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चार प्रकार के होते है: दर्शन मुनि जी मासा

पुज्यश्री दर्शन मुनि जी मासा ने कहा जीव चार प्रकार के होते है ठाणांग सूत्र में चार प्रकर की चोभंगी हे। 1; आहार भी करते, निहार भी करते हे संसारी जीव होते है। संसारी जीव ग्रहण करता रहता है जो त्यागता है उसका हमें त्याग करना, सामायिक के पहले चारों आहार का त्याग कर‌ ले। शरीर की क्रिया को निहार कहते है। 2) आहार तो करता है निहार नहीं करता है ,,गर्भ के जीव गर्मी में आहार, शरीर, इंद्रिया, शवासोश्वास, भाषा पर्याप्ति लेकर आता है। सबसे पहले आहार ग्रहण करता है, फिर शरीर बना,. इंद्रिया बनी, श्वासोश्वास, भाषा, मन पर्याप्ति प्राप्त करता है 3 ) निहार तो करते है आहार नहीं करते है वो जीव संथारे वाले जीव है आहार का त्याग कर लेते है, 18 पाप का त्याग, धन उपकरण का त्याग मनोरथ का चिंतन करता है 4 शरण को स्वीकार कर लेता है कुंटुम्ब, परिवार, शरीर का मोह छोड़ देता है। अंतिम समय में संथारा आये  (4) आहार नहीं करते है, ...

विजयरत्नाचल सूरि जी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से की मुलाकात

समस्त जिनशासन के लिए ऐतिहासिक एवम् अविस्मरणीय क्षण प.पू. आचार्य देव श्री विजयरत्नाचल सूरि महाराज आदि ठाणा ने राष्ट्रपति भवन में की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात। अनेक वर्षों के पश्चात् श्वेतांबर जैन आचार्य श्री का हुआ राष्ट्रपति भवन में पदार्पण। दिनांक 25 अगस्त 2023 के दिन मरुधर रत्न प.पू. आचार्य देव श्री रत्नाकरसूरि महाराज के शिष्य आचार्य श्री विजयरत्नाचल सूरी महाराज आदि साधु साध्वीने राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति से मुलाकात की। राष्ट्रपति ने कहा कि आज तक जैन साधु की त्याग एवं तपस्या के बारे में बहुत कुछ सुना था लेकिन आज प्रथम बार उनके दर्शन हुए है यह मेरा परम सौभाग्य है।वे इतनी धूप में नंगे पांव चलकर यहां आए हैं। आज का विज्ञान भी कहता है कि नंगे पाव चलने से स्वास्थ्य अच्छा रहता है।अंग्रेजो ने हमे चप्पल पकड़ा दी है वरन पहले और आज भी गांव के लोग नंगे पांव ही चलते हैं।मुझे भी नंगे पा...

मनुष्य शरीर रुपी गाड़ी ही मोक्ष के लिए उत्तम : गच्छाधिपति जिनमणिप्रभसूरिश्वरजी

मृत्यु का कोई भरोसा नहीं, अत: आध्यात्मिक धर्म के लिए देरी नहीं करने की दी प्रेरणा Sagevaani.com @चेन्नई; श्री मुनिसुव्रत जिनकुशल जैन ट्रस्ट के तत्वावधान में श्री सुधर्मा वाटिका, गौतम किरण परिसर, वेपेरी में शासनोत्कर्ष वर्षावास में उत्तराध्यन सूत्र के पाँचवे अध्ययन के विवेचन में धर्मपरिषद् को सम्बोधित करते हुए गच्छाधिपति आचार्य भगवंत जिनमणिप्रभसूरीश्वर म. ने कहा कि दो रास्ते जा रहे हैं, हमें कौनसे रास्ते पर जाना है, उसका चयन हमें ही करना पड़ेगा। टिकट दिल्ली की ली और मुम्बई की ट्रेन में बैठ गए तो टीसी आते ही नीचे उतार देगा। इस जीवन से विदा तो हमें होना ही पड़ेगा। प्रश्न है कि हम विदा बहूमान के साथ होना चाहते है या अपमान के साथ? अपना जीवन, अपना आचरण ही तय करनेवाला है। एक पण्डित मरण का रास्ता है एक बाल मरण का रास्ता। संंसार के लिए, पैसों के लिए, भोगों के लिए जो रो रो कर मरता है, वह निश्चित रूप स...

जैन धर्म सम्पूर्ण विश्व में सबसे उत्कृष्ट धर्म: जयतिलक मुनिजी

नार्थ टाउन में विराजित गुरुदेव जयतिलक मुनिजी ने फरमाया कि आत्म बधुओ, जैन धर्म सम्पूर्ण विश्व में सबसे उत्कृष्ट धर्म माना जाता है क्यों ? अहिंसा संयम तप का निरूपण है। अहिंसा संयम व तप को जो महत्व जैन धर्म में दिया है। वो महत्व, अन्य किसी धर्म में नही है। शेष धर्म त्यौहार आदि के दिन पाला जाता है परंतु जैन धर्म तो जन्म से लेकर अन्तिम सांसों तक पालन करने का निर्देश दिया गया है ये एक दो घंटे नहीं, बल्कि जीवन के हर काल हर क्षेत्र में भाव सहित पालन का निर्देश दिया गया है। जैसे नमक के बिना भोजन मन को प्रिय नही लगता वैसे ही भाव रहित धर्म क्रिया, भाव रहित आचरण प्रियकारी नहीं होती । भाव सहित आचरण भाव सहित धर्म क्रिया कर्मों कि निर्जरा कराती है। दुर्गति से बचने व सद्‌गति को प्राप्त करने के लिए जैन धर्म बड़ा ही महत्वपूर्ण है। धर्म चर्चा का विषय नहीं अपितु धर्म तो जीवन में अपनाने का विषय है। जिससे मन में...

धर्म ध्यानी दूसरों के नहीं, बल्कि अपने दुर्गुणों को देखता है : साध्वी नूतन प्रभाश्री जी

धर्मसभा में कहा- धर्म ध्यानी करता है अपने सुख-दुख का चिंतन और दुख के लिए दूसरों को नहीं अपने कर्मों को ठहराता है जिम्मेदार Sagevaani.com @शिवपुरी। संसार में जीने वाला व्यक्ति आर्त और रौद्र ध्यान में जीता है, लेकिन धर्म और अपनी आत्मा में जीने वाला व्यक्ति धर्म ध्यानी और शुक्ल ध्यानी होता है। आत्मा की शुद्धतम अवस्था का नाम शुक्ल ध्यान है। इस अवस्था तक पहुंचने के लिए धर्म ध्यान को अपने जीवन का अंग बनाना होगा। धर्म ध्यानी व्यक्ति दूसरों के नहीं, बल्कि अपने दुर्गुणों को देखता है और अपने दुखों के लिए दूसरों को नहीं, बल्कि अपने कर्मों को जिम्मेदार ठहराता है। उक्त शास्त्रोक्त वाणी प्रसिद्ध जैन साध्वी नूतन प्रभाश्री जी ने कमला भवन में आयोजित एक विशाल धर्मसभा में कही। साध्वी रमणीक कुंवर जी ने कहा कि जो व्यक्ति आपकी आलोचना और बुराई करता है उसे सकारात्मक रूप से देखा जाना चाहिए। यदि उसके कथन में कुछ सच...

आहार शुद्धि ही आध्यात्मिक प्रगति के मुख्य आधार हैं : देवेंद्रसागरसूरि

Sagevaani.com @चेन्नई. बिन्नी नोर्थटाउन सोसायटी के संघ भवन में आचार्य श्री देवेंद्रसागरसूरिजी ने प्रवचन देते हुए कहा कि मानव देह के निर्माण, पोषण और वृद्धि का मुख्य आधार आहार है। यद्यपि वायु और जल भी मनुष्य के लिए अत्यावश्यक आहार हैं, पर चूँकि ये प्राय: अनायास या अल्प आयास से ही प्राप्त होते रहते हैं, इसलिए हम अन्न या अन्य खाद्य पदार्थ को ही आहार की संज्ञा देते हैं, यदि विश्लेषण करके देखा जाय तो संसार में बहुसंख्यक व्यक्तियों के लिए तो भोजन था आहार ही जीवन का सर्वप्रधान उद्देश्य और कार्य है, वे इसी के लिये जीते और मरते हैं। आज सभ्य समाज में भी ऐसे लोगों की कमी नहीं जिनका ध्यान सदैव भोजन के प्रश्न पर ही केन्द्रित रहता है और जो सबेरे उठते ही यह हिसाब लगाया करते हैं कि आज किस समय क्या- क्या भोज्य सामग्रियाँ बनाई जायेंगी ? ऐसे भी असंख्यों लोग पाये जाते हैं जो भोजन के लिए अपने स्वास्थ्य, आरोग्य...

नमस्कार महामंत्र का स्मरण मात्र ही हमारे चित्त को प्रसन्न कर देता है: डॉ. वैभवरत्नविजयजी म.सा

 *विश्व वंदनीय प्रभु श्रीमद् विजय राजेंद्र सुरीश्वरजी महाराज साहब के प्रशिष्यरत्न राष्ट्रसंत, श्रुत समुद्र श्रीमद् विजय जयंतसेनसुरीश्वरजी म.सा.के कृपापात्र सुशिष्यरत्न श्रुतप्रभावक मुनिप्रवर श्री डॉ. वैभवरत्नविजयजी म.सा.* के प्रवचन के अंश    🪔 *विषय अभिधान राजेंद्र कोष भाग7*🪔 ~ श्री नमस्कार महामंत्र का स्मरण मात्र ही हमारे चित्त को प्रसन्न कर देता है क्योंकि श्रेष्ठ तत्व का स्मरण उसमें है। ~ जब हमारे भीतर में अहं का नाश का, भाव प्रकट होता है तब हमारे में रहे अरिहंत प्रभु स्वयमेव प्रगट होते हैं। ~ जब तक मृत्यु का बोध स्पष्ट रूप से नहीं होगा तब तक हमारा जीवन जागृति पूर्ण होना कठिन है । ~ साधक अपने प्राणों तक श्री नमस्कार महामंत्र का जाप करता है जिसके प्रभाव से साधक स्वयं ही पूर्ण पुरुषता को प्राप्त करता है। ~ जो स्वयं की आत्म वैभव का अत्यंत निकट रहकर अभ्यास करें वह है उपाध्याय भगवंत।। ~ श्री...

रक्षाबंधन पर्व के महत्व को बताया

,।श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन संघ कम्मनहल्ली अध्यक्ष: विजयराज चुत्तर, मंत्री: हस्तीमल बाफनाl श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन संघ कम्मनहल्ली में प.पू. धैर्याश्रीजी म.सा. ने रक्षाबंधन पर्व क्यों मनाया जाता है इसका महत्व बताया। जीवो की सदा रक्षा करो। रक्षा करना हमारा परम धर्म है। यह त्यौहार सभी कोई मनाते हैं। बहुत ही सुंदर एवं मार्मिकता के साथ में बताया। साथ ही विधि विधान के साथ रक्षाबंधन पर्व हर्षोल्लास एवं धूमधाम से मनाया। कर्नाटक तप चंद्रिका प. पू. आगमश्रीजी म.सा. में भी महत्व बताया। संयमी आत्माओं के रक्षा का भार आप सभी को सौपा है। मंत्रोपचार के साथ व्यवस्थित ढंग से मंत्र उपचार के साथ व्यवस्थित ढंग से राखी बन्धवाई गई। धैर्याश्रीजी म. सा,के सांसारिक भाई भाभी एवं बहन बहनोइ जालना से पधारे। अध्यक्ष विजयराज चुत्तर तथा कांतिलाल सकलेचा ने स्वागत किया। संचालन मंत्री हस्तीमल बाफना एवं सुधीर सिंघवी ने क...

उच्च व्यक्तित्व के लिए भाषा विवेक और उन्नत विचारों को अपनाये

 गच्छाधिपति जिनमणिप्रभसूरिश्वरजी ने नदी के मीठे पानी की तरह बनने की दी प्रेरणा  अठ्ठाई, उससे ऊपर, सिद्धि तप वालो का हुआ अभिनन्दन Sagevaani.com @चेन्नई ; श्री मुनिसुव्रत जिनकुशल जैन ट्रस्ट के तत्वावधान में श्री सुधर्मा वाटिका, गौतम किरण परिसर, वेपेरी में शासनोत्कर्ष वर्षावास के रविवारीय प्रवचन में धर्मपरिषद् को सम्बोधित करते हुए गच्छाधिपति आचार्य भगवंत जिनमणिप्रभसूरीश्वर म. ने कहा कि जो दूसरों प्यास बुझाता है, वह नदी है, तालाब है, कुआं है और पानी होने पर भी प्यास बुझा नहीं सकता वह सागर है, समुन्द्र है। जितना पानी समुन्द्र के पास है, उतना किसी के पास नहीं। नदियाँ पानी को मीठा बनाने का काम करती है, वही समुन्द्र मीठे पानी को भी खारा बना देता है। नदियां प्यास बुझाने का काम करती है, समुन्द्र प्यास जगाता है। प्रश्न हमारे जीवन पर भी हमारा जीवन समुन्द्र जैसा है या नदी जैसा। विशालता होते हुए भी समुन...

अणुव्रत क्रिएटिविटी कॉन्टैक्ट में टीजेवी में विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन

Sagevaani.com @Chennai : अणुविभा के तत्वावधान में अणुव्रत समिति, चेन्नई द्वारा गतिशील अणुव्रत क्रिएटिविटी कॉन्टैक्ट प्रथम चरण में तेरापंथ जैन विद्यालय, साहूकारपेट में विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया।  इस अवसर पर प्रतिभागी विद्यार्थियों के साथ विद्यालय प्रिंसिपल महोदया श्रीमती शशिकला, प्रभारी अध्यापिका सरन्या, अन्य अध्यापिकाएं, अणुव्रत समिति मंत्री श्री स्वरूप चन्द दाँती, श्री नरेन्द्र भण्डारी, तेरापंथ एजुकेशनल एण्ड मेडिकल ट्रस्ट कमेटी से महासंवाददाता श्री महेन्द्र आंचलिया, श्री माणकचन्द डोसी तेरापंथ सभा से पुर्वाध्यक्ष श्री सुरेश मुथा, श्री शांति भण्डारी, श्री सुरेश बाफणा, श्री राजेन्द्र आंचलिया, श्री सम्पतराज चोरड़िया उपस्थित रहे। मंत्री स्वरूप चन्द दाँती ने अपने विचारों के साथ आभार व्यक्त करते हुए बताया कि अणुव्रत समिति चेन्नई अध्यक्ष श्री ललित आंचलिया, दक्षिणांचल एसीसी प्रभारी श्...

राजस्थानी ओलंपियाड का समापन समारोह हर्षोल्लास के साथ सम्पन्न

  राजस्थानी एसोसिएशन तमिलनाडु द्वारा प्रथम राजस्थानी ओलंपियाड 2023 रजत खेलोत्सव का भव्य समापन 27 अगस्त, रविवार को जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम पेरियमेट के मैदान में सफलता के साथ सम्पन्न हुआ। मुख्य अतिथि ग्रेटर कॉर्पोरेशन ऑफ चेन्नई की माननीय मेयर सुश्री प्रिया राजन, टैबलेट्स (इंडिया) लिमिटेड‌ के सीईओ श्री आर.के. झंवर, बार्डर सिक्योरिटी फोर्स के कमांडेंट श्री कुलदीप चौधरी ने पधार कर कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। मेयर सुश्री प्रिया राजन ने राष्ट्रीय ध्वज व ओलम्पियाड ध्वजारोहण किया। श्री कुलदीप चौधरी ने शपथ ग्रहण करवाया। श्री आर.के. झंवर ने एथलीट शुरुआत करने की घोषणा की।इस अवसर पर आकाश में गुब्बारे छोड़े गए। डॉ निर्मल नाहटा ने ओलिंपिक मशाल को लेकर रजत के सभी सदस्यों के सहयोग से आगे बढ़ाया और अंत में अध्यक्ष मोहनलाल बजाज ने मशाल जलाई। तत्पश्चात राजस्थानी विद्यालयों के विद्यार्थियों ने मार्च पास्ट, ए...

तप त्याग के साथ मनायी गयी मरूधर केसरी की जन्म जयन्ती

 अन्नदानं के साथ त्रि दिवसीय कार्यक्रम: श्रावक के 21 गुण 14 नियम दैनिक चार्ट का विमोचन Sagevaani.com @चेन्नई: श्री एस एस जैन संघ के तत्वावधान एवं स्वर्ण संयम आराधक पूज्य श्री वीरेंद्रमुनीजी म.सा. के तत्वावधान में दिव्य विभूति श्रमण सूर्य गुरूदेव मरूधर केसरी मिश्रीमलजी म.सा. की जन्म जयन्ती, लोकमान्य संत श्री रूपचंदजी म.सा. की जन्म व पुण्यतिथी एवं मेवाड़ भूषण श्री प्रतापमलजी म.सा. का स्मरण दिवस रविवार दिनाँक 27 अगस्त को त्रि दिवसीय कार्यक्रम के रूप में तप त्याग सामायिक तेले के साथ हर्षोल्लास से मनाया गया। इसके पूर्व 25 अगस्त को सामूहिक दया व 26 अगस्त को नमोत्थुनम का जाप रखा गया।         27 अगस्त रविवारीय कार्यक्रम का प्रारंभ श्री वीरेन्द्र मुनीजी म.सा. के मंगलाचरण से हुवा। श्री एस एस जैन महिला मंडल, श्री पारस नाहर,भटेवरा ने स्तवन द्वारा गुरू चरणों मे अपनी अभिव्यक्ति प्रेषित की। श्री वर्द्धमान...

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