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समय पर नहीं किया तो अवसर हाथ से निकल जाता है: जयतिलक मुनिजी

परम पूज्य गुरुदेव जयतिलक मुनिजी ने नार्थ टाउन में फरमाया कि पर्युषण महापर्व चल रहे हैं देखते ही देखते पूरा हो जायेगा समय को रोकने में कोई समर्थ नहीं है व्यक्ति बैठा बैठा सोचता ही रह जाता है कुछ नहीं कर पाता। समय निकल जाता है आप सोचते है मैं तपस्या कर लूंगा लेकिन समय पर नहीं किया तो अवसर हाथ से निकल जाता है तपस्या करने से भय से मुक्त हो जाता है वो रोकने से भी रुकने वाला नहीं है तपस्या से अनुभव की प्राप्ति होती है । तपस्या में चारों आहार का त्याग करते हैं मन से, चाह से चारों आहार का त्याग करता है आहार के प्रति उसकी रुचि धीरे धीरे कम हो जाती है पूरी दुनिया माल-ताल खाती है तब भी उसका मन ललचाता नहीं है पुरी दृढ़ता के साथ तपस्या करते है तो भी चारों आहार का प्याग करता है तो उसके कर्मों की निर्जरा होती हैं क्योंकि वह जानता है देव, गुरु, धर्म की कृपा मे मेरा पास सब कुछ उपलब्ध है। तपस्या कुछ दिनों की...

गुणगान और दया सामायिक करके मनाया श्रमणसंघ के आचार्य शिव मुनि का साध्वी प्रितीसुधा के सानिध्य मे जन्मोत्सव

Sahevaani.com @भीलवाड़ा। गुणगान और दया सामायिक करके मनाया श्रमणसंघ के आचार्य शिव मुनि महाराज का जन्मोत्सव। रविवार अहिंसा भवन शास्त्री नगर मे पर्यूषण महापर्व के छठेदिवस साध्वी प्रितीसुधा ने वर्तमान आचार्य शिव मुनि के जन्मदिवस पर तपस्या करने वाले अराधको को सम्बोधित करते हुए कहा कि ध्यानयोगी शिव मुनि महाराज कुशल आचार्य के साथ आप मे कही गुण विद्यमान है। आपका जन्म पंजाब प्रांत के रानियां गांव मे धनाढ्य परिवार मे हुआ। उच्च शिक्षा प्राप्त करने प्रश्चात राष्ट्र संत ज्ञान मुनि के प्रवचनों से प्रभावित होकर आपने संयम अंगीकार किया। और आपकी सेवा और समर्पण तथा सादगीमय व्यवहार, विद्वत्ता को देखते हुए संतो के सम्मेलन में आचार्य आत्माराम जी महाराज ने सभी संतो की एक राय से आपको युवाचार्य बनाया गया। आपने आचार्य बनने के बाद सम्पूर्ण भारत मे एक नई दिशा प्रदान करते हुए संतो और समाज को संगठन एकता के सूत्र मे बांध...

गुणगान और सामायिक करके मनाई प्रज्ञामूर्ति पन्नालाल गुरू की जन्म जयंती साहूकार पेट में

जैसा नाम वैसे गुण के भंडार थे प्रज्ञामूर्ति पन्नालाल जी महाराज महासती धर्मप्रभा  Sagevaani.com @चैन्नई। जैसा नाम वैसे गुण के भंडार थे प्रज्ञा मूर्ति पन्नालाल जी म.सा. में। रविवार साहूकारपेट जैन भवन मे पर्वाधिराज पर्यूषण पर्व के छठेदिवस स्वाध्याय के आद्य प्रणेता पन्नालाल जी महाराज की 135 वीं जन्मजयंती पर महासती धर्मप्रभा ने गुण गान करतें हुए कहा कि प्राज्ञ संघ के पन्नालाल जी एक निडर शौर्य के धनी, दूरदष्ट्रा, जीवों के रक्षक, संघ एवं समाज हितेशी, मानवता के मसीहा और करूणा के देवता थें। प्राज्ञमूर्ति पन्ना का जन्म मारवाड़ मे माली परिवार मे हुआ और नानक सम्रदांय के मोती लाल जी महाराज के प्रवचनों से प्रभावित होकर सयंम अंगीकार किया था। अपने साधुत्व काल में रहते हुए पूरे भारतवर्ष का भ्रमण कर जैन शिक्षा संस्कार का प्रचार प्रसार किया और समाज में फैली कई कुरूतियों के विरुद्ध संयमित आन्दोलन कर बुराईयों क...

अखंड जाप के कलश की बोली लगाई गईl

आज अंबेश भवन भयंदर में गुरूनी मया श्री सत्य साधना जी मारासा आदि ठाणा 7 के सानिध्य में पांच तीर्थंकर भगवान के 5 महीने तक 12 घंटे के अखंड जाप के कलश की बोली लगाई गईl उसमें सभी श्रावक स्राविका हो ने बढ़ चढ़कर बोली लगाईl जिन-जिन भाइयों ने यह बोलिया ली उन सभी भाइयों को भगवान महावीर स्वामी का एवं पारसनाथ भगवान का हमेशा आशीर्वाद बना रहे, यही हम शुभकामनाएं देते हैंl महाराज साहब के सानिध्य में यह प्रोग्राम बहुत ही सुंदर रहा और उप प्रवतिनी संथारा परी का महा साध्वी श्री सत्य साधना जी मारासा का आशीर्वाद हमेशा आप पर बना रहेl

सत्य बोलने वाला व्यक्ति परेशान हो सकता है परंतु कभी पराजित नहीं होता है: रविन्द्र मुनि जी म.सा.

दिवाकर भवन पर चल रहे पर्वाधिराज पर्युषण पर्व के छठे दिवस पर मेवाड गौरव प्रखर वक्ता रविन्द्र मुनि जी म.सा.ने पर्युषण पर्व के अंतर्गत अन्तगड सूत्र के वाचन करते हुए गुरुदेव ने फ़रमाया की 8 वर्ष में अतिमुक्त कुमार ने अपने जीवन का लक्ष्य पा लीया लेकिन हम प्रतिवर्ष आगमो का अध्यन करते है सुनते है फिर भी हम प्रथम सीडी तक भी नहीं पहुच पाए सत्य को देखकर मुह मोड़ लेते हैl यह भूल हमारे अनंत भाव तक पीछा नहीं छोडती है सत्य बोलने वाला व्यक्ति परेशान हो सकता है परंतु कभी पराजित नहीं होता है। क्योंकि कहा भी गया है ‘सत्यमेव जयते’ सत्य की हमेशा विजय ही होती है। सत्य बोलने वाला हमेशा सुखी रहता है। झूठ बोलने वाले को एक झूठ को छिपाने के लिए कई झूठ बोलना पढ़ते है। झूठा व्यक्ति ठीक से जी भी नहीं पाता क्योंकि उसे सदा अपने झूठ के उजागर होने का भय बना रहता है।सत्य बोलने वाला व्यक्ति परेशान हो सकता है परंतु कभी पराजित ...

धर्म मे मानसिक पुरुषार्थ चाहिए: प्रकाश मुनि जी

आज के दिन महावीर स्वामी जी को याद करते है भगवान ने एक मास 20 रात्रि के बाद पर्युषणा पर्व की स्थापना कीl यह बात पूज्य प्रवर्तक श्री प्रकाश मुनि जी ने फरमाते हुए कहा कि आज के देवता भी 8 दिन का महोत्सव मानते हैl देव गति में क्रियात्मक धर्म नही, भावात्मक धर्म करते हैl वीतराग का धर्म कर्म प्रधान है कर्म का दूसरा रूप पुरुषार्थ हैl परमात्मा का जीवन पुरुषार्थ वाला था प्रेरणा हमें भी दी है उन्हें गर्भ से ज्ञान थाl अंग संचालन रोक दिया क्षायिक समकित आत्मा सब जानते हैl शुद्ध निर्मल ज्ञान था उनका जीवन चरित्र बताता है संयम की आराधना की, आत्मा की आराधना की, साधना की तन का मोह छोड़ दिया । भगवान ने इतनी वेदना कैसे सहन की क्योकि उनका शरीर वज्रसहनन वाला थाl सहनन ठोस होता है 1000 मन की गाड़ी उनके ऊपर से निकल जाय तो चींटी जा रही हो ऐसा लगता हैl परमात्मा आत्मा में डूब जाते है शुक्ल ध्यान चलता है, प्रथक, वितर्क सु...

चेन्नई महानगर में महावीर वांचना के अवसर पर पालनाजी झुलाने का आयोजन

चेन्नई महानगर के जैन मंदिरों में पर्युषण महापर्व के अवसर पर कल्पसूत्र व महावीर जन्मवांचन शनिवार को मनाया गया। इस मौके पर विभिन्न जैन मंदिरों से श्रद्धालुओं ने महावीर स्वामी के पालनाजी अपने घर पर ले गए और विशिष्ट सजा के साथ भक्तों के दर्शन एवं पालना झुलाने के लिए रखा। पालना झूलाते हुए श्रद्धालु भक्ति भाव में डुबकी लगाते नजर आए। पालनाजी के साथ त्रिशला महारानी के 14 स्वप्नों को भी अपने घर में सजाया। पालनाजी सजाने के लिए लोगों का उत्साह देखने लायक था। देर रात तक पालनाजी झूलाने के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। शहर के विभिन्न जैन युवा मंडलों ने व्यवस्था में सहयोग दिया। किलपॉक श्वेतांबर मूर्तिपूजक जैन संघ के पालनाजी किलपाॅक स्थित तंबूस्वामी रोड में जीवीबाई मेघराज साकरिया के गृहांगन में झूला झूलाते श्रद्धालु। मन्नड़ी स्थित श्री सुमतिनाथ जैन मंदिर के पालनाजी का लाभ किलपॉक स्थित मंगलम मित्रा अपा...

श्री सुमतिवल्लभ नोर्थटाउन जैन संघ में हर्षोल्लास के साथ मनाया भगवान का जन्मोत्सव

 आचार्य श्री के मुखारविंद से जन्म वांचन सुनकर झूम उठे श्रद्धालुगण श्री सुमतिवल्लभ जैन मूर्तिपूजक संघ में पर्युषण महापर्व के दौरान शनिवार को पांचवें दिन भगवान महावीर के जन्म वांचन महोत्सव धूमधाम से मनाया गया। आचार्य देवेंद्रसागरसूरिजी के निश्रा में दोपहर को कल्पसूत्र का वांचन प्रारंभ हुआ। इसके पश्चात भगवान महावीर के माता त्रिशला के गर्भ में आने से पूर्व देखे गये चौदह स्वपनों की बोली लगाई गई जिसमे धर्म प्रेमियों ने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया। इन सभी सपनों को लाभार्थी परिवारों द्वारा उतारा गया। वहीं कल्पसूत्र वांचन के दौरान भगवान महावीर के चरित्र एवं जन्म वांचन का प्रसंग आया तो पूरा माहौल भगवान महावीर के भक्तिरस से सराबोर हो गया। मंदिर परिसर में उपस्थित अपार जनमेदनी के समक्ष जन्म वांचन करते हुए ओर भगवान महावीर का जन्म की विशेषताएँ बताते हुए आचार्य श्री ने कहा कि परमात्मा के जन्म के समय ज्योतिष शा...

ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करने से कितने ताप का लाभ मिलता है: उपप्रवृत्तिनि संथारा प्रेरिका सत्य साधना ज गुरुणी मैया

हमारे भाईन्दर में विराजीत उपप्रवृत्तिनि संथारा प्रेरिका सत्य साधना ज गुरुणी मैया आदि ठाणा 7 साता पूर्वक विराजमान हैl वह रोज हमें प्रवचन के माध्यम से नित नयी वाणी सुनाते हैं, वह इस प्रकार हैंl बंधुओं जैसे कि आज का प्रवचन जो था वह था ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करने से कितने ताप का लाभ मिलता हैl यह सब गुरु णी मैया ने बताया जैसे की विजय सेठ विजय सेठानी उनके उपलक्ष में भी बताया की किस तरह उन्होंने ब्रह्मचारी व्रत का पालन कियाl आज महावीर जयंती के उपलक्ष में भी उन्होंने अच्छे से समझाया एवं महावीर जयंती के उपलक्ष में एक छोटी सी नाटिका महिला मंडल एवं बहू मंडल में मिलकर खीर एवं सुखी रहे सहन करें कड़वे ना बोले अगर किसी कारणवश कभी झगड़ा भी हो जाए तो वह केवल विचारों के परस्पर टकराव से ही होता हैl फिर वह विकराल रूप लेकर आपके जीवन को प्रभावित नहीं कर सकता हैl ऐसी स्थिति में दो में से अगर एक व्यक्ति अपने मा ...

श्रद्धा से ही धर्म का प्रारंभ कहा है: डॉ. वैभवरत्नविजयजी म.सा.

     स्थल: श्री राजेन्द्र भवन चेन्नई  विश्व हितलक्षि, प्रभु श्रीमद् विजय राजेंद्र सुरीश्वरजी महाराज साहब के प्रशिष्यरत्न, शांत स्वभावि, गंभीर गणनायक, यूग प्रभवक श्रीमद् विजय जयंतसेनसुरीश्वरजी म.सा.के कृपापात्र सुशिष्यरत्न श्रुतप्रभावक मुनिप्रवर श्री डॉ. वैभवरत्नविजयजी म.सा. के प्रवचन के अंश    🪔 *विषय : वैराग्यमय प्रभुवीर का वैभव*🪔 ~ ज्ञानी भगवंतोने विचार से धर्म का प्रारंभ नहीं किंतु श्रद्धा से ही धर्म का प्रारंभ कहा है। ~ जीवन में कभी, कैसी, कोई भी परिस्थिति हो उससे हमें संक्लेश और असमाधि मे नहीं जाना चाहिए क्योंकि वह स्थिति ना मेरी थी, ना है, और ना ही रहेगी। ~ धर्मी जीव हर पल समझदारी के साथ ही धर्म करता है जिसके फल रूप स्वभाव का मूलभूत परिवर्तन हो पूर्व के सभी कर्मों का क्षय हो और नए कर्म तीव्र भाव से बंद ना हो। ~ आत्मघात से भी ज्यादा महत्वपूर्ण पापघात, कर्मो का क्षय, अज्ञान का नाश होना...

वृक्षारोपण एवं पौधे वितरण का आयोजन

प्रभु महावीर स्वामी जी के जन्म वांचन महोत्सव के उपलक्ष में राजस्थान पत्रिका एवं एक्ष्नोरा इंटरनेशनल के संयुक्त तत्वावधान में चल रहे हरित प्रदेश अभियान द्वारा वृक्षारोपण एवं पौधे वितरण का आयोजन कॉलेज के विद्यार्थियों के साथ रखा गयाl इस मौके कई विद्यार्थियों ने प्रभु महावीर के जीवन पर प्रकाश डालाl नॉर्थ चेन्नई एक्ष्नोरा सचिव फतेहराज जैन ने प्रभु महावीर के जीवनी के कई विषयों की जानकारी दीl प्रभु महावीर स्वामी को पर्यावरण से बहुत लगाव था कई सालों तक गौर तपस्या वनों में की थीl उन्होंने हर जीव के प्रति जीवदया प्रतिपालक का अपदेश दियाl किसी जीव को हानि ना पहुंचे ऐसा उपदेश दियाl इस मौके सभी विद्यार्थियों को पर्यावरण के लिए आगे रहने की प्रतीक्षा दी तथा सभी विद्यार्थियों को पौधे वितरण किए गए।

सपना टूटने से पहले उसे सिद्ध कर लो : प्रवीण ऋषि

पर्युषण महापर्व के पंचम दिवस उपाध्या प्रवर ने समझाई परिष्ठापना समिति Sagevaani.com @रायपुर । लालगंगा पटवा भवन में पर्युषण महापर्व के दौरान अंतगड़ सूत्र का पाठ करते हुए उपाध्याय प्रवर प्रवीण ऋषि ने कहा कि परमात्मा के मूल 11 अंगों में से आठवां अंग है अंतगड़ सूत्र। उन्होंने कहा कि आपके मन में सवाल आता होगा कि हमें मूल पाठ क्यों सुनना चाहिए? हम तो सरल भाषा में सुनते हैं तो समझ में आ जाता है। लेकिन मूल पाठ परमात्मा के शब्द हैं। और भक्ति का रिश्ता हो तो बिना व्याकरण के भी शब्द का अर्थ समझ में आ जाता है। परमात्मा एक भाषा में बोलते हैं, लेकिन सुनने वाले को लगता है कि वे हमारी भाषा में बोल रहे हैं। ये परमात्मा की वाणी का अतिशय है। परमात्मा के शब्द हमारे कानों से गुजरने चाहिए, इसलिए मूलपाठ की आराधना करते हैं। उक्ताशय की जानकारी रायपुर श्रमण संघ के अध्यक्ष ललित पटवा ने दी है। पर्युषण महापर्व के पंचम दि...

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