शुक्रवार को श्री एमकेएम जैन मेमोरियल सेटर, पुरुषावाक्कम, चेन्नई मे चातुर्मासार्थ विराजित उपाध्याय प्रवर प्रवीणऋषि महाराज एव तीर्थेशऋषि महाराज द्वारा पर्युषण पर्व के अवसर पर विशेष प्रवचन का कार्यक्रम आयोजित हुआ। उपाध्याय प्रवर ने उपस्थित जन मैदिनी को पर्युषण पर्व का सकल्प कराया। पर्युषण पर्व की महिमा बताते हुए कहा कि प्रतिक्रमण करने का महत्व बताते हुए कहा कि राजा स ́प्रति द्वारा अपने पूर्व जन्म मे बिना जाने-समझे मा ̃ा अपनी भू१ शा ́त करने के लिए एक दिन से भी कम समय का साधु जीवन और आधी-अधूरी धर्म क्रिया की थी जिसके बाद उसका आयुष्य पूर्ण हो गया, जिसके फलस्वरूप वह राजा बना। इसलिए जो बिना जाने-समझे भी धर्मक्रिया करता है, उसका फल बहुत मिलता है। हमे अपना इतिहास जानना चाहिए कि हमारे पूर्वज कैसे धर्म शि१र पर पह ́ुचे और उनसे प्रेरणा लेनी चाहिए। परमात्मा प्रभु कहते है कि जो सारे दु:१ो के मूल पापो को...
मुंबई। राष्ट्र-संत श्री ललितप्रभ सागर महाराज ने कहा कि पर्युषण भीतर के प्रदूषण को हटाने का पर्व है। बाहर के प्रदूषण से बीमारियाँ आती हैं और मन के प्रदूषण से परेशानियाँ आती हैं। इसलिए जितनी जरूरत बाहर के प्रदूषण को कम करने की है, उतनी ही जरूरत है भीतर के प्रदूषण को समाप्त करने की। संतप्रवर ने कहा कि पर्युषण हृदय शुद्धि और कषाय मुक्ति का पर्व है। 84 लाख जीवयोनियों से क्षमा मांगना सरल है, पर जिनसे हमारा मनमुटाव है या जिसका हमने और जिसने हमारा दिल दुखाया है उससे माफी मांगना सच्चा धर्म है। संवत्सरी का इंतजार करने की बजाय आज ही माफी मांगकर हिसाब चुकता कर लें। हम साल भर भले ही गरम रहें, पर अब तो नरम बन जाएं और मन में पलने वाली गांठों को दूर कर लें। जैसे गन्ने की गांठों में रस नहीं होता वैसे ही जो मन मेें दूसरों के प्रति गांठ पाले रखता है उसका जीवन भी नीरस बन जाता है। उन्होंने कहा कि गांठ बन जाने ...
मदुरै तेरापंथ सभा के तत्वावधान में तेरापंथ भवन में आचार्य श्री माहश्रमण जी की आज्ञानुसार पधारी अग्रणी उपासिका सुमित्रा बरड़ीया – बैंगलोर एवं उपासिका भँवरीबाई हिंगड़ -के.जी.एफ़. एवं उपासिका उषा नाहर – बैंगलोर ने बताया कि पर्यूषण महापर्व का प्रथम दिवस जो खाध्य सयंम दिवस के रूप में मनाया जाता हे । आज से इन आठों दीनो में अपने आपको जगरूकता से धर्म- ध्यान की आराधना में जुड़ जाना हे। एवं त्याग, तपस्या, स्वाध्याय इत्यादि से अपने कर्मों की निर्जरा अवश्य करनी हे । इस से पूर्व 6-9-18 गुरुवार रात्रि को उपासिका बहनो का स्वागत कार्यक्रम रखा गया । ते.म.म. की मधु जीरावला एवं बबीता लोढ़ा के मंगलाचरण से कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ । तेरापंथ सभा के अध्यक्ष ओमप्रकाश कोठारी ने उपासिका बहिनों का स्वागत करते हुऐ ते.म.म. मदुरै की ख़ूब प्रशंसा की । ते.यु.प. अध्यक्ष जयंतीलाल जीरावला ने तिनो उपासिकाओ का प...
माधावरम् स्थित जैन तेरापंथ नगर के महाश्रमण समवसरण में गुरूवार को आचार्य श्री महाश्रमण ने मानव समाज को विशेष प्रेरणा पाथेय प्रदान* करते हुए कहा कि युवा अवस्था है, व्यापार – धंधा करता है, तो व्यापार में ईमानदारी रहे, यह धोखे का पैसा बढ़िया नहीं होता, अशुद्ध पैसा बढ़िया नहीं| आदमी जितनी प्रामाणिकता रखें, ईमानदारी, नैतिकता, शुद्धता, सरलता, भद्रता, साफ – सफाई, पारदर्शकता वो गुण व्यापार – धंधे आदि में रहे, तो आत्मा कितनी पाप से बच जाती हैं| अब धंधा भी करना है तो किस प्रकार का धंधा करते हैं| मान लिजीए एक आदमी हैं, मच्छी पालन का धंधा करता है, कोई नशीली चीजें बेचता हैं, तो वो धंधे करने जरूरी है क्या? नशीले पदार्थों का व्यापार करे, नशीले पदार्थों का उत्पादन करे या मच्छी आदि आदि का धंधा करे| इन धंधों से तो बचे| यह धंधे जरुरी नहीं है मेरे करने के लिए, इतनी अहिंसा प्रधानता हो व्यापा...
कोयम्बत्तूर आर एस पुरम स्थित आराधना भवन में चातुर्मासिक प्रवचन की कड़ी में विमलशिष्य वीरेन्द्र मुनि ने जैन दिवाकर दरबार में धर्म सभा को संबोधित करते हुवे कहा कि आज हमारे आंगन में पर्वाधिराज पर्व पर्युषण आ गये हैं। स्वागत के लिये तैयार हो जाओ परंतु स्वागत कैसे करेंगे आपके घर में मेहमान आते हैं। जंवाई आदि आते हैं तब कैसे तैयारी करते हैं अच्छा खाना पीना आदि बनाते वैसे करेंगे .ये आठ दिन पर्व के रूप में आये हैं। इन दिनों में ज्यादा से ज्यादा त्याग तपस्या दया दान धर्म ध्यान जप तप के द्वारा ही स्वागत कर सकते हैं। मुनिश्री ने अन्तगढ़ सूत्र का वांचन मूल पाठ व विविध विवेचन के साथ सुनाते हुवे सत्संग की महिमा का वर्णन करते हुवे कहा कि सत याने (अच्छा) संग याने ( संगत ) अथार्त अच्छे की संगत करना कहा भी है। संगत शोभा पाईये शाह अकबर बेन ” वाही काजल ठीकरी वाही काजल नैन ” जैसे के साथ रहेंगे वैसे ह...
संत महोपाध्याय श्री ललितप्रभ सागर महाराज ने कहा कि पर्युषण पर्व भारत की आत्मा है। जैसे सारी नदियाँ सागर में आकर विलीन हो जाती है वैसे ही सारे पर्व पर्युषण में आकर समा जाते हैं क्योंकि सारे पर्व बाहर की दुनिया को रोशन करते हैं, पर यह हमारे अंतर्मन को रोशनी से भरने के लिए आता है। यह मन को मांजने का, कषाय की होली जलाने का, कु्र रता से करुणा की ओर व दुश्मनी से मैत्री भाव की ओर बढने का पर्व है। यह तो जीवन की प्रयोगशाला में प्रवेश है जहाँ प्रेम, क्षमा और सरलता की साबुन लेकर मन में जम चुकी वैर-प्रतिशोध और कटुता की गंदगी को धोने केप्रयोग किए जाते हैं। पर्युषण भीतर के प्रदूषण को हटाने दिव्य पर्व है। संत ललितप्रभ ने ये विचार गुरुवार को कोरा केन्द्र मैदान में पर्युषण पर्व प्रवचनमाला के प्रथम दिन रखे। वे पर्युषण पर्व का अंतर्रहस्य विषय पर श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि पयुर्षण में त...
एसएस जैन संघ ताम्बरम में विराजित साध्वी धर्मलता ने कहा कि पर्वाधिराज पर्यूषण हमें संदेश दे रहे है कि संत हो या गृहस्थ साधना के क्षेत्र में सभी को आगे बढऩा है। यह पर्व राग से विराग और विराग से वीतराग का संदेश लेकर हमारे द्वार आया है। हमें आध्यात्मिक भाव से इसका स्वागत करना है। संस्कार में संस्करण करने वाली ,चार संज्ञा और चार कषायों को काटने वाली दान, शील, तप भाव की अराधना करना है। पानी से शरीर पवित्र होता है परन्तु कल्याण मार्ग के सोपान पर चढऩा है तो मोक्ष रूपी झरने में स्नान कर पवित्र बनना होगा। यह पर्व आत्मा की भाव दरिद्रता को दूर करता है। जैसे दिवाली पर धन का हिसाब लगाते हंै वैसे ही आत्म धन का हिसाब लगाना है कि कितना कमाया। पर्व के संदेश को ग्रहण कर आत्मा से परमात्म स्वरूप प्राप्त करें। उन्होंने ने कहा कि तुम क्लेश हो ऐसा मत बोलो, रोग हो ऐसा मत खाओ, कर्ज हो ऐसा मत खर्चो, पाप हो ऐसा काम ...
एमकेबी नगर जैन स्थानक में विराजित साध्वी धर्मप्रभा व स्नेहप्रभा के सान्निध्य में पर्यूष्यण पर्व के पहले दिन नवकार मंत्र का अखंड जाप शुरू हुआ। इस अवसर पर साध्वी धर्मप्रभा ने कहा यह पर्व आत्मा की परम शुद्धि करने वाला है। यह प्रत्येक आत्मा को अध्यात्मोन्मुखी दृष्टि प्रदान करता है। वैर विरोध का शमन कर प्रेम क्षमा मैत्री की त्रिवेणी प्रवाहित करता है। किसी दूसरे की निन्दा न कर स्वयं में झांकना ही पर्यूषण पर्व का संदेश है। यह पर्व हमें अंतरमुखी दृष्टि देता है। सरलता से जीवन को सरस और सहज बनाने में पर्यूषण की सार्थकता है। तप, त्याग और अनुष्ठान श्रद्धा से अंगीकृत करें। बड़े ही पुण्य से ये अवसर मिलता है। इसका लाभ लेना चाहिए। उन्होंने कृष्ण चरित्र का वाचन भी किया। इससे पहले साध्वी स्नेहप्रभा ने अंतगढ़ सूत्र का वाचन करने के बाद अहिंसा दिवस पर कहा कि भगवान महावीर का धर्म दया, अहिंसा और करुणा का धर्म ह...
साहुकारपेट स्थित राजेन्द्र भवन में मुनि संयमरत्न विजय ने व्रत रूपी आभूषण से विभूषित होने का अवसर ही पर्यूषण है। यह पर्व हमें अपने कर्तव्य पथ पर चलने का संदेश देता है। मानव भव ही एक ऐसा भव है, जिसमें मानव कुछ कर सकता है, बाकी नरक, तिर्यंच व देव गति में तो टाइम पास के अलावा कुछ नहीं। पर्यूषण पर्व के पहले दिन कहा जो हमारे आत्म प्रदूषण, कषाय दूषण व कर्मों की उष्णता दूर कर दे, वास्तव में वही पर्यूषण है। अध्यात्म के महल में चढऩे की प्रथम सीढ़ी है-‘अमारि प्रवर्तन’ अर्थात् अहिंसा का पालन करना और करवाना। नीचे देखकर चलने से जीव जंतुओं की रक्षा होती है, ठोकर नहीं लगती और पढ़ी वस्तु भी मिल जाती है। दया धर्म का पालन करने से हमारा हृदय कोमल होता है, परिणाम स्वरूप हृदय रूपी धरती पर हम साधार्मिक भक्ति, क्षमापना, त्याग, तपश्चर्या आदि के बीज बो सकते हैं। धर्म का मूल ही दया है और बिना मूल के तो ...
साहुकारपेट जैन भवन में विराजित उपप्रवर्तक गौतममुनि ने पर्यूषण पर्व के पहले दिन कहा पर्यूषण पर्व जन जन को जाग्रत करने के लिए आता है। इसका लाभ लेकर जीवन को सफल बनाएं। इसका लाभ लेने से चूकना नहीं चाहिए। पर्यूषण के आठ दिनों में मनुष्य अपने आत्मा के हित के लिए जो भी करना चाहे वे कर सकता है। जीवन की खाली झोली को त्याग नियम से भर लेना चाहिए। सुज्ञान की ज्योति से मनुष्य को अपने अज्ञान के अंधेरे को दूर करना चाहिए। अपनी दिव्य धर्म भावनाओं के साथ पर्यूषण का लोगों को लाभ लेना चाहिए। जब भी ऐसा दिव्य प्रसंग भाग्यशाली आत्मा को प्राप्त होता है तो वह इसका लाभ लेकर जीवन को धन्य बना लेती है। परमात्मा के प्रति लोगों को भक्ति दिखानी चाहिए। जब तक संतों का प्रवचन चलता हो उठने के बजाय ज्ञान प्राप्त करना चाहिए। प्रवचन में दिया हुआ समय जीवन को बदल सकता हैं। लेकिन उससे पहले उसे भाव पूर्वक जीवन में उतारने की जरूरत है...
पुरुषवाक्कम स्थित एमकेएम में विराजित उपाध्याय प्रवर प्रवीणऋषि ने पर्यूषण पर्व के प्रथम दिन इस पर्व की महिमा बताते हुए कहा पर्यूषण पर्वों का सिरमोर है। सिद्ध, बुद्ध और मुक्त हो चुके परमात्मा तीर्थंकर भगवन्त जो स्वयं तीर्थ हैं वे भी स्वयं को पर्यूषण की आराधना करने से रोक नहीं सकते। उनका मन, रोम-रोम इस पर्व की आराधना करता है। संवत्सरी पर्व का कोई विकल्प नहीं है। जो विश्व को निर्मल बनाकर जगत का दु:ख दूर करने में हिमालय के समान अटल, अविचल है, जो जीवन, तन, मन और आत्मा को तीर्थ बनाता है ऐसा है जैन धर्म। तीर्थंकर परमात्मा जैसे देव कोई नहीं जो सबका कल्याण करते हैं। संसार के प्रत्येक जीव चाहे नारकी हो, देव हो या तिर्यंच हो, सभी को अपनी संतानें मानकर वात्सल्य भाव रखते हैं। वे चाहते हैं कि उनकी संतान भी उनके जैसे शुद्ध, बुद्ध और मुक्त बने, परमात्मा बन जाए।भगवान महावीर ने विश्व के दुर्भाग्य को सौभाग्य...
कोंडीतोप स्थित सुंदेशा मूथा भवन में विराजित आचार्य पुष्पदंत सागर ने कहा प्रेम सृष्टि का सर्वश्रेष्ठ तत्व है। प्रेम की ताकत के सामने आदमी झुकता है। रावण ने वासना के तूफान में सीता का अपहरण किया था। रावण को राम ने नहीं उसके काम ने मारा था। हिरणी अपने बच्चे के प्रेम के कारण सिंह का सामना करती है और सफल भी होती है। यह बात अलग है कि प्रेम के नाम पर ही धोखा हो रहा है। लोग वासना को प्रेम का नाम दे रहे हैं। हम दुर्गति में भटकने के लिए पैदा नहीं हुए। यदि परमात्मा बनना है तो ऊर्जा को ऊध्र्वगामी बनाओ। ऊर्जा पुरुषो का ध्यान करो। जैसे मोबाइल की बैटरी चार्ज करते हो, परमातमा की ऊर्जा से स्वयं को चार्ज करो। इससे हमारी आत्मा को इस अंधकार में फिर न भटकना न पड़े। आत्मा सीता कर्मो के कारागर में कैद है। राम की तरह संयम के तीर से कामना -वासना के रावण का अंत करो। धर्म के अभाव में जीवन नरक है। प्रेम सर्वांग का र...