पर्युषण महापर्व में आज मनाया गया व्रत चेतना दिवस श्रीमती सुजाता बोथरा के 9 (नौ) के तप का अभिनंदन आचार्य महाश्रमण के प्रबुद्ध सुशिष्य मुनि डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार जी , मुनि रमेश कुमार जी , मुनि पद्म कुमार जी एवं मुनि रत्न कुमार जी के पावन सान्निध्य एवं श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा के तत्वावधान में सभी संघीय संस्थाओं के सहयोग से रविवार को पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व का पांचवां दिन व्रत चेतना दिवस के रूप में मनाया गया। इस अवसर पर मुनि डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार जी ने उपस्थित अपार जनमेदिनी को फरमाया कि व्रत जीवन की सुरक्षा है। त्याग बंधन नहीं है, सुरक्षा कवच है। जहां त्याग नहीं है वहां जीवन सुरक्षित नहीं है। इसलिए जैन धर्म में बारहव्रतों का विधान है। मुनि रमेश कुमार जी ने उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं को संबोधित करते हुए कहा कि व्रत छोटा-सा शब्द है, जिसमें अपार शक्ति है। व्रत मन की तृप्ति का सर्वोत्तम स...
प्रवचन – 24.08.2025 – प पू श्री मुकेश मुनीजी म सा – (बिबवेवाडी जैन स्थानक) जैन धर्म आपल्याला शिकवतो – “जीवो जीवस्य साहाय्यम्” म्हणजे एक जीव दुसऱ्या जीवाला मदत करणे हेच खरे धर्म आहे. ‘सेवा’ ही केवळ देहाने केलेली मदत नसून ती आत्म्याची निर्मळ भावना आहे. तत्त्वार्थसूत्रात आचार्य उमास्वाती यांनी म्हटले आहे –“परोपकारः पुण्याय, पापाय परपीडनम्” (दुसऱ्याचे कल्याण करणे हे पुण्य, आणि दुसऱ्याला दुःख देणे हे पाप). म्हणूनच सेवा म्हणजे – अहंकारविरहित, दयाभावाने प्रेरित कृती. मानवसेवा – भुकेल्याला अन्न, रुग्णाला औषध, निराश व्यक्तीला धीर. धर्मसेवा – साधू-साध्वींची विनयपूर्वक सेवा, जिनालयांची स्वच्छता, स्वाध्याय-प्रवचनातील सहभाग. समाजसेवा – शिक्षण, आरोग्य, पर्यावरणासाठी योगदान. आत्मसेवा – आत्म्याला शुद्ध करण्यासाठी तप, ध्यान, स्वाध्याय करणे. सेवा म्हणजे सर्वात श्रेष्ठ दान. भगवान महावीरांनी सांगि...
श्री गुजराती जैन संघ गांधीनगर में चातुर्मास विराजित दक्षिण सूर्य ओजस्वी प्रवचनकार डॉ श्री वरुण मुनि जी म.सा. ने पर्व पर्यूषण के पांचवें दिन रविवार को धर्म सभा में उपस्थित श्रद्धालुओं को अन्तगड सूत्र के माध्यम से क्षमा के सागर एवं अपूर्व सहनशीलता के धनी महान साधक मोक्षगामी आत्मा अर्जुनमाली के प्रेरणादायी कथानक पर सारगर्भित प्रकाश डालते हुए कहा कि अर्जुनमाली ने छह महीने में कर्म बांधे और छह महीने में सब कर्मों को क्षय करके परम पद मुक्ति मोक्ष में पधार गए। उन्होंने कहा कि प्रतिदिन छह पुरुष और एक स्त्री की हत्या जैसा जधन्यतम महापाप अपराध, हिंसा करने वाला ऐसा वह क्रूर, हिंसक पाप करने वाला अर्जुनमाली भी सुदर्शन श्रावक के प्रभाव से भगवान महावीर की शरण में जाकर दीक्षित हो जाता है और उसके जीवन का रुपान्तरण हो जाता है और वे अपने किये घोर पापों का प्रायश्चित करते हुए अपने जीवन में आने वाले सभी कष्ट, ...
रत्न स्वर्ण महोत्सव के तहत श्री जैन रत्न युवक परिषद् तमिलनाडु द्वारा 24 अगस्त रविवार को चेन्नई महसनागर में 12 व्रती श्रावक-श्राविका महाअभियान रत्न स्वर्ण महोत्सव के अन्तर्गत आचार्य प्रवर 1008 श्री हीराचन्द्रजी म. सा,भावी आचार्य प्रवर श्री महेंद्रमुनिजी म.सा की विशेष प्रेरणा से श्रावक- श्राविकाओं को 12 व्रतों या उनमें से कुछ व्रतों को ग्रहण करने एवं करवाने हेतु अखिल भारतीय श्री जैन रत्न युवक परिषद द्वारा एक विशेष अभियान “12 व्रती श्रावक महाअभियान” के रूप में चलाया जा रहा हैं,जिसके तहत पर्वाधिराज पर्युषण की शुभ घड़ियों में दिनांक 24 अगस्त 2025 रविवार को पूरे भारतवर्ष में सभी श्रावक श्राविकाएं एक व्रतधारी जाव 12 व्रत धारी श्रावक- श्राविका बनने हेतु 12 व्रतों को समझ कर ग्रहण करेंगे तथा एक साथ सामूहिक रूप में 24 अगस्त 2025 को अपने-अपने नजदीकी धर्म स्थानक में विराज रहे गुरु भगवंत की ...
जालना, 23 ऑगस्ट: जालना शहरात सुरू असलेल्या पर्युषण पर्वामुळे जैन समाजात भक्ती, आत्मशुद्धी आणि आध्यात्मिकतेची लाट आली आहे. आठ दिवस चालणाऱ्या या पर्वात दररोज होणाऱ्या प्रवचन, उपवास, सामायिक व तपश्चर्येमुळे भाविकांना आध्यात्मिक उन्नतीचा अनुभव मिळत आहे. चौथ्या दिवशीची आध्यात्मिक सुरुवातपर्युषण पर्वाच्या चौथ्या दिवशी, मंगलाचरण आणि ‘अंतःकृत दशांग सूत्र’ पठणाने कार्यक्रमाची सुरुवात झाली. त्यानंतर पूज्य रमणिकमुनीजी म.सा. यांच्या प्रभावी प्रवचनाने सभागृहातील वातावरण अधिकच पवित्र झाले. रमणिकमुनीजींनी ‘अंतःकृत सूत्र’ हे भगवान महावीर स्वामींचे मूळ वचन असल्याचे सांगितले. त्यांनी स्पष्ट केले की, या सूत्रात ९० सिद्ध आत्म्यांचा उल्लेख आहे. या आत्म्यांनी ज्ञान, दर्शन, चारित्र्य आणि तप या साधनांचा अवलंब करून मोक्षप्राप्ती केली. हे ऐकून उपस्थित भाविकांना आत्मिक प्रगतीसाठी प्रेरणा मिळाली. उपवासाचे महत्त्व आणि...
मानव जीवन अनेक घटना और दुर्घटनाओं का एक मेला है। इस मेले में अनेक व्यक्तियों के साथ गुजरते हुए कुछ तनाव, टकराव और बिखराव के प्रसंग होते रहते हैं। जिससे मनुष्य का दिमाग अनेक प्रश्न, उलझन, समस्या और गलतफहमियों का शिकार बन जाता है। इस तरह की ग्रंथियों से उसका मन बोझिल बना रहता है। यदि चिन्तन की गहराई में जाकर इन सारी ग्रंथियों का मूल कारण खोजा जाए तो वह है आग्रह अपने ही सोच-विचार को सच मानकर उसके साथ चिपक जाने का नाम आग्रह है। ऐसी स्थिति में दूसरे के दृष्टिकोण को गलत समझा जाता है, गौण कर दिया जाता है या उनके विचारों का समादर नहीं किया जाता। इस प्रकार आग्रही बनकर व्यक्ति अपने जीवन को तनाव और शिकायतों से भर लेता है। जिस संसार में हम जीते हैं वह संसार ही द्वन्द्वात्मक है। यहाँ सारे तत्व प्रतिपक्ष को लिए हुए हैं। वस्तु हो या व्यक्ति, घटना हो या परिस्थिति सभी अपने विरोधी पक्ष के साथ जुड़े हुए हैं।...
प्रवचन – 23.08.2025 – प पू श्री मुकेश मुनीजी म सा – (बिबवेवाडी जैन स्थानक) जैन धर्मात आत्मशुद्धी व साधनेच्या मार्गावर चालण्यासाठी अनेक भावनांचे वर्णन केले आहे. त्यामधील एक महत्त्वाची भावना म्हणजे प्रमोद. प्रमोद म्हणजे श्रेष्ठ गुणांनी युक्त साधूंप्रति आदर, गौरव व आनंद व्यक्त करणे. दुसऱ्या शब्दांत सांगायचे तर – थोर संत, आचार्य, साधू, विद्वान यांच्या गुणांची प्रशंसा करणे आणि त्यांच्या साधनेतून, त्यांच्या जीवनातून प्रेरणा घेणे, हेच प्रमोद. अकराव्या शतकातील आचार्य हेमचंद्रांनी त्यांच्या प्रसिद्ध ग्रंथात “त्रिषष्ठीशलाकापुरुषचरित्र” मध्ये प्रमोद भावनेचा उल्लेख केला आहे. त्यात एक प्रसंग येतो – राजा शतबळ यांनी आपल्या पुत्राला राज्य दिले आणि स्वतः एका आचार्यांच्या चरणी शरण गेले. त्यांनी ध्यानधारणेत लीन होऊन मैत्री, प्रमोद, करुणा, माध्यस्थ्य अशा चार भावनांचा अंगीकार केला. त्यामुळे त्यांचे...
पर्युषण महापर्व – आज वाणी संयम दिवस आचार्य महाश्रमण के प्रबुद्ध सुशिष्य मुनि डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार जी, मुनि रमेश कुमार जी , मुनि पद्म कुमार जी एवं मुनि रत्न कुमार जी के पावन सान्निध्य एवं श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा के तत्वावधान में सभी संघीय संस्थाओं के सहयोग से शनिवार को पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व का चौथा दिन वाणी संयम दिवस के रूप में मनाया गया। इस अवसर पर मुनि डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार जी ने उपस्थित अपार जनमेदिनी को फरमाया कि मनुष्य को मधुर व मीठी वाणी बोलनी चाहिए। वाणी के कारण दूसरे को अपना व पराया बनाया जा सकता है। व्यक्ति को कला पूर्ण एवं कम बोलने का प्रयास करना चाहिए। अधिक से अधिक मौन रहने का प्रयास करना चाहिए। मुनिश्री ने भव परम्परा से गुजर रहे भगवान महावीर के सोलहवें भव का प्रसंग सुनाये। मुनि रमेश कुमार जी ने तेरापंथ धर्मस्थल के खचाखच भरे जयसभागार में उपस्थित श्रावक-श्राविका...
21 अगस्त को वनबंधु परिषद चेन्नई महिला समिति ने वरिष्ठ नागरिक दिवस का आयोजन किया। इस आयोजन में समिति ने उन युगल को आमंत्रित किया जिन्होंने अपनी शादी के साठ वर्ष पूर्ण कर लिए थे। कुल 8 युगल इस कार्यक्रम में शामिल हुए । इनके मनोरंजन के लिए समिति ने अंताक्षरी और कुछ प्रश्न उत्तर तैयार किए जिसमें उन्होंने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। सभी वरिष्ठ सदस्यों से उनकी पसंदीदा फिल्म एवं उनके पसंदीदा हीरो हीरोइन के बारे में पूछा गया और उन्हीं से संबंधित कुछ गाने बनाकर उनके सामने प्रस्तुत किए गए। 60 साल की यह यात्रा अपने सह भागी के साथ कैसी रही? कुछ खट्टी मीठी यादें थीं , जिन्हें सभी युगल ने हमारे साथ साझा किया ,और यह भी बताया की सफल वैवाहिक जीवन के लिए क्या आवश्यक है। सबसे वरिष्ठ तो वह युगल था जिसने अपनी शादी के 72 साल पूर्ण किए l सभी युगल जोड़ियों ने कार्यक्रम को बहुत ज्यादा सराहा। सभी वरिष्ठ नागरिकों को चेन...
दिनांक 23 August शनिवार 2025, *118* वे अमावस्या* के उपलक्ष मैं *जैन सेवा मंडल* बैंगलोर कैंट, कि और से तीमैया रोड स्थित सेठ श्री *किशनलाल फूलचंद लुनिया मेटरनिटी होम”* (“पुअर हाउस हॉस्पिटल”) के बाहर अल्पाहार अन्नाधानम का कार्यक्रम रखा गया ! इस अवसर पर ताराचंद लुणावत, महावीर चंद गादिया, शांतिलाल चुतर, भिकम चंद लूनिया, भरत मेहता, मनोहर गुलेचा, महेंद्र सेन, अशोक खिवंसरा, आनंद चुतर, मांगीलाल, विजयराज सुराणा, संतोष चुतर, सुनिल पोखरना, विशाल गादिया,जितेन्द्र लुणावत,प्रदीप मेहता, महावीर फुलफगर, सुनीता विमल चंद बरलोटा, ललित लोढा, विजय राज सुराणा, प्रमोद संघवी ,दिनेश लोढ़ा,अशोक कोठारी, महेन्द्र लूणिया, सुनील सुराणा ,राकेश पोखरना,सुनिल खिवंसरा, आदि उपस्थित थे!
चंदनबाला तेला तप महायज्ञ में हुए 175 तेले पर्युषण महापर्व का चतुर्थ दिवस विजयनगर, बैंगलोर: जैन श्वेतांबर तेरापंथी सभा, विजयनगर के तत्वावधान में पर्युषण महापर्व के चतुर्थ दिन दिनांक 23 अगस्त को साध्वी श्री संयमलताजी ठाणा 4 के पावन सानिध्य में “वाणी संयम दिवस” का आयोजन अर्हम् भवन में हुआ। धर्म परिषद को सम्बोधित करते हुए साध्वी श्री संयमलताजी ने कि कहा कि वाणी व्यक्तित्व का आईना है। वाणी बोलने वाले के व्यक्तित्व और विकास का सटीक प्रतिबिंब है। संस्कृति को जीवित रखने में भाषा का बहुत महत्व है। आज विदेशी भाषा के अत्यधिक प्रादुर्भाव के कारण हमारी भाषा विकृत होती जा रही है, उसकी मधुरता कम होती जा रही है। हमारी वाणी में संयम होना आवश्यक है, बिना सोचे समझे कुछ भी नहीं बोलना चाहिए। साध्वीश्रीजी ने फरमाया कि इतिहास में अनेक ऐसे उदाहरण देखने मिलते हैं, जब वाणी के असयंम से अनेक समस्याएं उत...
श्री गुजराती जैन संघ गांधीनगर में चातुर्मास विराजित दक्षिण सूर्य ओजस्वी प्रवचनकार डॉ श्री वरुण मुनि जी म.सा. ने पर्व पर्यूषण आराधना के चौथे दिन धर्म सभा में उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि नशा नाश का द्वार है। नशे के कारण व्यक्ति के साथ उसके परिवार की सुख शांति भी भंग हो जाती है। इतिहास में अनेकों उदाहरण मिलते हैं जहां नशे व्यसनों के चक्कर में पड़ कर अनेकों जिन्दगीया बर्बाद हो गयी।उनका समूल नष्ट हो गया केवल इस नशे की बुरी आदतों के कारण। सुरा और दैपायन ऋषि के क्रौध के कारण ही द्वारका नगरी का विनाश हुआ। मुनि श्री ने देश एवं समाज के सभी युवाओं को आव्हान करते हुए कहा कि आप सभी आज अभी ही नशें रुपी भयंकर बुरी आदत को छोड़कर सरल, सादगी से अपना जीवन यापन करें। जो आपको दुर्गति में जाने से बचा सकता है और इसमें आपके साथ आपके परिवार में भी सदा सुख शांति समृद्धि और खुशहाली का माहौल बना रह...