★ गाड़ी की तरह जीवन में भी स्पीड ब्रेकर, रेड सिग्नल, रिवर्स गियर की बताई उपयोगिता Sagevaani.com @चेन्नई : श्री मुनिसुव्रत जिनकुशल जैन ट्रस्ट के तत्वावधान में श्री सुधर्मा वाटिका, गौतम किरण परिसर, वेपेरी में शासनोत्कर्ष वर्षावास में धर्मपरिषद् को संबोधित करते हुए गच्छाधिपति आचार्य भगवंत जिनमणिप्रभसूरीश्वर म. ने कहा कि गाड़ी की सुरक्षा के लिए जैसे रेड़ सिग्नल, स्पीड ब्रेकर जरूरी है उसी तरह जीवन में भी रेड़ सिग्नल, स्पीड ब्रेकर, रिवर्स गियर का होना जरूरी है, उसी का नाम है- मर्यादा। मर्यादा परिवार को, स्वयं को सुरक्षित रख सकती है। हर रावण सीता को उठा कर ले जा सकता है, जब वह लक्ष्मण रेखा को पार कर जाती है। हमारे परिवार की सुरक्षा, संस्कारों के संवर्धन, शील की सुरक्षा के लिए जरूरी है हम लक्ष्मण रेखा का उल्लंघन न करे। उस रेखा के भीतर रहकर हम प्रसन्नता का अनुभव कर सकते है। पंतग तभी तक सुरक्षित है, ज...
Sagevaani.com @चेन्नई : तेरापंथ जैन विद्यालय का 32वॉ खेल दिवस जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में शनिवार को आयोजित हुआ। प्रांगण के प्रवेश द्वार पर मुख्य अतिथि विश्वनाथन आईपीएस डीआईजी हाउसिंग बोर्ड, विशिष्ट अतिथि श्री हरीश आंचलिया एडवोकेट सुप्रीम कोर्ट एवं तेरापंथ एजुकेशन मेडिकल ट्रस्ट के पदाधिकारियों के पहुंचते ही स्कूल बैंड द्वारा गर्मजोशी के साथ स्वागत किया गया। तत्पश्चात मुख्य अतिथि द्वारा राष्ट्रीय ध्वज एवं विशिष्ट अतिथि द्वारा विद्यालय ध्वज फहराया गया। स्कूल के सभी हाउस के सदस्यों स्काउट गाइड के विद्यार्थियों एवं छात्र संसद के पदाधिकारियों ने नयनाभिराम मार्च पास्ट का प्रदर्शन किया और मुख्य अतिथि विशिष्ट अतिथि एवं सभी पदाधिकारियों को सलामी दी। छात्रों की सलामी देख कर ऐसा लगता था, जैसे भारतीय सेना के जवान सलामी दे रहे हो। मुख्य अतिथि द्वारा स्पोर्ट्स मीट का मशाल प्रज्वलित कर उद्घाटन किया...
हमारे भाईन्दर में विराजीत उपप्रवृत्तिनि संथारा प्रेरिका सत्य साधना ज गुरुणी मैया आदि ठाणा 7 साता पूर्वक विराजमान है। वह रोज हमें प्रवचन के माध्यम से नित नयी वाणी सुनाते हैं वह इस प्रकार हैं। तीन बातें एक संघं दूसरा संप 3 संत तीन बातें मिल जाती है। तो संघ बन जाता है यूनिटी पिरिडी सिंगिरिटी यह तीनों बातें मिल जाते हैं तो आत्मा का उद्धार हो जाता है तीर्थंकर ने भी संघ के बारे में बताया नमो संघस अगर जहां भी संघहो वहां साधु-साध्वी एक कदम भी उनको बिना पूछे आगे नहीं रखते। इसलिए संघ बड़ा है व्यक्ति बड़ा नहीं फूल को धागों में गिराया जाता है तो वह माला बन जाता है सभी नदियां मिल जाती है तो वह सागर बन जाता है। अगर एक एक इंट इकट्ठे करते हैं तो वह महल बन जाता है। उसी प्रकार अगर संघ में एक-एक व्यक्ति जुड़ता है वह संघ बन जाता है। आज का योग टीवी और कंप्यूटर का है इसलिए जेसा सिनेमा इंटरनेट पर दिखाया जाएगा य...
राजस्थानी एसोसिएशन तमिलनाडु कि महिला इकाई गणगौर ने 4 अगस्त को एसआरकेके अग्रवाल सभा भवन में सावन कार्यक्रम – ‘त्योहारों की बौछार’ का आयोजन किया, जहां 125 सदस्यों ने कार्यक्रम का आनंद लिया। स्वागत भाषण गणगौर अध्यक्ष कांता बिसानी ने दिया तथा मंच संचालन त्रिशला चांडक व खुशबू नाहर ने किया। कार्यक्रम में खेल, नाटक और नृत्य शामिल थे, लेकिन मुख्य आकर्षण गणगौर के पूर्व अध्यक्षों – उर्मिला सराफ, निर्मल खेमका, सरिता खेमका, शालिनी अग्रवाल, सुनीता डागा, संगीता जैन, पुष्पलता झंवर, डॉ. सुनीता जैन, कंचन बंसल द्वारा किया गया रैंप वॉक था जिसमें वर्तमान अध्यक्ष कांता बिसानी और सह अध्यक्ष रेखा सिंघी भी शामिल थे। आई हुई सभी महिलाओं ने भोजन का भी खूब आनंद उठाया। समिति सदस्यगण निहारिका राठी, संगीता बिसानी, प्रीति गुप्ता, नमीता जयसवाल, शिखा जैन, प्रियंका जैन, ममता अग्रवाल और मधु तुलस्यान न...
हमारे भाईन्दर में विराजीत उपप्रवृत्तिनि संथारा प्रेरिका सत्य साधना ज गुरुणी मैया आदि ठाणा 7 साता पूर्वक विराजमान हैl वह रोज हमें प्रवचन के माध्यम से नित नयी वाणी सुनाते हैं वह इस प्रकार हैंl एक बार गौतम स्वामी भगवान महावीर स्वामी से पूछा कि हे भगवान सिहासन कितने प्रकार के होते हैंl तब भगवान ने फरमाया सिहासन तीन प्रकार के होते हैंl जिस आसन पर सिह के माफिक बैठकर जनता को समझावे उसे सिंहासन कहते हैंl जो समवशरण में भगवान देशना देते हैं उसे सिहासन कहते हैंl उसकी रचना इंद्र करते हैंl दूसरा सिहासन जहां पर राजा बैठकर न्याय करता है उसकी रचना कारिगर लोग करते हैंl तीसरा सिहासन शादी के मंडप में वर-वधू बैठते हैं वहभी एक ही सिंहासन हैl एक सिंहासन ऐसा जिस पर साधु साध्वी आचार्य बैठते हैं वे संघ के प्रमुख सहायक है यह तो बाहरी सिहासन हैl एक सिहासन समाज का जैसे कि अध्यक्ष मंत्री उपाध्यक्ष आदि पर हमें तो श्रद्...
श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन संघ कम्मनहल्ली में कर्नाटक तप चंद्रिका प.पू. आगमश्रीजी म.सा. ने बताया मानव भव पाने के बाद जिनवाणी का श्रवण अति महत्व का है। कोहिनूर हीरे के समान है प्रभु के वचन। इन वचनों को सुनकर छ: खंड के अधिपति चक्रवर्ती भी राज्य को छोड़ देते हैं पर हमने श्रवण के बाद क्या-क्या छोड़ा।इच्छा, लालसा, लोभ, तृष्णा को नहीं छोड़ा तो भव भ्रमण ही है। दरिद्र कौन है, सदा मांगते जा रहे हैं। प.पू. धैर्याश्रीजी म.सा. ने प्रवचन के माध्यम से बताया कंचन वर्णि देही मिली है इसकी कद्र करो। बहिरात्मा,अंतरात्मा, परमात्मा के बारे में बताया। मंत्री हस्तीमल बाफना ने अभिवादन किया। अध्यक्ष विजयराज चुत्तर ने स्वागत किया। संचालन सुधीर सिंघवी ने किया।
उपाध्याय प्रवर प्रवीण ऋषि की मौजूदगी में संपन्न हुआ कार्यक्रम Sagevaani.com @रायपुर. जैन समाज की सेवा और सहायता के लिए उपाध्याय प्रवर प्रवीण ऋषि ने अनूठा अभियान चलाया है। वे समाज के हर घर में गौतम निधि कलश की स्थापना करवा रहे हैं। जिन घरों में यह कलश स्थापित होता है, उस परिवार के प्रत्येक सदस्य हर दिन दान के रूप में कुछ राशि कलश में डालते हैं। एक निश्चित समयावधि में सारी रकम इकट्ठी कर समाजहित में खर्च की जाती है। प्रवीण ऋषि ने पूरे देश मूें ऐसे कलश की स्थापना कराई है। इस योजना का सही तरीके से संचालन करने के लिए उन्होंने प्रतिनिधि भी नियुक्त किए हैं। शनिवार को राजधानी के टैगोर नगर स्थित श्री लालगंगा पटवा भवन में इन्हीं प्रतिनिधियों का राष्ट्रीय अधिवेशन आयोजित किया गया था। गौतम निधि लब्धि कलश रायपुर के प्रमुख कमल पटवा ने बताया कि देशभर से 200 से ज्यादा प्रतिनिधियों ने इस आयोजन में हिस्सा लि...
सौभाग्य प्रकाश संयम सवर्णोत्सव चातुर्मास खाचरोद मुनि को निर्वाण का उपदेश करना , मुक्ति का उपदेश करना, जिसने बंधन को समझा वह मुक्ति को समझेगा यह बात बताते हुए पुज्य प्रर्वतक की प्रकाश मुनि जी मासा ने फरमाया कि.. संत ज्ञान के दिपक होते है। स्व व पर को प्रकाशीत करते हैं। दीपक के प्रकाश से सब दिखता है। ज्ञान से स्व व पर को देखते है। *स्व पर प्रकाशम इति ज्ञान* -जो स्वयं व पर को प्रकाशीत करता है वह ज्ञानी है । *आप कौन है !* में मात्मा हूँ। ज्ञानपहले स्वप्रकाशीत होता है, आप अपने आप को जानते हे दुसरे को नहीं जानते हे। मन: पर्याय ज्ञान का स्वामी वह सामने वाले के मन में क्या चल रहा है वह जानता है, अपने चिंतन को अपन या सर्वज्ञानी जानते है ! पर हम उनको नहीं जानते हैं। गुरुरेव संतों को रत्न की उपमा दी है। स्वप्रकाशीत है वह उससे को भी प्रकाशित करते हे। जलकांत मणि,सूर्यकांत मणि, चंद्रकांत मणि, मणियों को ...
समाज के लिए जो उत्तरदायित्व होते हैं। उनको पूर्ण निष्ठा और ईमानदारी से निभाना चाहिएl आचार्य श्री देवेंद्रसागरसूरिजी ने नोर्थटाउन के श्री सुमतिवल्लभ श्वेतांबर मूर्तिपूजक जैन संघ में प्रवचन देते हुए कहा कि समाज के अंदर व्यक्ति कई बंधनों से बंधा है, इसलिए उसे हमेशा गतिशील रहना चाहिए। आज का युग डिजिटल का युग है। इसके कारण व्यक्ति का व्यवहार, रहन-सहन, खानपान, विचार भी बदल गए हैं। इसके कई फायदे भी हैं और नुकसान भी। व्यक्ति को हमेशा अपने जीवन का लक्ष्य निर्धारित कर उसको प्राप्त करने के लिए प्रयासरत रहना चाहिए। व्यक्ति के समाज के प्रति कुछ उत्तरदायित्व होते हैं। उनको पूर्ण निष्ठा और ईमानदारी से निभाना चाहिए। आज इस भागदौड़ की ज़िंदगी में व्यक्ति के व्यक्तित्व को निखारने वाले महत्वपूर्ण गुण संस्कार, अच्छी बातें, अच्छी आदतों की कमी लग रही है। इन अच्छी बातों व आदतों का गुण व्यक्ति को अपने जीवन में अपना...
कर्म का मतलब है पुरुषार्थ मेहनत क्रिया। आप कर्म करोगे तो फल मिलेगा जैसा करोगे वैसा फल मिलेगा। खिलाकर खुश रहने की भावना रखें, आपके हाथों में कर्म करने की क्षमता है तुम जैसा चाहो वैसा कर सकते हो लेकिन फल के लिए हमें पुरुषार्थ तो करना ही पड़ेगा क्योंकि बिना पुरुषार्थ के भगवान भी हमारी सहायता नहीं कर सकते हैंl यदि आप हमेशा किस्मत के भरोसे बैठे रहना पसंद करते हैं तो आप गलत मार्ग पर चल रहे हैं। दिवाकर भवन पर धर्म सभा को संबोधित करते हुए मेवाड़ गौरव प्रखर वक्ता पूज्य गुरुदेव रविंद्र मुनि जी”नीरज” ने फरमाया कि कर्म का मतलब है किसी क्रिया या कार्य का प्रदर्शन। यह हिंदु धर्म और दर्शन में एक महत्वपूर्ण अवधारणा है जिसके अनुसार व्यक्ति के कर्म उसके जीवन के भविष्य में प्रभाव डालते हैं। यह आध्यात्मिक और नैतिक मूल्यों के साथ जुड़ा होता है और जीवन के अनुभवों को समझाने में मदद करता है। कर्म का म...
Sagevaani.com @चेन्नई । धर्म का आयाम है नैतिकता । शुक्रवार को साहूकार पेठ में साध्वी धर्मप्रभा ने चातुर्मासिक धर्मसभा में श्रध्दालुओं सम्बोधित करते हुए कहा कि नैतिकता और आध्यात्मिका मनुष्य का मानवीय गुण जो उसे गुणगान औंर चारित्रवान बनाता है। बिना नैतिकता के मनुष्य मे आध्यात्मिका नहीं आ सकती है।आज हर व्यक्ति नैतिकता के उपदेश देता है और बड़ी – बड़ी बातें करता है,लेकिन स्वंय में नैतिकता का अभाव है। धर्म के तीन आयाम है, जिसमें नैतिकता एवं उपासना धर्म का सर्वोपरी आयाम बताये गये है आध्यात्मिकता प्राणी मात्र के प्रति समभाव सब में साम्य एकता का अनुभव करना आध्यात्मिकता है। इसमें संप्रदाय, रूप,वेष पंथ स्थान की मान्यता नहीं है। अर्थात बिना भेद भाव के सब के साथ आत्मवत् व्यवहार करना आध्यात्मिकता में धोखा बेईमानी ठगाई भ्रष्टाचार कहीं का नहीं है। नैतिकता का संबंध समाज से होता है नैतिकता समाज के बिना ...
🏰☔ *साक्षात्कार वर्षावास* ☔🏰 *ता :05/8/2023 शनिवार* 🛕 *स्थल: श्री राजेन्द्र भवन चेन्नई* 🪷 *विश्व वंदनीय प्रभु श्रीमद् विजय राजेंद्र सुरीश्वरजी महाराज साहब के प्रशिष्यरत्न राष्ट्रसंत, दीक्षा दाणेश्वरी प.पू. युगप्रभावक आचार्य श्रीमद् विजय जयंतसेनसुरीश्वरजी म.सा.के कृपापात्र सुशिष्यरत्न श्रुतप्रभावक मुनिप्रवर श्री डॉ. वैभवरत्नविजयजी म.सा.* के प्रवचन के अंश 🪔 *विषय श्री अभिधान राजेंद्र कोष भाग 7* ~ हमारी आत्मा को राग द्वेष से मुक्त करना और सभी परिस्थितियों में समभाव में रखना वह सर्वश्रेष्ठ आत्मरक्षा है। ~ जगत के सभी जीवो को पापों से रहित देखने का सामर्थ्य ही परमात्मा के मिलन का प्रथम कदम है। ~ हमारे भीतर में भी परमात्मा का अंश है ही उसकी सच्ची श्रद्धा से वह अवश्य प्रगट हो सकता है। ~ प्रभु महावीर स्वामी ने 12 1/2 साल की साधना काल में पूर्ण रूप से मौन की साधना की थी और परम मौन...