चेन्नई. साहुकारपेट जैन भवन में विराजित उपप्रवर्तक गौतममुनि ने शनिवार को सामूहिक खमतखामणा के अवसर पर कहा कि मनुष्य चाहे कितनी भी आराधना, तपस्या, तप और धर्म कर ले, लेकिन एक भी व्यक्ति के प्रति अगर मन में द्वेष की भावना रह गई तो सब व्यर्थ हो जाएगा। कभी भी अगर किसी के लिए कोई भी गलत भावना मन से निकली हो तो उसके लिए माफी मांगने से पीछे नहीं हटना चाहिए। ऐसा करके मानव अपने जीवन को सफल बना सकता है। क्षमायाचना ऐसी चीज है जिससे टूटे हुए रिश्ते भी जुड़ सकते हैं। सागरमुनि ने कहा यह पर्व मनुष्य को उसकी गलतियों को सुधारने का मौका देता है। ऐसा मौका आने पर अपने गलतियों के लिए माफी मांग लेनी चाहिए। इससे पहले दीक्षार्थी महिला का संघ की ओर से सम्मान किया गया। इस मौके पर संघ के अध्यक्ष आंनदमल छल्लाणी सहित अन्य लोग उपस्थित थे। मंत्री मंगलचंद खारीवाल ने संचालन किया। संघ के कोषाध्यक्ष गौतमचंद दुगड़ ने बताया कि म...
विराजित उपाध्याय प्रवर प्रवीणऋषि ने आचारांग सूत्र के माध्यम से वनस्पतिकाय के बारे में बहुत विस्तार से बताया गया है। उन्होंने कहा, जीवत्व की सिद्धि ही जैन दर्शन की सबसे बड़ी विशेषता है। जैन ग्रंथों में 84 लाख योनियों को विस्तार से वर्णन बताया गया है, जिसे आज का विज्ञान लगभग एक लाख तक ही शायद समझ पाया है। इतना सूक्ष्म विज्ञान देना तभी संभव है जब कोई सर्वज्ञ हो। जैन शास्त्रों का जीव विज्ञान बहुत गहरा है। इसलिए सचित का आहार मना है। इन्हें यदि आप सजीव मान लेंगे तो इनकी विराधना करने से बच जाएंगे, इन्हें कष्ट पहुंचाने से डरेंगे और इनका जीवत्व स्वीकारेंगे। आज से लगभग 100 वर्ष जब भारतीय वैज्ञानिक जगदीशचंद्र बसु ने वनस्पति में जीवन होने के प्रमाण दिए तो विज्ञान ने भी उसे स्वीकार किया, लेकिन इससे पहले विज्ञान इसे नहीं मानता था। जबकि हमारे तीर्थंकर परमात्मा ने तो आदिकाल में ही वनस्पतिकाय के सजीव होने ...
चेन्नई. श्री शांति वल्लभ टीवीएच लुम्बिनी जैन संघ के तत्वावधान एवं मुनि तीर्थसिद्ध विजय एवं तीर्थअर्हम विजय के सान्निध्य में पर्यूषण महापर्व सम्पन्न हुआ। इसके बाद तपस्वियों का सामूहिक पारणा हुआ। इस दौरान आशीष एवं माधवी विनेश बोकडिय़ा समेत बड़ी संख्या में तपस्यार्थी मौजूद थे। इससे पहले साधना, ध्यान, धर्म, तप जप हुआ। पर्यूषण पर्व की महिमा अहिंसा, त्याग तथा क्षमायाचना पर आधारित है। यह सभी को अपने जीवन के कर्तव्यों से अवगत कराता है। इन दिनों में ज्ञान की गंगा चारों दिशाओं में बहती है। प्रतिदिन जिनालय दर्शन, पूजा, व्याख्यान, शाम को प्रतिक्रमण एवं बाद में भक्ति से लोग ओत प्रोत हो जाते हैं। इस मौके पर कल्पेश बोकडिय़ा, जिमी तथा मिलन बोकडिय़ा समेत बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।
चेन्नई. गोपालपुरम में लॉयड्स रोड स्थित छाजेड़ भवन में चातुर्मासार्थ विराजित कपिल मुनि के सानिध्य व श्री जैन संघ गोपालपुरम के तत्वावधान में रविवार को सवेरे 7.30 से 9.00 बजे तक ध्यान साधना सत्र और सर्व सिद्धि प्रदायक, विघ्न बाधा विनाशक श्री वज्रपंजर (आत्म रक्षाकर) स्तोत्र जप अनुष्ठान का आयोजन किया जाएगा। कपिल मुनि ने इस स्तोत्र की महिमा बताते हुए कहा कि पंच परमेष्ठि देव असीम शक्ति के पुंज हैं। उनकी स्तुति और भक्ति से पाप रूपी अंधकार का नाश और आत्मा के मौलिक गुणों का प्रकटीकरण होता है। अत्यंत प्रबल पुण्य के प्रभाव से ही व्यक्ति के मन में श्रद्धा का जन्म होता है। श्रद्धा भक्तिपूर्ण हृदय से की गई स्तुति का फल अवर्णनीय होता है। इस जाप के प्रभाव से जीवन में अनिष्ट और अशुभ की सारी संभावनाएं क्षीण हो जाती है और जीवन में जितने भी शुभ और श्रेष्ठ हैं वे सभी साकार होते हैं। संघ के मंत्री राजकुमार कोठा...
चेन्नई. कोंडीतोप स्थित सुंदेशा मुथा भवन में विराजित आचार्य पुष्पदंत सागर ने कहा कि स्वार्थ का त्याग ही सबसे बड़ा तप है। दान में पदार्थ दिया जाताहै। दर्शन दिया जाता है। दान के साथ पांच प्रकार के पुण्य का फल मिलता है। अन्न का दान देने से अन्न के साथ मन पुण्य का भी बंध होता है। निमल मन वाला ही दान करता है। दान देते समय मधुर शब्द बोलने से कषाय मंद होती है। चेहरे पर दया का भाव होता है खुशी का भी भाव होता है । शरीर पुण्य का भी बंध होता है। तप स्वयं से और दान दूसरों से संबंधित होता है। कई धनपति और साधु दान के नाम पर बहुत कंजूस होते हैं। धनपति दान के नाम पर एक पैसा नहीं देता बल्कि सब्जी खरीदते समय मटर के दाने उठाकर खा लेता है। ऐसे ही कुछ साधु दर्शन भी नहीं देते। साधु रूप दान देता है। यह साधक का सबसे बड़ा दान है। ख्याति के चक्कर में साधु सिमट जाता है। धनपतियों के हाथ का खिलौना बनकर रह जाता है। इसस...
वेलूर. यहां आरकाट स्थित एसएस जैन स्थानक भवन में विराजित साध्वी मंयकमणि ने बताया कि कर्म दो प्रकार के होते हैं-निधत कर्म एवं निकाचित कर्म। निधत कर्म की त्याग, तपस्या एवं शुभ कर्मों से ही निर्जरा हो जाती है। इसी प्रकार निकाजित कर्म में तीन योगों से बंधन होता है, जिनको भोग बिना छुटकारा नहीं मिल सकता। अत: मानव को सोच-विचार कर कर्म करने चाहिए। क्रोध में मानव अपनी आत्मा व शरीर का तथा अपने जीवन का विवेक खो देता है एवं कीमती वस्तुओं को भी तोड़ फोड़ देता है। अपने अध्यात्मिक गुणों को नष्ट कर देता है। अत: मानव को क्रोध रुपी कषाय का त्याग करना चाहिए ताकि आत्मा उज्जवल एवं हल्की हो सके।
चेन्नई. शुक्रवार को श्री एमकेएम जैन मेमोरियल सेंटर, पुरुषावाक्कम, चेन्नई में चातुर्मासार्थ विराजित उपाध्याय प्रवर प्रवीणऋषि महाराज एवं तीर्थेशऋषि महाराज के सानिध्य में संवत्सरी पर्व के क्षमापना दिवस पर उपस्थित जन मैदिनी को प्रवचन में कहा कि परमात्मा ने दो प्रकार के धर्म दिए हैं। एक आत्म साधना और दूसरा संबंध साधना का। परमात्मा ने अध्यात्म को जितनी महत्ता दी उतनी ही आपसी संबंधों को दी है। जिसके संबंधों और रिश्तों में श्रद्धा, मैत्री और पवित्रता नहीं है वह अध्यात्म की साधना नहीं कर सकता, इतना ऊंचा विधान परमात्मा ने दिया है। तीर्थंकर परमात्मा ने कहा है कि तुम्हारी अध्यात्म की कसौटी है कि तुम रिश्तों को कितनी आत्मीयता से जीते हो और रिश्तों की कसौटी है कि तुम अध्यात्म में कितने उतरते हो। न जाने कितनी बार न चाहते हुए भी मात्र गुरु के साथ ही नहीं, संसार के अनेकों जीवों को हम अपने माया, अहंकार और ...
मुंबई। पर्युषण एवं संवत्सरी पर्व पूर्णाहुति के पावन अवसर पर बोरीवली वेस्ट स्थित कोरा केन्द्र मैदान में आयोजित सामूहिक पारणा महोत्सव में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने अपनी तपस्या का पारणा किया। महोपाध्याय ललितप्रभ सागर महाराज, महान दार्शनिक संत चन्द्रप्रभ महाराज और मुनि शांतिप्रियसागर महाराज के सान्निध्य में आयोजित इस पारणा कार्यक्रम में 600 से अधिक भाई-बहनों ने पारणा किया। व्यवस्था पारणा समिति के पारस चपलोत, मनोज मनवट, षंकर घीया, जितेन्द्र रांका, किषोरचंद डागा, गौतम भंसाली आदि संभाली गई। इस अवसर पर 48 और 30 उपवास के तपस्वी का पारणा गुरुदवों के सान्निध्य में हुआ। श्रद्धालुओं ने इस दौरान गुरुजनों के पात्रों में दूध भी समर्पित किया। राष्ट्रसंतों ने पारणे का विधिविधान करवाते हुए महामांगलिक प्रदान की। राष्ट्रसंत श्री ललितप्रभ महाराज ने कहा कि दुनिया में दो तरह की संस्कृतियाँ हैं: भोग संस्कृति और योग स...
माधावरम, चेन्नई (तमिलनाडु): जैन धर्म का महापर्व पर्युषण पर्वाधिराज। अष्टदिवसीय के आध्यात्मिक आयोजन का शुक्रवार को शिखर दिवस अर्थात् संवत्सरी महापर्व। आत्मशोधन के इस महापर्व का शुक्रवार को माधावरम स्थित आचार्यश्री महाश्रमण चतुर्मास प्रवास स्थल परिसर में बने ‘महाश्रमण समवसरण’ से ऐसा आध्यात्मिक रंग चढ़ा कि पूरा वातावरण ही आध्यात्मिकता के रंग से रंगा नजर आने लगा। जैन शासन के इस शिखर दिवस (संवत्सरी) तेरापंथ के वर्तमान शिखरपुरुष महातपस्वी शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमणजी की मंगल सन्निधि में सजे भव्य ठाठ को देखकर किसी महाकुम्भ जैसा महसूस हो रहा था। हो भी क्यों न जब ऐसे महातपस्वी का मंगल सन्निध्य प्राप्त हो फिर चींटी भी पहाड़ चढ़ जाए। शुक्रवार को प्रातः लगभग आठ बजे से चारित्रात्माओं की गूंजती मंगलवाणी और उसके मध्य किसी अमृतवाणी की भांति मिश्रित हुई आचार्यश्री महाश्रमणजी की मंगलवाणी ने श्रद्धालुओं की म...
चेन्नई. साहुकारपेट जैन भवन में विराजित उपप्रवर्तक गौतममुनि ने शुक्रवार को तपस्वीयों का गुणगान करते हुए कहा कि जो तपस्या करते हैं वहीं सही मायने में अपने परिवार को रोशन करते हैं। तप से ही मनुष्य अपने कर्मो की निर्जरा कर सकता है। ऐसे मेंं हर व्यक्ति को अपने जीवन मेंं शक्तिनुसार तपस्या करना ही चाहिए। उन्होंने कहा कि मनुष्य अपने तप से आत्म कल्याण कर सकता है। यदी मनुष्य को मुक्ति के मंजील तक पहुंचना है तो गुरुदेवों और अपने माता पिता के आज्ञों का अनुसरण कर उसके अनुसार अपना जीवन व्यवहार बनाना चाहिए। सच मुच जिनके जीवन में बड़ों के प्रति आदर, विनय और सरलता के भाव होते हैं वही अपने जीवन को सदगुणों से जोडऩे का कार्य करते हैं। जब तक बड़ों के प्रति आदर, विनय और उनके प्रति झुकने का भाव नहीं होगा तब तक सफलता के मार्ग पर नहीं जाया जा सकता हैं। उन्होंने कहा कि अपने जीवन में यदि मनुष्य गुणवान बनना चाहता है ...
चेन्नई : नेरकुन्ड्रम देवी करुमरियाम्मान स्ट्रीट स्थित श्री कुमावत समाज भवन मैं 13सितम्बर गणेश चतुर्थी के उपलक्ष्य विशाल भजन संध्या रात्रि 8.30 बजेे विशेष पुजा अर्चना एवं भोग लगाया और गणेश जी की आरती उतारी गई। एक शाम श्री गणेश जी के नाम का आयोजन गणपति ग्रुप एवं समस्त कुमावत समाज नेरकुन्ड्रम द्वारा किया गया। कुमावत म्यूजिकल ग्रुप के भजन कलाकार सुरेस सोमरवाल, पुखराज सैणचा, ओम जसनगर, और राजु गिरी ने सर्व प्रथम गणेश वन्दना एवं गुरु वंदना से भजनों की शुरुआत कर भक्ता री बेल पधारों म्हारा सांवरा………. मोरुड़ा रुणीचा में मिठो-मिठो बोलीयो रे ओ तो भक्तों ने दाय गणो आयो रे…………. एक से बढ़कर एक भजनों की प्रस्तुति देकर भक्तों का मन मोह कर झुमने पर मजबूर कर दिया। भजन संध्या प्रोग्राम मध्य रात्रि तक चला,भजन संध्या आयोजन में श्री कुमावत समाज चेन्नई के ...
श्री विश्वकर्मा मंदिर चेन्नई माधावरम में आज गणेश मुर्ती की स्थापना की गई। जिसमें सभी समाज बंधुओं ने गणपति जी मोदक का भोग लगाकर बड़े ही बड़े ही धूम धाम व हर्सोल्लास के साथ पूजा आरती की। इसमें विश्वकर्मा समाज के लोगों ने बढ़-चढक़र हिस्सा लिया। समाज के कोषाध्यक्ष कन्यालाल जी माकड़ सह सचिव सम्पतजी कोटूरपुरम प्रवक्ता हीरालाल जोहड सांस्कृतिक सलाहकार प्रेमराज जी जांगिड़ प्रमोद जी जांगिड़ वागेश जी जांगिड़ कालूराम जी जांगिड़ शंकरलाल जी सुथार एवम मंदिर के पुजारी कैलाश जी ओमप्रकाश जी ओजा ने भाग लिया।