकर जब अपने वृद्ध मां बाप की सेवा नहीं करते हैं और कुछ नौजवान जब अपने माता पिता को घर से बाहर निकाल देते हैं और उन्हें वृद्धावस्था में लाचार असहाय हालत में वृद्धाश्रम में छोड़ कर आ जाते हैं...
स्वाध्याय भवन, साहूकारपेट में पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व 20 से 27 अगस्त 2025 प्रतिक्रमण पौषध संवर साधना इस वर्ष पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व दिनांक 20 अगस्त 2025 बुधवार से दिनांक 27 अगस्त 2025 बुधवार तक हैं | पर्वाधिराज पर्युषण पर्व के पावन प्रसंग पर विशेष आत्मसाधना,ज्ञानाराधना व तपाराधना का लक्ष्य रखा गया हैं | प्रतिवर्ष की तरह पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व के प्रसंग पर दैनिक रुप से प्रतिक्रमण,संवर, पौषध की व्यवस्था,चेन्नई में साहूकारपेट के बेसिन वाटर वर्क्स स्ट्रीट में स्थित स्वाध्याय भवन में रहेगी | श्री जैन रत्न हितैषी श्रावक संघ के निवर्तमान कार्याध्यक्ष आर नरेन्द्र कांकरिया ने बताया कि स्वाध्याय भवन में स्वाध्यायी व श्रावक वर्ग दैनिक रुप से प्रतिक्रमण, पौषध,संवर करेंगे | स्वाध्यायी गण पौषध,संवर करते हुए दैनिक रुप से देवसिय व रायसी प्रतिक्रमण करवाएंगे | प्रतिक्रमण पौषध-संवर स्थल : स्वाध्य...